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नए सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे पहली बार चीन और रूस-यूक्रेन जंग पर बोले- प्रेस रिव्यू
चीन के साथ भारत के सीमा विवाद पर नए सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडेय के अहम बयान को अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने प्रमुखता से छापा है. प्रेस रिव्यू में सबसे पहले यही ख़बर पढ़िए.
सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कहा है कि सीमा विवाद को चीन ज़िंदा रखना चाहता है. उन्होंने ये भी कहा कि अगर चीन सीमा पर यथास्थिति को बदलने की कोई भी कोशिश करेगा तो भारत न सिर्फ़ उसे रोकेगा बल्कि जवाबी कार्रवाई भी करेगा.
आर्मी चीफ़ ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि पूर्वी लद्दाख को लेकर भारत का उद्देश्य और मंशा अप्रैल 2020 से पहले की यथास्थिति को बहाल करना है.
उन्होंने कहा, "पहली और सबसे महत्वपूर्ण चुनौती अप्रैल-मई 2020 से चली आ रही सीमाओं की स्थितियों का समाधान करना है. जहाँ तक पूर्वी लद्दाख की बात है तो, हमारा उद्देश्य और इरादा यहाँ अप्रैल 2020 से पहले की यथास्थिति को बहाल करना है. हमारा इरादा दोनों पक्षों में विश्वास और शांति को फिर से स्थापित करना है."
उन्होंने कहा, "यह एकतरफ़ा मामला नहीं हो सकता. दोनों छोर से प्रयास किए जाने चाहिए."
चीन के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि मूल मामला सीमा विवाद का समाधान है. आर्मी चीफ़ ने कहा, "हमें दिख रहा है कि चीन की मंशा सीमा मुद्दे को बरकरार रखने की रही है. एक देश के रूप में हमें एक 'संपूर्ण राष्ट्र' वाले दृष्टिकोण की ज़रूरत है और सेना के लिए इसका अर्थ, वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति को बदलने के किसी भी प्रयास को रोकना और उसका मुक़ाबला करना है."
रूस-यूक्रेन युद्ध पर क्या बोले आर्मी चीफ़
रूस और यूक्रेन की बीच जारी मौजूदा युद्ध का भारतीय सेना की तैयारियों पर क्या असर होगा, ये सवाल किए जाने पर आर्मी चीफ़ ने कहा कि इसमें बहुत से अहम सबक छिपे हैं. उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात ये थी कि पारंपरिक युद्ध की प्रासंगिकता अभी भी बनी हुई थी.
आर्मी चीफ़ ने कहा, "हम देख रहे हैं कि इस युद्ध में दोनो पक्षों की ओर से आर्टिलरी गन, एयर डिफ़ेंस गन, रॉकेट, मिसाइलें, टैंक का इस्तेमाल हो रहा है. इससे ये भी पता लगता है कि ये ज़रूरी नहीं कि युद्ध छोटे समय के लिए हों और जल्दी खत्म हो जाएं. ये मौजूदा संघर्ष की तरह ही लंबे समय तक खिंच सकते हैं."
उन्होंने कहा कि दूसरी अहम सीख ये है कि हमें हथियार, गोलाबारूद, उपकरणों के लिए आत्मनिर्भर होने की कोशिश करनी चाहिए. सेना प्रमुख ने कहा, "हम कुछ हथियार प्रणालियों, ख़ासतौर पर एयर डिफेंस, रॉकेट, मिसाइल और कुछ टैंकों के लिए रूस और यूक्रेन पर निर्भर हैं. इनके लिए खुद पर निर्भरता बढ़ाना एक अहम सीख है."
तीसरा महत्वूर्ण मुद्दा साइबर वॉर जैसे पहलू हैं. उन्होंने कहा कि साइबर डोमेन और या इन्फॉर्मेशन डोमेन हो, हमने देखा है कि विरोधी पर बढ़त हासिल करने के लिए नैरेटिव की लड़ाई लड़ी गई हैं. हमें युद्ध के नए क्षेत्रों पर तेज़ी से ध्यान देने की ज़रूरत है और अपनी क्षमता के विकास पर भी ध्यान देना ज़रूरी है.
पूर्वी लद्दाख की स्थिति को लेकर उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर पर बातचीत के ज़रिए संघर्ष के कई मसलों को सुलझाया गया है और बाकी इलाक़ों के लिए भी वार्ता के ज़रिए ही समाधान निकाला जा सकता है.
उन्होंने कहा कि ये अच्छा है कि भारत और चीन एक दूसरे से बात कर रहे हैं. भारत के सैनिक एलएसी की अहम जगहों पर बने हुए हैं. "जहाँ तक स्थिति का सवाल है, सैनिकों को अपने काम में दृढ़ बने रहने और यथास्थिति को बदलने की कोशिशों को रोकने के लिए मार्गदर्शन दिया गया है."
राजद्रोह कानून पर फिर से विचार करने को तैयार केंद्र सरकार, SC में दिया हलफ़नामा
केंद्र ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफ़नामें में कहा है कि सरकार राजद्रोह क़ानून पर फिर से विचार करने के लिए तैयार है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफ़नामे में ये कहा गया है कि राजद्रोह कानून पर फिर से विचार किया जाएगा. इसकी फिर से जांच की जाएगी.
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में देश की संप्रभुता की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्धता जताते हुए कहा है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के प्रावधानों की फिर से जांच की जाएगी.
इसके साथ ही सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में ये भी कहा गया है कि राजद्रोह कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार न किया जाए और सरकार की पुनर्विचार की कवायद पूरी होने तक इंतज़ार करना चाहिए.
केंद्र के इस हलफ़नामे को राजद्रोह क़ानून पर सरकार के यू-टर्न के तौर पर देखा जा रहा है. दो दिन पहले ही केंद्र सरकार ने राजद्रोह क़ानून का बचाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देने वाली याचिकाओं तो ख़ारिज किए जाने की मांग की थी.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शीर्ष अदालत में दायर एक हलफ़नामे में कहा कि उसका निर्णय औपनिवेशिक चीज़ों से छुटकारा पाने के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों के अनुरूप है और वह नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के सम्मान के पक्षधर रहे हैं. इसी भावना के साथ 1,500 से अधिक अप्रचलित हो चुके क़ानूनों को समाप्त कर दिया गया है.
कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने की सीएम मान से मुलाक़ात, तारीफ़ों के पुल बांधे
कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाक़ात की. सिद्धू ने इसके बाद मान की तारीफ़ करते हुए कहा कि उनमें ज़रा भी अहंकार नहीं है.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच ये मुलाक़ात ऐसे समय हुई है जब सिद्धू ने कुछ दिन पहले मान को 'रबड़ की गुड़िया' कहा था. विपक्षी पार्टियां ये आरोप लगाती हैं कि पंजाब सरकार को दिल्ली से आम आदमी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व चला रहा है.
सिद्धू और मान के बीच शाम सवा पाँच बजे के आसपास शुरू हुई बैठक 50 मिनट तक चली.
सिद्धू ने पंजाब सिविल सचिवालय में मुलाक़ात के बाद मीडिया से कहा, ''मैं यहाँ पंजाब की तरक़्क़ी के लिए आया हूँ. मैं मुख्यमंत्री साहब (मान) के बारे में क्या कहूँ, उनमें कोई अहंकार नहीं है. वो आज भी वैसे ही हैं, जैसे 10-15 साल पहले और छह महीने पहले थे.''
कांग्रेस के पू्र्व विधायक ने सीएम मान को सुझाव दिया कि शराब से ही पंजाब सरकार 25000 से 30000 करोड़ रुपये की कमाई कर सकती है. उन्होंने ये भी कहा कि रेत की कीमतें तय करने से सबकुछ ठीक हो जाएगा. राज्य मैं रेत माफ़िया नहीं रह जाएंगे.
सिद्धू ने रविवार को कहा था कि वह राज्य की अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार से संबंधित मामलों पर चर्चा करने के लिए सीएम मान से मिलेंगे.
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