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सत्येंद्र जैन: आर्किटेक्ट से लेकर केजरीवाल के सबसे करीबी शख्स बनने तक सफर
- Author, दीपक मंडल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने सोमवार को केजरीवाल सरकार के ताकतवर मंत्री सत्येंद्र जैन को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार कर लिया. जैन की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी और आप आदमी पार्टी के बीच वाकयुद्ध शुरू हो गया.
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि जैन को आठ साल पुराने एक फ़र्ज़ी मामले में गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने कहा कि जैन हिमाचल में आम आदमी पार्टी के चुनाव प्रभारी हैं, और चूंकि बीजेपी हिमाचल प्रदेश में बुरी तरह हार रही है इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया है ताकि वो वहाँ न जा सकें.
सिसोदिया ने कहा कि वो कुछ दिनों में छूट जाएँगे क्योंकि केस बिल्कुल फ़र्ज़ी है. दूसरी ओर बीजेपी ने उनके इस्तीफे की मांग की है.
सत्येंद्र जैन के पास दिल्ली के गृह और स्वास्थ्य विभाग के अलावा ऊर्जा, पीडब्ल्यूडी, उद्योग, शहरी विकास, बाढ़-सिंचाई और जल संसाधन जैसे विभागों की जिम्मेदारी है. इससे केजरीवाल सरकार में उनके कद का पता चलता है. दिल्ली की शकूर बस्ती से विधायक जैन आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सबसे नज़दीकी सहयोगियों में शुमार हैं.
जैन 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में शुरू हुए एंटी करप्शन मूवमेंट में शामिल थे. इसके ठीक एक साल बाद जब आम आदमी पार्टी का गठन हुआ तो वो केजरीवाल के साथ इसमें शामिल हो गए.
जैन के खिलाफ केस क्या है?
जैन को 2017 में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग से जु़ड़े एक केस में गिरफ्तार किया गया है. ईडी ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है.उनके खिलाफ चार कंपनियों के जरिये पैसे के अवैध लेन-देने का आरोप है.
लेकिन जैन और आम आदमी पार्टी ने कहा है कि वह 2013 में इन कंपनियों से अलग हो गए थे. उसके बाद इन कंपनियों की गतिविधियों के बारे में उन्हें कुछ भी पता नहीं है.
पहले भी लगे भ्रष्टाचार के आरोप
जैन के खिलाफ़ पहले भी भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हुए हैं. सीबीआई ने 2018 में पीडब्ल्यूडी की एक क्रिएटिव टीम को टेंडर देने में कथित अनियमितता के मामले में भी उनके खिलाफ केस दर्ज किया था. इस मामले में सीबीआई ने हाल ही में क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की है.
2016 में जैन की आर्किटेक्ट बेटी को लेकर भी विवाद हुआ. आरोप लगा कि जैन ने अपनी बेटी को मोहल्ला क्लीनिक का एडवाइज़र बनाया. विवाद होने पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया. जैन ने कहा कि यह मानद पद था. इसके लिए उनकी बेटी को कोई वेतन नहीं दिया जाता था.
केजरीवाल की कैबिनेट में मंत्री रहे और फिर आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आए कपिल मिश्रा ने 2017 में आरोप लगाया गया था कि जैन ने केजरीवाल को उनके घर में दो करोड़ रुपये कैश दिए थे. लेकिनकपिल मिश्रा ने दिल्ली की एक अदालत में जैन से बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा था ये आरोप राजनीति से प्रेरित था.
केजरीवाल ने दिल्ली में हर बार अपनी सरकार में जैन को अहम पद दिए. उनके पास शुरू से ही स्वास्थ्य और विभाग रहा है. इस वक्त उनके पास सात मंत्रालय है. वो केजरीवाल के सबसे करीबी शख्स में शुमार हैं.
जैन पर केजरीवाल को इतना भरोसा क्यों?
आखिर जैन पर केजरीवाल को इतना भरोसा क्यों है? बागपत में पैदा हुए जैन एक आर्किटेक्ट हैं, जो पहले पीडब्ल्यूडी में नौकरी करते थे. बाद में उन्होंने अपनी कंपनी खोल ली.
जैन जिस तरह केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद सहयोगी के तौर पर उभरे हैं, उससे पार्टी के अंदर उनके सहयोगियों और प्रतिस्पर्द्धियों से लेकर विरोधी भी आश्चर्यचकित हैं.
पंकज पुष्कर 2015 से 2020 तक दिल्ली की तिमारपुर सीट से आम आदमी पार्टी के विधायक थे. अब पार्टी छोड़ चुके पुष्कर कहते हैं, '' पार्टी में जैन की तरक्की की कुछ वजहें तो साफ हैं. दरअसल जैन एक बहुत अच्छे पार्टी वर्कर हैं. अच्छे वर्कर मतलब वो जो आदेश का पालन कर सके और जिसे पता हो उसका बॉस क्या चाहता है. साथ ही वह ये भी जानता हो कि बॉस जो चाहता है उसे कैसा पूरा किया जाए. ''
वह कहते हैं, ''जब पार्टी बनी थी, उस वक्त इसमें शामिल ज्यादातर लोग आंदोलन की पृष्ठभूमि लेकर आए थे. उनका मिजाज धरना-प्रदर्शन और विरोध करने वालों का था. जबकि सत्येंद्र जैन प्रशासनिक मिजाज के शख्स हैं और पार्टी का कामकाज बड़ी शिद्दत से करते हैं. ''
''उनके कामकाज में किसी वामपंथी पार्टी के होलटाइमर और अपने काम के प्रति गंभीर भारत सरकार के किसी आईएएस अफसर का रुझान दिखता है. ये चीज़ें उन्हें पार्टी में आगे ले जाती हैं. ''
पुष्कर एक दिलचस्प वाकये के बारे में भी बताते हैं, ''सत्येंद्र जैन ने एक बार विधायकों की अनौपचारिक बैठक में एक कहानी सुनाई, जिसका लब्बो-लुआब ये था कि लोग भले ही उन्हें नमस्कार करते हों लेकिन उन्हें अपनी असलियत पता है. यानी उन्होंने अपनी विनम्रता का प्रदर्शन करते हुए बता दिया कि पार्टी के असली नायक तो केजरीवाल हैं. लोग उन्हें यूं ही अहम समझते हैं. ''
पुष्कर कहते हैं सत्येंद्र जैन की ये खासियत उन्हें आम आदमी पार्टी के लिए अनिवार्य बना देती है.
वह कहते हैं, सत्येंद्र जैन को सचिवालय के अंदर काम करने वाले शख्स के तौर पर देखा जाता था. उन्हें एक राजनीतिक संगठनकर्ता के तौर पर नहीं जाना जाता था. लेकिन उन्होंने इस मोर्चे पर भी काम किया और खुद को एक अच्छे राजनीतिक संगठनकर्ता के तौर पर उभारा. यही वजह है कि उन्हें हिमाचल में पार्टी के चुनावी काम के लिए उतारा गया. ''
सत्येंद्र जैन पर लगे रहे भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में पूछने पर पुष्कर ने कहा, '' मैंने सत्येंद्र जैन की कार्यशैली को काफी बारीकी से देखा है. मुझे नहीं लगता है कि वो ऐसे व्यक्ति हैं, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाएं. लेकिन यह भी सच है कि वे इतने बड़े सिस्टम को देखते हैं कि अगर कहीं भ्रष्टाचार हो भी रहा होगा तो उस पर नजर रखना आसान नहीं रहा होगा. ''
वह कहते हैं, '' फिलहाल ये जाँच का मामला है. लेकिन इस समय उन पर जो आरोप लग रहे हैं वे राजनीति से प्रेरित हो सकते हैं. ''
आम आदमी पार्टी के गठन से ही सत्येंद्र जैन के साथ काम कर रहे पार्टी के एक सीनियर नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि वह सरकार में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों में से हैं. मोहल्ला क्लीनिक, बेहतर स्कूल और सस्ते और मजबूत फ्लाईओवर बनाने का जो काम केजरीवाल सरकार ने किया है, उसमें जैन की अहम भूमिका रही है. इस वक्त पूरी दिल्ली में नलों से पानी पहुंचाने की योजना चल रही है. 200 यूनिट फ्री बिजली का आइडिया भी उन्हीं का था, वो भी बगैर सब्सिडी बढ़ाए.
दिल्ली में महिलाओं के लिए बसों की यात्रा मुफ्त करने और पंजाब में महिलाओं को एक हजार रुपये देने का आइडिया भी जैन का ही था. वह 'मैन ऑफ आइ़़डियाज' हैं. उन्होंने नतीजे लाकर दिखाए हैं. इसलिए आम आदमी पार्टी में उनकी काफी अहमियत है.
विरोधी क्या कहते हैं?
लेकिन शकूर बस्ती सीट पर उनसे चुनाव हार चुके बीजेपी नेता डॉ. एस सी वत्स ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि सत्येंद्र जैन ने चुनाव आचारसंहिता का उल्लंघन किया है. इस मामले में जैन के खिलाफ उन्होंने याचिका दायर की है. हाई कोर्ट में उनकी अपील मंजूर कर ली है.
वत्स ने कहा, ''आचारसंहिता उल्लंघन के मामले में जैन की विधायकी जा सकती है. जैन ने अपना चुनाव खर्च सिर्फ सात लाख रुपये दिखाया है. आप बताइए क्या आजकल सात लाख रुपये में विधानसभा का चुनाव लड़ा जा सकता है. ''
एस सी वत्स का कहना है कि जैन की फंड जुटाने की क्षमता काफी ज्यादा है. पार्टी में पैसा लाने की वजह से ही इनकी अहमियत बढ़ती जा रही है. पंजाब में आम आदमी पार्टी ने चुनाव लड़ने में जो खर्च किया है, उसे जुटाने में इनकी बड़ी भूमिका रही है ''
आम आदमी पार्टी के संस्थापकों में से और अब पार्टी छोड़ चुके कुमार विश्वास ने सत्येंद्र जैन के गिरफ्तार होते ही ट्विटर पर लिखा कि कथित भ्रष्टाचार का मामला उनके सामने पहले आ चुका है और उस वक्त उन्होंने इस पर सवाल उठाया था. लेकिन केजरीवाल के वफादारों ने मामला रफा-दफा कर दिया. हालांकि बीबीसी ने जब उनसे इस संबंध में बात करनी चाही तो उन्होंने कोई बयान देने से इनकार कर दिया.
बहरहाल सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी को राजनीति से प्रेरित बताने वाली आम आदमी पार्टी ने इस पर सिर्फ ट्विटर के जरिये ही विरोध जताया है. आम तौर पर ऐसे मामलों में आक्रामक रुख अपनाने वाली आम आदमी पार्टी ने फिलहाल इस पर कोई बड़ा राजनीतिक आंदोलन नहीं छेड़ा है.
आम आदमी पार्टी पर नज़र रखने वालों को उसके अगले कदम का इंतजार है.
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