त्रिपुराः बिप्लब देव की सीएम की कुर्सी क्या ख़राब प्रदर्शन के कारण गई?

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- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी के लिए
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री की कुर्सी से इस्तीफा देने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में बिप्लब देव ने कहा, "मैंने त्रिपुरा के लिए काम किया है और मैं पार्टी का आभारी हूं."
मुख्यमंत्री के पद से अचानक इस्तीफा देने की बात पर उन्होंने कहा, "पार्टी सबसे ऊपर होती है. हमलोग भारतीय जनता पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता है."
"बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष अमित भाई शाह जी ने मुझे प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किया था. उसके बाद से मैंने उनके मार्गदर्शन में काम करना शुरू किया."
बिप्लब देव ने कहा, "यह उम्मीद करता हूं कि मुझे पार्टी अध्यक्ष से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक जो भी जिम्मेदारी दी गई थी, मैंने त्रिपुरा के लोगों के पक्ष में पूरी तरह न्याय करने की कोशिश की."
क्या बिप्लब देव से नाखुश था केंद्रीय नेतृत्व? इस सवाल पर पूर्वोत्तर राज्यों में बीजेपी का सांगठनिक कामकाज संभाल रहे पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के तौर पर बिप्लब देव के प्रदर्शन से केंद्रीय नेतृत्व काफी नाखुश था.

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अपना नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बीजेपी के इस वरिष्ठ नेता ने बीबीसी से कहा, "अगर कोई व्यक्ति अच्छा प्रदर्शन कर रहा है तो उसे बदलने की जरूरत नहीं पड़ती है.बीजेपी में प्रदर्शन के आधार पर सभी पदों पर बैठे लोगों के रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा होती है. प्रदर्शन सुधारने के कई मौके भी दिए जाते हैं. लेकिन अगर कोई फिर भी अपने प्रदर्शन में सुधार नहीं करता है तो पार्टी अन्य विकल्पों पर चिंता करती है."
एक सवाल का जवाब देते हुए बीजेपी नेता ने कहा, "मुख्यमंत्री के पद पर बैठे किसी भी व्यक्ति से पार्टी अगर कार्यकाल पूरा करने के एक साल पहले इस्तीफा मांग लेती है तो यह स्पष्ट समझ लेना चाहिए कि उनके कामकाज पर सवाल है. प्रदेश बीजेपी के अंदर एक मुख्यमंत्री से कौन नाराज है और कौन खुश है यह एक दूसरा मुद्दा है. हमारी पार्टी सारे निर्णय प्रदर्शन के आधार पर लेती है."
इससे पहले भी बीजेपी ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उत्तराखंड में मुख्यमत्री तीरथ सिंह रावत को हटाकर पुष्कर सिंह धामी को प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान सौंपी थी.
बीजेपी को इस प्रयोग का हाल ही में संपन्न हुए उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में फायदा हुआ और पार्टी को दोबारा सत्ता मिली. बीजेपी एकबार ऐसा ही प्रयोग पूर्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा में करने जा रही है.

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माणिक साहा होंगे नए मुख्यमंत्री
इस बीच डॉ माणिक साहा को त्रिपुरा का नया मुख्यमंत्री नामित किया गया है.
बिप्लब देव ने ही विधायक दल की बैठक में डॉ. साहा के नाम का प्रस्ताव रखा था.
साल 2018 में जब बिप्लब देव को पार्टी ने त्रिपुरा का मुख्यमंत्री नियुक्त किया उसके बाद डॉ. साहा को प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया.
डॉ साहा को बिप्लब देव का काफी करीबी माना जाता है.
इसी साल अप्रैल में हुए राज्यसभा चुनाव में जीतकर डॉ. साहा संसद पहुंचे हैं. पेशे से दंत चिकित्सक डॉ. साहा को प्रदेश में काफी सज्जन व्यक्ति के तौर देखा जाता है.
हालांकि चुनावी राजनीति में उनका अनुभव बहुत कम है. इससे पहले कांग्रेस में रहते हुए 1995 में डॉ. साहा ने केवल एक बार वॉर्ड कमिश्नर का चुनाव जीता था.

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क्या डॉ. साहा, बीजेपी को चुनाव जिता पाएंगे?
इस सवाल का जवाब देते हुए राज्य के वरिष्ठ वकील और राजनीतिक विश्लेषक संदीप दत्ता चौधरी कहते है, "दरअसल मुख्यमंत्री बिप्लव देव के खिलाफ कई कारणों से आज जो माहौल है उसमें काफी विरोधी लहर है. इसके अलावा बीजेपी ने सत्ता में आने से पहले लोगों से जो वादे किए थे उनको बिप्लव देव की सरकार पूरा नहीं कर सकी."
"इस बात को लेकर भी लोग चर्चा कर रहे हैं. लिहाजा बीजेपी ने साफ सुथरी छवि वाले डॉ. माणिक साहा को अगले चुनाव में पार्टी के नए चेहरे के तौर पर पेश किया है."
राज्य में मौजूदा ज्वलंत मुद्दों पर दत्ता चौधरी कहते है, "राज्य में माकपा के लंबे शासन में बेरोजगारी समेत कई समस्याएं थीं और प्रदेश के नाराज लोगों ने उन्हें हटाकर बीजेपी को मौका दिया. लिहाजा सरकार को अपने काम से जवाब देने की जरूरत थी. अब फिर से लोग इन्हीं समस्याओं पर बात कर रहे हैं."
ऐसी चर्चा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुलाकात के दौरान बिप्लब देव से कहा था कि त्रिपुरा चुनाव में बीजेपी एक नए चेहरे के साथ जाना चाहती है.
इसके बाद शनिवार को बिप्लब देव ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. त्रिपुरा में अगला विधानसभा चुनाव मार्च 2023 तक होने वाला है.

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बीजेपी में अंदरूनी कलह के संकेत
दरअसल, 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने घोषणापत्र 'विजन डॉक्युमेंट त्रिपुरा 2018' में कहा था कि राज्य में खाद्य प्रसंस्करण, बांस, आईटी और वस्त्र जैसे क्षेत्रों के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) स्थापित किए जाएंगे.
बीजेपी ने हर घर को रोजगार, महिलाओं को स्नातक तक मुफ्त शिक्षा, राज्य सरकार के कर्मचारियों को 7वां वेतन आयोग और युवाओं को मुफ्त स्मार्टफोन देने का भी वादा किया था.
त्रिपुरा में लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे शेखर दत्ता बीजेपी सरकार के कामकाज पर कहते हैं, "पिछले चार साल में मुख्यमंत्री के तौर पर बिप्लब देव का प्रदर्शन बेहद खराब रहा. बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में जो वादे किए थे उनमे से कोई वादा पूरा नहीं किया गया."
"केवल राज्य सरकार के कर्मचारियों को 7वां वेतन आयोग के समान वेतन देने के वादे को आंशिक रूप से पूरा किया गया. प्रदेश में बेरोजगारी को लेकर युवाओं में आक्रोश है. बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की देव को 2020 के सितंबर में हटाने की योजना थी. लेकिन उस समय अलग-अलग कारणों से कुछ नहीं हुआ."
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दत्ता आगे कहते हैं, "अगले साल फरवरी में यहां विधानसभा चुनाव है, लिहाजा बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को यह अहसास हो गया कि बिप्लब के नाम पर अगला चुनाव लड़ना सही नहीं होगा. इसलिए पार्टी ने नए चेहरे के साथ चुनाव में जाना फैसला किया है."
"हालांकि प्रदेश में पूराने बीजेपी नेता डॉ माणिक साहा को सहजता से नहीं ले रहे हैं. शनिवार को जब केंद्रीय पर्यवेक्षक केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और भाजपा महासचिव विनोद तावड़े की मौजूदगी में बिप्लब देब ने डॉ. साहा का नाम अगले मुख्यमंत्री के तौर पर प्रस्ताव रखा तो वरिष्ठ विधायक राम प्रसाद पाल ने अपना विरोध जताया. लिहाजा त्रिपुरा बीजेपी में फिलहाल सबकुछ ठीक नहीं है."
हालांकि केंद्रीय पर्यवेक्षक मंत्री भूपेंद्र यादव ने मीडिया से कहा, 'बिप्लब देब के नेतृत्व में पिछले चार साल में राज्य में काफी विकास हुआ है."
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