सिद्धू मूसेवाला की हत्या में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बरार का क्या कनेक्शन बताया जा रहा है - प्रेस रिव्यू

सिद्धू मूसेवाला

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दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के सूत्रों का कहना है कि वो सिंगर-राजनेता सिंद्धू मूसेवाला की हत्या में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की भूमिका की जांच कर रहे हैं. वहीं कनाडा स्थित गैंगस्टर गोल्डी बरार ने हत्या की ज़िमेदारी ली है.

अंग्रेज़ी अख़बार 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, स्पेशल सेल के सूत्रों का कहना है कि बरार का गिरोह लॉरेंस बिश्नोई का ही हिस्सा है. पुलिस का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े कई लोग पहले ही दिल्ली और इसके आस-पास की जेलों में हैं.

अख़बार वरिष्ठ अफ़सर के हवाले से लिखता है कि पुलिस कनाडा से कथित तौर पर बरार गिरोह की हत्या की कई योजनाओं की जांच कर रही है.

अफ़सर का कहना है कि बिश्नोई और उसके गिरोह के ख़िलाफ़ दिल्ली, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में आपराधिक रिकॉर्ड हैं. बिश्नोई इस समय जेल में है और वहीं से अपने गैंग का संचालन करता है.

बीते साल फ़रवरी में बरार ने बिश्नोई की मदद से पंजाब में युवा कांग्रेस नेता गुरलाल सिंह बलवान की कथित तौर पर हत्या की योजना बनाई थी.

स्पेशल सेल के डीसीपी मनीषी चंद्रा ने उस समय मीडिया को बताया था कि उनकी टीम ने तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है जिन्होंने बलवान पर 10-12 गोलियां दाग़ी थीं.

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उन्होंने बताया था, "अभियुक्तों ने अपने अपराध को स्वीकार किया है और कहा है कि वो लोग बलवान के पीछे सिंघू बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन के समय से ही थे और उन्होंने 26 जनवरी को जंतर-मंतर पर हिंसा के समय भी उनका पीछा किया था लेकिन भीड़ की वजह से वो अपनी योजना को अंजाम नहीं दे पाए थे. फ़रवरी में उन्होंने बरार के निर्देश पर उनकी हत्या कर दी."

बिश्नोई से जुड़े उसके साथी भी ख़ुद गैंगस्टर के तौर पर चर्चित हैं. उसका साथी और दोस्त संपत नेहरा ने कथित तौर पर बॉलीवुड अभिनेता सलमान ख़ान की हत्या की योजना बनाई थी और उसे साल 2018 में हरियाणा स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने गिरफ़्तार किया था.

चंडीगढ़ के पूर्व पुलिस अफ़सर के बेटे नेहरा ने दावा किया था कि अप्रैल 2018 में चंडीगढ़ में पंजाबी सिंगर परमीश वर्मा पर हमला उसी ने किया था.

इस गिरोह के दूसरे साथी काला जठेड़ी, मोंटी और काला राणा हैं. राणा कथित तौर पर 30 हत्याओं में शामिल है. राणा को डीसीपी चंद्रा की टीम मार्च में थाईलैंड से प्रत्यर्पण करके भारत लाई थी.

वहीं काला जठेड़ी कथित तौर पर 40 हत्याओं में शामिल रहा है, उसको उसकी गर्लफ़्रेंड अनुराधा चौधरी के साथ बीते साल जुलाई में स्पेशल सेल ने गिरफ़्तार किया था जिसे राजस्थान में 'लेडी डॉन' बताया जाता था.

तालिबान

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यूएन की रिपोर्ट में दावा, तालिबान में चल रहे जैश-ए-मुहम्मद के कैंप

संयुक्त राष्ट्र की एक कमिटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान स्थित और भारत केंद्रित चरमपंथी समूह लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद की मौजूदगी अफ़ग़ानिस्तान में है.

अंग्रेज़ी अख़बार 'द टाइम्स ऑफ़ इंडिया' अपनी रिपोर्ट में लिखता है कि तालिबान लगातार ख़ारिज करता रहा है कि उसकी ज़मीन पर कोई चरमपंथी संगठन नहीं है लेकिन संयुक्त राष्ट्र की तालिबान पर प्रतिबंधों के लिए बनी कमिटी की मॉनिटरिंग टीम ने ऐसा नहीं पाया है.

रिपोर्ट के अनुसार, इस टीम ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्ष परिषद के सदस्य देशों को रिपोर्ट जमा की है जिसमें बताया गया है कि तालिबान सीधे तौर पर नांगरहार में जैश-ए-मुहम्मद के आठ में से चार आतंकी कैंपों का सीधे नियंत्रण देख रहा है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा के कुनार और नांगरहार में ऐसे तीन कैंप चल रहे हैं.

मॉनिटरिंग टीम की यह 13वीं रिपोर्ट है और बीते साल 15 अगस्त को काबुल पर तालिबान के नियंत्रण के बाद यह पहली रिपोर्ट है.

ज्ञानवापी पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद का प्रस्ताव

ज्ञानवापी मस्जिद

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सहारनपुर के देवबंद में मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सम्मेलन के दूसरे दिन काशी की ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा की ईदगाह के संबंध में एक अहम प्रस्ताव पारित किया गया.

दारुल उलूम देवबंद के पदाधिकारी मुफ्ती राशिद आज़मी ने प्रस्ताव पर सहमति जताई. उन्होंने कहा कि देश की आज़ादी में जमीयत का अहम योगदान रहा है.

दैनिक जागरण अख़बार लिखता है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद की इस सम्मेलन में प्राचीन इबादतगाहों पर बार-बार विवाद खड़ने पर चर्चा हुई है.

प्रस्ताव में देश में अमन और शांति को खराब करने वाली शक्तियों और उनको समर्थन देने वाले राजनीतिक दलों के रवैये से गहरी नाराज़गी ज़ाहिर करती है.

प्रस्ताव में कहा गया कि 'बनारस की ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा की एतिहासिक ईदगाह और अन्य मस्जिदों के खिलाफ़ इस समय ऐसे अभियान जारी हैं, जिससे देश में अमन शांति और उसकी गरिमा और अखंडता को नुकसान पहुंचा है, अब इन विवादों को उठाकर साम्प्रदायिक टकराव और बहुसंख्यक समुदाय के वर्चस्व की नकारात्मक राजनीति के लिए अवसर निकाले जा रहे हैं. हालांकि यह स्पष्ट है कि पुराने विवादों को जीवित रखने और इतिहास की कथित ज़्यादतियों और गलतियों को सुधारने के नाम पर चलाए जाने वाले आंदोलनों से देश का कोई फ़ायदा नहीं होगा.'

चार धाम में तीर्थ यात्रियों की मौत का आंकड़ा 100 पार

केदारनाथ

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चार धाम यात्रा में तीर्थ यात्रियों की मौत का आंकड़ा 100 पार हो गया है. केदारनाथ धाम में अब तक सबसे अधिक 50 यात्रियों ने दम तोड़ा है.

अमर उजाला अख़बार लिखता है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी और ठंड के कारण अचानक हृदय गति रुकने से लगातार यात्रियों की मौतें हो रही हैं.

इस बार तीन मई से चार धाम यात्रा का आग़ाज़ हुआ. 27 दिनों की यात्रा में चारों धामों में अब तक 102 यात्रियों की मौत हो चुकी है. रविवार को ही तीन तीर्थ यात्रियों की मौत हुई है. मौतों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से 50 साल से अधिक आयु के यात्रियों की हेल्थ स्क्रीनिंग की जा रही है.

जिन यात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हैं, उन्हें यात्रा न करने की सलाह दी जा रही है. चारों धामों के यात्रा मार्गों पर स्थापित मेडिकल रिलीफ केंद्रों पर अब तक 50 से अधिक आयु के 5500 से अधिक लोगों की हेल्थ स्क्रीनिंग की गई है जबकि 57 हजार यात्रियों की स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी की गई है.

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