प्रोजेक्ट चीता पर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा, कहा- प्रस्ताव 2009 में बना था, कांग्रेस को श्रेय न देने पर तंज

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दक्षिण अफ़्रीका के नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में छोड़ दिया. बीते कुछ दिनों से देश में 70 सालों बाद चीतों के आने की बहुत चर्चा चल रही है.
चीतों को लाए जाने के मुद्दे पर बड़े स्तर पर प्रचार प्रसार को लेकर कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि ये सब देश का ध्यान अहम राष्ट्रीय मुद्दों और भारत जोड़ो यात्रा से भटकाने के लिए किया जा रहा है.
कांग्रेस ये भी कह चुकी है कि प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत कांग्रेस की मनमोहन सरकार ने की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी. बाद में 2020 में ये रोक हटाई गई.
कांग्रेस ने शुक्रवार को अपने एक ट्वीट में लिखा, "प्रोजेक्ट चीता का प्रस्ताव 2008-09 में तैयार हुआ. मनमोहन सिंह जी की सरकार ने इसे स्वीकृति दी. अप्रैल 2010 में तत्कालीन वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश जी इसके लिए अफ़्रीका के चीता आउटरीच सेंटर गए."
कांग्रेस की ओर से ये भी कहा गया कि "2013 में, सुप्रीम कोर्ट ने इस परियोजना पर रोक लगा दी थी, और 2020 में, शीर्ष अदालत ने इसे अनुमति दे दी, जिससे चीतों के भारत में आने का मार्ग प्रशस्त हो गया."
शनिवार की सुबह जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन चीतों को कुनो नेशनल पार्क में छोड़ा तो उसके बाद जयराम रमेश ने इस पहल की शुरुआत करने के लिए कांग्रेस सरकार को श्रेय नहीं देने को लेकर सरकार को घेरा और साथ ही यह भी कहा कि वो राष्ट्रीय मुद्दों की बजाए बेवजह का ये तमाशा खड़ा किया है.
उन्होंने लिखा, "प्रधानमंत्री शासन की निरंतरता को शायद ही कभी स्वीकार करते हैं. चीता प्रोजेक्ट के लिए 25.04.2010 को केपटाउन की मेरी यात्रा का ज़िक्र तक न होना इसका ताज़ा उदाहरण है. आज पीएम ने बेवजह का तमाशा खड़ा किया. ये राष्ट्रीय मुद्दों को दबाने और #BharatJodoYatra से ध्यान भटकाने का प्रयास है."
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बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने जयराम रमेश की सोच को लेकर पलटवार किया. उन्होंने कहा, "इसे ही कहते हैं कांग्रेस पार्टी की हल्की और घटिया सोच. जयराम रमेश ख़ुद अपने को पर्यावरण विद मानते हैं. किताब लिखते हैं. कांग्रेस पार्टी मोदी जी की सोच को कभी न समझेगी, न समझने का प्रयास करेगी. ये देश की पर्यावरण शक्ति को मजबूत करने का बहुत अद्वितीय प्रयास है."
हालांकि जयराम रमेश ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी शुभकामनाएं भी दीं और ये भी कहा कि चीता प्रोजेक्ट पर लोगों की आशंका निराधार है और इसमें प्रोफ़ेशनल बहुत अच्छे हैं.
उन्होंने लिखा, "2009-11 के दौरान जब बाघों को पहली बार पन्ना और सरिस्का में स्थानांतरित किया गया तब कई लोग आशंकाएं व्यक्त कर रहे थे. वे ग़लत साबित हुए. चीता प्रोजेक्ट पर भी उसी तरह की भविष्यवाणियां की जा रही हैं. इसमें शामिल प्रोफ़ेशनल्स बहुत अच्छे हैं. मैं इस प्रोजेक्ट के लिए शुभकामनाएं देता हूं!"
वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जयराम रमेश के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए केंद्र सरकार को घेरा, "क्यूँकि हमारा शेर #भारत_जोड़ो_यात्रा पर निकला हुआ है तो भारत तोड़ने वाले विदेश से अब चीते ला रहे हैं."
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इधर कांग्रेस ने एक और ट्वीट किया कि "वो चीता दिखाएंगे- हम बेरोज़गारी पर बतियाएंगे."
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"कांग्रेस हाथी है, इसे मिटा नहीं सकते"

बाद में जयराम रमेश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी इसका ज़िक्र किया और साथ ही ये भी कहा कि "कांग्रेस एक हाथी है. बड़ा हाथी है, धीरे-धीरे चलता है. मगर जब चलता है तब सही तरीके से चलता है. और भारत जोड़ो यात्रा इस हाथी के लिए एक बहुत बड़ा ऑक्सीजन या बूस्टर डोज़ होगा. कांग्रेस पार्टी को हमारे देश से कोई नहीं मिटा सकता. विपक्ष की एकता की बात होती रहती है, मज़बूत कांग्रेस के बिना विपक्षी एकता असंभव है. और कई पार्टियां विपक्ष की एकता चाहती हैं ताकि कांग्रेस कमज़ोर हो और हम ये होने नहीं देंगे.
उन्होंने कहा, "विपक्षी पार्टी भी जान जाएं कि अगर आप कांग्रेस के साथ आना चाहते हैं तो कांग्रेस को कमज़ोर मत कीजिए. कांग्रेस को 'बैकस्टैब' मत कीजिए और हमेशा कांग्रेस से लेने की होड़ में मत रहिए. हर एक पार्टी कुछ देती है, हर एक पार्टी कुछ लेती है. अब तक हमेशा कांग्रेस देती रही है और सभी पार्टियों ने कांग्रेस का फ़ायदा उठाया है. तो कांग्रेस मुक्त भारत का मायने है 'संसार मुक्त भारत'."
इस दौरान जयराम रमेश ने बताया कि लद्दाख हिल काउंसिल का उपचुनाव कांग्रेस ने बड़े अंतर से जीत लिया है, जहां उसने बीजेपी के हराया है.

प्रोजेक्ट चीता

भारत ने 1950 के दशक में चीते को विलुप्त घोषित कर दिया था और कहा था कि देश में एक भी चीता नहीं बचा था. अब नामीबिया से 'प्रोजेक्ट चीता' के हिस्से के रूप में आठ चीतों को भारत लाया गया है.
इनमें पांच मादा और तीन नर चीते हैं. इन चीतों पर रेडियो फ्रिक्वेंसी (आरएफ़) कॉलर लगाए गए हैं, जो नामीबिया से इन्हें लाने से पहले ही इनपर लगाए गए हैं.
इन चीतों को फिलहाल नेशनल पार्क के एक हिस्से में आइसोलेशन में रखा गया है.
कुनो नेशनल पार्क में इन चीतों के लिए क्वॉरंटीन ज़ोन बनाया गया है. 1.15 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले कुनो नेशनल पार्क में छोड़े जाने से पहले पांच-छह साल उम्र वाले इन चीतों को इस क्वॉरंटीन ज़ोन में ही रखा जाएगा जिससे वे इस बदली हुई आबोहवा के आदी हो सकें.
दुनिया भर में इस समय चीतों की संख्या लगभग 7,000 है, जिसमें से आधे से ज़्यादा चीते दक्षिण अफ़्रीका, नामीबिया और बोत्सवाना में मौजूद हैं.

चीते के बारे में दिलचस्प जानकारियाँ

- बाघ, शेर या तेंदुए की तरह चीते दहाड़ते नहीं हैं, उनके गले में वो हड्डी नहीं होती जिससे ऐसी आवाज़ निकल सके, वे बिल्लियों की तरह धीमी आवाज़ निकालते हैं और कई बार चिड़ियों की तरह बोलते हैं.
- चीता दुनिया का सबसे तेज़ दौड़ने वाला जीव है लेकिन वह बहुत लंबी दूरी तक तेज़ गति से नहीं दौड़ सकता, अमूमन ये दूरी 300 मीटर से अधिक नहीं होती.
- चीते दौड़ने में भले ही सबसे तेज़ हों लेकिन कैट प्रजाति के बाकी जीवों की तरह वे काफ़ी समय सुस्ताते हुए बिताते हैं.
- गति पकड़ने के मामले में चीते स्पोर्ट्स कार से तेज़ होते हैं, शून्य से 90 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार पकड़ने में उन्हें तीन सेकेंड लगते हैं.
- चीता का नाम हिंदी के शब्द चित्ती से बना है क्योंकि इसके शरीर के चित्तीदार निशान इसकी पहचान होते हैं.
- चीता कैट प्रजाति के अन्य जीवों से इस मामले में अलग है कि वह रात में शिकार नहीं करता है.
- चीते की आँखों के नीचे जो काली धारियाँ आँसुओं की तरह दिखती हैं वह दरअसल सूरज की तेज़ रोशनी को रिफ़लेक्ट करती हैं जिससे वे तेज़ धूप में भी साफ़ देख सकते हैं.
- मुग़लों को चीते पालने का शौक़ था, वे अपने साथ चीतों को शिकार पर ले जाते थे जो आगे-आगे चलते थे हिरणों का शिकार करते थे.
- भारत में जो चीते लाए गए हैं वे खुले मैदानों में शिकार करने के आदी हैं, उनके मध्य प्रदेश के जंगलों में शिकार करना कितना आसान होगा, यह अभी देखना बाक़ी है.
(स्रोत- ज़ूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ़ लंदन)

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