पटना में दो संदिग्ध गिरफ़्तार, पुलिस के आरएसएस वाले बयान पर विवाद

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- Author, विष्णु नारायण
- पदनाम, पटना से, बीबीसी के लिए
बिहार पुलिस ने सोमवार (11 जुलाई) की रात पटना के फुलवारीशरीफ़ इलाक़े से दो संदिग्ध चरमपंथियों को गिरफ़्तार करने का दावा किया है.
पटना पुलिस के मुताबिक उसे इंटेलिजेंस ब्यूरो से दो संदिग्ध लोगों के बारे में जानकारी मिली थी. गिरफ़़्तार किए गए लोगों का नाम मोहम्मद जलालुद्दीन और अतहर परवेजट है. गिरफ़्तार किए गए दोनों लोगों पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है.
गिरफ़्तार किए गए अतहर परवेज़ के सगे भाई मंज़र पटना के गांधी मैदान ब्लास्ट मामले में अभियुक्त हैं.
ये लोग इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) और राजनीतिक पार्टी एसडीपीआई (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया) से जुड़े बताए गए हैं.
हालांकि पीएफ़आई ने पुलिस के सभी आरोपों को खारिज किया है. पीएफ़आई ने कहा है कि सभी आरोप निराधार हैं और पीएफ़आई को बदनाम करने के लिए लगाए गए हैं.
पुलिस ने एक प्रेस वार्ता करके संदिग्धों की गिरफ़्तारी के बारे में जानकारी दी है.
आरएसएस से तुलना पर विवाद
पुलिस की प्रेसवार्ता को लेकर विवाद भी हो गया है. पटना के एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने प्रेसवार्ता के दौरान अभियुक्तों के काम करने के तरीक़े की तुलना आरएसएस से कर दी.
पटना के एसएसपी ने पत्रकारों को समझाते हुए कहा, "कटुता की तरफ़ जिसे हम अंग्रेज़ी में रेडिक्लाइजेशन बोलते हैं, उसके लिए ये लगातार कार्यशील थे, इसका जो मॉडस था कि ये लोग, जैसे शाखा होती है, आरएसएस शाखा आर्गेनाइज़ करती है और लाठी की ट्रेनिंग देती है, उसी तरह ये लोग शारीरिक प्रशिक्षण, फिज़िकल एजुकेशन के नाम से अपने यूथ को बुलाकर प्रशिक्षण दे रहे थे और जो अपना एजेंडा है और प्रोपेगैंडा है, उनके माध्यम से यूथ को ब्रेनवॉश करने का काम कर रहे थे."
पटना के एसएसपी के इस बयान पर विवाद हो गया है और उनके इस्तीफ़े की मांग की जा रही है. बिहार में बीजेपी के प्रवक्ता निखिल आनंद ने पटना एसएसपी के बयान की निंदा करते हुए कहा, "आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को राजनीति और वैचारिक प्रभाव से ऊपर समझा जाता है. पटना एसएसपी का पीएफ़आई की आरएसएस से तुलना करना निंदनीय हैं. इन अधिकारियों के पास कार्रवाई में कोई पूर्वाग्रह और पूर्वकल्पित धारणा नहीं होनी चाहिए. उन्हें राजनीति करने से पहले माफ़ी मांगनी चाहिए और इस्तीफ़ा दे देना चाहिए."
पुलिस ने संदिग्धों के बारे में क्या बताया

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संदिग्धों की गिरफ़्तारी के बारे में जानकारी देते हुए पटना के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने बताया, "एक मकान में कुछ लोगों के द्वारा देश विरोधी और समुदाय विरोधी कार्य किया जा रहा है. हमें यह सूचना प्राप्त हो रही थी और हम सूचना का सत्यापन एजेंसी से करा रहे थे.
हमें 11 जुलाई को एकदम सही-सही सूचना प्राप्त हुई कि अहमद पैलेस में पिछले दो महीने से ऐसी गतिविधियां चल रही हैं. दूसरे राज्यों से लोग आ रहे हैं. आने-जाने वाले लोग संदेहास्पद हैं. जब जांच कराई तो पाया कि लोग नाम बदलकर एयर टिकट से लेकर होटल तक की सेवा ले रहे हैं. जांच में भी इस बात की पुष्टि हुई है."
मनीष कुमार ने बताया कि पुलिस ने 11 जुलाई की रात फुलवारीशरीफ़ इलाक़े के नया टोला नहर पर स्थित मोहम्मद जलालुद्दीन के घर पर रेड की और मौके से झारखंड पुलिस से रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर मोहम्मद जलालुद्दीन और अतहर परवेज़ को गिरफ़्तार किया गया.

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पुलिस के मुताबिक ये दोनों ही व्यक्ति देश में प्रतिबंधित संगठन सिमी के पूर्व सदस्य रहे हैं और इस वक्त पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफ़आई) और एसडीपीआई के सक्रिय सदस्य हैं.
पुलिस का दावा है कि ये लोग पिछले 2 सालों से अन्य लोगों को ट्रेनिंग दे रहे थे और बाहर के चरमपंथियों को यहां आश्रय दे रहे थे.
पुलिस ने बताया, "बीती 6-7 जुलाई को इन्होंने यहां मार्शल आर्ट के नाम पर स्थानीय लोगों को तलवार-चाकू चलाने का प्रशिक्षण दिया और दूसरे सम्प्रदाय के प्रति उन्मादित करने , साम्प्रदायिक विद्वेष पैदा करने का प्रयास कर रहे थे."

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पुलिस का दावा है कि मौके से सीसीटीवी फुटेज हासिल की गई है और सभी तथ्यों को सत्यापित किया गया है.
इन दोनों संदिग्धों की गिरफ़्तारी के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम पटना के अलग-अलग इलाक़ों में छापेमारी में जुट गई है.
केंद्रीय जांच एजेंसी ने फुलवारीशरीफ़ इलाक़े से एक और संदिग्ध को गिरफ्तार किया है.
यह छापेमारी वरिष्ठ अधिकारियों की अगुवाई में चल रही है. हालांकि इस बारे में अधिकारिक जानकारी अभी नहीं दी गई है.
वहीं पटना पुलिस की कार्रवाई के बारे में एडीजी पुलिस मुख्यालय जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि मामले की जांच वरीय स्तर पर की जा रही है.
बिहार आईबी और पटना पुलिस के साथ ही एटीएस की टीम अपने स्तर पर अनुसंधान में जुटी है. फिलहाल दोनों गिरफ्तार किए गए लोगों पर आईपीसी की अलग-अलग धाराओं में मुक़दमा दर्ज किया गया है. इसमें देश विरोधी गतिविधि से जुड़ी धाराएं भी शामिल हैं.
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