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जयशंकर ने पाकिस्तान को किस ‘आईटी’ का एक्सपर्ट बताया
ख़ास बातें
- गुजरात दौरे पर गए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान के 'आईटी' पर तंज़ कसा.
- उन्होंने कहा कि भारत आईटी यानी इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का एक्सपर्ट है तो वहीं पाकिस्तान इंटरनेशनल टेररिस्ट्स के एक्सपर्ट हैं.
- जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद कोई राजनीति या कूटनीति नहीं है, आतंकवाद तो आतंकवाद है.
- जयशंकर ने हाल में संयुक्त राष्ट्र महासभा और कई दूसरे मंचों पर भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर बयान दिए थे.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को पाकिस्तान को इशारों-इशारों में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का माहिर क़रार दिया. उन्होंने पड़ोसी देश के 'आईटी' की तुलना भारत की 'आईटी' की तुलना करते हुए ये बात कही.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, गुजरात में वडोदरा के एक कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा, ''हमारा एक पड़ोसी है. जिस तरह से हम आईटी यानी इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के एक्सपर्ट हैं वे इंटरनेशनल टेररिस्ट्स के एक्सपर्ट हैं.''
जयशंकर ने कहा, ''आतंकवाद कोई राजनीति या कूटनीति नहीं है. आतंकवाद तो आतंकवाद है. आज दुनिया पहले की तुलना में इसे ज़्यादा अच्छी तरह समझ रही है. हम दुनिया को ये समझाते रहे हैं कि आतंकवाद जो आज हमारे साथ हो रहा है वो कल आपके साथ होगा. अब दुनिया इसे बर्दाश्त नहीं करती. जो देश आतंकवाद का इस्तेमाल कर रहे हैं वो आज दबाव में हैं''
जयशंकर ने कहा, ''भारत के ख़िलाफ़ आतंकवाद वर्षों से चला आ रहा है. लेकिन हम दुनिया को इस बारे में सफलतापूर्वक समझा चुके हैं. हमारा मानना है कि ये आज हमारे साथ हो रहा है कल आपके साथ होगा. ''
अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों पर भी सवाल
जयशंकर ने हाल में संयुक्त राष्ट्र महासभा और कई दूसरे मंचों पर भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर बयान दिए थे. वॉशिंगटन में भारतीय अमेरिकी समुदाय के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि आतंकवाद से न तो पाकिस्तान को फ़ायदा पहुंचा है और न ही यह अमेरिका के हित में है.
जयशंकर अमेरिका की ओर से पाकिस्तान को एफ़-16 लड़ाकू विमानों के लिए मेंटेनेंस पैकेज देने के सवाल पर ये टिप्पणी कर रहे थे.
पाकिस्तान को इस लड़ाकू विमान के लिए अमेरिकी पैकेज दिए जाने पर जयशंकर ने कहा, ''अगर कोई कहता है कि ये पाकिस्तान को आतंकवाद से मुक़ाबले के लिए दिया जा रहा है तो सबको पता है कि इन विमानों को कहां तैनात किया गया है और इनका क्या इस्तेमाल है. आप इस प्रकार की बातें कहकर किसी को मूर्ख नहीं बना सकते.''
जो बाइडन प्रशासन ने हाल में पाकिस्तान को एफ़-16 लड़ाकू के मेंटेनेंस पैकेज के तौर पर 45 करोड़ डॉलर की मंज़ूरी दी है. भारत ने इसे लेकर अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों पर सवाल उठाए थे.
डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने एफ़-16 लड़ाकू विमान के लिए पाकिस्तान को दिए जाने वाले मेंटेनेंस पैकेज को रोक दिया था. ये विमान पाकिस्तान ने अमेरिका से वर्षों पहले ख़रीदे थे.
अमेरिका ने इस डील पर क्या कहा था?
अमेरिका ने कहा था कि भारत ये न समझे कि रूस-यूक्रेन युद्ध में निष्पक्ष रहने की सज़ा के तौर पर उसने पाकिस्तान को एफ़-16 लड़ाकू विमानों के लिए मेंटेनेंस पैकेज को मंज़ूर किया है.
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय में इंडो-पैसिफ़िक सिक्योरिटी अफ़ेयर्स के सहायक मंत्री एली रैटनर ने कहा था कि इस डील का मतलब भारत को रूस के साथ बेहतर रिश्तों की वजह से नीचा दिखाना नहीं है.
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को इस डील के संबंध में पहले और इसके दौरान सारी जानकारी दी गई थी.
एली रैटनर ने मीडिया से बातचीत में कहा था, ''अमेरिकी सरकार का यह फ़ैसला पाकिस्तान के साथ हमारी रक्षा साझेदारी को बढ़ाने के लिए किया गया, जो मुख्य तौर पर आतंकवाद और परमाणु सुरक्षा पर केंद्रित है.''
हालांकि अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने 11 सितंबर को एक रिपोर्ट छापी थी जिसमें कहा गया था कि पिछले दिनों अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू भारत के दौरे पर थे और इस दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस सौदे के बारे में अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी.
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