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बिहार में बदली सियासत, क्या बोले बड़े खिलाड़ी
बिहार में एक बार फिर सत्ता बदल चुकी है लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही हैं.
नीतीश कुमार बीजेपी छोड़ लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के साथ आ गए हैं. नीतीश-लालू की इस जोड़ी के इर्द-गिर्द ही बिहार की राजनीति पिछले 3 दशकों से घूम रही है.
अब राज्य में एक नई सरकार है, डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने चुनाव से पहले जो वादे किए थे, उनपर लोगों की नज़र भी है.
ऐसे में बिहार के बड़े राजनेता, नए गठबंधन और सरकार पर अपनी-अपनी राय भी रख रहे हैं.
बीबीसी संवाददाता रजनीश कुमार ने बिहार की अलग-अलग पार्टियों के बड़े नेताओं से जाना कि वो नई सरकार, महागठबंधन और नीतीश कुमार के इस कदम को लेकर क्या सोचते हैं.
10 लाख नौकरियों के वादे पर क्या बोले तेजस्वी यादव?
रोज़गार और बेरोज़गारी के मुद्दे पर आक्रामक रहे तेजस्वी यादव ने 2020 के चुनावी अभियान में '10 लाख सरकारी नौकरी' का वादा किया था.
इस वादे पर तेजस्वी कहते हैं कि वो ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को नौकरी देने की कोसिश करेंगे. वो कहते हैं, ''विश्वास मत हो जाने दीजिए. आज ही मेरी मुख्यमंत्रीजी से चर्चा हुई है, हम लोग ये करने जा रहे हैं. ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को, 4-5 लाख लोगों को कोशिश है कि हम लोग नौकरियां दे देंगे.''
इसी के साथ ही तेजस्वी यादव कहते हैं कि वो अलग-अलग विभाग और प्राइवेट सेक्टर में भी नौकरियों के अवसर तलाशेंगे.
महागठबंधन पर तेजस्वी यादव कहते हैं, ''केंद्र से जो सहयोग मिलना चाहिए वो नहीं मिलता है. हमारा हौसला बुलंद है, कम संसाधन में जितना काम कर सकते हैं, उतना करेंगे.''
इसी बातचीत को विस्तार देते हुए तेजस्वी यादव के बड़े भाई और राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव कहते हैं कि काम करने के लिए महागठबंधन बनाया गया है और नीतीश कुमार से आरजेडी ने समझौता किया है.
वे कहते हैं, ''काम करने के लिए ही हम लोगों ने महागठबंधन अपनाया है, नीतीश कुमार से समझौता काम करने के लिए ही किया गया है. 10 लाख रोज़गार का जो वादा किया था, उसको पूरा करेंगे. हम मिलजुलकर काम करेंगे.''
मंत्री पद के सवाल पर तेज प्रताप कहते हैं कि उनकी अभी कोई ख़्वाहिश नहीं है जो भी ज़िम्मेदारी उन्हें दी जाएगी वो उसे निभाएंगे.
नीतीश जहां गए हैं, वहां भी चैन से रह लें तो बड़ी बात है: रविशंकर प्रसाद
पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब से लोकसभा सांसद रविशंकर प्रसाद को महागठबंधन पर भरोसा नहीं है.
वो कहते हैं कि बीजेपी ने हर बार नीतीश कुमार के साथ रहते हुए गठबंधन धर्म को निभाया है लेकिन नीतीश कुमार ने ऐसा नहीं किया है.रविशंकर प्रसाद का यह कहना कि नरेंद्र मोदी को बिहार में चुनाव प्रचार नहीं करने देने की नीतीश की शर्त बीजेपी इसलिए मान लेती थी क्योंकि वह गठबंधन धर्म निभा रही थी.
वो कहते हैं, ''नीतीश कुमार अभी जिस गठबंधन में गए हैं, उसमें भी चैन से रह लें तो बड़ी बात है. लेकिन यह ज़रूर कह सकता हूं कि लालू राज में जो गुंडई होती थी, उसकी वापसी फिर से होगी.''
रविशंकर प्रसाद का कहना है कि नीतीश कुमार को बीजेपी ने ही नेता बनाया है और बिहार में कई बार मुख्यमंत्री के पद पर बैठाया है.
नीतीश कुमार को पीएम मैटेरियल का कीड़ा काटता है: गिरिराज सिंह
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी कहते हैं कि बीजेपी, नीतीश कुमार के साथ लगातार गठबंधन धर्म को निभाती आई है. गिरिराज कहते हैं, ''जब-जब नीतीश कुमार को पीएम मैटेरियल का कीड़ा काटता है, वो ऐसा करते हैं. हमें कोई कसक नहीं है, हमने गठबंधन धर्म और वादे का पालन किया है.''
गिरिराज भी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने का क्रेडिट बीजेपी को ही देते हैं. वो कहते हैं, ''हमने तो नीतीश कुमार को ज़ीरो से हीरो बनाया है, पहली बार हमने बनाया था आख़िर में भी हमने ही बनाया है.''
गिरिराज सिंह से जब ये पूछा गया कि बीजेपी बिहार में कोई लीडरशिप पैदा क्यों नहीं कर रही? वो कहते हैं कि बीजेपी में हर एक नेता 'मास लीडर' है. उनका कहना है, ''2013 के पहले क्या कोई जानता था कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री होंगे.''
लीडरशिप के सवाल पर बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय जायसवाल भी यही बात कहते हैं. संजय का कहना है, ''बिहार बीजेपी में हर कोई लीडर है, बीजेपी के जितने कार्यकर्ता हैं वो सब.''
क्या बीजेपी लीडरशिप को नीतीश कुमार के कदम की जानकारी थी?
क्या बीजेपी को पता था कि नीतीश कुमार कुछ ऐसा करने वाले हैं? इस सवाल के जवाब में रविशंकर प्रसाद कहते हैं कि नीतीश कुमार ने कभी भी बातचीत में ऐसा ज़ाहिर नहीं होने दिया.
वे कहते हैं, ''अभी एक हफ्ते पहले बिहार में एक सम्मेलन में अमित शाह और जेपी नड्डा की उपस्थिति में घोषणा की गई कि 2025 में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री उम्मीदवार होंगे, 2024 में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में चुनाव लड़ेंगे.''
इसी सवाल पर संजय जायसवाल कहते हैं, ''नीतीश कुमार का स्वभाव है कि वो आदतन 'धोखेबाज' हो चुके हैं.'' संजय जायसवाल आरोप लगाते हैं कि नीतीश कुमार, बीजेपी के साथ गठबंधन में रहते हुए खुद तो तेजस्वी के मुद्दे पर न्यूट्रल बने रहे लेकिन अपने आसपास के लोगों से कुछ न कुछ कहलवाते रहते थे.
आरसीपी सिंह के मुद्दे पर रविशंकर प्रसाद और संजय जायसवाल दोनों ही कहते हैं कि उन्हें केंद्र में मंत्री बनाने का फ़ैसला ख़ुद नीतीश कुमार ने लिया था.
संजय जायसवाल कहते हैं कि आरसीपी सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य बनाने का फ़ैसला नीतीश कुमार ने लिया था. अब आरसीपी सिंह की जगह वो ओडिशा कैडर के आईएएस ऑफिसर मनीष वर्मा को लाए हैं.
वे कहते हैं, ''आरसीपी अब उनके लिए किसी काम के नहीं रह गए हैं, जैसे वो सबको बाहर का रास्ता दिखाते हैं वही आरसीपी के साथ काम कर रहे हैं.''
सात पार्टियां एक साथ, बीजेपी का सफाया होगा: भक्त चरण दास
बिहार कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास इस गठबंधन को अबतक का सबसे अलग गठबंधन बताते हैं. वो कहते हैं कि महागठबंधन एक ऐसा गठबंधन है, जहां बीजेपी एकतरफ है और बाकी सभी पार्टियां एक साथ आ गई हैं.
वे दावा कहते हैं कि बीजेपी अपना वोट बैंक खोने जा रही है और अगले चुनाव में बीजेपी को भारी हार का सामना करना होगा. भक्त चरण दास से जब ये पूछा गया कि युवाओं को कांग्रेस में कैसे और कब आगे आकर ज़िम्मेदारी संभालने का मौका दिया जाएगा, तो वे कहते हैं कि कांग्रेस इस दिशा में लगातार काम करती आई है और आगे भी करती रहेगी.
इस गठबंधन का क्या होगा?
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर लंबे समय तक नीतीश कुमार के साथ मिलकर काम कर चुके हैं. वो अलग-अलग समय में बीजेपी और कांग्रेस के साथ भी राष्ट्रीय और अलग-अलग राज्यों में काम कर चुके हैं.
प्रशांत किशोर कहते हैं कि बिहार में पिछले 10 साल में ये छठा राजनीतिक गठबंधन है, जिसकी सरकार बनी है. वो कहते हैं कि इस सरकार से भी जनता को कई उम्मीदें हैं और ये जो राजनीतिक अस्थिरता का दौर है वो जल्दी सुधरने वाला नहीं है.
प्रशांत किशोर कहते हैं, ''हमें इस गठबंधन को समय देना चाहिए, जनता को अगर बेहतर सरकार मिलती है तो गठबंधन के लिए आगे भी सबकुछ सही होगा लेकिन गठबंधन अगर सही से नहीं चलता हो इसका बड़ा नुकसान गठबंधन और इससे जुड़ी पार्टियों को होगा.''
प्रशांत किशोर कहते हैं कि 2017 में बना बीजेपी और जेडीयू का गठबंधन सहज नहीं दिख रहा था. वो कहते हैं, ''2017-2022 में बीजेपी और जेडीयू के बीच गठबंधन में जैसा तालमेल दिख रहा था, ऐसा लंबे समय तक नहीं चल सकता था.''
प्रशांत किशोर का कहना है कि पहले जो गठबंधन नीतीश और बीजेपी के बीच हुए थे उसमें ऐसा देखने को नहीं मिला था. वो वजह भी बताते हैं कि तब के दौर की और आज के दौर की बीजेपी में कई मायनों में अंतर आ चुका है और अब बीजेपी सत्ता में भी है.
ऐसे में नीतीश कुमार का लंबे समय तक बीजेपी के साथ रहना संभव नहीं दिख रहा था.
(कॉपी- अभय कुमार सिंह)
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