'राष्ट्रपत्नी' वाले अधीर रंजन चौधरी के बयान पर हंगामा, माफ़ी पर अड़ी बीजेपी

पश्चिम बंगाल से कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 'राष्ट्रपत्नी' कहने वाले बयान पर विवाद छिड़ गया है.

उनके बयान का बीजेपी नेता जमकर विरोध कर रहे हैं और कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से माफ़ी की मांग कर रहे हैं.

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से पिछले तीन दिनों से प्रवर्तन निदेशालय की पूछताछ का विरोध कर रहे हैं और धरना दे रहे हैं. बुधवार को धरने के दौरान ही अधीर रंजन चौधरी ने एक समाचार चैनल से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए 'राष्ट्रपत्नी' शब्द का इस्तेमाल कर दिया था.

राष्ट्रपति भवन ना जाने देने को लेकर उन्होंने कहा, ''कल जाने नहीं दिया गया. आज भी जाएंगे. हिंदुस्तान की राष्ट्रपति जी सबके लिए हैं. राष्ट्रपति जी, नहीं राष्ट्रपत्नी जी, हिंदुस्तान की राष्ट्रपत्नी जी सबके लिए हैं. हमारे लिए क्यों नहीं?''

इसके बाद अगले दिन उन्होंने अपने बयान पर सफ़ाई देते हुए कहा, "माफ़ी मांगने का सवाल ही नहीं उठता. मैं बीजेपी से माफ़ी क्यों मांगू. मैं जानता हूं कि भारत की राष्ट्रपति चाहे कोई भी हो वे हमारे लिए राष्ट्रपति ही हैं. ये शब्द बस एक बार निकला है. ये चूक हुई है. लेकिन सत्ताधारी पार्टी के कुछ लोग राई का पहाड़ बना रहे हैं."

"दो दिन से जब हम विजय चौक के तरफ जा रहे थे. हमसे पूछा जा रहा था कि आप कहा जा रहे हैं? हम उनसे कह रहे थे कि हम राष्ट्रपति भवन जाना चाहते हैं और राष्ट्रपति से मिलना चाहते हैं. कल मुझसे गलती से ये (राष्ट्रपत्नी) शब्द निकला है तो मैं क्या करूं. मुझे फांसी पर लटकाना है तो लटका दो. मैंने पत्रकार को रोकने की कोशिश की लेकिन वो निकल गए. मैं उसी समय उनसे कह देता कि ये गलत शब्द निकला है.''

समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, संसद के मॉनसून सत्र के दौरान इस मुद्दे पर काफी हंगामा हुआ. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर अधीर रंजन चौधरी की 'राष्ट्रपत्नी' वाली टिप्पणी को लेकर कांग्रेस ने भाजपा से माफ़ी भी मांगी.

अब अधीर रंजन चौधरी ने अपने ऊपर लगे राष्ट्रपति के अपमान के आरोप को लेकर लोकसभा स्पीकर से संसद में बोलने के लिए समय देने का अनुरोध किया है.

द्रौपदी मुर्मू भारत की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति हैं. सत्ताधारी एनडीए की ओर से झारखंड की पूर्व गवर्नर रहीं द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार बनाया गया था. उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा को बड़े अंतर से हराया. उन्होंने 25 जुलाई को राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी.

वह झारखंड की पहली महिला और आदिवासी राज्यपाल भी थीं. यहां से सेवानिवृति के बाद वे अपने गृह राज्य ओड़िशा के मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में रहती हैं. यह उनके पैतृक गांव बैदापोसी का प्रखंड मुख्यालय है. वे झारखंड में सबसे लंबे वक़्त (छह साल से कुछ अधिक वक़्त) तक राज्यपाल रहीं.

स्मृति रानी ने क्या कहा

तब लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित की गई. इससे पहले भाजपा सांसदों ने इस टिप्पणी को लेकर संसद में विरोध प्रदर्शन किया. हालांकि, विरोध के चलते कार्यवाही को फिर चार बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया.

इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने कहा, "जब से द्रौपदी मुर्मू का नाम राष्ट्रपति के उम्मीदवार के रूप में घोषित हुआ तब से ही द्रौपदी मुर्मू कांग्रेस पार्टी की घृणा और उपहास का शिकार बनीं. कांग्रेस पार्टी ने उन्हें कठपुतली कहा."

"कांग्रेस आज भी इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रही कि एक आदिवासी महिला इस देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद को सुशोभित कर रही हैं. सोनिया गांधी द्वारा नियुक्त नेता सदन अधीर रंजन ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्र की पत्नी के रूप में संबोधित किया."

सोनिया गांधी ने क्या कहा

वहीं, अधीर रंजन चौधरी की टिप्पणी पर सोनिया गांधी ने भी बयान दिया है. क्या अधीर रंजन 'राष्ट्रपत्नी' वाली टिप्पणी पर माफी मांगेंगे, इस सवाल के जवाब में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा, "उन्होंने माफी मांग ली है."

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ये महिला का जानबूझकर किया गया अपमान है. सोनिया गांधी को राष्ट्रपति और देश से माफ़ी मांगनी चाहिए.

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी इसे आदिवासियों का अपमान बताया. उन्होंने कहा, ''ये देश के आदिवासियों और राष्ट्रपति का अपमान है. उन्हें तुरंत माफ़ी मांगनी चाहिए. सोनिया गांधी को ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करने के लिए माफ़ी मांगनी चाहिए.''

अधीर रंजन चौधरी के बयान का विरोध कर रहीं बीजेपी सांसद रमा देवी ने कहा, ''हम ये अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे. हम देश के तौर पर, एक महिला के तौर पर इसे सहन नहीं करेंगे. एक आदिवासी महिला के राष्ट्रपति बनने पर शर्म महसूस करना शर्म की बात है. उन्हें ज़रूर माफ़ी मांगनी चाहिए.''

वहीं, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अधीर रंजन चौधरी पर जानबूझकर ऐसा बयान देने और उसे दोहराने का आरोप लगाया है.

उन्होंने कहा, ''उन्होंने जानबूझकर ऐसा बयान दिया और उसे दो बार बोला. क्या ये छोटी बात है? हम कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से संसद और देश के सामने माफ़ी की मांग करते हैं. एआर चौधरी ने जिस तरह से राष्ट्रपति का अपमान किया ये उनकी मानसिकता दिखाता है. देश आदिवासी लोगों का ऐसा अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करेगा. इस सबके बाद भी उन्होंने कहा कि इसके लिए माफ़ी की ज़रूरत नहीं है.''

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोनिया गांधी से सवाल किया है कि क्या वो अधीर रंजन के विचारों से सहमत हैं. उन्होंने ट्वीट किया, ''कांग्रेस के नेता अधीर रंजन जी ने अपने बयान से देश के सर्वोच्च पद का अपमान किया है. यह उनकी और उनकी पार्टी की निकृष्टतम मानसिकता का प्रकटीकरण है. उनका यह बयान आदिवासी विरोधी है, महिला विरोधी है. राष्ट्रपति किसी भी पार्टी का नहीं, अपितु सम्पूर्ण देश का होता है.''

''मैं सोनिया गांधी जी से पूछना चाहता हूं कि आपके नेता ऐसे अपशब्दों का प्रयोग कर रहे हैं, तो क्या आप भी उनके विचारों से सहमत हैं? देश यह जानना चाहता है. महामहिम राष्ट्रपति के लिए भारतीय इतिहास में ऐसा निंदात्मक कृत्य किसी ने नहीं किया है. सोनिया जी सहित कांग्रेस को सदन में देश से माफ़ी मांगनी चाहिये.''

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वरिष्ठ पार्टी नेताओं की तत्काल बैठक बुलाई है. इस बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे और अधीर रंजन चौधरी को भी बुलाया गया है.

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