तेलंगाना: टीआरएस विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त की कोशिश के दावों पर बीजेपी ने क्या कहा

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तेलंगाना पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया है. पुलिस का दावा है कि इन तीनों ने सत्ताधारी पार्टी में फूट डालने के लिए चार विधायकों को खरीदने की कोशिश की थी.
सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने इसके लिए बीजेपी पर साजिश करने का आरोप लगाया है. बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए टीआरएस से 'ड्रामा' बंद करने को कहा है.
पुलिस ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि तीन लोगों ने अतचंपेता विधायक गुव्वला बालाराजू, कोल्हापुर के विधायक बीरम हर्षवर्धन रेड्डी, पिनापाका विधायक रेगा कांत राव और ताण्डूर विधायक रोहित रेड्डी को टीआरएस से अलग करने के मकसद से प्रलोभन देने की कोशिश की थी.
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बीबीसी तेलुगू संवाददाता बाला सतीश के अनुसार, साइबराबाद पुलिस कमिश्नर स्टीफ़न रविंद्र ने कहा कि टीआरएस के विधायकों को पार्टी से तोड़ने की सूचना मिलने के बाद हैदराबाद के एक फ़ार्म हाउस पर छापेमारी की गई.
उन्होंने बुधवार रात मीडिया को बताया कि तेलंगाना राष्ट्र समिति के विधायकों ने खुद उन्हें इस मामले की सूचना दी थी.
विधायकों को क्या लालच दिया?
पुलिस कमिश्नर स्टीफ़न रविंद्र के अनुसार विधायकों का दावा था कि तीन लोगों ने उन्हें पैसे का लालच देने की कोशिश की.
स्टीफ़न रविंद्र ने कहा, "विधायकों ने बताया कि तीन लोग आए और उन्हें प्रलोभन दिया. उन्होंने पैसों, कॉन्ट्रैक्ट और बड़े पद का लालच दिया और बदले में टीआरएस से अलग होने को कहा."
"इस सूचना के आधार पर हमने रंगारेड्डी ज़िले के मोइनाबाद में एक फार्म हाउस पर छापा मारा और वहां तीन लोग मिले. इन तीन में से एक रामचंद्र भारती उर्फ़ सतीश शर्मा हरियाणा के फ़रीदाबाद के एक मंदिर में पुजारी है. उन्हें हैदराबाद और दिल्ली में भी देखा गया है."
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि तिरुपति के एक स्वामीजी, जिन्हें सिमहाया जी के नाम से पुकारा जाता है, भी रामचंद्र भारती के साथ आए थे.
पुलिस को सूचना दी गई थी कि नंदकुमार नाम का एक शख्स इन दोनों लोगों को अपने साथ लाया था और यहाँ टीआरएस के विधायकों को प्रलोभन देने को लेकर विचार-विमर्श कर रहा था.
इसी सूचना के आधार पर छापेमारी की गई.

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स्टीफ़न रविंद्र के अनुसार, अब पुलिस इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी.
पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "हम जाँच करेंगे और इस बारे में पूरी जानकारी सार्वजनिक करेंगे कि विधायकों को किस तरह का प्रलोभन इन तीनों लोगों की ओर से दिया गया."
समाचार एजेंसी पीटीआई से स्टीफ़न रविंद्र ने कहा, "हम ये भी जांच कर रहे हैं कि ये तीन लोग किस पार्टी से जुड़े हैं."
तेलंगाना में ये सियासी घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब तीन नवंबर को मुनूगोड़े विधानसभा सीट पर उप-चुनाव को लेकर टीआरएस और बीजेपी पूरी ताकत झोंके हुए हैं. यहाँ टीआरएस, बीजेपी और कांग्रेस तीनों में ही कांटे की टक्कर मानी जा रही है.
इस सीट पर उप चुनाव के लिए 47 उम्मीदवार मैदान में हैं. बीजेपी ने इस सीट से कोमाटिरेड्डी राज गोपाल रेड्डी को मैदान में उतारा है. रेड्डी अगस्त में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे. रेड्डी के इस्तीफ़े के कारण ही उप चुनाव हो रहा है.
टीआरएस ने पूर्व विधायक के प्रभाकर रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस ने पलवई श्रावंती को मैदान में उतारा है.

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टीआरएस-बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप
इस मामले के सामने आने के बाद टीआरएस व्हिप दसयम विनय भास्कर ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि के. चंद्रशेखर राव की सरकार को गिराने की हर कोशिश को उनकी पार्टी नाकाम कर देगी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, चेन्नूर से टीआरएस विधायक बाल्का सुमन ने आरोप लगाया है ये सब बीजेपी का किया-धरा है, जो टीआरएस विधायकों को लुभाने की कोशिश कर रही है.
उन्होंने ट्वीट किया, "एक बार फिर से ये साबित हो गया कि टीआरएस पार्टी के विधायक केसीआर के सिपाही और तेलंगाना के आत्मसम्मान के प्रतिनिधि हैं."
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वहीं, बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव पर मुनूगोड़े चुनाव हारने के डर से ड्रामा करने का आरोप लगाया है. एक टीवी चैनल से फ़ोन पर बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बीजेपी में टीआरएस के विधायकों की क्या ज़रूरत है.
एक टीवी चैनल की बहस का क्लिप शेयर करते हुए केंद्रीय मंत्री ने ये भी लिखा है कि लोगों का ध्यान खींचने में लगी टीआरएस को ये समझने की ज़रूरत है कि ये पहले से लिखे जा चुके 'फ़्लॉप शो' पर तेलंगाना की जनता सिर्फ़ हंसेगी.
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बीजेपी नेता ने छोड़ी पार्टी, टीआरएस में शामिल
राज्य में विधायकों की ख़रीद-फ़रोख्त की कोशिशों के दावों के बीच तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी के नेता रापोलू आनंद भास्कर ने बुधवार को टीआरएस में शामिल हो गए.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, भास्कर ने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया कि उनकी अनदेखी की गई, अपमान किया गया और राष्ट्रीय भूमिका में अलग-थलग कर दिया गया.
भास्कर 2012 से 2018 तक राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं. हालांकि, उस समय वो कांग्रेस में थे और 2019 में वो बीजेपी में शामिल हुए थे.
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