You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
क्या बीजेपी ने देवेंद्र फडणवीस को उप-मुख्यमंत्री बनाकर उनके पर कतर दिए?
- Author, नीलेश धोत्रे
- पदनाम, बीबीसी मराठी सेवा
महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कई दिनों से जारी सियासी संग्राम में गुरुवार शाम जो कुछ हुआ है, उसके बाद तमाम राजनीतिक विश्लेषक अचरज में पड़ गए हैं.
महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने पहले एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र का नया मुख्यमंत्री बनाने का एलान किया.
इसके साथ ही उन्होंने ये भी बता दिया कि वह सरकार में शामिल नहीं होंगे.
फडणवीस के इस फ़ैसले ने भी राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया था. लेकिन इसके कुछ देर बाद जो कुछ हुआ, वो और ज़्यादा चौंकाने वाला था.
शाम लगभग साढ़े सात बजे एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री बनने के साथ-साथ फडणवीस ने उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली.
अपने यूटर्न पर क्या बोले फडणवीस
फडणवीस ने इस बारे में एक ट्वीट करके अपना पक्ष रखने की कोशिश की है.
उन्होंने लिखा है, "एक ईमानदार कार्यकर्ता होने के नाते मैं पार्टी के आदेशों का पालन करता हूं. मैं उस पार्टी के आदेशों से ऊपर नहीं हूं जिसने मुझे सर्वोच्च स्थान दिया."
बता दें कि उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने से महज तीन घंटे पहले उन्होंने राजभवन से घोषणा की थी कि वह सरकार में शामिल नहीं होंगे. लेकिन इसके बाद बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने उनसे अलग फ़ैसला लिया.
फडणवीस के सरकार में शामिल नहीं होने की घोषणा के तुरंत बाद बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट कर लिखा कि, "भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने फ़ैसला किया है कि भाजपा को सरकार का हिस्सा होना चाहिए. इसलिए हमने उनसे देवेंद्र फडणवीस को उप-मुख्यमंत्री बनाने का अनुरोध किया है."
इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर लिखा कि, 'देवेंद्र फडणवीस ने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की सलाह पर सरकार में शामिल होने का फ़ैसला किया है. यह महाराष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा और सेवा भाव को दर्शाता है.'दिलचस्प यह है कि शपथ ग्रहण समारोह से महज आधे घंटे पहले बीजेपी अध्यक्ष ने ट्वीट कर देवेंद्र फडणवीस को कैबिनेट में शामिल होने का आदेश दिया.बीबीसी मराठी ने जब इसकी वजहों के बारे में न्यूज-18 के मुंबई ब्यूरो प्रमुख विनय देशपांडे से पूछा तो उन्होंने कहा, "बीजेपी जैसी पार्टी इस तरह काम नहीं करती. बीजेपी में सारे फ़ैसले बंद दरवाजे़ में होते हैं और फिर नेता आगे आकर उनकी घोषणा करते हैं."
फडणवीस के पर कतरने की कोशिश?
वहीं, नागपुर से प्रकाशित मराठी दैनिक लोकमत के कार्यकारी संपादक श्रीमंत माने का कहना है कि यह देवेंद्र फडणवीस के क़द को कमतर करने जैसा है.
वे कहते हैं, ''यह फडणवीस के पंख कतरने की कोशिश है. फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की दौड़ से हटने के बारे में कह कर अपनी छवि को बेहतर किया लेकिन शायद केंद्रीय नेतृत्व को यह पसंद नहीं आया."
बीबीसी मराठी ने वरिष्ठ पत्रकार दीपक भातूसे से पूछा कि नड्डा के मीडिया में आने और इसकी घोषणा करने का क्या मतलब है.
उन्होंने कहा, "फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की थी कि वह सरकार में शामिल नहीं होंगे. उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस की ख़बर पूरे देश में फैल गई. हर जगह यही संदेश गया कि फडणवीस कैबिनेट में नहीं होंगे. इसलिए केंद्रीय नेतृत्व को मीडिया में आना पड़ा. केंद्रीय नेतृत्व ने फडणवीस से फोन पर बात की होगी, उन्हें सरकार में शामिल होने के लिए कहा होगा."
लेकिन दीपक भातूसे उस सवाल की ओर इशारा करते हैं जो अभी देश में हर नागरिक के जे़हन में है.
वे कहते हैं, "लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और फडणवीस के बीच कोई तालमेल नहीं है? फडणवीस सरकार में शामिल नहीं होने का इतना बड़ा फ़ैसला ले रहे हैं और उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व को इसके बारे में सूचित क्यों नहीं किया, यह भी एक बड़ा सवाल है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)