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सिद्धू मूसेवाला के नए गाने SYL में क्या है?
जानेमाने गायक और कांग्रेस नेता सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद उनका आख़िरी गाना एसवाईएल (SYL) यूट्यूब पर गुरुवार को रिलीज़ किया गया.
ख़बर लिखे जाने तक इस गाने को यूट्यूब पर 1.8 करोड़ बार देखा जा चुका है. यह गाना अपने बोल और उठाए गए मुद्दों की वजह से चर्चा में है.
बीबीसी पंजाबी सेवा ने इस गीत के कुछ अंशों को समझने की कोशिश की है जिनके ज़रिए पंजाब से जुड़े कुछ वाकयों का ज़िक्र किया गया है.
SYL नहर
पंजाब और हरियाणा के बीच जल के बंटवारे के लिए सतलुज-यमुना लिंक नहर यानी एसवाईएल का निर्माण किया जाना था.
भाखड़ा बांध का पानी हरियाणा की यमुना नदी तक पहुंचने के लिए इसका निर्माण होना था, लेकिन नहर बनने से पहले ही यह मामला विवादों में उलझ गया.
1976 में आपातकाल के दौरान केंद्र सरकार ने दोनों राज्यों को 35 लाख-35 लाख एकड़ फ़ीट पानी देने के बारे की अधिसूचना जारी की थी. इसमें दो लाख एकड़ फ़ीट पानी दिल्ली को भी दिया जाना था.
सतलुज-यमुना नहर की कुल लंबाई 214 किलोमीटर है, जिसमें से 122 किलोमीटर का काम पंजाब को पूरा करना था और 92 किलोमीटर की नहर हरियाणा को बनानी थी.
हरियाणा अपने हिस्से की नहर का निर्माण कर चुका है जबकि पंजाब में यह काम अभी अधूरा है.
नहर के काम को लेकर क़रीब पांच दशक से विवाद है और दोनों राज्यों की अलग-अलग सरकारों ने अदालतों में पानी को लेकर अपना-अपना पक्ष रखा है.
सुशील गुप्ता का बयान
सुशील गुप्ता आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य हैं. अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़, उन्होंने इस साल अप्रैल में बयान दिया था कि अगर हरियाणा में उनकी पार्टी सत्ता में आई तो यमुना और सतलुज को जोड़ने वाली नहर का काम पूरा हो जाएगा और उस नहर का पानी हरियाणा के हर एक खेत में पहुंच जाएगा.
सिद्धू मूसेवाला के गाने की शुरुआत सुशील गुप्ता के इसी बयान से होती है.
गुप्ता ने अपने बयान में कहा था, "2025 तक एसवाईएल का पानी हरियाणा के खेतों तक पहुंच जाएगा. यह हमारा वादा नहीं है बल्कि हमारी गारंटी है."
सोवरेनिटी
सिद्धू मूसेवाला अपने गीत में कहते हैं, "जब तक तुम हमें सोवरेनिटी की राह नहीं देते, तब तक पानी की बात को छोड़ दीजिए, एक बूंद भी नहीं देंगे."
सोवरेनिटी का अर्थ है संप्रभुता और राजनीति में संप्रभुता एक स्वतंत्र देश की विशेषता होती है.
किसी देश को तभी स्वतंत्र माना जाता है जब उसकी सरकार किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में होती है जो उस क्षेत्र में बाहरी दबाव से स्वतंत्र रूप से शासित होती है.
बंदी सिखों की रिहाई
इस गीत में सिद्धू मूसेवाला 1980 के दशक में पंजाब में शुरू हुए उग्रवाद के दौरान हिंसक और आतंकवादी गतिविधियों के आरोपों में जेलों में बंद खालिस्तान समर्थक कैदियों के बारे में बात करते है.
इन्हें पंजाब में बंदी सिख भी कहा जाता है. गाने में सिद्धू मूसेवाला ने उनकी रिहाई की मांग की है. बंदी सिखों में कई 25 से 30 साल से अधिक समय की सज़ा के तहत जेलों में बंद हैं.
भारत सरकार ने 2019 में इन सिखों में से आठ को रिहा करने की घोषणा की थी लेकिन मामला अभी भी लंबित है. ये बंदी सिख हैं-
- जगतार सिंह हवारा, जो पंजाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहे हैं. बेअंत सिंह की हत्या साल 1995 में पंजाब सिविल सेक्रेटेरियट के बाहर एक बम विस्फोट में हो गई थी. इस बम विस्फोट में 17 लोगों की मौत हुई थी.
- दविंदरपाल सिंह भुल्लर 1995 से जेल में हैं. वह 1993 में दिल्ली युवा कांग्रेस मुख्यालय के बाहर हुए विस्फोट के मुख्य आरोपी हैं. इस घटना में नौ लोगों की मौत हुई थी.
- गुरदीप सिंह खैरा भी 1995 से जेल में बंद है. भारत सरकार की अधिसूचना में शामिल खैरा ने सबसे अधिक समय जेल में बिताया है. 2001 में एक निचली अदालत ने उन्हें मौत की सज़ा सुनाई थी, जिसे बाद में 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दिया था.
- बलवंत सिंह राजोआना पंजाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले के मुख्य आरोपी हैं. दोषी मानते हुए उन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई थी.
- लखविंदर सिंह, गुरमीत सिंह और शमशेर सिंह को भी 25 साल से अधिक की सज़ा सुनाई गई थधी. तीनों 2013 से पैरोल पर जेल से बाहर हैं.
- बेअंत सिंह हत्याकांड में जगतार सिंह तारा ने अपनी भूमिका लिखित रूप में स्वीकार कर ली थी.
लाल किले पर निशान साहिब फहराने की घटना
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि क़ानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर पंजाब हरियाणा समेत देश के कई राज्यों के किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर धरना दिया था.
इसी बीच 26 जनवरी को किसानों नें ट्रैक्टर परेड निकाली. इस दौरान दिल्ली के लाल किले पर कुछ युवकों ने एक खाली खंभे पर निशान साहिब लगा दिया था.
सिद्धू मूसेवाला ने इस घटना का ज़िक्र भी अपने आख़िरी गाने में किया है.
गौरतलब है कि घटना के बाद पंजाबी गायक बब्बू मान ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा था कि वह अपने माता-पिता की मौत के बाद भी उतना नहीं रोए थे जितना इस घटना के बाद रोये हैं.
साल भर से अधिक वक्त तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद आख़िरकार सरकार ने तीनों कृषि क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा की.
बलविंदर जटाना
गाने के आख़िरी बोल में सिद्धू मूसेवाला ने गांव जटाना के बलविंदर सिंह का ज़िक्र किया है.
बलविंदर सिंह की पृष्ठभूमि पंजाब के रोपड़ जिले के चमकौर साहिब से थी. चूंकि उनके गांव का नाम जटाना था, इसलिए उन्हें खालिस्तानी आंदोलन के उग्रवादी सफों में बलविंदर सिंह जटाना के नाम से जाना जाने लगा.
1990 में, उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर चंडीगढ़ के सेक्टर 26 में एसवाईएल के कार्यालय में इस नहर के निर्माण प्रोजेक्ट में शामिल चीफ़ इंजीनियर एमएस सीकरी और सुपरिटेन्डेंट अवतार सिंह औलख पर गोलियां चलाई.
घटना में दोनों की मौत हो गई और नहर का निर्माण कार्य रोक दिया गया था.
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