राजराज चोल को हिंदू राजा कहना कहां तक सही, क्या कहता है इतिहास?

राजराज चोल
    • Author, प्रमिला कृष्णन
    • पदनाम, बीबीसी तमिल

इन दिनों भारत में जाने-माने फ़िल्म निर्देशक मणिरत्नम की नई फ़िल्म पोन्नियन सेलवन-1 की बहुत चर्चा हो रही है.

इस फ़िल्म के माध्यम से चोल वंश के साम्राट राजराज चोल के बारे में कई नई जानकारियां भी सामने आई है जिनको लेकर चर्चा गर्म है.

9वीं से 13वीं शताब्दी के बीच भारत के एक बड़े इलाक़े पर चोल वंश का शासन रहा था.

इस फ़िल्म को लेकर तमिल फ़िल्म निर्माता वेत्रिमारन ने कहा है कि राजराज चोल को हिंदू पहचान देने की कोशिश की गई है. इस वजह से तमिलनाडु पर हज़ारों साल पहले शासन कर चुके राजा की धार्मिक पहचान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.

ये बात वेत्रिमारन ने दलित पार्टी 'विदुतलाई चिरुताइगल कच्ची' के नेता थोलकप्पियान तिरुमावलवन के 60वें जन्मदिन के मौक़े पर आयोजित समारोह में कही थी.

उन्होंने कहा, "तिरुवल्लुवर का भगवाकरण किया जा रहा है. राजराज को हिंदू राजा कहा जा रहा है. वे तमिल लोगों की पहचान चुराने की कोशिश कर रहे हैं."

हालांकि इसके बाद एक अन्य तमिल फ़िल्ममेकर पेरारासू ने कहा, "राजराज चोल एक हिंदू राजा थे, सभी भारतीय हिंदू हैं."

इसके बाद तमिल राजा के धर्म को लेकर पूरे राज्य में बहस छिड़ गई है. तमिल टीवी चैनलों पर इस मुद्दे को लेकर डिबेट शो तक आयोजित किए जा रहे हैं.

प्रोफ़ेसर ए करुणानंदन
इमेज कैप्शन, प्रोफ़ेसर ए करुणानंदन

क्या कहता है इतिहास?

बीबीसी हिंदी

विवेकानंद कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफ़ेसर ए करुणानंदन कहते हैं, "इस विवाद पर कुछ बोलने से पहले हमें राजराज चोल के शासन काल के समय और हिंदू धर्म के इतिहास की तुलना करनी चाहिए."

वो कहते हैं, "राजराज चोल का शासन दसवीं और 11वीं शताब्दी का है. हिंदू शब्द का इस्तेमाल पहली बार उनके जीवनकाल के बाद हुआ था. जब राजराज चोल जीवित थे, तब हिंदू शब्द की उत्पत्ति भी नहीं हुई थी."

"अब तक चोल वंश के दौरान के जो भी शब्दालेख मिले हैं, उनमें हिंदू शब्द नहीं मिला है. तमिल सहित किसी भी भाषा में किसी धर्म को बतलाने के लिए उस वक्त हिंदू शब्द का इस्तेमाल किया ही नहीं गया था. इसलिए राजराज चोल को हिंदू कहने के लिए कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है."

करुणानंदन के मुताबिक़ राजराज के समय में शैव और वैष्णव दो धर्म मूल रूप से प्रचलन में थे.

वे समझाते हुए कहते हैं, "राजराज के समय में अधिकांश लोग शैव धर्म को मानते थे, इस धर्म के लोग शिव को ईश्वर मानते थे. तब एक धर्म के तौर पर हिंदुत्व था ही नहीं. शैव और वैष्णव तब प्राथमिक तौर पर लोगों के धर्म हुआ करते थे, जबकि जैन और बौद्ध धर्म की लोकप्रियता कम हो रही थी. ये लोग भी शैव और वैष्णव संप्रदाय के अधीन ही थे. राजराज ने एक नए तरह का शैव संप्रदाय चलाया था जिसे पाशुपत शैव कहते हैं, इसलिए राजराज को हिंदू राजा नहीं कहा जा सकता."

करुणानंदन के मुताबिक़ राजराज को हिंदू राजा बताना ऐतिहासिक ग़लती है.

इसके पीछे वो दलील देते हैं, "जो फ़ारसी और यूनानी लोग उत्तर पश्चिम से भारत आए, उन्हें सिंधु कहा गया. सिंधु शब्द का मतलब नदी से था. लेकिन हिंदू शब्द का कोई शाब्दिक मतलब नहीं है. राजनीतिज्ञों ने इस शब्द को बदलकर इसे धर्म का प्रतीक बनाया."

वहीं राजराज चोल पर 'राजराज' नाम की क़िताब लिख चुके वी जीवाकुमार बताते हैं कि उनके शासनकाल में शैव धर्म का चलन था और उस दौर में शिव मंदिर बनवाए गए थे.

वी जीवाकुमार ने बताया, "उनके समय में, शिव मंदिर थे और जो धर्म था वह शैव था. शिव की भक्ति वाले गीत तेवारम और तिरुमुराई महाकाव्य में भी मिलते हैं. अभी भी ऐसे लोग हैं जो शैव को अलग धर्म के तौर पर देखते हैं. यहां तक कि केवल शिव लिंग की पूजा करने वाले लिंगायत भी ख़ुद को हिंदू नहीं मानते."

"राजराज चोल के समय में शैव के अलावा बौद्ध और जैन धर्म चलन में था. वैष्णव धर्म को भी लोग मानते थे. सिद्ध नाम के लोगों का समुदाय भी था जो किसी देवी-देवता की पूजा नहीं करते थे. राजराज के समय में कई धर्म के लोग एक साथ रहते थे लिहाज़ा उन्हें किसी एक धर्म से जोड़कर नहीं देखा गया."

राजराज चोल की एक पुरानी पेंटिंग
इमेज कैप्शन, राजराज चोल की एक पुरानी पेंटिंग

धर्म को लेकर तमिल कितने अलग

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वी जीवाकुमार के मुताबिक़ अंग्रेज़ सर विलियम जोन्स ने पहली बार हिंदू शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जो ना तो ईसाई थे और ना ही मुसलमान.

जीवाकुमार कहते हैं, "अंग्रेज़ों ने हिंदू शब्द का इस्तेमाल विभिन्न देवी-देवताओं को मानने वाले लोगों को एक समूह में लाने के लिए किया था. जब सर विलियम जोन्स ने इसके लिए नियम बनाए और लिखा तो उन्होंने गैर ईसाई और गैर मुस्लिमों को हिंदू कहा. यह कोई धार्मिक पहचान नहीं थी, बल्कि बस नाम रख दिया गया था."

हालांकि चेन्नई यूनिवर्सिटी में दर्शनशास्त्र और धार्मिक विचार विभाग के प्रोफ़ेसर सरवनन भी मानते हैं कि मौजूदा प्रचलन के आधार पर राजराज को हिंदू राजा कहना ग़लत है.

वे कहते हैं, "किसी एक धर्म या एक धार्मिक रिवाजों के लिए हिंदू शब्द का इस्तेमाल नहीं था. जब हम हिंदू कहते हैं तो हम वैदिक अभ्यास, यज्ञ और अग्नि की बात करते हैं. यह सनातन धर्म और वर्णाश्रम को भी दर्शाता है."

"तमिल लोगों की धार्मिक आस्था बिल्कुल अलग है. नौवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने शण्मत के तहत छह धर्मों की बात की थी. उन्होंने कहा था कि शिव की पूजा करने वाले शैव हैं, विष्णु की पूजा करने वाले वैष्णव, मुरुगा की पूजा करने वाले कुमारम, सूर्य की पूजा करने वाले सौराम, गणेश की पूजा करने वाले गणपत्यम और शक्ति की पूजा करने शाक्तम हैं. उन्होंने धर्म और लोगों का विभाजन ऐसे किया था. इसलिए मौजूदा समय में राजराज को हिंदू राजा कहना, ग़लत होगा."

सरवनन यह भी कहते हैं कि हिंदू शब्द के भीतर शैवम शब्द भी छिपा है.

वो कहते हैं, "तिरुक्कुरल और शिलप्पदिकरम जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी हिंदुओं के बारे में एक शब्द नहीं हैं. लेकिन बाद के साम्राज्यों में प्रभावशाली पदों पर लोगों ने यह विचार स्थापित किया कि वेद और ब्राह्मण श्रेष्ठ हैं."

"कुछ समय बाद उन्होंने शिव को भी अपना लिया जो शैव धर्म के एकमात्र देवता हैं और उन्हें हिंदू धर्म में शामिल कर लिया गया. इस तरह उन्होंने शैववाद को हिंदू धर्म कहा और धीरे-धीरे इसे उसमें समायोजित कर लिया. वैष्णववाद के साथ भी ऐसा ही हुआ. शैव धर्म के परम अनुयायी कभी स्वीकार नहीं करेंगे कि वे हिंदू हैं."

पोन्नियन सेलवन-1

इमेज स्रोत, LYCA PRODUCTION

'हिंदुस्तान के लोग हिंदू हैं'

சிவப்புக் கோடு

हालांकि वेत्रिमारन के बयान की बीजेपी काफ़ी आलोचना कर रही है.

बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय सचिव एच राजा ने पूछा है, "जिस राजा ने शिव के मंदिर बनाए हों, वह क्या होगा, मुसलमान, ईसाई या फिर बौद्ध?"

तमिलनाडु में बीजेपी के उपाध्यक्ष नारायण तिरुपति कहते हैं राजराज के लिए हिंदू शब्द का इस्तेमाल ग़लत नहीं है क्योंकि हिंदू एक धर्म ना होकर जीवनशैली है.

उन्होंने कहा, "हम भारत यानी हिंदुस्तान में रहने वाले सभी लोगों को हिंदू कहते हैं. अगर शैव और वैष्णवों में टकराव था तो हिंदू शब्द आने से दोनों टकराव ख़त्म हुआ, दोनों एकजुट हुए."

"अगर पहले खूनख़राबा होता था और लोगों के गर्दन उड़ा दिए जाते थे तो इन सबको हिंदू शब्द ने रोक दिया. शैव और वैष्णव एक साथ आ गए. इसलिए राजराज के लिए हिंदू शब्द का इस्तेमाल ग़लत नहीं है."

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