You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
केरल में मानव बलि का मामला, शरीर के 56 हिस्से किए
- Author, बी सुधाकर
- पदनाम, बीबीसी तमिल के लिए
चेतावनी:इस रिपोर्ट के कुछ हिस्से आपको विचलित कर सकते हैं.
केरल में हुए मानव बलि के मामले में और भी चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं. दो महिलाएं, जिनमें एक तमिल महिला भी शामिल थी, को मानव बलि क्रिया के लिए अग़वा किया गया था.
इस घटना के सामने आने के बाद से इलानथूर के लोग हैरान हैं. यहाँ रहने वाले कई लोगों को शक़ है कि गिरफ़्तार किए गए शफ़ी नाम के अभियुक्त ने इन दो हत्याओं के अलावा और भी हत्याएं की होंगी.
अपनी पहचान न ज़ाहिर करते हुए बीबीसी से डिंडीगुल की एक महिला ने मुलाक़ात की. वो अभियुक्त भगावल सिंह के घर के पास ही रहती हैं. उनका दावा है कि वो भी रहस्यमय व्यक्ति शफ़ी के चक्कर में फंसने ही वाली थी कि अंतिम समय में किसी तरह बच गईं.
वो कहती हैं, "मैं शफ़ी से मिलने वाली थी, उसने मुझसे कहा था कि वो मुझे एक लाख रुपये तक दे देगा, लेकिन अंतिम समय में मैंने अपना विचार बदल लिया और मैं उसके साथ नहीं गई. फिर शफ़ी रोज़लिन को ले गया."
शफ़ी की पत्नी का कहना है कि उन्हें यक़ीन नहीं हो रहा है कि उनके वो इतना वीभत्स अपराध कर सकते हैं.
पुलिस ने भगावल सिंह के घर के गार्डन से उन महिलाओं के शवों के 61 हिस्से बरामद किए हैं, जिन्हें यहाँ मारा गया था. अधिकारियों का कहना है कि तेज़ चाकू से उन्हें बहुत बर्बर तरीक़े से काटा गया था. ये भी पता चला है कि 56 हिस्से पद्मा नाम की महिला थे जबकि हड्डियों के पाँच हिस्से रोज़लिन के थे.
बुधवार को इनमें से 35 हिस्सों को पोस्टमॉर्टम और विश्लेषण के लिए भेजा गया. बाक़ी हिस्सों को गुरुवार को जांच के लिए भेजा गया.
दोनों महिलाओं के शवों के हिस्से मिल जाने के कारण डीएनए जांच के लिए उनके रिश्तेदारों के ब्लड सैंपल भी लिए गए हैं.
क्या कह रहे हैं स्थानीय लोग
इलानथूर के रहने वाले शाजी कहते हैं, "इस हत्याकांड के बारे में जानकारी मिलने के बाद से हम सब हैरान हैं और सदमे में हैं. आज के दौर में जब समाज इतना शिक्षित हो चुका है और आगे बढ़ चुका है, इस तरह की घटना बेहद डराने वाली है. दौलत के लिए मानव बलि दी गई है. ये कूडाथयी की घटना से भी अधिक वीभत्स है, जहाँ एक परिवार के छह लोगों को ज़हर दे दिया गया था."
शाजी उस घटना का ज़िक्र कर रहे थे जिसमें एक महिला ने साइनाइड ज़हर खिलाकर अपने ही परिवार के छह लोगों को मार दिया था.
स्थानीय दुकानदार जोसे भगावल सिंह के घर के पास पिछले दो सालों से रह रहे हैं. वो कहते हैं कि वो भगावल सिंह के परिवार को बहुत अच्छे से नहीं जानते हैं, बस आते-जाते उनकी तरफ़ देखकर मुस्कुरा दिया करते थे.
वो कहते हैं, "वो आयुर्वेद वैद्य हैं. बहुत से लोग उनके पास इलाज कराने जाते थे. वो और उनकी पत्नी लैला लोगों से अच्छे से बात करते थे. जब उन्हें गिरफ़्तार किया गया था तब हम सब लोग ये सोच रहे थे कि इस निर्दोष दंपती को क्यों गिरफ़्तार किया जा रहा है. लेकिन जब सच पता चला तो हम सब हैरान रह गए."
वो कहते हैं कि इस मामले में पुलिस को और गंभीरता और गहनता से जाँच करनी होगी क्योंकि बहुत से लोगों को ये लगता है कि यहां दो से अधिक हत्याएं हुई होंगी.
पुलिस की जांच
स्थानीय पुलिस ये पता करने की कोशिश कर रही है कि पड़ोसी भगावल सिंह को कितना जानते थे. स्थानीय लोगों के मुताबिक़ पुलिस ने उनसे पूछा है कि वो भगावल सिंह के बारे में क्या-क्या जानते हैं और क्या कभी ऐसा लगा कि वो चर्चित होना चाहते हैं.
जब शव के हिस्सों को निकाला जा रहा था तब पंचायत सदस्य साली लालू वहीं मौजूद थीं. वो घटनाक्रम की सरकारी गवाह भी हैं.
साली लालू बताती हैं, "अभियुक्त पुलिस को जगह बता रहे थे और वहीं से शव के हिस्सों को निकाला जा रहा था. मैं इसकी गवाह हूँ. ऐसा लग रहा था जैसे किसी खेत से आलू निकाले जा रहे हों. शव के हिस्सों को सटीकता से काटा गया था. बारिश हो रही थी. शव के टुकड़े मिट्टी से सने थे "
वो कहती हैं कि वो ऐसा मंज़र था जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है.
पुलिस ने दोपहर एक बजे खुदाई शुरू की थी और रात दस बजे तक खोज चलती रही. मौक़े से मृतक महिलाओं के इस्तेमाल की चीज़ें जैसे लिपस्टिक, पर्स, चश्मा आदि भी बरामद किए गए.
साली लालू बताती हैं, "पहले हमें सर मिले, फिर बाहें. जब अभियुक्तों से शरीर के बाक़ी हिस्सों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने अलग-अलग जगहों पर निशानदेही की. वहां खुदाई की गई तो बाक़ी हिस्से मिले. पुलिस को ये जांच करनी होगी कि क्या और भी मानव बलि तो यहां नहीं दी गई हैं."
घटनास्थल पर आईं एक रोज़लिन की बेटी मंजू वर्गीस ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "वो जनवरी 2015 से 2022 के बीच उत्तर प्रदेश में शिक्षिका थीं. वो केरल के कलाडी में अपनी मां के पास रहने जनवरी में आईं थीं. अगले दिन ही उन्होंने एक ट्रस्ट के साथ काम करना शुरू कर दिया था."
'मेरी मां लॉटरी टिकट नहीं बेचती थीं'
मंजू ने कलाडी पुलिस स्टेशन में 6 जून को अपनी मां की गुमशुदगी दर्ज करवाई थी. 15 अगस्त को उन्होंने एफ़आईआर दर्ज करवा दी थी.
वो कहती हैं कि मीडिया रिपोर्टों से उन्हें दंपती समेत तीन लोगों के गिरफ़्तार होने के बारे में पता चला था.
मंजू कहती हैं कि उनकी मां कलाडी में, भाई इडुकी में और वो वडक्कनचेरी में रह रही थीं. जब मंजू ने अपनी मां से अपने साथ आकर रहने के लिए कहा तो उन्होंने ये कहते हुए मना कर दिया था कि सभी सामान को लाना मुश्किल होगा.
मीडिया रिपोर्टों में रोज़लिन के बारे में कहा गया था कि वो लॉटरी टिकट बेचती थीं. हालांकि मंजू इसका खंडन करती हैं. वो बताती हैं कि उनकी मां आयुर्वेद उत्पादों की वेंडर थीं.
पुलिसकर्मियों ने छतरी, कास्मेटिक चीज़ें और बैग मंजू को दिखाया जिसकी उन्होंने अपनी मां के सामान के रूप में पहचान की.
डीएनए जांच
रोज़लिन की पहचान पुख़्ता करने के लिए मंजू का डीएनए सेंपल लिया गया है और इसे जांच के लिए त्रिवेंद्रम मेडिकल कॉलेज भेजा गया है.
जब शफ़ी के बारे में पूछा गया तो मंजू का कहना था कि वो उन्हें नहीं जानती हैं.
गुरुवार को एरनाकुलम की अदालत ने शफ़ी, भगावल सिंह और लैला को 12 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया.
इसी बीच तमिलनाडु की रहने वाली पदमा के बेटे आर सेट्टू ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से मामले में दख़ल देने और अंतिम संस्कार के लिए शव को घर लाने में मदद करने की अपील की है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)