राज्यसभा चुनाव: बीजेपी की लिस्ट से मुख्तार अब्बास नकवी आउट, निर्दलीय के तौर पर सुभाष चंद्रा इन, आख़िर माजरा क्या है?

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- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मंगलवार को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन भरने की आख़िरी तारीख़ है.
10 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी की तरफ़ से जारी नामों की सूची में केंद्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नक़वी का नाम नहीं है.
बीजेपी के जानकारों को ये हैरान कर रहा है. उसी तरह से राजस्थान से घनश्याम तिवाड़ी का नाम भी चौंकाने वाला है.
मंगलवार सुबह ही ज़ी मीडिया ग्रुप के चेयरमैन रहे सुभाष चंद्रा ने बीजेपी नेता वसुंधरा राजे सिंधिया से मुलाक़ात की और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राजस्थान से पर्चा भरा.
इसके बाद चर्चा गरम है कि बीजेपी सुभाष चंद्रा का समर्थन करके राजस्थान में कांग्रेस के तीसरे उम्मीदवार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है.
इस वजह से आज बात बीजेपी की राज्यसभा लिस्ट की. आख़िर जो नाम आए और जो नहीं आए - उनका इशारा किस तरफ़ है.

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राजस्थान से संदेश
'द हिंदू' अख़बार से जुड़ीं वरिष्ठ पत्रकार निस्तुला हेब्बार कहती हैं, राजस्थान से घनश्याम तिवाड़ी को टिकट दिया है. उन्होंने वसुंधरा राजे से तनातनी के बाद बीजेपी छोड़ दी थी. ज़ाहिर है उनको टिकट दे कर वसुंधरा राजे को एक संदेश देने की कोशिश है.
वरिष्ठ पत्रकार अदिति फडनीस भी बीजेपी के राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में घनश्याम तिवाड़ी को ही सबसे हैरान करने वाली एंट्री बताती हैं.
अदिति, घनश्याम तिवाड़ी के इतिहास को इसके पीछे की एक वजह मानती है.
"घनश्याम तिवाड़ी वसुंधरा राजे के मुखर आलोचकों में से एक थे, जब वो राजस्थान की सीएम थीं. 44 साल वो संघ में रहे और फिर भाजपा छोड़ दी. अपनी पार्टी बनाई और कुछ समय के लिए कांग्रेस में भी शामिल हो गए. साल 2020 में भाजपा में वापस आए. और 2022 में पार्टी उन्हें राज्यसभा भेज रही है.
वो कहती हैं, "इसके पीछे दो लॉजिक हो सकते हैं. एक लॉजिक ये कि घनश्याम तिवाड़ी को राजस्थान की राजनीति से निकाल कर पूरा मैदान वसुंधरा राजे के लिए खाली छोड़ दिया है. दूसरा लॉजिक ये भी हो सकता है कि वसुंधरा राजे इस फैसले से और नाराज़ हो जाएं कि उनके विरोधियों को राज्यसभा इनाम में दिया जा रहा है. दोनों में से बीजेपी की सोच क्या है, ये बीजेपी और वसुंधरा राजे ही जानते होंगे. "
हालांकि तिवाड़ी उम्मीदवारी घोषित होने के बाद वसुंधरा राजे से मिले और दोनों ने साथ में फोटो भी खिंचवाई.
राजस्थान से ही एक दूसरी तस्वीर भी बीजेपी की तरफ़ से एक मैसेज की तरह काम कर रही है.
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मंगलवार सुबह ही वसुंधरा राजे और सुभाष चंद्रा के मिलने की तस्वीरें भी सामने आई. इससे साफ़ हो गया कि राजस्थान में चौथी सीट की लड़ाई दिलचस्प मोड़ पर पहुँच गई है.
राजस्थान की 4 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है. राज्य में विधायकों के संख्या बल के हिसाब से एक राज्यसभा सीट के लिए 41 विधायकों की ज़रूरत किसी भी पार्टी को पड़ेगी.
राज्य की 200 विधानसभा सीटों में कांग्रेस के पास 120 विधायकों का समर्थन है जबकि बीजेपी के पास 76 विधायक हैं.
बीजेपी एक सीट पर अपना उम्मीदवार जिता सकती है और उसने एक ही नाम की घोषणा की है - घनश्याम तिवाड़ी.
कांग्रेस दो उम्मीदवारों को आसानी से जिता सकती है और उसने तीन उम्मीदवारों की घोषणा की है.
अब तक कांग्रेस को तीसरी सीट के लिए निर्दलीय विधायकों से समर्थन मिलने की उम्मीद थी.
लेकिन चौथी सीट के लिए निर्दलीय के तौर पर सुभाष चन्द्रा ने नामांकन दाखिल कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है.
माना जा रहा है कि सुभाष चंद्रा को बीजेपी सपोर्ट करेगी और बाकी बचे वोट वो ख़ुद मैनेज करेंगे.
ज़ाहिर है चौथी सीट उसी के खाते में आएगी जिसके पास अच्छे मैनेजर होंगे.
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यूपी की लिस्ट
इसी तरह से बीजेपी की उत्तर प्रदेश की लिस्ट भी दिलचस्प है.
उत्तर प्रदेश से बीजेपी ने लक्ष्मीकांत वाजपेयी, डॉ. राधा मोहन अग्रवाल, सुरेन्द्र सिंह नागर, बाबूराम निषाद, दर्शना सिंह, संगीता यादव, के लक्ष्मण, मिथिलेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है.
यूपी की लिस्ट के बारे में निस्तुला कहती है, "बीजेपी ने मुसलमान छोड़ कर बाक़ी सभी समुदायों को ख्याल रखा है. निषाद, यादव, पंडित सब को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश उनकी लिस्ट में साफ़ दिखती है. शिव प्रताप शुक्ल का टिकट इस बार कटा है. माना जाता है कि यूपी के मुख्यमंत्री से उनके रिश्ते अच्छे नहीं हैं.
डॉ. राधा मोहन अग्रवाल ने योगी आदित्यनाथ के लिए अपनी विधानसभा सीट छोड़ी थी. उनको राज्यसभा भेज कर उसका इनाम देने की कोशिश की गई है."

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मुख़्तार अब्बास नक़वी का टिकट क्यों कटा?
लेकिन मुख़्तार अब्बास नक़वी को राज्यसभा नहीं भेजना भी बीजेपी कवर करने वालों को हैरान कर रहा है.
अदिति फडनीस कहती हैं कि बताया जा रहा है कि मुख्तार अब्बास नक़वी रामपुर सीट से लोकसभा उपचुनाव लड़ सकते हैं. इस सीट पर 23 जून को चुनाव होना है. आजम ख़ान के विधायक बनने के बाद ये सीट खाली हुई है.
निस्तुला कहती हैं, "इस थ्योरी के अलावा भी मुख़्तार अब्बास नक़वी के नाम को लेकर कई और दलीलें दी जा रही हैं.
एक दलील ये दी जा रही है कि नक़वी को राज्यसभा देने का मतलब ये है कि उनका लगातार चौथा टर्म होता. बीजेपी एक ही नेता को चार बार राज्यसभा भेजकर कार्यकर्ताओं में कोई अलग संदेश नहीं देना चाहती थी.
दूसरी दलील ये दी जा रही है कि उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाने पर विचार चल रहा है.
तीसरी दलील ये भी है कि उन्हें कहीं गवर्नर बना कर भेज दिया जाए. बीजेपी का फोकस मुसलमानों में भी पसमांदा मुसलमानों पर हो गया है. जबकि मुख़्तार अब्बास नक़वी शिया सैयद मुसलमान हैं.
बीजेपी के उत्तर प्रदेश में एक ही मुस्लिम चेहरे को मंत्री बनाया है. वो हैं दानिश, जो कि पसमांदा मुस्लिम है.
इन में से सही क्या है, कोई बाहर का व्यक्ति नहीं बता सकता. "

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मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावना
वरिष्ठ पत्रकार अदिति फडनीस कहती हैं, अगर मुख्तार अब्बास नक़वी राज्यसभा से चुन कर नहीं आते हैं तो मंत्रिमंडल में एक सीट खाली रहेगी.
उसी तरह से आरसीपी सिंह को जेडीयू ने राज्यसभा उम्मीदवार नहीं बनाया है.
वो भी जेडीयू कोटे से केंद्र में मंत्री है.
दो सीटें केंद्रीय मंत्रिमंडल में खाली होती है, तो मोदी कैबिनेट की शक्ल सूरत बदली हुई नजर ज़रूर आएगी.
2024 के चुनाव से पहले उसे भरने की एक कोशिश भी हो सकती है, क्योंकि कुछ वेकैंसी रहेगी.

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स्थानीय उम्मीदवारों को तरजीह
कांग्रेस के उलट बीजेपी की लिस्ट में एक और ख़ास बात देखने को मिलती है.
बीजेपी ने राज्य के स्थानीय उम्मीदवारों के हौसले बुलंद रखे हैं.
के लक्ष्मण और निर्मला सीतारमण के अलावा बाक़ी ज़्यादातर उम्मीदवार बीजेपी की लिस्ट में स्थानीय ही हैं.
के लक्ष्मण तेलंगाना से आते हैं, लेकिन पार्टी यूपी से राज्यसभा भेज रही है. उसी तरह से निर्मला सीतारमण को कर्नाटक से उम्मीदवार बनाया गया है.

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महाराष्ट्र और कर्नाटक में उत्साहित बीजेपी
महाराष्ट्र में 6 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहा है. महाराष्ट्र में एक उम्मीदवार को राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 वोट की ज़रूरत है.
विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से बीजेपी को 2 सीट आसानी से मिल सकती है और 31 वोट उसके बाद भी बच जाएंगे.
बीजेपी ने इस वजह से तीन उम्मीदवार खड़े किए हैं - पीयूष गोयल, अनिल बोंडे और धनंजय महादिक.
दूसरी तरफ़ महाविकास अघाड़ी से शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी एक एक उम्मीदवार आसानी से जीता सकते हैं.
शिवसेना दूसरा उम्मीदवार अपने सहयोगियों, निर्दलीय और छोटी पार्टियों को मिला कर जीता सकती है. इस वजह से उन्होंने दो उम्मीदवारों की घोषणा की है. संजय पवार और संजय राउत.
यानी छठी सीट के लिए बीजेपी और शिवसेना में टक्कट होगी.
वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन कहते हैं जिस तरह से अप्रैल में असम में बीजेपी ने दोनों सीटें क्रॉस वोटिंग करा कर जीत ली थी. उसी तरह का खेल महाराष्ट्र में भी हो सकता है.
इसी तरह का उत्साह कर्नाटक में भी बीजेपी में दिख रहा है. दो सीट वहां से बीजेपी जीत सकती है और एक सीट कांग्रेस जीत सकती है. चौथी सीट के लिए जेडीएस के पास पूरे नंबर नहीं है लेकिन उन्होंने अपना उम्मीदवार खड़ा किया है. जेडीएस के पास 32 विधायक हैं.
बीजेपी ने भी कर्नाटक में तीसरा उम्मीदवार खड़ा किया है.
कर्नाटक में एक राज्यसभा उम्मीदवार जीताने के लिए 44 विधायकों की ज़रूरत पड़ेगी.
निस्तुला कहती हैं, "कर्नाटक और महाराष्ट्र में जीतने वाले तय उम्मीदवारों से ज्यादा उम्मीदवार घोषित कर बीजेपी ने एक संदेश देने की ये भी कोशिश की है कि वो आसानी से कोई सीट छोड़ने वाले नहीं."
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