'काले जादू' वाले पीएम मोदी के तंज़ पर राहुल गांधी का जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा और उन पर 'काला-जादू' फैलाने का आरोप लगाया.

अपने संबोधन में पीएम ने कहा, "निराशा और हताशा में डूबे कुछ लोग सरकार पर लगातार झूठा आरोप मढ़ने में जुटे हैं. लेकिन ऐसे लोगों पर से जनता का विश्वास पूरी तरह से उठ चुका है. यही वजह है कि अब वे काला जादू फैलाने पर उतर आए हैं."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काले जादू वाले इस भाषण को कांग्रेस के पांच अगस्त को महंगाई के ख़िलाफ़ प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है.

दरअसल, पांच अगस्त को कांग्रेस नेताओं ने काले कपड़े पहनकर महंगाई के मुद्दे पर सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था.

प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को हरियाणा के पानीपत में वीडियो कॉनफ्रेंसिंग के माध्यम से 2जी इथेनॉल संयंत्र का उद्घाटन किया. इसी दौरान उन्होंने विपक्षी दल पर तंज़ किया.

अपने संबोधन मे पीएम मोदी ने कहा, "आज़ादी के इस अमृत महोत्सव में जब देश तिरंगे के रंग में रंगा हुआ है, तब कुछ ऐसा भी हुआ है, जिसकी तरफ़ देश का ध्यान दिलाना चाहता हूं. हमारे वीर स्वतंत्रता-सेनानियों को अपमानित करने का, इस पवित्र अवसर को अपवित्र करने का प्रयास किया गया है. ऐसे लोगों की मानसिकता, देश को भी समझना ज़रूरी है."

पीएम मोदी ने कहा, "हम जानते हैं कभी-कभी कोई मरीज़, जब अपनी लंबी बीमारी के इलाज से थक जाता है, निराश हो जाता है, अच्छे-अच्छे डॉक्टरों से सलाह लेने के बावजूद जब उसे लाभ नहीं होता है, तो वाहे जितना ही पढ़ा-लिखा क्यों ना हो अंधविश्वास की ओर बढ़ने लग जाता है. वो झाड़-फूंक कराने लगता है, टोने-टोटके पर, काले जादू पर विश्वास करने लगता है. ऐसे ही हमारे देश में भी कुछ लोग हैं, जो नकारात्मकता के भंवर में फंसे हुए हैं. निराशा में डूबे हुए हैं. सरकार के ख़िलाफ़ झूठ पर झूठ बोलने के बाद भी जनता ऐसे लोगों पर भरोसा करने को तैयार नहीं है. ऐसी हताशा में ये लोग भी एब काले-जादू की तरफ़ मुड़ते नज़र आ रहे हैं."

उन्होंने आगे कहा, "अभी हमने पांच अगस्त को देखा है कि कैसे काले-जादू को फैलाने का भरपूर प्रयास किया गया. ये लोग सोचते हैं कि काले कपड़े पहनकर, उनकी निराशा-हताशा का काल समाप्त हो जाएगा. लेकिन उन्हें ये पता नहीं है कि वे चाहे जितनी ही झाड़-फूंक कर लें, कितना ही काला जादू कर लें, अंधविश्वास कर लें, जनता का विश्वास अब उन पर दोबारा कभी नहीं बन पाएगा."

पीएम मोदी ने कहा कि इस काले जादू के फेर में आज़ादी के अमृत-महेत्सव का अपमान ना करें, तिरंगे का अपमान ना करें.

कांग्रेस ने काले जादू वाले भाषण पर दिया जवाब

पीएम मोदी ने के इस बयान का कांग्रेस पार्टी ने जवाब भी दिया है.

कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर-हैंडल से ट्वीट करके प्रतिक्रिया दी है.

कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया है, "बेलगाम बेरोज़गारी, कमरतोड़ महंगाई, टूटता रुपया, बढ़ता व्यापार घाटा, देश छोड़ कर जाते निवेशक लेकिन प्रधानमंत्री को चिंता काले कपड़ों की है!"

"लाख कोशिश कीजिए मोदी जी, पर असल मुद्दों पर सवाल से बच नहीं पाइएगा."

राहुल गांधीन ने भी ट्वीट करके पीएम मोदी को जवाब दिया है.

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने ट्वीट करके पीएम मोदी के इस बयान का जवाब दिया है.

उन्होंने लिखा है, "पीएम मोदी, आप इधर उधर की बात न करें, ये बताएं महंगाई बढ़ाकर क्यों लूटा? जनता को काले कपड़ों से गिला नहीं, आपकी रहबरी पर सवाल है."

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और मीडिया प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट किया है.

उन्होंने लिखा है, "ये काला धन लाने के लिए तो कुछ कर नहीं पाए, अब काले कपड़ों को लेकर बेमतलब का मुद्दा बना रहे हैं. देश चाहता है कि प्रधानमंत्री उनकी समस्याओं पर बात करें लेकिन जुमला जीवी कुछ भी बोलते रहते हैं."

यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास ने भी ट्वीट कर पीएम मोदी पर तंज़ किया है.

राज्यसभा में कांग्रेस के सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी पीएम के इस बयान पर निशाना साधा है.

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मुझे हैरानी हो रही है कि पीएम इस तरह का बयान दे रहे हैं. लग रहा है कि बंगाल का चुनाव हारने के बाद से उनके दिमाग़ से काला-जादू शब्द निकल नहीं रहा है और कल बिहार में जो कुछ हुआ, उसके बाद पीएम ख़ुद इस तरह की बात बोल रहे हैं तो मुझे प्रसन्नता है कि पांच अगस्त को कांग्रेस पार्टी का जो प्रदर्शन रहा, वो अभी भी बीजेपी को परेशान कर रहा है."

इमरान प्रतापगढ़ी ने आगे कहा, "उस प्रदर्शन की धार को कम करने के लिए गृहमंत्री को बोलना पड़ा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को बोलना पड़ा और अंत में आज जब पीएम को बी बोलना पड़ा तो इससे पता चलता है कि जनता के आक्रोश को देखकर बीजेपी के नेताओं की आंख के आगे अंधेरा है. इसलिए उन्हें फिलहाल सबकुछ काला-काला ही दिखाई पड़ रहा है. अगर उन्हें ये लगता है कि अगर काला कपड़ा पहन लेना, काला जादू करना है तो मैं कुंभ में स्नान करती हुई उनकी उन तस्वीरों का ज़िक्र करना चाहूंगा जिसमें उन्होंने काले कपड़े पहन रखे हैं. ये तो शब्दों से खेलने की एक नाकाम कोशिश है."

गुजरात कांग्रेस के नेता हितेंद्र पिठादिया ने भी ट्वीट करके मोदी के इस बयान की निंदा की है. उन्होंने लिखा है, "यह देश का दुर्भाग्य है कि 21वीं सदी में देश का प्रधानमंत्री शिक्षा, चिकित्सा एवं विज्ञान की जगह काले जादू टोना में विश्वास रखता है..!!"

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भी इस संबंध में ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा है, "इसीलिए तो मोदी जी अपनी दाँई कलाई में काला धागा बाँधते हैं. काला जादू ना चले नज़र ना लगे. गंगा जी में स्नान करने के लिए काले कपड़े पहनते हैं संघ की शाखाओं में काली टोपी पहनी जाती है."

प्रशांत टंडन नाम के एक शख़्स के ट्वीट को री-ट्वीट करते हुए दिग्विजय सिंह ने उनकी बात का समर्तन करते हुए कहा है कि काले जादू वाली मोदी की क्लिप को अंग्रेज़ी में लिखकर पोस्ट किया जाना चाहिए ताकि अंतरराष्ट्रीय-स्तर पर भी लोग उनकी बौद्धिकता की गहराई जान सकें.

सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा काला-जादू

वहीं कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने ट्वीट किया है, "काला कपड़ा श्रेष्ठ फैशन है, काला कपड़ा पहनकर शनि की आराधना की जाती है, काला कपड़ा पहनकर संगम में डुबकी भी लगाई जाती है, काला कपड़ा विरोध प्रकट करने के लिए भी पहना जाता है, इसे काला जादू कहकर रंग की अवहेलना न करें."

पीएम मोदी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर काला-जादू और ब्लैक-मैजिक ट्रेंड कर रहा है. लोग तरह-तरह के मीम बनाकर पोस्ट कर रहे हैं.

सुधीर पंवर ने पीएम मोदी के बयान की अख़बार में छपी एक कटिंग को ट्वीट करते हुए लिखा है- 'काला जादू' को खोई प्रतिष्ठा वापस मिली और ब्रांड एम्बेसडर भी.

संतोष गुप्ता नाम के यूज़र ने लिखा है, "काला कपड़ा अगर काला जादू का प्रतीक है, तो सफ़ेद दाढ़ी सफेद झूठ का सिंबल है."

संजय शर्मा नाम के एक यूज़र ने लिखा है, "मुझे बहुत पसंद है काला रंग ! काला जादू तो सही है पर अपने को काले धन का खेल कभी नहीं समझ आता ! काला जादू ! काला धन !"

काले रंग और राजनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के इस हिस्से को बीजेपी के कई नेताओं ने ट्वीट किया है. हालांकि पीएम मोदी ने पहले गृहमंत्री अमित शाह भी कांग्रेस के काला-रंग पहनकर किए गए विरोध-प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाया था.

एक कार्यक्रम के दौरान अपने भाषण में उन्होंने कहा था कि ये प्रदर्शन महंगाई या बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ नहीं किया गया बल्कि इसलिए किया गया क्योंकि आज के ही दिन एक साल पहले श्रीराम जन्मभूमि का शिलान्यास हुआ था. इसलिए कांग्रेस पार्टी ने इसका विरोध दर्ज कराने के लिए काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया.

गृहमंत्री के इस बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करके अपनी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने लिखा था, "अमित शाह जी, आपने शायद अपना राजनीतिक जीवन आरएसएस से शुरू नहीं किया होगा नहीं तो आपको काले रंग से इतना एतराज नहीं होता. आरएसएस का स्वयं सेवक कौन से रंग की टोपी पहनता है? काले रंग की. कुछ समझ में आया? "

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने पीएम मोदी की संगम में स्नान करती हुई तस्वीर पोस्ट करके अमित शाह से सवाल भी पूछा था.

काले रंग को मोदी-शाह का बैर नया नहीं है.

पीएम मोदी को किन-किन रंगों से परहेज़

बीबीसी ने कुछ वर्ष पहले राजनीति में काले रंग की चर्चा पर एक लेख प्रकाशित किया था. इसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों के दौरान काले रंग पर 2016 से ही अघोषित पाबंदी है.

नरेंद्र मोदी काले कपड़ों से भी परहेज़ करते हैं. इसका जिक्र पत्रकार नीलांजन मुखोपाध्याय ने 'नरेंद्र मोदी : द मैन, द टाइम्स' में किया है.

इस पुस्तक के एक चैप्टर में मोदी कुर्ता बनाने वाले चौहान ब्रदर्स में से एक बिपिन चौहान ने कहा है कि मोदी आम तौर पर काले कपड़ों से दूर ही रहते हैं और सौ फ़ीसद काला रंग तो बिल्कुल नहीं पहनते. उनकी कलाई पर एक काला धागा ज़रूर बंधा होता है, लेकिन उसका मकसद शायद बुरी नज़र से बचाना है.

बिपिन चौहान के दावों के मुताबिक रंग-बिरंगे परिधान पहनने वाले मोदी हरे रंग से भी दूरी बरतते हैं.

काले रंग का समाजशास्त्र और मनोविज्ञान

दरअसल काले रंग से भड़कने का समाजशास्त्र और मनोविज्ञान ख़ासा पुराना है.

रोमन साम्राज्य के समय से ही उसे शोक, अशुभ, मौत, जादू-टोने और चुड़ैलों से जोड़ा जाता रहा. पश्चिमी देशों में मृतक के अंतिम संस्कार पर काले वस्त्र पहनकर आने का चलन उसी परंपरा का विस्तार है.

यह परंपरा विक्टोरियाई युग (1861) में शुरू हुई थी जहां विधवाएं दो-तीन वर्ष तक काले वस्त्र पहनने के लिए विवश थीं.

लेकिन अठारहवीं-उन्नीसवीं शताब्दी में वह वर्ड्सवर्थ, बायरन, शेली, कीट्स, विलियम ब्लेक, कोलरिज जैसे महान रोमांटिक कवियों का सबसे प्रिय रंग बना, जो अक्सर काले कपड़ों में रहते थे. वे कवियों को राजा-रानियों से श्रेष्ठ मानते थे और लीक से हटकर चलते हुए विक्टोरियाई युग की तथाकथित नैतिकताओं के ख़िलाफ़ थे. शेली का प्रसिद्ध कथन है कि 'कवि विश्व के स्वघोषित दूत' होते हैं.

बीसवीं सदी आते-आते काले रंग का अर्थ बदल गया और उसने महंगे और ऊंचे दर्जे के फ़ैशन में प्रवेश किया. काले कपड़ों को संपन्न-सुरुचिपूर्ण रहन-सहन और परिधान का हिस्सा बनाने में फ़्रांस के फ़ैशन डिज़ाइनरों का बहुत हाथ है.

(कॉपीः भूमिका राय)

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