मोहम्मद ज़ुबैरः पाकिस्तान, यूएई, सऊदी अरब, बहरीन से पैसा लेने के आरोपों पर ऑल्ट न्यूज़ का जवाब

मोहम्मद ज़ुबैर

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, मोहम्मद ज़ुबैर

फ़ैक्ट चेक वेबसाइट 'ऑल्ट न्यूज़' ने अपने सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर की गिरफ़्तारी के बाद ऑल्ट न्यूज़ की पेरेंट कंपनी प्रावदा मीडिया फाउंडेशन पर लगाए गए दिल्ली पुलिस के आरोपों का जवाब दिया है.

'ऑल्ट न्यूज़' ने कहा है, "पिछले कुछ दिनों में ऑल्ट न्यूज़ और पेरेंट कंपनी प्रावदा मीडिया फाउंडेशन पर कई तरह के आरोप लगाए गए हैं. इनमें दावा किया गया है कि हमने उन विदेशी स्रोतों से पैसा लिया है, जिनसे हम चंदा नहीं ले सकते हैं. ये आरोप पूरी तरह से ग़लत हैं."

"हम जिस पेमेंट प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए चंदा लेते हैं, वो हमें विदेशी स्रोतों से पैसा लेने का विकल्प नहीं देता है और हमने केवल भारतीय बैंक खातों से पैसा लिया है. इन माध्यमों के ज़रिए जुटाई गई पूरी रकम कंपनी के बैंक खाते में जाती है."

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त

"कंपनी से जुड़े कुछ लोगों ने अपने निजी खातों में पैसा लिया है, ये आरोप भी झूठ है क्योंकि कंपनी से जुड़े लोग केवल महीने का मेहनताना लेते हैं. ये सब कुछ उस महत्वपूर्ण कार्य को बंद करने की कोशिश है, जो हम करते हैं और हम लोग इसके ख़िलाफ़ लड़ेंगे और जीतेंगे."

दिल्ली पुलिस ने मोहम्मद ज़ुबैर को 27 जून को एक आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में गिरफ़्तार किया था. एक हिंदू देवता के ख़िलाफ़ मोहम्मद ज़ुबैर का ये विवादास्पद ट्वीट साल 2018 में किया गया था.

शनिवार को दिल्ली की एक निचली अदालत ने मोहम्मद ज़ुबैर को इस मामले में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. उनकी चार दिनों की पुलिस हिरासत की अवधि शनिवार को ख़त्म हो गई थी.

मोहम्मद ज़ुबैर

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, मोहम्मद ज़ुबैर

दिल्ली पुलिस ने क्या कहा

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने शनिवार को अदालत में कहा था कि प्रावदा मीडिया फाउंडेशन को विदेशी मोबाइल नंबर या फिर विदेश में स्थित आईपी एड्रेस के ज़रिए कई बार पैसे भेजे गए थे. इस तरह से कंपनी को दो लाख रुपये से ज़्यादा की रकम मिली थी.

दिल्ली पुलिस का कहना है कि रेज़रपे पेमेंट गेटवे से मिले जवाब की पड़ताल से ये बात सामने आई है कि ऐसे कई भुगतान किए गए थे जिनमें या तो भारत से बाहर के मोबाइल नंबर या फिर विदेशों के आईपी एड्रेस इस्तेमाल किए गए थे.

दिल्ली पुलिस के बयान के मुताबिक़, इन जगहों में बैंकॉक, ऑस्ट्रेलिया, मनामा, नॉर्थ हॉलैंड, सिंगापुर, विक्टोरिया, न्यूयॉर्क, इंग्लैंड, रियाद, शारजाह, स्टॉकहोम, अबू धाबी, वाशिंगटन, कंसास, न्यू जर्सी, ओंटारियो, कैलिफॉर्निया, टेक्सास, लोवर सैक्सनी, बर्न, दुबई, स्कॉटलैंड शामिल हैं.

पुलिस का कहना है कि प्रावदा मीडिया फाउंडेशन ने इन ट्रांज़ैक्शंस के ज़रिए 2,31,933 रुपये की रकम जुटाई थी.

पुलिस ने सोशल मीडिया एकाउंट्स की पड़ताल के हवाले ये कहा है कि मोहम्मद ज़ुबैर की गिरफ़्तारी के बाद उनके समर्थन में ट्वीट करने वाले ज़्यादातर हैंडल्स मध्यपूर्व के संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत जैसे देशों के थे. पुलिस का कहना है कि मोहम्मद ज़ुबैर के पक्ष में पाकिस्तान से भी ट्वीट किए गए थे.

पुलिस ने मोहम्मद ज़ुबैर के ख़िलाफ़ आईपीसी के सेक्शन 120बी (आपराधिक साज़िश) और सेक्शन 201 (सबूत नष्ट करने) और फेरा क़ानून (फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट) की धारा 35 के तहत नए आरोप लगाए हैं.

इससे पहले उनके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, भाषा आदि के आधार पर दो समुदायों या समूहों के बीच वैमनस्यता फैलाना) और धारा 295ए (धार्मिक भावनाएं भड़काने के इरादे से कोई कार्य करना) के तहत केस दर्ज किया गया था.

मोहम्मद ज़ुबैर

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, मोहम्मद ज़ुबैर

शनिवार को अदालत में ज़मानत याचिका पर हुई बहस

दिल्ली पुलिस की ओर से सीनियर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अतुल श्रीवास्तव ने कोर्ट से ज़ुबैर के लिए 14 दिन की न्यायिक हिरासत की मांग की.

वहीं, ज़ुबैर की ओर से दलील रख रहीं वकील वृंदा ग्रोवर ने जमानत याचिका दाखिल की जिसे कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया और उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का फ़ैसला सुनाया.

सरकारी वकील अतुल श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में कुछ नए तथ्य रिकॉर्ड पर आए हैं. इसलिए पुलिस ने अभियुक्त ज़ुबैर के ख़िलाफ़ कुछ नई धाराएं लगाई हैं. ज़ुबैर के ख़िलाफ़ आईपीसी की 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 201 (सबूत मिटाना) और फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट की धारा 35 भी लगाई है.

अतुल श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि हमने ज़ुबैर का लैपटॉप और मोबाइल ज़ब्त किया है. इनमें से भी कुछ चीज़ें मिली हैं. वृंदा ग्रोवर ने इस पर कड़ा विरोध किया. उन्होंने कहा कि ट्वीट साल 2018 के हैं जबकि जो फोन वो इस्तेमाल कर रहे हैं, वो अलग है. उन्होंने कहा कि ज़ुबैर ने ट्वीट से इनकार नहीं किया है. उन्हें इसे लेकर ट्विटर को कहना चाहिए कि वो इसे वेरिफ़ाई करें.

वृंदा ग्रोवर ने कहा, "दिल्ली पुलिस ने लैपटॉप और मोबाइल फोन ज़ब्त किया है लेकिन इससे उनके ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं मिले हैं. इस मामले में वो उनका अपराध सिद्ध करने में भी नाकाम रहे हैं. दिल्ली पुलिस सिर्फ़ इस मामले में अनावश्यक देर करने की कोशिश कर रही है."

मोहम्मद ज़ुबैर

इमेज स्रोत, ANI

सिम कार्ड और फ़ोन बदलने का आरोप

वृंदा ग्रोवर ने कहा कि दिल्ली पुलिस उनके ख़िलाफ़ अपनी मनगढ़ंत कहानी को आगे बढ़ाने के लिए ग़ैरक़ानूनी तरीके से कार्रवाई कर रही है. उन्होंने कहा, "अपराध साबित करने के लिए रिकॉर्ड पर कोई सामग्री या सबूत नहीं है."

दिल्ली पुलिस ने कहा कि इस मामले में जांच जारी है. ज़ुबैर ने पाकिस्तान और सीरिया समेत कई देशों से कथित तौर पर विदेशी फंड हासिल किए हैं. इसलिए उनके ख़िलाफ़ एफ़सीआरए की धारा 35 लगाई गई है.

श्रीवास्तव ने कहा कि जब ज़ुबैर दिल्ली पुलिस के बुलाने पर पूछताछ के लिए आए तब उन्होंने बताया कि वो उस दिन के पहले तक दूसरा सिम कार्ड और फ़ोन इस्तेमाल कर रहे थे, जिसे उन्होंने दिल्ली पुलिस को दिखाया. नोटिस मिलने के बाद उन्होंने वो सिम फेंक दिया और दूसरे फ़ोन में लगाया. इस शख्स को देखिए वो कितने चालाक हैं.

इस पर वृंदा ग्रोवर ने सवाल किया कि एक व्यक्ति का सिम या फ़ोन बदलना कोई अपराध है? फ़ोन को रिफ़ॉर्मेट करना कोई अपराध है? क्या चतुर होना कोई जुर्म है? ये सब आईपीसी या किसी और धारा के तहत किसी अपराध की श्रेणी में नहीं आता है. आप हो सकता है कि किसी व्यक्ति को पसंद न करते हों. ये ठीक है लेकिन आप (उनके ख़िलाफ़) किसी तरह विद्वेषपूर्ण या ग़लत बयान नहीं दे सकते हैं.

मोहम्मद ज़ुबैर

इमेज स्रोत, ANI

मोहम्मद ज़ुबैर की वकील ने क्या कहा

वृंदा ग्रोवर ने कहा कि दिल्ली पुलिस उन्हें ऐसे फँसाना चाहती है जहां से निकलने का कोई रास्ता न हो. उन्होंने कहा,"इस देश में आप उन्हें झूठे मामले में नहीं फंसा सकते हैं. कोर्ट को निष्पक्षता की रक्षा करनी होगी. वो पहले ही पांच दिन की पुलिस हिरासत में रहे हैं. उन्होंने सभी नोटिसों का जवाब दिया है. अब उनकी ज़रूरत नहीं है. वो (पुलिस) ख़ुद उन्हें (ज़ुबैर को) न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग कर रहे हैं."

दिल्ली पुलिस के वकील श्रीवास्तव ने कहा कि अभियुक्त की कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड्स (सीडीआर) की जांच से प्रथम दृष्टया ये पाया गया कि उन्होंने कथित तौर पर रेज़र गेटवे के ज़रिए पाकिस्तान और सीरिया से फंड हासिल किए हैं. ऐसे मामले (पैसे के लेनदेन) में उनका अपराध साबित करने के लिए जांच किए जाने की ज़रूरत है.

वृंदा ग्रोवर ने ज़मानत दिए जाने की मांग करते हुए कहा, "मोहम्मद ज़ुबैर एक युवा पत्रकार और फैक्ट चेक करने वाले व्यक्ति हैं. वो ऐसे नागरिक हैं जिन पर हम सभी को गर्व करना चाहिए और उन्हें ज़मानत पर छोड़ा जाना चाहिए. "

वृंदा ग्रोवर ने कहा कि उन्होंने सबूत के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की है और उनके ख़िलाफ आईपीसी की धारा 201 लगाए जाने को ग़लत बताया. उन्होंने कहा, "वो निर्दोष व्यक्ति हैं. वो पत्रकार हैं और ज़िम्मेदार व्यक्ति हैं. इसलिए कृपया उन्हें जमानत पर रिहा करें. सब कुछ दिल्ली पुलिस की आंखों के सामने है. वो पांच दिन से दिल्ली पुलिस की हिरासत में हैं."

छोड़िए YouTube पोस्ट
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त

'जांच एजेंसियों के साथ असहयोग'

वहीं, अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि वृंदा ग्रोवर सिर्फ़ अपनी कही बातों को दोहरा रही हैं. उन्होंने कहा, "ज़ुबैर इस मामले में जांच एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं. कोर्ट को उनकी जमानत याचिका ख़ारिज कर देनी चाहिए. "

श्रीवास्तव ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 41 के तहत पुलिस को अधिकार दिया गया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी केस में अपनी भूमिका को लेकर जांच एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं कर रहा है तो उसे गिरफ़्तार किया जा सकता है. उन्होंने पाकिस्तान और सीरिया से विदेशी फंड क्यों और कब हासिल किए, इस बारे में जांच की जानी है.

वृंदा ग्रोवर की दलील को लेकर श्रीवास्तव ने कहा, "ये कहना कि वो एक युवा पत्रकार हैं और हमें उन पर गर्व होने चाहिए तो मुझे कोर्ट से ये कहना है कि ज़ुबैर का अभियान और गतिविधियां संदिग्ध हैं. उन्हें विदेश से फंड या दान मिल रहे हैं, इसकी जांच होनी ज़रूरी है. इसलिए कोर्ट को उन्हें ज़मानत नहीं देनी चाहिए."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)