रांची में वाहन चेकिंग के दौरान महिला पुलिस अफ़सर की कुचल कर हत्या

    • Author, आनंद दत्त
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, रांची से

झारखंड की राजधानी रांची में बुधवार सुबह तीन बजे पिकअप वाहन ने महिला पुलिस अधिकारी संध्या टोपनो को कुचल दिया जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गयी.

सूचना मिलने के बाद हटिया के डीएसपी राजा कुमार मित्रा, धुर्वा और जगरनाथपुर थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी घटना स्थल पर पहुँचे. इसके बाद महिला पुलिस अफ़सर के शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया.

संध्या टोपनो 2018 बैच की सब इंस्पेक्टर थीं और इस समय तुपुदाना ओपी में तैनात थीं.

रांची के एसएसपी किशोर कौशल ने बताया कि 'तुपुदाना थाना प्रभारी को तोरपा की तरफ़ से एक संदिग्ध वाहन के आने की सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही तुपुदाना ओपी क्षेत्र की हुलहुंदू में बैरिकेड लगाकर वाहन को रोकने का प्रयास किया गया.

इस बीच संदिग्ध वाहन ने गश्ती वाहन को भी टक्कर मारी और इसी क्रम में वाहन चेकिंग को लीड कर रही महिला पुलिस अफ़सर संध्या टोपनो भी वाहन की चपेट में आ गयीं. अस्पताल ले जाने के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.'

पोस्टमार्टम के वक़्त रिम्स में मौजूद संध्या के छोटे भाई अजीत टोपनो ने बीबीसी हिन्दी को बताया कि, संध्या की नाईट ड्यूटी लगी हुई थी.

उन्होंने कहा कि मंगलवार रात 11 बजे वे अपनी बहन को छोड़ने के लिए तुपुदाना ओपी गए थे. संध्या के साथ अजीत की यह आख़िरी बातचीत थी. इसके बाद सुबह पुलिस की गाड़ी घर आई और संध्या के एक्सीडेंट की सूचना घरवालों को दी. परिवार वाले अस्पताल पहुँचे तो पता चला कि संध्या की मौत हो चुकी थी.

अजीत ने बताया कि वे शव को हटिया स्थित अपने घर ले जा रहे हैं, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाना है.

अजीत के अनुसार घर वाले उनकी पुलिस की नौकरी के ख़िलाफ़ थे और उनके पिता जब तक जीवित रहे, उन्हें पुलिस की नौकरी के लिए आवेदन करने नहीं दिया.

लेकिन 2016 में पिता के निधन के बाद संध्या ने 2018 में पुलिस की नौकरी की.

लापरवाही के आरोप

अजीत इस मामले में पुलिस पर लापरवाही का भी आरोप लगाते हैं.

वे कहते हैं, "जिस वैन को रोकने में तीन ज़िलों की पुलिस नाकाम रही, उन्हें रोकने के लिए एक महिला अफ़सर को सिर्फ़ दो-तीन सिपाहियों के साथ रात में भेज दिया गया. जिस बीच दो अन्य हवलदार वाहनों की चेकिंग कर रहे थे, उसी बीच यह हादसा हो गया."

अजीत अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई और सज़ा की माँग कर रहे हैं.

अजीत के मुताबिक़, उनके पिता निहारण टोपनो की 2016 में मृत्यु हो गयी थी. वे पेयजल विभाग में कार्यरत थे.

संध्या हटिया में अपनी मां स्नेहलता टोपनो, बहन सीमो टोपनो और भाई अजीत टोपनो के साथ रहती थीं. भाई बहनों में वे दूसरे स्थान पर थीं. उनका परिवार मूल रूप से खूंटी के रनिया से हैं, लेकिन वे सालों से हटिया में रहते आ रहे हैं. संध्या सहित सभी भाई बहनों की पढ़ाई-लिखाई रांची में ही पूरी हुई.

अपराधी फ़रार, वाहन जब्त

इधर रिम्स में पोस्टमार्टम के बाद संध्या टोपनो के शव को कांके रोड स्थित न्यू पुलिस लाइन लाया गया है. पुलिस लाइन में शव को सलामी दी गई.

मौक़े पर एसएसपी किशोर कौशल, सिटी एसपी अंशुमन, ग्रामीण एसपी नौशाद आलम समेत अन्य पुलिसकर्मी मौजूद थे.

एसएसपी किशोर कौशल ने बीबीसी हिन्दी को बताया कि, पुलिस इस मामले में एफ़आईआर दर्ज़ कर रही है. अपराधियों पर हत्या का मुक़दमा चलाया जाएगा.

मामले में एसएसपी ने एक व्यक्ति की गिरफ़्तारी की पुष्टि की है.

एसएसपी कहते हैं, "वाहन में मवेशी लदे हुए थे. उसे गुमला और तोरपा में भी रोकने का प्रयास किया गया था, लेकिन अपराधी भागने में कामयाब रहे थे. फ़िलहाल वाहन को भी पुलिस ने अपने क़ब्ज़े में ले लिया है. दूसरे व्यक्ति की तलाश पुलिस कर रही है."

उन्होंनें आगे बताया, जानकारी मिली कि महिला पुलिस अफ़सर को कुचलने के बाद मवेशियों से लदा पिकअप वैन रिंग रोड की तरफ़ भाग निकला, जिसका पुलिस पीछा कर रही थी. रिंग रोड में तेज़ रफ़्तार के कारण पिकअप ने नियंत्रण खो दिया और वह बीच रास्ते में पलट गई. गाड़ी पलटने के बाद पुलिस ने घेराबंदी कर चालक को गिरफ़्तार कर लिया, लेकिन अन्य लोग भागने में कामयाब रहे. पुलिस चालक से पूछताछ कर रही है.

क्या कहती हैं संध्या की बैचमेट

पुलिस हेड क्वाटर, रांची में पदस्थापित विपुला ने संध्या के साथ नेतरहाट में ट्रेनिंग की थी. वे बताती हैं कि संध्या बहुत ही निडर, बेबाक और समझौता नहीं करने वाली लड़की थीं.

विपुला कहती है, "नेतरहाट में ट्रेनिंग के दौरान संध्या को कमांडर बनाया गया था. कमांडर जो एक समूह को नेतृत्व दे, जिसकी शारीरिक क्षमता बेहतर हो, निडर हो और आवाज़ बुलंद हो. आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि संध्या कितनी निर्भीक और लड़ाकू थीं."

संध्या की एक साथी पूजा जो पुलिस हेडक्वाटर में ही कार्यरत हैं, वो बताती हैं कि संध्या समाज को अपराध मुक्त करने के सपने के साथ पुलिस में आई थीं.

घटना के तीन दिन पहले से ही उन्हें रात की ड्यूटी दी जा रही थी. उन्हें जैसे ही गौ-तस्करी की सूचना मिली उसने तस्करों को रोकने का प्रयास किया और यह घटना हुई.

वे आगे कहती हैं, "हम पुलिस ईमानदारी से कार्य करना चाहते हैं. ड्यूटी के दौरान शहीद होने में हमें कोई संकोच नहीं है, लेकिन अगर किसी साज़िश का हम शिकार हो जाते हैं तो मन भयभीत हो जाता है."

साथ ही वे ये भी कहती हैं, "2018 बैच की ही रूपा तिर्की के बाद संध्या की इस सन्देहास्पद मौत से हम डर नहीं रहे लेकिन चिंतित ज़रूर हैं."

घटना के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज़ हो गई है.

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने बीबीसी हिंदी से कहा, "जब से जेएमएम और कांग्रेस की सरकार बनी है, झारखंड गो-तस्करों का सबसे बड़ा अड्डा बन गया है."

वे कहते हैं, "वर्तमान सरकार इसे रोकने में पूरी तरह विफल रही है. जिस पुलिसकर्मी की दर्दनाक मौत हुई है, वो आदिवासी हैं. इससे पहले भी एक और आदिवासी पुलिसकर्मी रूपा तिर्की की मौत संदेहास्पद स्थिति में हुई थी. मैं सरकार को चेतावनी देना चाहता हूं कि अगर वो गो-तस्करी को रोकने में सफल नहीं होती तो झारखंड की जनता का कोपभजन बनने के लिए तैयार रहे."

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