लखीमपुर खीरी में किसान फिर धरने पर, केंद्रीय मंत्री टेनी को बर्खास्त करने की मांग

    • Author, अनंत झणाणें
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखीमपुर खीरी से

लखीमपुर खीरी के अक्टूबर 2021 के किसान हत्याकांड में इंसाफ़ की मांग फिर से उठ रही है.

संयुक्त किसान मोर्चे ने मारे गए चार किसान और एक पत्रकार के परिवार वालों के साथ मिल कर शहर की मंडी समिति ने तीन दिन के धरने का आह्वान किया था.

इसके बाद गुरुवार सुबह से ही किसानों के जत्थे मंडी समिति में पहुँचने लगे और संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन शुरू हुआ.

लखीमपुर ज़िला प्रशासन की तरफ से इस धरने की कोई औपचारिक अनुमति नहीं दी गई है. लेकिन राकेश टिकैत और दूसरे प्रभावशाली नेताओं के नेतृत्व में हो रहे इस धरने को शहर मंडी समिति में जगह दी गई और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई.

गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र की बर्खास्तगी की फिर उठी मांग

बीबीसी से किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, "मंत्री अजय मिश्र उर्फ़ टेनी की बर्खास्तगी, बिजली अमेंडमेंट बिल वापसी, एमएसपी गारंटी क़ानून, किसानों के मुक़दमे की वापसी, यही हमारी मुख्य मांगे हैं."

राकेश टिकैत ने कहा, "जिन चार किसानों की भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या के मामले में गिरफ्तारी हुई है, उनके मुकदमे भी वापस होने चाहिए."

इस मामले में अभियोजन पक्ष ने सभी किसानों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल कर दी है.

टिकैत ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि, "प्रशासन हमारा कोई सहयोग नहीं कर रहा है. ना यहाँ पानी की व्यवस्था है ना ही शौचालय की व्यवस्था है. उनको देना है पानी तो दे दें वरना हम लेना जानते हैं."

तो संयुक्त किसान मोर्चा कितने वक्त में मंत्री अजय मिश्र की बर्खास्तगी और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई चाहता है? इस बारे में राकेश टिकैत कहते हैं, "हमारे हाथ में टाइमलाइन नहीं है. यह सरकार के हाथ में है. हमारा काम है आवाज़ उठाना, प्रदर्शन करना."

तो इस तीन दिवसीय प्रदर्शन के बाद क्या होगा? राकेश टिकैत कहते हैं कि, "तीन दिन बाद यह घर जायेंगे. यहाँ से गुस्सा लेकर जायेंगे. दूसरे राज्यों में कहीं पर मीटिंग में जाएंगे तो अजय मिश्र टेनी का नाम हमेशा आता रहेगा जब तक वो बर्खास्त नहीं होंगे."

किसानों की मांगों से जुड़ा हुआ मूवमेंट क्या फिर से तूल पकड़ेगा और क्या इसकी शुरुआत लखीमपुर से होगी? राकेश टिकैत कहते हैं, "तूल पकड़ेगा, लेकिन क्या मालूम कहाँ से पकड़ेगा."

किसानों की हत्या के मामले में मंत्री अजय मिश्र टेनी की संलिप्तता के बारे में आरोप लगाते राकेश टिकैत कहते हैं, "यह तो सभी जानते हैं कि उन्होंने बयान दिए. हमारे मुताबिक़ वो 120 बी (साज़िश) के मुल्ज़िम हैं."

जब हमने राकेश टिकैत से पूछा की किसानों की हत्या के मामले में मंत्री अजय मिश्र का नाम कहीं नहीं है तो उन्होंने कहा, "नाम तो दोबारा भी आ सकता है."

केंद्रीय मंत्री पर अब तक क्यों नहीं की गई कार्रवाई?

यह समझने के लिए बीबीसी ने किसान आंदोलन से जुड़े नेता योगेंद्र यादव से बात की.

योगेंद्र यादव ने कहा, "एफआईआर की शिकायत में मंत्री अजय मिश्र का दो बार नाम है, लेकिन पुलिस उन्हें नामज़द करने से इनकार कर रही है. और फिर वही पुलिस कहती है कि यह नामज़द नहीं हैं तो फिर हम उन्हें कैसे गिरफ्तार करें? अरे भाई अपनी एफआईआर ख़ुद पढ़ लो और इनको नामज़द कर दो. और वो होते ही सब कुछ हो जाएगा. शिकायतकर्ता ने, मृतक के पिता ने, उन्हें स्पष्ट रूप से ज़िम्मेदार ठहराया है. पुलिस उसका संज्ञान लेने से इनकार कर रही है."

क्या तीन दिन के दबाव के बाद संयुक्त किसान मोर्चा को लगता है कि सरकार अजय मिश्र को मामले में नामज़द करने का दबाव महसूस करेगी?

योगेंद्र यादव कहते हैं, "अगर चाहे तो उन्हें आधे घंटे में नामजद करके कोर्ट में पेश कर सकती है. क्या सरकार करेगी? सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र में सरकार लोकलाज से चलेगी? तीन दिन का धरना समाप्त होगा लेकिन यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा. यह हमारे लिए जालियाँवाला बाग़ कांड की तरह है. हम इसको न भूलेंगे, न भूलने देंगे."

योगेंद्र यादव कहते हैं कि मोर्चे ने क़ानूनी लड़ाई लड़ी है और बड़े वकीलों की मदद से सुप्रीम कोर्ट में मामला उठाया. लेकिन क्या संयुक्त किसान मोर्चा ने मंत्री की मामले में नामज़दगी और बर्खास्तगी की मांग को फिर से उठाने में देरी कर दी?

इस सवाल के जवाब में योगेंद्र यादव कहते हैं, "जी नहीं. हमने तो बार बार यह मांग की है. आप कह रहे हैं कि हम कोर्ट में जाकर कहें कि वो पुलिस को ऐसा आदेश दें. उससे ज़्यादा आसान तरीका यह नहीं है कि सरकार पुलिस को आदेश दे दे. हमारा उस सरकार पर हक़ है क्योंकि यह लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनी हुई सरकार है. हम सरकार से भी कहेंगे और सफल नहीं हुए तो कोर्ट भी जाएंगे. वो तो अंतिम विकल्प है."

कहाँ तक पहुँची है इन दोनों मामले में सुनवाई?

पिछले साल 3 अक्टूबर की किसानों और भाजपा के कार्यकर्ताओं की हत्या की घटना की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने ही मंत्री अजय मिश्र के बेटे और मुख्य आरोपी आशीष मिश्र की ज़मानत रद्द की थी.

बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले से जुड़े अपने एक आदेश में टिपण्णी करते हुए कहा था, "अगर मंत्री ने किसानों को धमकी न दी होती तो घटना नहीं होती. जब क़ानून की रक्षा करने वाले ही क़ानून तोड़ेंगे तो क़ानून का क्या होगा?"

मुक़दमों का स्टेटस बेहतर समझने के लिए बीबीसी ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नमेंट कौंसिल (क्रिमिनल) अरविंज त्रिपाठी से बात की. उनके मुताबिक़ सभी अभियुक्तों और उनके विरुद्ध चल रहे मुक़दमों को ख़त्म करने की अर्ज़ियों पर बहस चल रही है.

त्रिपाठी कहते हैं, "डिस्चार्ज पर बहस मतलब अभियुक्त कह रहे हैं कि जो आरोप लगाए गए हैं वो बेबुनियाद हैं. वो कह रहे हैं कि हमने कोई ऐसा काम नहीं किया है जो क़ानून के विपरीत हो. ये बचाव पक्ष की तरफ़ से है, और फिलहाल उन्हीं की बहस चल रही है. कुल 13 से 14 मुल्ज़िम हैं. तो पहले उन्हीं लोगों की बहस चल रही है. जब 13 मुल्ज़िमों की बहस ख़त्म हो जाएगी तब अभियोजन पक्ष उनकी दलीलों पर अपने जवाब देगा."

इस मामले में जनवरी में ही चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी. तो क्या मामले की सुनवाई रोज़ होती है?

अरविंद त्रिपाठी कहते हैं, "रोज़ाना नहीं होती, 12 से 13 दिन की डेट लगती है. सुनवाई ख़त्म करने की कोई समय सीमा नहीं निर्धारित है. न ही कोई हाई कोर्ट का निर्देश है."

जिन चार किसानों पर भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या का आरोप है उनके मुक़दमों में सुनवाई कहाँ तक हुई है?

इस बारे में अरविन्द त्रिपाठी कहते हैं, "उनमें भी डिस्चार्ज पर बहस हो रही है. 24 अगस्त की तारीख़ लगी हुई है."

103 गवाह पेश किए जा चुके हैं

अभियोजन पक्ष ने आशीष मिश्र और अन्य अभियुक्तों के ख़िलाफ़ किसानों को गाड़ी के नीचे कुचल कर मारने वाली घटना के मुक़दमे में 103 गवाह पेश किए गए हैं.

जब अदालत अभियुक्तों की इन मुक़दमों को ख़त्म करने वाली अर्ज़ियों पर फ़ैसला सुनाएगा, उसी के बाद अदालती कार्रवाई आगे बढ़ेगी.

अरविंद त्रिपाठी बताते हैं, "डिस्चार्ज के आदेश बाद के बाद गवाह पढ़ना शुरू होंगे. फिर गवाही शुरू होगी. कोर्ट में अभियोजन अपना एविडेंस देगा. उसके बाद कोर्ट जजमेंट देंगी. और उसके बाद गवाही शुरू हो जाएगी."

बीबीसी ने सरकारी वकील त्रिपाठी से यह भी पूछा कि क्या मंत्री अजय मिश्र टेनी को भी इस मामले में अभियुक्त बनाया जा सकता है? इसके जवाब में उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा कि, "एफआईआर में तो (नाम) नहीं है."

क्या कहना है किसानों के परिवारों का?

इस धरने में मारे गए किसानों के परिवार वाले भी शामिल हुए. तीन अक्टूबर 2021 की घटना में किसान नक्षत्र सिंह भी मारे गए थे. उनके बेटे जगदीप सिंह कहते हैं कि, "हमें उम्मीद है कि आज फिर से एकत्रित होकर हम लोग सरकार पर दबाव भी बना सकते हैं."

जगदीप सिंह ने कहा, "मुख्य अभियुक्त आशीष मिश्रा उर्फ़ मोनू पर जो लगे हुए इल्जाम हैं वो उनके अपने हैं. जब तक मंत्री जी को पद से हटाया नहीं जाएगा, उनके ऊपर उनके केसों पर कार्रवाई नहीं जाएगी तब तक इन केसों में निष्पक्ष जांच नहीं हो पाएगी. अलग-अलग फोरम में किसी ने भी बात उठाई हो पर हमारा निशाना है मंत्री की बर्खास्तगी. हमारे लड़के जो अंदर हैं उनको बाहर निकालना, और जो घायल हैं उनको मुआवजा दिलाना और मंत्री की बर्खास्तगी हम ज़रूर करवाकर ही रहेंगे."

इस घटना में पत्रकार रमन कश्यप भी मारे गए थे. उनके भाई पवन ने बीबीसी को बताया, "आशीष मिश्र के जेल में होने से हमारी मांगे पूरी नहीं हुई हैं. उनके पिता का मंत्री पद से इस्तीफ़ा चाहिए."

क्या परिवार वाले चाहते हैं कि मामले की फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो? पवन कहते हैं, "हम लोग हर संभव प्रयास कर रहे हैं. प्रशासन और शासन में टेनी (मंत्री) का होना हम लोगों को बहुत ज़्यादा खल रहा है. और इसी वजह से हम लोगों को केस लड़ने में भी काफी दिक्कत आ रही है."

मंत्री की बर्खास्तगी की मांग तो पिछले साल विधानसभा चुनाव चुनाव से पहले से उठ रही है लेकिन अभी तक अजय मिश्र सरकार में कायम हैं?

इस बारे में पवन कश्यप कहते हैं, "ये सरकार की तानाशाही है. हम लोगों की मांगें शुरू से रही हैं. अगर पद से उनका इस्तीफ़ा हो जाता, तो उनका नाम आ जाता. वो पद पर रहे इसलिए संबंधित अधिकारियों ने उनका नाम लेना ठीक नहीं समझा. और दबाव रहा है इसलिए बच गए हैं. अब ये दबाव बनाने के लिए 75 घंटे का आंदोलन यहां पर रखा गया है."

क्या कहना है मारे गए बीजेपी कार्यकर्ता के परिवार वालों का?

बीबीसी ने 3 अक्टूबर को किसानों की हत्या के बाद हुई हिंसा में मारे गए भाजपा के कार्यकर्ता शुभम मिश्र के पिता विजय मिश्र से बात की.

विजय मिश्र ने कहा, "मेरे बेटे की हत्या करने वाले अभी भी फ़रार हैं. एसआईटी ने अपनी जांच में चार लोगों को धरा है. 20 अज्ञात अभियुक्तों में अभी 4 ही पकड़े गए हैं, बाकी 16 अभी फ़रार हैं. हमारी तहरीर में 20 अज्ञात का ज़िक्र था. पता नहीं सरकार क्यों नहीं पकड़ रही है."

मंत्री अजय मिश्र पर लगाए गए इल्ज़ामों के बारे में विजय मिश्र का कहना है, "मंत्री जी का इसमें क्या कसूर है कि मंत्री जी बर्खास्त हो जाएँ? किसान तो हम भी थे. हमारे बेटे को मारा गया तो हमने जिस पर आरोप लगाया वो भी अभी तक नहीं पकड़े गए हैं."

कहाँ हैं मंत्री अजय मिश्र और क्या है उनकी इस धरने पर राय?

यह जानने के लिए बीबीसी ने उनके प्रतिनिधि अंबरेश सिंह से बात करनी चाही लेकिन उन्होंने सिर्फ़ इतना बताया कि मंत्री अजय मिश्र टेनी फिलहाल दिल्ली में अपने गृह मंत्रालय से जुड़े कार्यक्रमों में व्यस्त हैं.

मंत्री अजय मिश्र टेनी के फ़ेसबुक पेज के मुताबिक़ वो मंत्रालय में शाहजहांपुर के राज्यसभा सांसद मिथिलेश कुमार से मिले और 16 अगस्त को उन्होंने लखीमपुर खीरी के पलिया में स्वर्गीय जनरल बिपिन रावत को समर्पित एक सरोवर का लोकार्पण किया.

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