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'अग्निपथ' विवाद: कांग्रेस, आप, टीएमसी का हमला, बचाव में उतरी बीजेपी
देश के कई हिस्सों में केंद्र सरकार की 'अग्निपथ योजना' के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं. बिहार और मध्य प्रदेश में कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसक घटनाएं भी दर्ज की गयी हैं.
भारत सरकार इस योजना के तहत अल्पावधि के लिए सेना में 17.5 साल से लेकर 21 साल की उम्र वाले युवाओं की भर्ती करेगी.
हालांकि, युवाओं की मांग है कि सेना में भर्ती के पुराने तरीके को बहाल किया जाए.
इसी बीच इस योजना पर सियासी गहमागहमी तेज़ हो रही है.
जहां एक ओर विपक्ष के नेता इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरते हुए नज़र आ रहे हैं. वहीं, बीजेपी नेता इस योजना के बचाव में उतरते दिख रहे हैं.
अग्निपथ योजना की ख़ास बातें
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'अग्निपथ' योजना की घोषणा की
- इसके तहत सेना में भर्ती चार सालों के लिए होगी
- भर्ती होने की उम्र 17.5 साल से 21 साल के बीच होनी चाहिए
- शैक्षणिक योग्यता 10वीं या 12वीं पास
- पहले साल की सैलरी प्रति महीने 30 हज़ार रुपये होगी
- चौथे साल 40 हज़ार रुपये प्रति महीने मिलेंगे
- चार साल बाद सेवाकाल में प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन होगा और 25 प्रतिशत लोगों को नियमित किया जाएगा
तेजस्वी यादव ने उठाया सवाल
बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर सत्ताधारी पार्टी बीजेपी से तीखे सवाल पूछे हैं.
राजद नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट करके सवाल उठाया है कि - "अग्निपथ योजना के तहत शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कम अवधि की अस्थायी सेवा के बाद एक बड़ी आबादी 22 साल की उम्र में बेरोज़गार हो जाएगी. क्या इससे देश में क़ानून व्यवस्था संबंधित समस्या पैदा नहीं होगी?"
इसके साथ ही तेजस्वी यादव ने लिखा है कि "इसके तहत बीजेपी सेना का नाम बदनाम करते हुए सरकारी ख़र्चे पर संघ और उसके दूसरे संगठनों के लोगों को लाठी की जगह बंदूक़ की ट्रेनिंग दिलाना चाहती है."
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उठाया सवाल
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के सहयोगी रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना पर सवाल उठाए हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ अमरिंदर सिंह ने सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना पर पुनर्विचार का सुझाव दिया है. साथ ही कहा कि उन्हें हैरानी है कि सरकार को ऐसे बड़े बदलाव क्यों करने पड़े.
समाचार एजेंसी यूएनआई के मुताबिक़ कैप्टन अमरिंदर सिंह का कहना है कि चार साल की नौकरी किसी जवान के लिए बहुत छोटी अवधि की है.
कांग्रेस ने कहा - वापस ली जाए योजना
कांग्रेस पार्टी ने भी इसका विरोध करते हुए सरकार से अपील की है कि इस योजना को वापिस लिया जाए.
कांग्रेस का कहना है कि सरकार भर्ती योजना के नाम पर युवाओं के सपनों को रौंद रही है, कम वेतन और छोटी अवधि के लिए नौकरी के नाम पर युवाओं का अपमान किया जा रहा है.
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा है कि जिन युवाओं के लिए यह योजना बनाई गई है, वही इसका विरोध कर रहे हैं क्योंकि उन्हें अपना भविष्य अंधेरे में जाता दिख रहा है.
सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी करते हुए उन्होंने कहा कि न तो सेना के साथ खिलवाड़ होना चाहिए और न ही युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ होना चाहिए.
उन्होंने कहा, "सेना में एक लाख पद खाली पड़े हैं. उन्हें जल्द से जल्द भरा जाए. उसके बाद ही अस्थायी नौकरियों की बात करें सरकार."
हालांकि, कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने इस मुद्दे पर पार्टी से हटकर रुख पेश किया है.
उन्होंने कहा है कि 'मैं उन युवाओं के प्रति सहानुभूति रखता हैं जो अग्निपथ योजना को लेकर चिंतित हैं. असलियत ये है कि भारत को युवा सशस्त्र बल की ज़रूरत है जो तकनीक और अत्याधुनिक हथियारों के इस्तेमाल से लैस हो. संघीय सशस्त्र बल रोज़गार गारंटी स्कीम नहीं होना चाहिए.'
केजरीवाल ने विरोध का समर्थन किया
वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि इसे लेकर विरोध कर रहे युवाओं की मांग एकदम सही है.
एक ट्वीट में उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि "युवाओं को चार साल नहीं, पूरी ज़िंदगी देश सेवा करने का मौक़ा दिया जाए और पिछले दो साल सेना में भर्तियां ना होने की वजह से जिसकी उम्र अब अधिक हो गई है, उन्हें भी मौक़ा दिया जाए."
वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने इससे जुड़ी एक रिपोर्ट को ट्वीट करते हुए लिखा, "एक के बाद एक योजना, केंद्र सरकार लोगों की ज़िंदगियों का मज़ाक उड़ा रही है. इस योजना को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. क्या उनके आंसुओं का कोई मोल नहीं?"
सांसद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने ट्ववीट कर कहा है कि इस योजना से बेरोज़गारी में कमी नहीं आएगी बल्कि उसमें इज़ाफ़ा होगा.
उन्होंने लिखा, "हमारी सेना आपकी 'स्कीम' और 'ब्रेन वेव' की प्रयोगशाला नहीं है. ये योजना देश-हित में नहीं है."
बचाव में उतरी बीजेपी
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ट्वीट कर कहा है कि जो छात्र दसवीं के बाद अग्निवीर बनेंगे, उनके लिए राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय (एनआईओएस) विशेष कार्यक्रम की शुरुआत कर रहा है. इसके तहत 10वीं कक्षा पास छात्र अपनी शिक्षा आगे बढ़ाकर 12वीं कक्षा पास प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकेंगे.
उनका कहना है कि इस योजना को रक्षा प्राधिकरणों के परामर्श से तैयार किया गया है. और इसके तहत उन्हें जो सर्टिफ़िकेट मिलेगा उससे वो आगे नौकरी कर सकेंगे और अपनी पढ़ाई भी जारी रख सकेंगे.
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा है कि अगले कुछ सालों में इस योजना के तहत हज़ारों भर्तियां होंगी.
उन्होंने कहा है कि "इससे दसवीं के बाद सेना में भर्ती हुए छात्र को देश की सेवा करने का मौक़ा मिलता है, 12वीं का सर्टिफ़िकेट मिलेगा, उनका स्किल सेट बेहतर होता है और प्रशिक्षण और पैसा मिलता है. इसके बाद अगर कोई दूसरी नौकरी करता है तो उन्हें उसमें भी मदद मिलती है."
उत्तराखंड के मुखयमंत्री और बीजेपी नेता पुष्कर सिंह धामी भी इसके बचाव में सामने आए हैं.
उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा है कि "मैं राज्य के सभी युवाओं को आश्वत करता हूं कि प्रदेश के जो भी युवा अग्निवीर के रूप में राष्ट्र सेवा करेंगे, उन सभी को सेवा के उपरांत उत्तराखंड पुलिस, आपदा प्रबंधन, उपनल व अन्य संबंधित सेवाओं में प्राथमिकता दी जाएगी."
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वो भ्रामक खबरों से दूर रहें.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने ट्विटर पर इस योजना को लेकर स्पष्टीकरण दिया है.
वरुण गांधी ने पूछे तीखे सवाल
वहीं, बीजेपी नेता और सांसद वरुण गांधी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिख 'अग्निपथ योजना' को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब देने की गुज़ारिश की है.
उन्होंने रक्षामंत्री को टैग करते हुए लिखा है, "युवाओं को असमंजस की स्थिति से बाहर निकालने के लिए सरकार अतिशीघ्र योजना से जुड़े नीतिगत तथ्यों को सामने रख कर अपना पक्ष साफ करे."
चिट्ठी में वरुण गांधी ने लिखा, "सेना में 15 साल की नौकरी के बाद रिटायर हुए नियमित सैनिकों को कॉर्पोरेट सेक्टर नियुक्त करने में ज़्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं. ऐसे में चार की अवधि के बाद इन अग्निवीरों का क्या होगा?"
उन्होंने सवाल किया है कि "इस योजना से प्रशिक्षण लागत की बर्बादी होगी क्योंकि चार साल बाद सेना इन प्रशिक्षित जवानों में से 25 फ़ीसदी का उपयोग कर सकेगी. ये रक्षा बजट पर अनावश्यक बोझ साबित होगा."
"हर साल भर्ती किए गए युवाओं में से 75 फ़ीसदी बेरोज़गार होंगे, ये संख्या हर साल बढ़ती जाएगी. इससे युवाओं में असंतोष और अधिक पनपेगा."
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