अग्निपथ योजना अगर सोच-समझकर लाई गई तो सरकार नए एलान क्यों कर रही है

    • Author, मानसी दाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

'अग्निपथ योजना' की घोषणा के बाद से एक तरफ जहाँ युवाओं का विरोध नज़र आया, वहीं दूसरी तरफ़ सरकार ने उन्हें भरोसा देते हुए नए एलान करती नज़र आ रही है.

सरकार ने उन्हें ये भरोसा दिला रही है कि चार साल की सेवा ख़त्म होने के बाद भी उन्हें अर्धसैनिक बलों जैसी कई दूसरी सरकारी नौकरियों में प्रथमिकता मिलेगी और उनके लिए ख़ास आरक्षण भी होगा.

यहाँ ये सवाल उठता है कि अगर अग्निवीरों के लिए दूसरी नौकरियों में 10 फ़ीसदी तक का लिए रिज़र्व करना ही था तो इसके बारे में योजना की घोषणा करते वक्त ही क्यों नहीं बताया गया? कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार ने जल्दबाज़ी में इसका एलान कर दिया और फिर विरोध को देखने के बाद थोड़ा नरम रुख़ अख्तियार किया है.

वरिष्ठ पत्रकार अदिति फड़णिस कहती हैं, "मुझे नहीं लगता कि सरकार ने इस योजना की घोषणा को लेकर कोई हड़बड़ी की, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार को ये उम्मीद नहीं थी कि इसकी इतनी भीषण विरोध होगा. आश्चर्य ये है कि सरकार ने पहले इसके बारे में क्यों नहीं सोचा."

वो कहती हैं, " देश में सेना का सम्मान किसी और नौकरी की अपेक्षा अधिक है, युवा मानते हैं कि मेहनत कर के अगर उन्हें एक बार सेना में नौकरी मिल गई तो उनका जीवन पूरी तरह संभल जाएगा. युवा मानते हैं कि ये उन्हें केवल जीवन बिताने का आर्थिक साधन ही नहीं है ये उन्हें समाज में भी सम्मान और स्थान भी देता है. इसलिए इसे लेकर युवाओं की नाराज़गी समझ आती है."

लेकिन योजना की घोषणा के बाद किश्तों में पहले आयु सीमा बढ़ाने की बात और फिर अलग-अलग सेवाओं में भर्तियों में 10 फीसदी आरक्षण का एलान करने से युवाओं को मनाने की कोशिश कामयाब हो सकेगी.

अदिति फड़णिस कहती हैं, " मुझे नहीं लगता कि इन चीज़ों से लोग मानेंगे क्योंकि ये स्थिति संभालने की कोशिश लगती है. युवाओं को जो अपेक्षा है, ऐसा नहीं लगती कि वो इन घोषणाओं से संतुष्ट होंगे."

वो कहती हैं, "दूसरी बात ये कि सरकार ये इसलिए कर रही है क्योंकि वो पेंशन बिल और सैलरी बिल बचाना चाहती है. इसे लेकर लोगों में नाराज़गी है क्योंकि एक तरफ सरकार कहती है कि फौज देश की रक्षा करती है और दूसरी तरफ युवाओं को अल्पावधि की नौकरी दी जा रही तै ताकि सरकार पैसे बचा सके. इसमें कोई शक नहीं कि सरकार पैसा बचाने की केशिश कर रही है."

सेना ने क्या कहा

लेकिन क्या विरोध प्रदर्शनों के तीव्र होने के बाद सरकार ने विभिन्न सरकारी सेवाओं में 10 फीसदी के आरक्षण की घोषणा की, क्या सरकार का रुख़ इस मामले में नरम पड़ने लगा. इसका जवाब मिला रविवार को सेना के तीनों अंगों ने आला अधिकारियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस में.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में लेफ़्टिनेंट जनरल अनिल पुरी ने कहा, "सेना में सुधारों की कवायद 1989 से ही चल रही थी, इस पर अलग-अलग वक्त में अमल किया जाता रहा है, लेकिन सेना की औसत उम्र कम करने के उद्देश्य से जवानों की भर्ती में बदलाव पहले नहीं किया जा सका. ये अब जाकर हो पाया है."

उन्होंने कहा, "सरकार के विभिन्न विभागों में अग्निवीरों के लिए रिज़र्वेशन के बारे में पहले ही योजना बनाई गई थी, हिंसा की घटनाओं के बाद ऐसी घोषणाएं की गई हैं ऐसा नहीं है."

'अटल नहीं होती योजनाएं'

मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में योजनाओं का एलान करने के बाद पहले भी बदलाव किए हैं. ताज़ा उदाहरण किसान आंदोलन का है जिसके बाद सरकार ने कृषि बिल वापस लेने की घोषणा की थी. उससे पहले भूमि अधिग्रहण बिल को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया था.

अदिति फड़णिस कहती हैं, "अगर बहुत अधिक विरोध होता है तो सरकार ने योजनाएं पहले भी वापस ली है. लेकिन इस बार स्थिति वैसी नहीं लगती क्योंकि बजट में सैलरी पेंशन 50 फीसदी से अधिक है और उसे कम करने का सरकार के पास यही रास्ता है कि वो नौकरियों में लोगों की संख्या कम करे या फिर उन्हें देने वाले पैसे कम करे."

"सरकार खुद भी कश्मकश में है क्योंकि वो ऐसा करना तो नहीं चाहती लेकिन ऐसा करने को वो बाध्य है. ये उसके लिए ऐसी स्थिति है जो न तो उगलते बन रही है न निगलते."

क्या कहता है बजट?

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार 2013-14 से लेकर 2022-23 तक भारत की जीडीपी में लगभग दोगुना (112 लाख करोड़ रूपये से 237 लाख करोड़ रूपये) बढ़ोतरी हुई है.

इस दौरान रक्षा बजट भी लगभग दोगुना बढ़ा है, इसके बाद भी सैलरी हिस्सा लगभग स्थिर रहा लेकिन, 2014 में वन रैंक वन पेशन लागू होने के बाद से पेंशन के मद में होने वाला खर्च बढ़ गया है. रक्षा बजट का लगभग आधा हिस्सा सैलरी और पेंशन के मद में खर्च होता है.

इस रिपोर्ट के अनुसार साल 2013-24 में रक्षा बजट में सैलरी और पेंशन का हिस्सा 42.2 फीसदी थी जो ताज़ा बजट में बढ़कर 48.4 फीसदी हो गया है.

'पहले पायलट प्रोजेक्ट लागू करना चाहिए था'

कई जानकारों का कहना है कि पहले इसे बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाना चाहिए.

भारतीय सेना में पूर्व अधिकारी मेजर जनरल हर्ष कक्कड़ ने फ़र्स्टपोस्ट में एक लेख में कहा है कि इस योजना को लेकर सवाल अधिक हैं और जवाब कम. इसे पहले एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लाना चाहिए था जिसकी बाद में समीक्षा की जा सकती. लेकिन अभी इसे सेना पर जबर्दस्ती थोपा जा रहा है.

एनडीटीवी ने एक अनाम अधिकारी के हवाले से कहा है कि अर्धसैनिक बलों में अग्निवीरों के लिए आरक्षण का एलान भी अचानक हुआ. अधिकारी का कहना है कि अग्निपथ योजना को पहले पायलट योजना के रूप में लाया जाना चाहिए था जिसके बाद इसे धीरे-धीरे लागू करना था.

सेवानिवृत्त मेजर जनरल जीडी बख़्शी ने लिखा "मुझे लगा कि इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है. ऐसा लगता है कि ये चीन की तरह सेना में कम अवधि की नियुक्तियों के लिए किया जा रहा है. भगवान के लिए ऐसा न करें."

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, "सेना की कार्यकारी क्षमता को अकाउंटेंट की कलम से न लिखा जाए. ये रिवेन्यू बजट में पैसे बचाने के लिए किया जा रहा है. एक कारगर संस्था को पैसे बचाने के लिए नष्ट न करें. डीफ़ेन्स बजट को कृपया जीडीपी का और 3 फीसदी दे कर इसे बढ़ाएं."

एक टेलीविज़न चैनल पर बात करते हुए सेवानिवृत्त मेजर जनरल एके सिवच ने भी कहा कि इस योजना को लागू करने से पहले इसे पायलट प्रोजेक्ट की तरह चलाना चाहिए था.

अब तक क्या क्या हुआ?

  • 14 जून 2022: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों के साथ अग्निपथ योजना की घोषणा की.
  • 15 और 16 जून: अग्निपथ योजना को लेकर विरोध बढ़ने लगा. राजनेताओं और राजनीतिक दलों में उसे कर सोशल मीडिया पर टिप्पणी करना शुरू किया. बीजेपी के नेता वरुण गांधी ने भी इसे लेकर सवाल उठाए. कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने कहा कि वो अपने यहां सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों को प्रथमिकता देंगे.
  • 17 जून 2022: सरकार इसे लेकर युवाओं को भरोसा दिलाने की कोशिश में दिखने लगी. सरकार ने कहा कि पिछले दो सालों में कोरोना महामारी के कारण सेना में भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई थी, इसलिए अग्निपथ योजना के पहले साल में आयु सीमा में दो वर्ष की रियायत देकर उसे 21 साल से 23 साल किया जाएगा.
  • 18 जून 2022: गृह मंत्रालय ने कहा असम राइफ़ल्स और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में होने वाली भर्तियों में 10 फ़ीसदी सीटें अग्निवीरों के लिए रिज़र्व होंगी. साथ ही भर्ती के लिए निर्धारित अधिकतम आयु में तीन साल की छूट देने का फ़ैसला किया गया.
  • अग्निपथ के तहत भारतीय वायुसेना ने अधिसूचना जारी की जिसमें नौकरी के दौरान छुट्टियों, तनख़्वाह और नौकरी ख़त्म होने पर मिलने वाली धनराशि के बारे में विस्तार से बताया गया.
  • 19 जून 2022 : तीनों सेना प्रमुखों ने एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की और इस योजना को लेकर कहा कि सेना में सुधारों का काम दशकों पहले से काम शुरू हुआ था. इसे लेकर धीरे-धीरे वक्त-वक्त पर काम किया जा रहा है और इसी के तहत अग्निपथ की योजना का एलान हुआ है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)