ममता बनर्जी पीएम मोदी को लेकर इस क़दर उदार क्यों हुईं?

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- Author, टीम बीबीसी हिंदी
- पदनाम, नई दिल्ली

ममता बनर्जी के हाल के बयान से अटकलें तेज़
- उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी एकता का साथ नहीं दिया और बीजेपी उम्मीदवार को आसान जीत मिली
- ममता ने फिर एक सितंबर को कहा कि आरएसएस में हर कोई बुरा नहीं है
- सोमवार को ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में कहा कि केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के लिए पीएम ज़िम्मेदार नहीं हैं
- ममता बनर्जी एनडीए की पुरानी साथी रही हैं, लेकिन अभी प्रदेश में बीजेपी मुख्य विपक्षी पार्टी है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक टिप्पणी को लेकर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
ममता बनर्जी ने कहा था कि वह ऐसा नहीं मानती हैं कि मोदी ने सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियो को बंगाल में खुला छोड़ दिया है. ममता ने कहा था कि यह बीजेपी के दूसरे नेताओं ने किया है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस की नेतृत्व वाली सरकार ने सोमवार को केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग को लेकर एक प्रस्ताव पेश किया था. इस प्रस्ताव में कहा गया है कि बीजेपी अपने विरोधियों को केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर दबा रही है. इस प्रस्ताव के समर्थन में ममता बनर्जी ने भी 27 मिनट तक भाषण दिया.
ममता ने अपने भाषण में कहा, ''कई लोगों को नहीं पता है कि सीबीआई अब पीएमओ को रिपोर्ट नहीं करती है. यह अब गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करती है. ये एजेंसियां अब पीएमओ से नियंत्रित नहीं होती हैं. देश भर से कारोबारी भाग रहे हैं. ये सीबीआई और ईडी के दुरुपयोग से डरे हुए हैं. मैं नहीं मानती हूँ कि नरेंद्र मोदी ऐसा करते हैं. इनका दुरुपयोग बीजेपी के अन्य नेता कर रहे हैं.''
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कांग्रेस के सवाल

ममता बनर्जी का यह बयान बीजेपी विधायकों के लिए चौंकाने वाला था. ममता बनर्जी को कांग्रेस ने इस बयान के लिए आड़े हाथों लिया है. कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा है कि इस सरकार में मोदी की मंज़ूरी के बिना परिंदे भी पर नहीं मारते हैं.
श्रीनेत ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां प्रधानमंत्री को असहज कर देने वाले सवालों के बीच ढाल की तरह काम करेंगी. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एकमात्र नेता हैं जो आरएसएस और बीजेपी से समझौता किए बिना लड़ रहे हैं. कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी से आमने-सामने की असली लड़ाई कांग्रेस ही लड़ रही है.
उन्होंने कहा, नेशनल हेरल्ड न्यूज़ पेपर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने राहुल गांधी से तीन दिनों तक कई घंटे पूछताछ की थी. इसके बाद भी राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करना बंद नहीं किया.
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, ''मुझे नहीं पता कि ममता अमित शाह पर क्यों आरोप लगा रही हैं और मोदी को क्यों बचा रही हैं. मुझे नहीं पता कि किस आधार पर उन्होंने फ़ैसला किया कि मोदी अच्छे हैं. मैं इस पर कोई भी टिप्पणी नहीं करना चाहती.''
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि जब आप प्रधानमंत्री को क्लीन चिट दे देते हैं तब उन सवालों से बचा रहे होते हैं जिन्हें देश पूछना चाहता है कि केंद्रीय एजेसिंयों का दुरुपयोग क्यों हो रहा है.
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, ''अगर आप विपक्ष में हैं तो लुका-छिपी का खेल नहीं खेल सकते. इस मामले में कांग्रेस का रुख़ बिल्कुल स्पष्ट है. हम इस बात से नहीं डरते हैं कि सीबीआई और ईडी हमें टारगेट करेगी. उनकी एजेंसियां, उनकी ट्रोल आर्मी और फ़र्ज़ी प्रॉपेगैंडा से कांग्रेस डरती नहीं है. यह हमारा फ़र्ज़ है कि प्रधानमंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग करें. विपक्ष के तौर पर यही हमारा धर्म है. कांग्रेस और नेतृत्व निडर है.''

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आरएसएस पर क्या बोली थीं ममता

पीएम मोदी को लेकर ममता बनर्जी के बयान के बरक्स डेक्कन हेरल्ड ने अमेरिकी सिंगर जिमी डीन का एक उद्धरण प्रकाशित किया है. जिमी डीन ने कहा था, ''मैं हवा की दिशा नहीं बदल सकता, लेकिन गंतव्य तक पहुँचने के लिए अपनी नाव को ऐजस्ट कर सकता हूँ.''
ममता बनर्जी ने इससे पहले इस महीने की शुरुआत में आरएसएस को लेकर भी टिप्पणी की थी.
ममता ने कहा था कि आरएसएस में सभी लोग बुरे नहीं हैं. उन्होंने कहा था कि आरएसएस में ऐसे लोग बड़ी संख्या में हैं जो बीजेपी का समर्थन नहीं करते हैं. ममता की इस टिप्पणी को एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अवसरवादी बताया था. वहीं बीजेपी ने कहा कि उसे ममता के सर्टिफ़िकेट की ज़रूरत नहीं है.
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था, ''2002 में ममता ने आरएसएस को देशभक्त बताया था. इसके जवाब में आरएसएस ने ममता को दुर्गा कहा था. मैं उम्मीद करता हूँ कि टीएमसी के मुस्लिम चेहरे ममता की ईमानदारी के लिए तारीफ़ करेंगे.''
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राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में ममता का रुख़

ममता बनर्जी ने जुलाई में उपराष्ट्रपति के चुनाव में विपक्षी एकता का साथ नहीं दिया था. उनकी पार्टी ने मतदान से बाहर रहने का फ़ैसला किया था. दूसरी तरफ़ ममता राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी एकता को लेकर मुखर थीं.
तब ममता की पार्टी के प्रवक्ता सुखेंदु शेखर ने कहा था कि विपक्ष ने उम्मीदवार तय करने से पहले उनकी पार्टी से संपर्क नहीं किया था.
ममता की पार्टी के वोटिंग में शामिल नहीं होने से बीजेपी के राष्ट्रपति उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को आसान जीत मिली थी. जगदीप धनखड़ इससे पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे. राज्यपाल की भूमिका में जब धनखड़ थे तो ममता से ठनी रहती थी. अचानक से ममता के इस रुख़ को लेकर भी लोग हैरान थे.
जाधवपुर यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर अब्दुल मतीन कहते हैं कि ममता बनर्जी का बीजेपी और आरएसएस को लेकर यह रुख़ चौंकाने वाला नहीं है.
प्रोफ़ेसर मतीन कहते हैं, ''ममता बनर्जी एनडीए का हिस्सा रही हैं. 2002 में जब गुजरात में दंगा हुआ तो ममता बीजेपी के साथ ही थीं. नरेंद्र मोदी ने हिन्दुत्व को लेकर जो पॉलिटिकल डिस्कोर्स सेट किया है, उससे ममता टकराना नहीं चाहती हैं. वह उसी के बरक्स बंगाली अस्मिता की चाशनी में बहुसंख्यकवाद की राजनीति को आगे बढ़ा रही हैं. उन्हें पता है कि अल्पसंख्यकों का वोट कहीं जाएगा नहीं. लेफ़्ट और कांग्रेस प्रदेश में बची नहीं है.''
1998 में तृणमूल कांग्रेस का गठन हुआ और पहली बार 2001 में विधानसभा चुनाव का सामना किया था. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने सीपीएम को पहले ही चुनाव में कड़ी टक्कर दी थी.
इस चुनाव में सीपीएम का वोट शेयर 36.59 फ़ीसदी रहा जबकि टीएमसी को 30.66 प्रतिशत वोट मिले. 2011 में सीपीएम के 34 साल के शासन का ममता बनर्जी ने अंत कर दिया. ममता 2011 में मुख्यमंत्री बनीं और अब तक हैं.

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बंगाल में ममता Vs बीजेपी

पिछले पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर 38.1 फ़ीसदी था जबकि ममता बनर्जी का 47.94 फ़ीसदी. ममता बनर्जी को 294 में से 213 और बीजेपी को 77 सीटों पर जीत मिली थी.
ममता बनर्जी को बीजेपी से क़रीब 10 फ़ीसदी वोट ज़्यादा मिले थे. बीजेपी को 2019 के लोकसभा चुनाव में 40.30 फ़ीसदी वोट मिले थे. अगर लोकसभा से तुलना करें तो इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी को दो फ़ीसदी कम वोट मिला था.
दूसरी तरफ़ टीएमसी का वोट शेयर 2019 में 43.30 फ़ीसदी से बढ़कर 48.20 प्रतिशत हो गया था. अगर बीजेपी को 2019 के लोकसभा चुनाव के हिसाब से जीत मिलती तो क़रीब 121 विधायक बीजेपी के होते, लेकिन 77 सीटों पर ही बीजेपी को जीत मिली है क्योंकि उसका वोट प्रतिशत घटा है जबकि ममता का बढ़ा है.
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