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नोएडा का 'ट्विन टावर' चंद लम्हों में कुछ इस तरह ज़मींदोज़ हो गया
- Author, सौतिक बिस्वास
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
रविवार दोपहर 2 बजकर 31 मिनट पर नोएडा के सेक्टर 93ए में स्थित विवादास्पद ट्विन को गिरा दिया गया. पलक झपकते ही करीब 3700 किलोग्राम बारूद ने ट्विन टावर को ध्वस्त कर दिया.
एपेक्स और केएन नामक टावर को सुपरटेक बिल्डर ने बनाया था. बाद में पाया गया कि इन्हें बनाने में नियमों का उल्लंघन किया गया. ये देश में गिराई जाने वाली सबसे बड़ी बहुमंजिला इमारतें थीं.
एपेक्स (32 मंजिली) और शीआन (30 मंजिला) इमारतों को 'ट्विन टावर' कहा जाता था. इनकी ऊंचाई 320 फ़ीट से ज़्यादा थी, और ये नोएडा के घनी आबादी वाले इलाके में स्थित थीं. इन्हें गिराने के लिए क़रीब 3700 किलोग्राम विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया.
धमाका कुछ इस तरह से हुआ कि बिल्डिंग सीधे नीचे गिर गई और चारों तरफ हवा में धुएं का गुबार दिखाई दिया. इस काम के लिए बहुत दक्षता की ज़रूरत है. इसके लिए तीन देशों के इंजीनियरों ने इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया.
इनमें से एक इंजीनियर ने इसे "इंजीनियरिंग का खूबसूरत कारनामा" बताया था.
ये प्रक्रिया क्यों है अलग?
दुनियाभर में घनी आबादी वाले इलाकों में आमतौर पर इस तरह इमारतों को गिराने की इजाज़त नहीं दी जाती है.
इस बात पर ध्यान दीजिए कि एक 12 मंज़िला इमारत यहां से सिर्फ़ 30 फ़ीट की दूरी पर है. आसपास की 45 इमारतों में क़रीब 7 हज़ार लोग रहते हैं. आसपास रहने वाले सभी लोगों को रविवार की सुबह घरों को खाली करने के निर्देश दिए गए थे. ट्विन टावर के गिरने के पांच घंटे बाद ही उन्हें वापस अपने घरों में जाने की इजाज़त दी जाएगी. सड़क पर रहने वाले जानवरों को भी इलाके से हटा दिया गया था.
इस इलाके और नोएडा एक्सप्रेस वे पर इस दौरान ट्रैफ़िक रोक दिया गया. विस्फोट से कई सौ फ़ीट ऊंचा धूल का गुबार उठा. इसलिए एयरपोर्ट और एयरफोर्स से विमानों की सुरक्षा का ध्यान रखने के लिए कहा गया था.
यही नहीं, गिराई जा रही इमारतों से पचास फीट दूर भूमिगत गैस पाइपलाइन है जो दिल्ली में गैस की आपूर्ति करती है.
इलाके में रहने वालों का डर
आसपास रहने वालों को डर है कि विस्फोट से होने वाले कंपन के कारण उनके घरों और इमारतों को भी नुकसान हो सकता है. लेकिन इस प्रक्रिया में शामिल इंजीनियर मानते हैं कि चिंता की कोई बात नहीं है.
नोएडा में इमारतों को भूकंप निरोधी बनाया गया है. ब्रिटेन के इंजीनियर जिन्होंने बिल्डिंग गिराने में मदद की, उनका अनुमान था कि जितनी तीव्रता रिक्टर स्केल 4 के भूकंप से होती है, उसकी तुलना में इस विस्फोट की तीव्रता 10 प्रतिशत रहेगी.
साइट पर मौजूद वरिष्ठ इंजीनियर मयूर मेहता ने बताया, "ये पूरी तरह सुरक्षित है."
कैसे हुआ ब्लास्ट
रविवार को विस्फोट कराने वाले छह लोग, जिन्हें ब्लास्टर कहा जा रहा है और एक पुलिस अफ़सर को इलाके में जाने की इजाज़त दी गई. इसे 'एक्सक्लूज़िव ज़ोन' कहा जाता है.
ब्लास्ट के लिए कई तरह के विस्फोटकों का इस्तेमाल किया गया. डेटोनेटर्स से प्रक्रिया की शुरुआत हुई. कछ ही मिली सेकेंड में छोटे प्लास्टिक ट्यूब शॉक वेव की मदद से विस्फोटकों को सिग्नल भेजें गए, जो दोनों बिल्डिंग में लगाए गए थे.
कई महीनों से ब्लास्टर्स तीस मंज़िला इमारत के अलग अलग हिस्सों में जा रहे थे. इमारतों की बिजली सप्लाई काट दी गई थी. एस्केलेटर निष्क्रिय कर दिए गए थे. ये सुनिश्चित किया गया कि अलग अलग मंज़िल पर सभी 20,000 से ज़्यादा कनेक्शन एक साथ समन्वय के साथ काम कर सकें. एक गलती से पूरी प्रक्रिया अधूरी रह सकती थी.
मेहता की 11 साल पुरानी कंपनी के लिए ये बहुत चैलेंजिंग काम नहीं था. उन्होंने बताया कि वो पहले भी 18-20 इमारतों को गिरा चुके हैं. इसमें एक एयरपोर्ट टर्मिनल, एक क्रिकेट स्टेडियम, एक ब्रिज और एक बड़ी कंपनी की चिमनी शामिल है. उनका कहना है कि बिहार में गंगा नदी पर बने पुल को गिराना इससे मुश्किल था, क्योंकि वहां ये सुनिश्चित करना था कि मलबा नदी में न गिरे.
30,000 टन मलबा निकलने का अनुमान
ट्विन टावर से क़रीब 30,000 टन मलबा निकलने की उम्मीद है. ये भी सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि मलबा बाहर ना फैले और आसपास के लोगों और इमारतों को नुकसान न पहुंचे. क़रीब 1200 ट्रक मलबे को रिसाइक्लिंग के लिए ले जाएंगे. रिसाइकल होने में तीन महीने तक का समय लग सकता है.
मेहता कहते हैं, "धूल जल्दी ही बैठ जाएगी, लेकिन मलबा हटाने में समय लगेगा."
इतनी ऊंची इमारतें गिराना भारत में आम बात नहीं है. साल 2020 में केरल में एक लग्ज़री लेक साइड आपार्टमेंट को गिराया गया था. वहां क़रीब दो हज़ार लोग रहते थे. बिल्डिंग को पर्यावरण नियमों का उल्लंघन कर बनाया गया था. लेकिन नोएडा में बिल्डिंग गिराने की इस प्रक्रिया का स्तर बहुत बड़ा है. आसपास रहने वाले लोग अपना घर छोड़ दोस्तों और रिश्तेदारों से यहां जाने लगे हैं.
कई लोगों का टूटा सपना
ट्विन टावर को ध्वस्त करने से पहले पास ही की एक बिल्डिंग के एसोसिएशन के प्रमुख एसएन बैरोलिया ने बताया कि, "लोग अपने दरवाज़े और खिड़कियां सील कर रहे हैं. एसी निकाल रहे हैं, दीवारों पर से टीवी हटा रहे हैं. हम बिल्डिंग को पूरी तरह से बंद कर रहे हैं. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ."
सुपरटेक की बिल्डिंग में फ़्लैट खरीदने वालों को एक लग्ज़री ज़िंदगी का सपना दिखाया गया था. सुपरटेक ने वादा किया था कि केएन एक "प्रतिष्ठित" 37-मंजिला ऊंची इमारत होगी, और एपेक्स से "पार्टी करते समय" नीचे एक "चमकता हुआ शहर" दिखेगा.
रविवार को ऐसे सभी वादे आखिरकार धराशायी हो गए.
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