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कर्नाटक: मंदिर में मुस्लिम केला व्यापारी को लेकर क्यों हुआ विवाद?
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बंगलुरू से, बीबीसी हिंदी के लिए
कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ ज़िले में मुसलमान व्यापारियों के मंदिर में होने वाले त्योहारों में हिस्सा न लेने देने को लेकर चले अभियान के बाद अब वहां एक नई मांग उठ रही है.
कुछ हिंदू संगठनों ने मांग की है कि मंदिर में केले की सप्लाई करने वाले व्यापारी मुसलमान हैं, इसलिए उनका लाइसेंस रद्द होना चाहिए.
मंगलुरू शहर से क़रीब दस किलोमीटर दूर कोडुपू में मौजूद श्री अनन्तपद्मनाभ मंदिर ने टेंडर में सबसे कम क़ीमत बताने वाले एक मुसलमान व्यापारी को मंदिर में केले की सप्लाई का ठेका दिया है. अब कुछ हिंदू संगठनों ने इसका विरोध किया है और इसे रद्द करने की मांग की है.
लेकिन ज़िला प्रशासन ने साफ़ कर दिया है कि ये कॉन्ट्रैक्ट 30 जून तक ही मान्य है इसलिए इसे रद्द नहीं किया जा सकता.
बजरंग दल के जिला अध्यक्ष शरन पंपवेल ने बीबीसी हिंदी को बताया, "हिंदू संगठनों ने मंदिर समिति को कहा है कि इस तरह के ठेके केवल हिंदू व्यापारियों को दिया जाना चाहिए, किसी और समुदाय के व्यापारी को नहीं देना चाहिए."
लेकिन शरन पंपवेल ने कहा, "ज़िला प्रशासन ने कहा है कि ये पिछले साल दिया गया कॉन्ट्रैक्ट है जो कुछ ही दिनों में यानी 30 जून को ख़त्म हो जाएगा. हमने ये फ़ैसला किया है कि हम उसके ख़त्म होने का इंतज़ार करेंगे."
हालांकि इस मामले में ज़िला प्रशासन ने कर्नाटक ट्रांसपेरेंसी एंड पब्लिक प्रोक्योरमेन्ट ऐक्ट (केटीपीपीए, कर्नाटक पारदर्शिता और सार्वजनिक खरीद क़ानून) और कर्नाटक हिंदू रीलिजियस इंस्टीट्यूट एंड एन्डाओमेन्ट एक्ट (कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और बंदोबस्ती क़ानून) का हवाला देते हुए कहा है कि नियमों का पालन करना होगा.
दक्षिण कन्नड़ ज़िले के डिप्टी कमिश्नर डॉक्टर केवी राजेन्द्र ने बीबीसी को बताया, "केटीपीपीए के अनुसार किसी भी व्यापारी को कॉन्ट्रेक्ट पाने से रोका नहीं जा सकता. एन्डाओमेन्ट एक्ट में इस तरह की व्यवस्था है कि हिंदू मंदिर के परिसर में केवल हिंदुओं को ही जगह दी जानी चाहिए."
उन्होंने कहा, "ये दोनों अलग-अलग क़ानून हैं. कोई भी ऐसा कॉन्ट्रेक्ट देने से मना नहीं कर सकता जिसमें सबसे कम क़ीमत बताई गई हो. केवल ये बात देखने की ज़रूरत होती है कि कॉन्ट्रैक्ट में ये लिखा हो कि व्यापारी स्थानीय धार्मिक मान्यताओं का पूरा सम्मान करेंगे."
वो कहते हैं कि व्यापारियों के मामले में "हम स्पष्टीकरण जारी कर सकते हैं. अगर कोई मुसलमान व्यापारी है भी तो उन्हें भी सप्लाई का ठेका दिया जा सकता है लेकिन उन्हें स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना होगा."
हिजाब विवाद से शुरू हुआ मामला?
डॉक्टर केवी राजेन्द्र कहते हैं, "अगर सामान को मंदिर के गर्भगृह तक ले जाना हो तो इसके लिए मंदिर स्थानीय स्तर पर हिंदू व्यक्ति को काम पर लगा सकता है."
उन्होंने कहा कि केटीपीपीए के अनुसार कुछ मानक दिशानिर्देश भी हैं. इसके अनुसार अगर कोई इससे जुड़ा मुद्दा उठाना चाहता है तो वो अपील कर सकता है जो अपने किसी अफ़सर को इससे जुड़े निर्देश दे सकता है.
दक्षिण कन्नड़ और उडुपी के समुद्रतटीय ज़िले इस साल जनवरी से ही विवादों में रहे हैं, जब यहां हिजाब को लेकर विवाद पैदा हुआ था.
इस मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है. कोर्ट के इस आदेश के बाद वहां के मुसलमान समुदाय से जुड़े धार्मिक नेताओं ने मुसलमानों ने इस फ़ैसले का विरोध करने की बजाय इस पर दुख जताने का फ़ैसला किया और वहां के मुसलमानों से अपील की कि वो अपनी दुकानें बंद रखें.
इसके बाद हिंदू संगठनों ने यहां अभियान चलाया कि हिंदू मंदिरों के त्योहारों में मुसलमानों को अस्थायी दुकानें ना खोलने दी जाएं.
इस अभियान की आंच मंगलुरू से 22 किलोमीटर दूर बप्पानाडु दुर्गापरमेश्वरी मंदिर कर भी पहुंची. इस मंदिर को बप्पा नाम के एक मुसलमान व्यक्ति ने बनाया था.
कहा जाता है कि एक बार बप्पा के सपने में देवी प्रकट हुई और उन्होंने बप्पा को एक मंदिर बनाने के लिए कहा. हिंदू और मुसलमान दोनों समुदाय के लोग इस मंदिर में पूजा अर्चना के लिए आते हैं.
मंदिर समिति ने मंदिर में मुसलमान व्यापारियों के काम करने और आने पर कोई रोक नहीं लगाई है, लेकिन स्थानीय हिंदू संगठनों ने मंदिर के बाहर इस तरह के पोस्टर लगाए थे.
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