अग्निपथ को उपसेनाध्यक्ष ने बताया पायलट प्रोजेक्ट, बदलावों पर भी बोले- प्रेस रिव्यू

बीएस राजू

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उपसेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा है कि अग्निपथ भर्ती योजना को अच्छी तरह से सोच-विचार कर ही शुरू किया गया और यदि इसमें किसी बदलाव की ज़रूरत पड़ेगी तो चार साल बाद किए जाएंगे. प्रेस रिव्यू में सबसे पहले यही पढ़िए.

थल सेना ने सोमवार को ही अग्निपथ स्कीम के ज़रिए भर्ती के लिए अनिवार्य पंजीकरण के लिए अधिसूचना जारी की है. इस पर आर्मी के वाइस चीफ़ बीएस राजू कहते हैं, "अग्निपथ योजना एक पायलट प्रोजेक्ट है. अग्निपथ सशस्त्र बलों में भर्ती की प्रक्रिया में मौलिक परिवर्तन का प्रतीक है और सभी इस बदलाव को स्वीकार करना चाहिए."

बीएस राजू ने ये बयान देशभर में अग्निपथ योजना के ख़िलाफ़ हो रहे हिंसक प्रदर्शनों के बाद दिया है. साल 2020 से सेना में भर्ती का सपना देखने वाले युवा सड़कों पर हैं. युवाओं का कहना है कि चार साल सेवा देने के बावजूद इस स्कीम से स्थायी नौकरी नहीं मिलेगी और न ही पेंशन, स्वास्थ्य सेवाएं.

बीएस राजू ने कहा, "अगर बदलाव की ज़रूरत पड़ी तो भर्ती का तरीक़ा, रिटेंशन-एक्सटेंशन मिलने वाले जवानों की संख्या या ऐसा कुछ भी...एक बार हमारे पास विश्वसनीय आंकड़े आ जाएं तो इनमें चार से पाँच साल बाद बदलाव किए जा सकते हैं. फिलहाल, हमारे पास एक योजना है, जिस पर अच्छे से सोच-विचार किया गया है और जिसे हम लागू कर रहे हैं."

ये पूछे जाने पर कि योजना लाने से पहले सेना पायलट प्रोजेक्ट क्यों नहीं लाई, उन्होंने कहा, "हम जो कर रहे हैं, वो असल में पायलट प्रोजेक्ट है. जिस दर के साथ ये हो रहा है, उसमें हां, ये एक पायलट प्रोजेक्ट माना जा सकता है. हमने इसे पायलट प्रोजेक्ट नहीं माना होगा. लेकिन, ये एक वर्क इन प्रोग्रेस है. इसलिए हम जो कर रहे हैं, वो पायलट प्रोजेक्ट की तरह ही है लेकिन हमारे सामने स्पष्ट टाइमलाइन है. सरकार ने बार-बार कहा है कि वे हमारे अनुभवों के आधार पर संशोधनों के लिए तैयार है."

उन्होंने कहा कि अभी वो ये अनुमान नहीं लगा सकते कि क्या बदलाव होंगे. "इस योजना को लेकर हमारे अनुभवों के आधार पर चार या पाँच साल बाद बदलाव लाए जाएंगे. ये बदलाव किसी भी मोर्चे पर हो सकते हैं."

राजू ने कहा, "रेजिमेंट में बदलाव बहुत धीमे होगा और समरूप इकाइयों को तुरंत खत्म करने की कोई योजना नहीं है. हम इसमें बदलाव को लेकर हड़बड़ी में नहीं है."

इस योजना की आलोचना में कहा जा रहा है कि 'ऑल इंडिया, ऑल क्लास' भर्तियों से सैन्य टुकड़ियों की एकता प्रभावित होगी, जो कि अब तक सैन्यकर्मियों में समरूपता बनी हुई थी.

योजना के एलान के तुरंत बाद इसमें बदलावों की घोषणा को लेकर ये माना जा रहा है कि इसे बिना सोचे-समझे ही लागू कर दिया गया. योजना के एलान के बाद विरोध को देखते हुए ये घोषणा की गई थी कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में अग्निवीरों को 10 फ़ीसदी, कोस्ट गार्ड और डिफ़ेंस पीएसयू में 10 फ़ीसदी का आरक्षण मिलेगा. इसके अलावा केवल इस बार अधिकतम आयु सीमा में भी दो साल की रियायत दी जाएगी.

अग्निपथ विरोध प्रदर्शन

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उन्होंने इस पर कहा, "मैं इस तर्क से सहमत नहीं हूं क्योंकि सिवाय अधिकतम आयु को 21 से 23 साल करने के अलावा, बाक़ी सभी प्रस्ताव हमें अलग-अलग स्रोतों से इस योजना को मज़बूती देने के मक़सद से मिले थे. तो ये कुछ ऐसी सुविधाएं हैं जिन्हें देने के बारे में सरकार ने पहले ही सोचा था."

राजू ने कहा, "11.71 लाख रुपये टैक्स की छूट के साथ मिलेंगे. इसके साथ ही उन्हें चार साल की नौकरी में भी 11.72 लाख रुपये वेतन के तौर पर दिए जाएंगे. इसका मतलब है कि सेना में आने वाले एक 18 साल के युवा को चार साल बाद वापसी के समय 24 लाख रुपये मिलेंगे."

उन्होंने कहा, "इन सबके बाद हमने सोचा...और हम अब भी मानते हैं कि चार साल बाद एक युवा को सेना से निकलकर बाहर कई मौक़े मिलेंगे. ये योजना ऐसी बनाई गई है कि चार साल बाद उन्हें पेंशन नहीं मिलेगी, ऐसी बनाई गई है ताकि उन्हें अधिक क्षमतावान युवा बनाया जाए. ये एक युवा को चार साल के लिए देश की सेवा करने का मौक़ा देने और फिर यहाँ से निकलकर कुछ और करने देने के लिए बनाई गई योजना है. ये अपने अंत नहीं है. "

कश्मीरी पंडितों ने एलजी से लिखित में मांगी सुरक्षा की गारंटी

कश्मीरी पंडित

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प्रधानमंत्री विशेष पैकेज के तहत भर्ती किए गए कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मांग की है कि वो लिखित में ये आश्वासन दें कि भविष्य में किसी भी पंडित की हत्या नहीं होगी. कश्मीरी पंडितों का कहना है कि वो लिखित आश्वासन मिलने पर ही दोबारा नौकरी पर लौटेंगे.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू की ख़बर के अनुसार, मई महीने में लगातार निशाना बनाकर की गई हत्याओं के बाद बीते 32 दिनों से कोई भी कश्मीरी पंडित अपने काम पर नहीं लौटा है.

कश्मीरी पंडित कर्मचारी और ऑल माइनॉरिटी एंप्लाइज़ एसोसिएशन कश्मीर (एएमईएके) के सदस्य अजय ने अख़बार से कहा, "जब तक एलजी हमें लिखित में ये नहीं दे देते कि अब किसी अल्पसंख्यक की हत्या नहीं होगी, हम वापस दफ़्तरों में नहीं लौटेंगे. कश्मीर बहुत असुरक्षित है और ख़बरों में रहने के लिए चरमपंथी हमें मारने के लिए सड़कों पर हैं. उनके लिए, हम सिर्फ़ नंबर हैं. हम ख़बर नहीं बनना चाहते. हम अपने परिवार और बच्चों की सुरक्षा चाहते हैं. "

बडगाम के शेखपुरा में प्रवासी कॉलोनी के कई कश्मीरी पंडितों ने धरना प्रदर्शन किया. एक महीने पहले इसी कॉलोनी के निवासी राहुल भट को चरमपंथियों ने उनके ऑफ़िस में मार दिया था. इसके बाद से अब तक 5 हज़ार 400 पंडित कर्मचारियों ने घाटी में अपने दफ़्तरों में काम पर जाना छोड़ दिया. सैकड़ों कर्मचारी सुरक्षित ठिकाने की तलाश में हिंदू-बहुल जम्मू में शिफ़्ट हो चुके हैं.

दक्षिण कश्मीर की माइग्रेंट कॉलोनी में रहने वाले संजय कहते हैं, "एलजी ने हमसे बात की थी. लेकिन सारे मसले एक ही बैठक में नहीं सुलझाए जा सकते हैं. हमारी मांग है कि जब तक स्थिति नहीं सुधरती हमें रिलीफ़ कमिश्नर के ऑफ़िस में भेज दिया जाएगा."

सोमवार को अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस के मौके पर सैकड़ों पंडितों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने कहा, "हम अपने ही देश में शरणार्थी बन गए हैं. जब तक पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित नहीं किया जाता, तब तक आतंकवाद नहीं रुकेगा."

अग्निवीर के ख़िलाफ़ प्रदर्शन से एक हज़ार करोड़ रुपये की संपत्ति तबाह

अग्निपथ विरोध प्रदर्शन

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हिंदी अख़बार दैनिक भास्कर की ख़बर के अनुसार अग्निवीर योजना पर देश के कई हिस्सों में भारी प्रदर्शन से चार दिनों के अंदर रेलवे की संपत्ति और यात्रियों के रिफंड को मिलाकर कुल एक हज़ार करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान की आशंका है.

इसके अलावा 12 लाख़ लोगों को यात्रा भी रद्द करनी पड़ी. इस दौरान 922 मेल एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द हुईं और 120 मेल ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द हुईं.

अख़बार ने बताया है कि डेढ़ लाख़ यात्रियों को बीच रास्ते में ट्रेन छोड़नी पड़ी. पाँच लाख़ से अधिक पीएनआर रद्द हुए. करीब 70 करोड़ रुपये का यात्रियों को रिफंड दिया गया. पूर्व मध्य रेल ज़ोन को 241 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ.

ख़बर के अनुसार ग्निपथ योजना को लेकर विरोध प्रदर्शन 19 राज्यों तक पहुंच चुका है. इस दौरान यूपी-बिहार में सार्वजनिक संपत्ति को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाया गया. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2020 की रिपोर्ट देखें तो ऐसे मामलों में 28 फ़ीसदी तक की कमी आई थी, लेकिन यूपी-बिहार समेत 6 राज्यों में केस बढ़े थे. केस की संख्या में उत्तर प्रदेश (2217) सबसे ऊपर है. तमिलनाडु (668) दूसरे नंबर पर है.

रिपोर्ट के मुताबिक़, चार दिनों में देश भर में 922 मेल एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द हुई हैं,यदि एक पीएनआर पर 3 यात्री मानें तो कुल 5 लाख से ज्यादा के पीएनआर रद्द हुए हैं, हर ट्रेन में औसतन 1200 से 1500 तक यात्री चलते हैं, जिससे करीब 12 लाख की यात्रा रद्द हुई. रेल मंत्रालय ने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि एक यात्री का किराया कम से कम 600 रुपये मानें तो कुल 70 करोड़ का रिफंड लौटाया जा रहा है. इसमें एसी, सेकंड एसी और फर्स्ट एसी के किराया को शामिल करें तो रिफंड 100 करोड़ का होगा.

827 पैसेंजर ट्रेनें रद्द रही. 120 मेल एक्सप्रेस ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द रहीं, जिससे करीब डेढ़ लाख यात्रियों को बीच में ही ट्रेन छोड़कर यात्रा रद्द करनी पड़ी.मेल एक्सप्रेस 24 कोच की होती है. इंजन 12 करोड़ रु. का है. एसी कोच ढाई करोड़, स्लीपर जनरल कोच 2 करोड़ रुपये का होता है. एक ट्रेन 30 करोड़ रुपये की पड़ती है. विरोध में 21 ट्रेनें अलग-अलग जगह जलाई गईं.

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