दिल्ली में 'ऑपरेशन बुलडोज़र' का क्या चुनावी कनेक्शन है?

    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

दिल्ली की जहांगीरपुरी में अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए आज सुबह बुलडोज़र पहुँचा. लेकिन क्यों, कहाँ और कैसे ये जानने के लिए इस घटना की क्रोनोलॉजी समझने की ज़रूरत है.

  • 16 अप्रैल को हनुमान जयंती के मौके पर जहांगीरपुरी में हिंसा और सांप्रदायिक तनाव हुआ
  • 17 - 18 अप्रैल को पुलिस 24 लोगों को इस सिलसिले में गिरफ़्तार करती है.
  • मुख्य अभियुक्त किस पार्टी से जुड़ा है -इसको लेकर दिल्ली की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और विपक्षी पार्टी बीजेपी के बीच ट्विटर पर वार पलटवार होते हैं.
  • 19 अप्रैल को ही एमसीडी एकीकरण के क़ानून को राष्ट्रपति से मंज़ूरी मिलती है.
  • 19 अप्रैल को ही तीन और संयोग होते हैं. दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष नॉर्थ एमसीडी महापौर और कमिश्नर को इलाके के अतिक्रमण हटाने को लेकर चिट्ठी लिखते हैं. संयोग कह सकते हैं कि उसी दिन नॉर्थ एमसीडी कमिश्नर दिल्ली पुलिस को चिट्ठी लिख कर अवैध अतिक्रमण पर कार्रवाई के लिए 400 पुलिस वालों की माँग करते हैं. ये भी महज संयोग ही हो सकता है कि दिल्ली पुलिस उनके आग्रह को उसी दिन स्वीकार भी कर लेती है.
  • एक दिन बाद 20 अप्रैल को सुबह दिल्ली पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के बीच बुलडोज़र के साथ एमसीडी के अधिकारी जहांगीरपुरी पहुँचते है. अवैध निर्माण को ढहाने की कार्रवाई शुरू हो जाती है.
  • लेकिन बीच में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच जाता है और कोर्ट मामले की सुनवाई तक एमसीडी को यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहती है.
  • बुलडोज़र की कार्रवाई थम जाती है.
  • 21 अप्रैल को अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय की जाती है.

हनुमान जयंती के मौके पर हुई हिंसा में अब तक जो मामला क़ानून व्यवस्था से जुड़ा था, उसमें 19 अप्रैल को दिल्ली नगर निगम की एंट्री हो जाती है.

बुलडोज़र का बीजेपी कनेक्शन - आम आदमी पार्टी का आरोप

दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी. दिल्ली में तीन नगर निगम है. दक्षिणी दिल्ली नगर निगम, उत्तर दिल्ली नगर निगम और पूर्वी दिल्ली नगर निगम.

तीनों नगर निगम पर फिलहाल बीजेपी का कब्ज़ा है.

इस वजह से दिल्ली सरकार में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी आरोप लगा रही है कि जो लोग एमसीडी चला रहे हैं, उन्हें ये अतिक्रमण पहले क्यों नहीं दिखा? पिछले 15 साल से दिल्ली के नगर निगम पर बीजेपी का कब्ज़ा है. तो ये अतिक्रमण बनने किसने दिया?

आम आदमी पार्टी के नेता दुर्गेश पाठक ने दंगों के लिए बीजेपी को ज़िम्मेदार ठहराते हुए इसे आने वाले एमसीडी चुनाव से जोड़ा. बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "दिल्ली में हर चुनाव वो हारते आ रहे हैं. बीजेपी का यहाँ बुरा हाल है. दंगा कराने से बीजेपी को लगता है कि चुनाव में उन्हें फ़ायदा मिलेगा. ये उनका हमेशा से पुराना तरीका है."

दुर्गेश अपने तर्क को 2020 के दिल्ली दंगों के साथ जोड़ कर रखते हैं.

2020 में फरवरी के महीने में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे हुए थे. उससे ठीक पहले दिल्ली में चुनाव हुए थे, जिसमें बीजेपी की हार हुई थी और आम आदमी पार्टी बहुमत से दिल्ली की सत्ता में लौटी थी. उस दंगे के बाद भी उसे बीजेपी की चुनावी हार से जोड़ा गया था.

दुर्गेश पाठक आगे कहते हैं, "केंद्र की सरकार आपके पास, एमसीडी में आपका शासन है, दिल्ली की कानून व्यवस्था आपके हाथ - तो बांग्लादेश से आए घुसपैठियों को रोकना किसकी ज़िम्मेदारी है. अतिक्रमण को रोकना किसी ज़िम्मेदारी है."

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "चूंकि बीजेपी से ना तो स्कूल बनेगा, ना अस्पताल बनेगा, ना महंगाई कम होगी, तो ये क्या करेंगे? बीजेपी दंगाइयों की पार्टी है. ये सिर्फ़ दिल्ली को लूटेंगे, अतिक्रमण कराएंगे और दंगे कराएंगे."

बीजेपी का पक्ष

आम आदमी के आरोपों को दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता सिरे से ख़ारिज करते हैं.

बीबीसी से बातचीत में आदेश गुप्ता ने कहा, "बीजेपी अगर 15 साल से नगर निगम की सत्ता पर काबिज़ है तो 15 हज़ार बार अतिक्रमण हटाने का काम किया है. इस साल 20 अप्रैल तक सिर्फ़ जहांगीरपुरी इलाके की बात करें तो अतिक्रमण हटाने की 7 बार कार्रवाई हुई है. अतिक्रमण हटाने की पिछली कार्रवाई यहां 11 अप्रैल को हुई थी. जो लोग इस कार्रवाई को धर्म के चश्मे से देख रहे हैं उनका मक़सद दंगाइयों को बचाना और शरण देने का है."

'एमसीडी चुनाव के पहले बीजेपी दंगे करा रही है' - आम आदमी पार्टी के इन आरोपों पर जवाब देते हुए आदेश गुप्ता ने कहा, अगर पिछले सात सालों में दिल्ली में सरकार में रहते हुए एमसीडी को कमज़ोर करने का काम नहीं किया होगा, तो उन्हें डरने की क्या ज़रूरत है?

जब उनसे पूछा कि तीनों नगर निगमों पर बीजेपी का कब्ज़ा है तो एमसीडी को कमज़ोर दिल्ली सरकार कैसे कर सकती है? इस पर आदेश गुप्ता कहते हैं, "दिल्ली सरकार से ही एमसीडी को फंड मिलता है. वो दे नहीं रहे. 40 हज़ार करोड़ में से केवल 7 हजार करोड़ एमसीडी को मिला है तो एमसीडी कैसे काम करेगी? इस वजह से एमसीडी के एकीकरण का फैसला केंद्र सरकार ने लिया है. अब एक मेयर होगा, जो मुख्यमंत्री जितना ही ताकतवर होगा. आम आदमी पार्टी को दर्द और डर इस बात का."

एमसीडी एकीकरण

दिल्ली में इस साल मई के पहले निगम चुनाव होने थे. लेकिन केंद्र की बीजेपी सरकार ने दोबारा से तीनों एमसीडी को एक में मिलाने का फैसला किया है, जिसे राष्ट्रपति से 19 अप्रैल को मंजूरी भी मिल गई.

2012 तक तीनों नगर निगम एक हुआ करती थे. कांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार में इनका बंटवारा हुआ था.

2012 से पहले संयुक्त एमसीडी में 272 सीटें होती थी. तीन एमसीडी में बंटवारे में उत्तरी और दक्षिणी एमसीडी में 104 और पूर्वी एमसीडी में 64 सीटें रहीं. यानी कुल सीटें 272 ही रहीं.

2017 में दिल्ली में निगम चुनाव हुए थे, जिसका टर्म इसी साल मई में ख़त्म होना है. उससे पहले चुनाव होना था.

मंगलवार को राष्ट्रपति से जो एमसीडी एकीकरण का नोटिफिकेशन जारी हुआ है - उसके मुताबिक़, अब एकीकृत एमसीडी में 250 से ज़्यादा सीटें नहीं हो सकती. यानी अब परिसीमन की ज़रूरत होगी. और इसके लिए 6 महीने तक का वक़्त लग सकता है.

यानी एमसीडी चुनाव आने वाले 6 महीने में होने वाले नहीं.

फिलहाल जहाँ अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया है, वो वार्ड नंबर 21 में आता है. वहाँ से निगम पार्षद पूनम बागड़ी हैं. वो चुनाव कांग्रेस की टिकट पर जीतीं थी और पिछले साल आम आदमी पार्टी में शामिल हो गई है.

बुलडोज़र चलने की टाइमिंग को लेकर सवाल?

नॉर्थ एमसीडी के मेयर बीजेपी नेता राजा इक़बाल सिंह है. जब उनसे आदेश गुप्ता की चिट्ठी के बाद अतिक्रमण हटाने की टाइमिंग को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा, "ये कार्रवाई तो पहले भी होनी थी. यहां के स्थानीय लोग काफ़ी परेशान थे. ज़मीनों पर कब़्जे़ हो रहे थे. लोगों को आने जाने में दिक़्क़त हो रही थी. ट्रैफिक की समस्या हो रही थी. इन्हीं सब को दूर करने के लिए हमने ये फ़ैसला लिया."

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया है कि इस मामले में क़ानून का पालन नहीं किया है. जिनकी दुकानें और मकान थे उनको हटाने से पहले सूचित नहीं किया गया था. इम मामले को लेकर उन्होंने ट्वीट भी किया है.

लेकिन मेयर राजा इक़बाल सिंह इससे इनकार करते हैं. उनका कहना है कि ये सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा था. इसको हटाने के लिए कई बार उन लोगों को कहा जा चुका था.

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