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हरियाणा में डीएसपी की डंपर से कुचलकर हत्या, क्या बता रहे हैं गाँव के लोग- ग्राउंड रिपोर्ट
- Author, शुभम किशोर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नूह से
रात के 11 बजे किसी भी दूसरे गांव की तरह हरियाणा के नूह ज़िले के पचगांव की सड़कें भी सुनसान हो जाया करती हैं. लेकिन मंगलवार को हालात कुछ अलग थे.
सड़क पर खड़े लोगों को देखकर लग रहा था जैसे रात हुई नहीं है. हर कोई अपने-अपने तरीक़े से उस घटना का ज़िक्र और उस पर चर्चा कर रहा था, जो मंगलवार की दोपहर घटी.
पुलिस के अनुसार गुरुग्राम से सटे नूह ज़िले के तावडू थाना क्षेत्र के गांव पचगांव में तावडू के डिप्टी सुपरिंटेन्डेंट ऑफ़ पुलिस सुरेंद्र सिंह बिश्नोई पर डंपर चढ़ाकर उनकी हत्या कर दी गई. सुरेंद्र सिंह डंपर ड्राइवर के दस्तावेज़ों की जांच कर रहे थे. पुलिस ने इस मामले में एक अभियुक्त को गिरफ़्तार भी किया है.
पुलिस अधिकारी की हत्या के बाद से पूरे इलाक़े में तनाव का माहौल है. पुलिस अलर्ट पर है. पुलिस के कई आला अधिकारी गांव का दौरा कर चुके हैं और देर रात भी पुलिस की गाड़ियां गांव में आती-जाती दिखाई दीं.
इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं.
वहीं इस घटना के बाद से गांव वालों में डर है.
अमूमन सूरज ढलने के साथ जिस गांव में सन्नाटा हो जाता करता है, वहां मंगलवार की रात सड़कों पर खड़े लोगों की बातों में उनकी चिंता साफ़ झलक रही थी. इलाके में तनाव इस कदर है कि कोई भी कैमरे पर आकर बात करने को तैयार नहीं.
'पहले कभी ऐसा नहीं देखा'
बीबीसी की टीम को देख एक बूढ़ी महिला अपने घर से निकलीं, अपनी पहचान छिपाने की शर्त पर उन्होंने हमसे बात की.
उन्होंने कहा, "50 साल हो गए इस गांव में रहते हुए. कभी इस तरह का माहौल नहीं देखा. कभी इस तरह की घटना नहीं हुई. गांव वाले पुलिस के साथ हैं, कोई एक पुलिस वाले को कैसे मार सकता है."
गांव वाले पुलिस के साथ होने की बात तो करते हैं, लेकिन उनका कहना है कि पुलिस से उन्हें डर भी लग रहा है.
हरियाणा में डीएसपी की हत्या
- डीएसपी सुरेंद्र सिंह बिश्नोईपर मंगलवार दोपहर एक ड्राइवर ने गाड़ी चढ़ा दी जिससे उनकी मौक़े पर ही मौत हो गई
- सुरेंद्र सिंह मंगलवार को दोपहर 12 बजे दो पुलिसकर्मी, एक ड्राइवर और एक गनमैन के साथ अवैध खनन की शिकायत पर छापा मारने गए थे
- 1994 में बतौर एएसआई भर्ती हुए सुरेंद्र सिंह तावडू में डीएसपी के पद पर तैनात थे. वो चार महीने में रिटायर होने वाले थे
- मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि डीएसपी सुरेंद्र सिंह को शहीद का दर्जा दिया जाएगा
- मृत डीएसपी के परिजनों को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी
वहीं पर मौजूद मोहम्मद वारिस कहते बताते हैं, "गांव में बिल्कुल मातम फैला हुआ है, सब डरे हुए हैं, छोटे छोटे बच्चों ने भी खाना नहीं खाया है. डर है कि कहीं गांव पर कोई दिक्कत न आ जाए, जो दोषी हैं उनको तो कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए."
इसी बीच कैमरा और लाइट देखकर पास के एक घर से कोई आता है और सभी से कहने लगता है कि चले जाओ नहीं तो पुलिस आ जाएगी.
पुलिस की गाड़ी देख भागते लोग
कुछ ही दूर चलने पर हमें कुछ और लोग भी मिले. इनमें से एक शख़्स मुश्किल से बात करने को तैयार हुआ, तभी पास से पुलिस की एक गाड़ी गुज़री और सभी भागने लगे.
हालांकि कुछ देर के बाद ये लोग वापस भी आए.
हामिद हुसैन कहते हैं, "गांव में डर इतना है कि महिलाएं और बच्चे गांव छोड़कर चले गए हैं, सभी आसपास के गावों में चले गए हैं."
वहीं मौजूद एक और शख्स ने बताया, "गांव में लोग ही कहां हैं जिन्हें आप खोज रहे हैं, आधे तो भाग चुके हैं."
वहीं मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि हादसे के बाद गांव से छह-सात लोगों को पुलिस अपने साथ ले गई है.
हालांकि पुलिस के प्रवक्ता कृष्ण कुमार ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है और दूसरे अभियुक्तों की तलाश जारी है.
मंगलवार को तावडू के डिप्टी सुपरिंटेन्डेंट ऑफ़ पुलिस सुरेंद्र सिंह बिश्नोई पर डंपर चढ़ाकर उनकी हत्या कर दी गई थी.
पुलिस के मुताबिक, डीएसपी सुरेंद्र सिंह बिश्नोई को पचगांव से सटी अरावली पहाड़ी पर अवैध रूप से खनन किए जाने की सूचना मिली थी, जिसके बाद वो दोपहर करीब 12 बजे दो पुलिसकर्मी, एक ड्राइवर और एक गनमैन के साथ वहां गए थे.
अवैध खनन की समस्या
गांव के लोगों ने बीबीसी को बताया कि अवैध खनन की समस्या नई नहीं है. पिछले कुछ समय से स्थानीय मीडिया में भी इसकी काफ़ी चर्चा हुई, और पुलिस ने पिछले कुछ महीनों में चौकसी बढ़ा दी है.
गांव के लोगों की माने तो आसपास के कई लोग ही खनन के इस कारोबार में शामिल है.
आधीरात में खुली गांव की इकलौती दुकान पर इससे पहले की हम और लोगों से बात कर पाते, दो गाड़ियां आईं. इन्हें देखते ही वो लोग छिपने के लिए भागे.
इन गाड़ियों में कुछ लोग पुलिस की वर्दी में और कई लोग सादे कपड़े लोग बैठे थे. इनमें से खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले एक व्यक्ति ने हमें बुलाया और एक तस्वीर दिखाकर पूछा कि क्या हमने उस लड़के को कहीं देखा है.
हमने उनसे उनका पद और उस लड़के को खोजने की वजह जानने की कोशिश की लेकिन उन्होंने बताने से इनकार कर दिया.
ये बातचीत क़रीब दो मिनट चली. इसके बाद हम पीछे मुड़े, तो वहां खड़े सभी लोग कहीं छिप चुके थे.
पुलिस की गाड़ियां वहीं खड़ी रहीं लेकिन जो लोग अभी तक सड़क पर खड़े होकर बातें कर रहे थे वे कहीं छिप चुके थे.
क्या हुआ था?
रोहतक से बीबीसी के सहयोगी पत्रकार सत सिंह ने बताया कि डीएसपी सुरेंद्र सिंह बिश्नोई गांव से सटी अरावली पहाड़ी पर अवैध रूप से खनन किए जाने की सूचना को मिली थी.
उन्होंने एक संदिग्ध डंपर को रुकने के लिए कहा और उससे पेपर मांगे, लेकिन ड्राइवर ने डंपर की स्पीड बढ़ा दी.
ड्राइवर और गनमैन दोनों जान बचाने के लिए गाड़ी से कूद गए लेकिन ड्राइवर ने सुरेंद्र सिंह पर गाड़ी चढ़ा दी. डीएसपी सुरेंद्र सिंह की मौक़े पर ही मौत हो गई.
हरियाणा पुलिस ने ट्वीट कर कहा है "अपना काम पूरा करते हुए डीएसपी सुरेंद्र सिंह ने अपनी जान दे दी. हरियाणा पुलिस की संवेदना पीड़ित परिवार के साथ है. दोषियों को सज़ा दिलवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी."
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