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'डबल एक्सएल' के बहाने बात बॉडी शेमिंग की, "मेरी पहचान सिर्फ़ मेरा वज़न या शेप नहीं है"
- Author, वंदना
- पदनाम, टीवी एडिटर, बीबीसी इंडिया
"अगर आप प्लस साइज़ हैं तो हमारे यहाँ भारत में ये आसान नहीं होता. मैं 15 साल की थी जब पता चला कि मुझे पीसीओएस नाम की बीमारी है. तभी से मेरा वज़न ज़्यादा रहा है. मुझे मोटी, ड्रम ...पता नहीं क्या-क्या कहा गया. मज़ाक़ के नाम पर ज़िंदगी भर ज़लील होना पड़ा है. अगर आप मोटे हैं तो दुनिया की नज़रों में आप बदसूरत हैं. बॉडीशेमिंग की वजह से मैं लंबे समय तक ख़ुद को बदसूरत समझती आई..."
बेंगलुरू में रहने वाली चित्रा प्लस साइज़ महिला हैं यानी उनका वज़न ज़्यादा है. और इसकी वजह से उनकी ज़िंदगी पर गहरा असर पड़ा है.
चित्रा बताती हैं, "मेरे लिए जीवनसाथी ढूँढना मेरे माता-पिता के लिए डरावने सपने जैसा था. उन्होंने कभी इस बारे में मुझे नहीं बताया पर मैंने उनका डर महसूस किया है. ये बात और है कि मुझे बहुत अच्छा जीवनसाथी मिला जो मुझे मेरे वज़न के परे मुझे मानते हैं. मेरी सगाई के दिन भी मेरे रिश्तेदार मुझे लेक्चर दे रहे थे कि मुझे वज़न कम करना चाहिए वरना मेरे पति की दिलचस्पी मुझमें कम हो जाएगी. ये सुनकर मैं इतना आहत और परेशान हो गई थी कि कई दिनों तक कुछ समझ नहीं आ रहा था."
'माफ़ कीजिएगा आप हमें थोड़ा ज़्यादा ही हेल्दी लग रही हैं'
अभी कुछ दिन पहले ही मोबाइल पर स्क्रोल करते हुए डबल एक्सएल नाम की एक फ़िल्म का ट्रेलर देखा जिसमें दो हीरोइनों सोनाक्षी सिन्हा और हुमा क़ुरैशी को दिखाया गया है. फ़िल्म में उनका वज़न काफ़ी ज़्यादा है.
'डबल एक्सएल' साइज़ की हुमा क़ुरैशी फ़िल्म में नौकरी मांगते हुए कहती हैं, "स्पोर्ट्स चैनल पर स्पोर्ट्स प्रज़ेंटर बनना है हमें, जो एक्सपर्ट के साथ मैच के बाद ब्यौरा देते हैं, ये वीडियो हमने ख़ुद लिखकर डायरेक्ट भी की है".
और सामने से जवाब आता है- "माफ़ कीजिएगा आप हमें थोड़ा ज़्यादा ही हेल्दी लग रही हैं. आपकी तस्वीरें देखकर कहा है कि मोटी हैं."
यानी टीवी पर दिखने के लिए ख़ास किस्म का बॉडी टाइप होना ज़रूरी है. ये डायलॉग फ़िल्मी ज़रूर है लेकिन बॉडी शेमिंग बहुत से लोगों की ज़िंदगी की हक़ीक़त है जिसका शारीरिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर गहरा असर पड़ता है.
बॉडी शेमिंग से प्लस साइज़ मॉडल का सफ़र
नेहा परुलकर एक प्लस साइज़ मॉडल हैं. बॉडी शेमिंग के कारण मिले तानों से ऊपर उठकर आज उन्होंने अपनी अलग जगह बनाई है. आज उनका अपना मक़ाम है लेकिन इसके पीछे बॉडी शेमिंग की लंबी दास्तां है.
"मुझमें बचपन से ही ख़ुद पर बिल्कुल कॉन्फ़िडेंस नहीं था. मोटी होने के कारण कई बार बॉडी शेमिंग होती थी. ऐ मोटी! ऐ जाएंट! (दानव) ऐसे कहकर मुझे बुलाया जाता था. वज़न कम करने और अपनी बॉडी इमेज को बनाए रखने के लिए मैं भूखी रहा करती थी. दिन में सिर्फ़ एक बार खाना खाती थी ताकि वज़न कम हो सके. ये तब की बात है जब मैंने कॉलेज जाना शुरू ही किया था. मैं दिन भर सिर्फ़ सलाद खाकर रहती थी. मैं इतनी कमज़ोर हो गई थी कि कॉलेज जाने तक की ताकत नहीं बचती थी."
बॉडी शेमिंग का गहरा असर
नेहा अकेली नहीं हैं, हमारे आस- पास ऐसे कितने ही लोग हैं जो मोटे या ओबीज़ की कैटेगरी में आते हैं. खुशी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है.
"एक वक़्त था जब मेरा वज़न बहुत बढ़ गया था. इससे निपटने के लिए मैंने ग़लत तरीके अपनाने शुरू कर दिए जिसे इटिंग डिसऑर्डर कहते हैं. मैं खाना पचाती नहीं थी, खाती नहीं थी, उसको टेस्ट करके बस निकाल देती थी ताकि शरीर में कैलरी न जाए. मेरे माता-पिता को नहीं पता था. मेरे अंदर कैलरिज़ न जाए , इसलिए मैंने कहीं आना-जाना बंद कर दिया."
"फिर एक दिन मैं घर पर अकेले थी और घर की घंटी बजी. जब मैं दरवाज़ा खोलने के लिए उठी तो मेरी आँखों के सामने अंधेरा छा गया. मैं बेहोश हो गई और जब उठी तो मेरे सिर से ख़ून निकल रहा था. ये अनुभव बहुत डरावना था. मुझे लगा कि किसी दिन मुझे कुछ हो गया तो किसी को पता भी नहीं चलेगा कि ये क्यों हुआ क्योंकि मैं सबसे छिप कर रही थी. तब मैंने अपनी दोस्त को पहली बार बताया."
ख़ुशी जैन ने जब बीबीसी के कार्यक्रम वर्कलाइफ़ इंडिया में अपनी ये बात साझा की तो बताते-बताते वो काफ़ी भावुक हो गईं.
कुछ वैसे ही सवाल जो सोनाक्षी सिन्हा फ़िल्म में पूछती हैं, जब उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता है, "इन लोगों को हमारे सपनों का साइज़ नहीं दिखा, सिर्फ़ हमारा साइज़ दिखा. कुछ लोगों ने मिलकर एक स्टैंडर्ड बनाया है और पता नहीं कब वो स्टैंडर्ड नॉर्मल डिक्लेयर हो गया."
फ़िल्मों में हमेशा साइज़ ज़ीरो क्यों
बात फ़िल्मों की हो रही है तो ये सवाल उठता है कि आपको यहाँ कितने किरदार ऐसे मिलेंगे जो साइज़ ज़ीरो न हों बल्कि हमारे-आपकी तरह ठीक-ठाक वज़न के हों. और ये नियम महिलाओं पर कुछ ज़्यादा ही लागू होता है.
पुराने ज़माने में देखें तो शम्मी कपूर जैसे हीरो की स्वीकार्यता थी जो ठीक-ठाक वज़न वाले थे लेकिन उनकी हीरोइनों को तो तंग चूड़ीदार और कुर्ता पहनने वाली पतली लड़की ही होना पड़ता था.
ये वो वक़्त भी था जब टुनटुन या बाद में गुड्डी मारूति को उनके वज़न के कारण कॉमेडी सीन के लिए ही लिया जाता था. और उनके पर्दे पर आते ही बैकग्राउंड में हाथी जैसी आवाज़ सुनाई देती थी.
हाल के सालों में 'दम लगाके हइशा' के ज़रिए ऐसी फ़िल्म ज़रूर आई जिसमें हीरोइन संध्या (भूमि पेडनेकर) एक ऐसी लड़की है जिसका वज़न बहुत ज़्यादा है. लेकिन हीरो (आष्युमान खुराना) बतौर पत्नी उसे स्वीकार नहीं करता बल्कि खुले आम उसकी तौहीन करता है.
दोस्तों के सामने वो ये कहता है, "कितनी सुंदर बहू है तेरी, एकदम टिंच. और मेरे पापा ने इतनी मोटी सांड मेरे गले मढ़ दी. कुछ करना दो दूर की बात, छूने का मन न करे."
लेकिन ऐसी फ़िल्में बहुत कम हैं जहाँ किसी औरत का मोटे होना या वज़नदार होना ही उसकी पहचान न हो बल्कि ये सामान्य सी बात हो. जैसा तुम्हारी सुलू में विद्या बालन थीं.
हालांकि इस बात पर भी बहस होती है कि किसी के साइज़ ज़ीरो पर उसे ट्रोल करना भी एक तरह की बॉडी शेमिंग ही है.
जब विद्या से पूछा आपने वज़न घटाने के लिए कुछ सोचा है?
हैरत की बात ये है कि ग्लैमरस समझे जाने वाली इन मॉडल्स और हीरोइनों को भी सालों साल अपनी उम्र और वज़न की वजह से बॉडी शेमिंग का सामना करना पड़ता है.
फ़िल्म डबल एक्सएल की हीरोइन सोनाक्षी सिन्हा ने भी लगातार अपने वज़न की वजह से ट्रोलिंग झेली है. और ये तब जब फ़िल्मों में आने के लिए उन्होंने 80-90 किलो से अपना वज़न काफ़ी कम किया.
बीबीसी से सोनाक्षी कहती हैं, "आज भी ऐसा कई बार होता है, जब फ़िल्म से पहले बोला जाता है कि थोड़ा सा वज़न और कम कर लो, गाना शूट करना है. लोगों के लिए ये सामान्य बात होती है और वो बोलने से पहले सोचते भी नहीं कि उन्होंने हमें हमारा काम, हमारा टैलेंट देखकर साइन किया है न कि वेस्ट साइज़ के लिए."
"मेरे करियर की सबसे बड़ी हिट तब आई जब मेरा वज़न ज़्यादा था. जब दर्शकों को दिक्कत नहीं हुई तो बतौर फ़िल्मकार आपको किस बात का डर है. सबसे ख़राब बात ये है कि हीरो चाहे कैसा भी हो वो चलेगा. हीरोइन की हाइट, वेट सब देखा जाता है."
वहीं हुमा क़ुरैशी का तजुर्बा भी कुछ ऐसा ही है. वे कहती हैं, "गैंग्स ऑफ़ वासेपुर में मेरे साथ नवाज़ थे जो दुबले पतले थे और मुझे लोग कहते थे कि मेरा वज़न ज़्यादा है. जब वो फ़िल्म में मेरा हाथ पकड़ते हैं तो मैं ख़ुद को, अपनी बाजू को देखती थी. लेकिन लोग आज उस सीन को हमारे काम के लिए याद रखते हैं."
हुमा क़ुरैशी कहती हैं, "महिलाओं को आप सिर्फ़ उनके लुक्स तक सीमित कर देते हो. डबल एक्सएल फ़िल्म में काम करना बहुत लिबरेटिंग था. हमें लगा कि ये एहसास हम हर लड़की को दे सकें कि आप किसी भी साइज़ के हों, रंग-रूप के हों लेकिन आप ख़ास हो."
मुझे याद है कि कुछ साल पहले तुम्हारी सुलू के प्रमोशन के वक़्त किसी रिपोर्टर ने विद्या बालन से सवाल पूछा था, "हमने आपकी जितनी भी फ़िल्में देखी हैं सारी विमेन सेंट्रिक हैं. आगे भी आप विमेन सेंट्रिक फ़िल्मों में नज़र आएँगी या फिर आपने वज़न घटाने के लिए भी कुछ सोचा है."
सवाल सुनकर एक बार विद्या बालन ज़रूर सकते में आ गई थीं पर उनका जवाब था कि वो जो काम कर रही हैं उससे बहुत ख़ुश हैं और आप लोगों का नज़रिया बदल जाए तो बहुत अच्छा होगा.
भारती सिंह बनीं अपवाद
फ़ैट शेमिंग को लेकर ताज़ा विवाद ग्रैमी विजेता गायिका टेलर स्विफ़्ट को लेकर सामने आया. कुछ दिन पहले ही उन्होंने अपना नया म्यूज़िक वीडियो रिलीज़ किया था जिसमें वो वज़न चेक करने वाली मशीन पर खड़ी होती हैं और उस पर लिखा हुआ आता है फैट.
फैट शेमिंग के आरोपों के बाद उन्हें ये म्यूज़िक वीडियो एडिट करके दोबारा डालना पड़ा हालांकि कई लोगों ने उनका समर्थन भी किया.
कुछ साल पहले आई नेटफ़्लिक्स डॉक्यूमेंट्री में टेलर स्विफ़्ट ने अपने इटिंग डिसऑर्डर के बारे में भी बताया था. टेलर के मुताबिक, "ये सब उन कॉमेंट से शुरू हुआ जो मेरे बारे में लोग लिखते थे. जब मैं 18 साल की थी और मैं पहली बार एक मैगज़ीन के कवर पर छपी तो हेडलाइन बनी थी कि 18 की साल में प्रेग्नेंट हो गई? मैंने बहुत ही कम ख़ाना शुरू कर दिया था. लेकिन अब मैं ऐसा नहीं करती."
भारत में टीवी पर या फ़िल्मों पर दिखने वाले कलाकारों और किरदारों की बात करें तो भारती सिंह एक अपवाद ज़रूर हैं, जिन्होंने अपने लिए कॉमेडी क्वीन का टाइटल हासिल किया. ये शायद पहली बार हुआ था कि भारती के रूप में किसी ब्यूटी ब्रैंड ने एक प्लस साइज़ के मॉडल को लिया.
विज्ञापन में भारती दर्शकों से कहती हैं, "क्या सोचा था 36-24-36? मोटी, हाथी, लड्डू बचपन से यही नाम मिलते थे मुझे. अपने इसी परिचय को पहचान में बदल डाला और बन गई क्वीन ऑफ़ कॉमेडी. लोगों ने तारीफ़ें की बिदांस, स्मार्ट.. पर एक कॉम्पिलमेंट हमेशा मिसिंग था ब्यूटीफ़ुल भारती. लेकिन परसों किसी ने कहा यू आर लुकिंग ब्यूटीफ़ुल. ब्यूटीफ़ुल तो मैं थी ही, अब लगता है दुनिया का नज़रिया बदल रहा है. वरना मुझे चुनते बॉडी लोशन के एड में."
भारती की तरह ही मुश्किलों के बीच चित्रा और ख़ुशी जैसी औरतों ने भी अपनी राह तलाश ली है.
अब डिफीटिंग डिसॉर्डर नाम की वेबसाइट चलाने वाली ख़ुशी बताती हैं, "मेरा और मेरी बॉडी इमेज के बीच का रिश्ता अब पॉज़िटिव है .लेकिन इसके लिए मैंने दूसरों से भी मदद ली. मैंने काफ़ी समय तक थैरेपी ली. मोटापे की वजह से जो शर्म थी उसे कम करने के लिए ग़लत तरीके अपनाने के बजाए मैंने न्यूट्रिशनिस्ट का सहारा लिया. अब मैं अपनी भूख का सम्मान करती हूँ."
भारत में बढ़ रही है मोटापे की समस्या
हालांकि इस बहस का एक हिस्सा ये भी है कि अगर आप किसी से उसके बढ़ते वज़न के बारे में बात नहीं कर रहे हैं तो क्या आप ख़राब सेहत और ग़लत लाइफ़स्टाइल को बढ़ावा तो नहीं दे रहे हैं.?
नए नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे (2019-21) के मुताबिक 23 फ़ीसदी पुरुष और 24 फ़ीसदी महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स 25 या उससे ज़्यादा है. 2015-16 के मुताबिक ये चार फ़ीसदी ज़्यादा है. पाँच साल से कम उम्र में 3.4 फ़ीसदी बच्चों में मोटापा है जो 2015-16 में 2.1 फ़ीसदी था.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक शरीर में ज़्यादा फैट होने से कई तरह की बीमारियों के होने का ख़तरा बढ़ जाता है जैसे कई तरह के कैंसर, टाइप-2 डाइबटिज़, दिल और फ़ेफ़ड़ों से जुड़ी बीमारियाँ. पिछले साल ओबेसिटी से दुनिया भर में 28 लाख लोगों की मौत हुई.
बॉडी शेमिंग या ग़लत लाइफ़स्टाइल को बढ़ावा?
तो फैट शेमिंग और एक सेहतमंद लाइफ़स्टाइल से जुड़ी बातचीत में कहाँ और कैसे फ़र्क़ किया जाए?
शिंपी मथारु डाइटिशियन हैं और नेचुरल साइंसिज़ के ज़रिए लोगों का इलाज करती हैं.
मोटापे की अलग-अलग वजहों के बारे में शिंपी बताती हैं, "मोटापे की एक वजह होती है जेनेटिक यानी आपके जीन्स ऐसे हैं कि शरीर में फैट स्टोर करने की क्षमता बाक़ी लोगों से ज़्यादा होती है. इसलिए खाना पचाने का मैटाबॉलज़िम धीमा होता है, सो खाने को एनर्जी में बदलने के बजाए, ऐसे लोगों में वो फैट के रूप में स्टोर हो जाता है."
"ख़राब लाइफ़स्टाइल भी मोटापे के लिए ज़िम्मेदार है- जैसे अगर आपका खान-पान सही नहीं है. मेरे मोटापे की वजह ग़लत खाना-पीना था. बचपन में मोटी थी और लोग मोटी-मोटी कहते थे. बहुत बुरा लगता था. अगर आप बहुत तनाव में रहते हैं तो उससे शरीर में स्ट्रेस होर्मोन बढ़ते हैं और कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस होर्मोन फ़ैट को बढ़ाते हैं. कुछ लोगों में मोटापा अनुवांशिक भी होता है."
शिंपी कहती हैं कि बॉडी शेमिंग और किसी को अच्छे लाइफ़स्टाइल के लिए प्रेरित करने में फ़र्क होता है. शिंपी के मुताबिक, "नेगेटिव मोटिवेशन कभी-कभार ही कारगार साबित होता है. अगर आपको वाक़ई फ़िक्र है कि आपके दोस्त या जानने वाले का मोटापा उसकी सेहत के लिए अच्छा नहीं है तो आप उससे निपटने में उसका साथी बनिए."
"उनके साथ वैसा ही खाना खाइए जो उनके लिए सही है, अगर कसरत की ज़रूरत है तो उनके जिम बडी बन जाइए, अगर उन्हें डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की ज़रूरत है तो उन्हें लेकर जाइए. उन्हें अलग थलग मत पड़ने दीजिए. बॉडी शेमिंग से किसी की मदद नहीं होती उल्टा तनाव में उनका वज़न बढ़ सकता है."
चुनौतियाँ कई हैं लेकिन चित्रा कहती हैं कि समय के साथ उन्होंने ख़ुद को ये बात समझाई है कि वज़न कम ज़्यादा हो सकता है, बदल सकता है लेकिन जो नहीं बदलती वो है आपकी असल पर्सनैलिटी.
अपनी बात समेटते हुए चित्रा बस इतना कहती हैं, "मैंने अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने पर बहुत काम किया है, अपनी शख़्सियत को निखारने पर काम किया है. अपनी असुरक्षा की भावना को मिटाने की कोशिश की है. अब मुझे एहसास हो गया है कि बहुत से लोग दरअसल कॉन्फ़िडेंट इंसानों से घबराते हैं, कॉन्फ़िडेंट औरतों से घबराते हैं. फिर उनका साइज़ कुछ भी हो."
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