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अरुणाचल में झड़प के बाद जयशंकर ने यूएन में चीन का नाम लिए बग़ैर ये कहा - प्रेस रिव्यू
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार शाम संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में नाम लिए बिना चीन को आड़े हाथों लिया.
उन्होंने कहा कि दुनिया जब आतंकवाद का सामना करने के लिए एक साथ, एक मंच पर आ रही है तब आतंकवाद फैलाने वालों का बचाव करने के लिए बहुपक्षीय मंचों का दुरुपयोग किया जा रहा है.
इस दौरान एस जयशंकर ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी पर भी निशाना साधा और कहा कि 'ओसामा बिन लादेन को पनाह देना और पड़ोसी देश की संसद पर हमला करना आपको उस सभा में ज्ञान देने का आधार नहीं देता.'
अंग्रेजी अख़बार द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, एस जयशंकर ने ये बातें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओपन डिबेट की अध्यक्षता करते हुए कही.
इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों की संख्या बढ़ाए जाने का मुद्दा भी उठाया.
उन्होंने कहा, "दुनिया जब आतंकवाद से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए एक साथ आ रही है तब भी आतंक फैलाने वालों को सही ठहराने और उनका बचाव करने के लिए बहुपक्षीय मंचों का दुरुपयोग किया जा रहा है."
जयशंकर अपने इस बयान के ज़रिए उन तमाम प्रयासों का ज़िक्र करने की कोशिश कर रहे थे जिनमें भारत ने पाकिस्तानी सरज़मीं पर फलने-फूलने वाले आतंकियों जैसे मसूद अज़हर को ब्लैक लिस्ट में शामिल करवाने की कोशिशें की हैं.
भारत इस संबंध में सुरक्षा परिषद में कई बार प्रस्ताव ला चुका है.
लेकिन ऐसे प्रस्तावों को यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की प्रतिबंध लगाने वाली समिति में वीटो पावर रखने वाले चीन जैसे देशों की ओर से टाला या रोका जाता रहा है.
अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीनी सैनिकों के बीच झड़प पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस के प्रवक्ता ने कहा है, "हमने इस मामले से जुड़ी रिपोर्ट्स देखी हैं. हम तनाव कम करने की अपील करते हैं. और ये सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सीमावर्ती क्षेत्र में तनाव न बढ़े."
चीन, रूस, अमेरिका, ब्रिटेन और फ़्रांस ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं.
जयशंकर ने इस सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सुधार इस समय की सबसे बड़ी मांग है.
उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि ग्लोबल साउथ भी भारत की ओर से सतत् प्रयास करते रहने के दृढ़निश्चय को साझा करता है.
हम सभी जानते हैं कि समान प्रतिनिधित्व और सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों की संख्या में वृद्धि का सवाल पिछले तीन दशकों से संयुक्त राष्ट्र की महासभा का उद्देश्य रहा है. सुधारों को लेकर जारी बहस भटकती रही है, लेकिन इस दौरान असल दुनिया नाटकीय अंदाज़ में बदल गयी."
उन्होंने कहा, "हम यहां 75 साल पहले बनाए गए बहुपक्षीय संस्थानों की प्रभावशीलता बढ़ाने पर एक ईमानदार चर्चा के लिए आए हैं. हमारे सामने सबसे बड़ा सवाल ये है कि इन संस्थानों को सबसे बेहतर ढंग से कैसे सुधारा जा सकता है. क्योंकि हर बीतते साल के साथ सुधारों को दरकिनार करना मुश्किल होता जा रहा है."
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर बढ़ते तनाव की वजह से बदलाव की ज़रूरत बढ़ गयी है.
जयशंकर ने कहा, "इस व्यवस्था ने एक तरफ़ दुनिया में असमानता और इसके चलने के ढंग को कम असरदार बनाया है, इसके साथ ही ये भी पता चला है कि समाधान निकालने के लिए एक व्यापक और गहरी साझेदारियों की ज़रूरत है."
उन्होंने ये भी बताया कि हालिया संघर्षों के चलते दुनिया पर जो असर पड़ा है, उसने ये रेखांकित किया है कि इस दुनिया में व्यापक साझेदारी की कितनी ज़रूरत है.
इस दौरान पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने कहा कि 'अगर आप बहुपक्षीय मंचों को सफल होते देखना चाहते हैं तो आप कश्मीर से जुड़े यूएनएससी प्रस्ताव को अनुमति देकर ये साबित कर सकते हैं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आपकी अध्यक्षता में सफ़लतापूर्वक हमारे क्षेत्र में शांति ला सकता है.'
इसके जवाब में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि ओसामा बिन लादेन को पनाह देना और पड़ोसी देश की संसद पर हमला करना आपको इस सभा में भाषण देने का आधार नहीं देता.
चीन से जुड़े एम्स साइबर अटैक के तार
भारत के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान एम्स पर पिछले दिनों हुए साइबर हमले की जांच के तार चीन और हॉन्गकॉन्ग से जुड़ते दिख रहे हैं.
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, इस मामले की जांच कर रही टीम से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि दो ईमेल आईडी की आईपी ऐड्रेस चीन के हेनान और हॉन्ग-कॉन्ग से जुड़े हैं.
सूत्रों ने बताया है कि हैकर्स ने प्रोटोनमेल नामक ईमेल सर्विस को इस्तेमाल किया था. हालांकि, जांच एजेंसियां अब तक इसके लिए ज़िम्मेदार शख़्स का पता नहीं लगा पाई हैं.
सूत्र ने बताया है, "जांचकर्ता अपनी जांच में एक चीनी सर्वर ऐड्रेस तक पहुंचे हैं. इसका ये मतलब नहीं है कि वे किसी व्यक्ति, संस्था या भौगोलिक पते तक पहुंच गए हों. उन्हें अब तक एक आईपी ऐड्रेस के बारे में पता चला है जो कि चीन से जुड़ा है. ये एक चीनी फ़िज़िकल सर्वर हो सकता है. या ये एक वर्चुअल सर्वर हो सकता है. हमें आने वाले कुछ समय में इस बारे में जानकारी मिल जाएगी."
अमेरिका में चीनी छात्र गिरफ़्तार, बढ़ सकता है तनाव
अमेरिका में एक चीनी छात्र को किसी अन्य शख़्स को धमकी देने के मामले में गिरफ़्तार किया गया है.
उन पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के ख़िलाफ़ पोस्ट लिखने वाले और लोकतंत्र का समर्थन करने वाले एक व्यक्ति को धमकाने का आरोप है.
अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, इससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ सकता है.
अमेरिकी न्याय विभाग ने बुधवार को बताया कि गिरफ़्तार चीनी छात्र बर्कले कॉलेज ऑफ़ म्यूज़िक का विद्यार्थी है. उस पर चीन में लोकतंत्र के समर्थन में सोशल मीडिया में पोस्ट लिखने वाले व्यक्ति को धमकाने, अपमान करने, उसे प्रताड़ित करने और पीछा करने का आरोप है.
इस छात्र की पहचान 25 साल के जिओली वू के रूप में की गई है. उसे बोस्टन की संघीय अदालत में पेश किया जाएगा.
अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा है कि अमेरिका हमेशा अभिव्यक्ति व राजनीतिक विचारों की आज़ादी का पक्षधर रहा है. वू की ओर से धमकाने और प्रताड़ित करने वाला व्यवहार अभिव्यक्ति की आज़ादी के अनुकूल नहीं है.
अटॉर्नी जनरल रशेल एस. रोलिंस ने कहा कि अभियुक्त ने चीन के ख़िलाफ़ असहमति जताने वाले शख़्स को ख़ामोश करने और धमकाने का प्रयास किया.
रोलिंस ने कहा कि 'हम शांतिपूर्वक अपने विचार व राय प्रकट करने वाले किसी भी व्यक्ति को इस तरह की धमकी देने वालों को बर्दाश्त नहीं करेंगे. अमेरिका में अभिव्यक्ति की आज़ादी एक संवैधानिक अधिकार है और हम इसकी हर कीमत पर रक्षा करेंगे.'
जियोली वू को इस जुर्म के लिए पांच साल तक की जेल और रिहाई के बाद तीन साल तक निगरानी में रखने के अलावा ढाई लाख डॉलर तक का जुर्माना हो सकता है.
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