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लाउडस्पीकर विवाद पर बयान देकर नीतीश कुमार किस पर निशाना साध रहे हैं
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को एक बयान में धर्मस्थलों से लाउडस्पीकर हटाए जाने को एक फालतू विवाद बताया है.
नीतीश ने कहा है कि बिहार सरकार किसी की धार्मिक प्रथा में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी.
पुर्णिया ज़िले में मीडिया से बात करते हुए नीतीश कुमार ने कहा, "यह बकवास है, बिहार में हम धर्म के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते हैं. हर कोई अपने धर्म को मानने और उसका पालन करने के लिए स्वतंत्र है."
नीतीश का ये बयान ऐसे समय में आया है जब सत्ता में उनकी सहयोगी पार्टी भारतयी जनता पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश में धर्मस्थलों से लाउडस्पीकर उतरवा रही है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा था कि धर्मस्थलों के लाउडस्पीकरों पर अंकुश लगाया जाएगा. इसके बाद से ही प्रदेश के कई शहरों और ज़िलों में मंदिरों और मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतारे जा रहे हैं.
हालांकि इस पर प्रशासन का कहना है कि ये लाउडस्पीकर आपसी सहमति से उतारे जा रहे हैं.
उत्तर प्रदेश में कई हज़ार धर्मस्थलों से लाउडस्पीकर उतार दिए गए हैं और कई हज़ार की आवाज़ को सीमित कर दिया गया है.
बिहार बीजेपी के नेता का बयान
नीतीश के बयान से एक दिन पहले ही बिहार में बीजेपी नेता जनक राम ने शुक्रवार को कहा था कि अगर उत्तर प्रदेश में लाउडस्पीकर पर क़ानून आया है, तो इसका असर बिहार में भी होगा.
नीतीश कुमार सरकार में खान और भूविज्ञान मंत्री जनक राम ने कहा, "देश के क़ानून से बड़ा कोई धर्म नहीं है. देश और राज्य क़ानून से शासित हो रहे हैं. तो अगर यह क़ानून यूपी में आया है तो इसका असर बिहार पर भी पड़ेगा."
उन्होंने कहा, "केंद्र और राज्य के नेता इस पर विचार करने और बिहार में इसे लागू करने के लिए एक साथ बैठेंगे."
अब नीतीश कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार का लाउडस्पीकर पर रोक लगाने का कोई इरादा नहीं है.
लाउडस्पीकर पर विवाद
भारत में लाउडस्पीकर पर विवाद नया नहीं हैं. हिंदूवादी संगठन मस्जिद से अज़ान की आवाज़ को लेकर सवाल उठाते रहे हैं.
साल 2017 में मशहूर गीतकार सोनू निगम ने अज़ान की आवाज़ पर सवाल उठाया था. तब भी अज़ान को लेकर विवाद हुआ था.
उत्तर प्रदेश के बरेली में 2017 में ही हिंदू और मुसलमानों ने प्रशासन को अर्ज़ी देकर मस्जिद से अज़ान की आवाज़ को सीमित करने की गुहार लगाई थी.
प्रशासन ने बाद में मस्जिद से अवाज़ को मुनासिब स्तर तक सीमित करने और ऐसा न करने पर लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई करन के लिए कहा.
वहीं भारत के सुप्रीम कोर्ट ने लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल के लिए एक गाइडलाइन तय कर रखा है. इसके तहत लाउडस्पीकर की आवाज़ की एक सीमा तय की गई थी.
इसके अलावा रात दस बजे से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल पर पांबदी लगी हुई है क्योंकि संविधान की धारा 21 के तहत चैन की नींद सोना नागरिकों के अधिकारों के दायरे में आता है.
ताज़ा विवाद
लाउडस्पीकर को लेकर ताज़ा विवाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे के बयानों के बाद शुरू हुआ है. राज ठाकरे ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने और उनके बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने की चेतावनी दी है.
राज ठाकरे ने अपने समर्थकों से मस्जिद के सामने अज़ान के वक़्त हनुमान चालीसा का पाठ करने की अपील भी की है.
राज ठाकरे ने गुड़ी पड़वा के दिन एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, "मैं धार्मिक रूप से कट्टर नहीं हूं लेकिन मुझे अपने धर्म पर गर्व है. जब धर्म बना होगा तब क्या लाउडस्पीकर्स थे? क्या आपने ऐसे लाउडस्पीकर्स दूसरे देशों में देखा है?"
महाराष्ट्र में राज ठाकरे ने लाउडस्पीकर के ख़िलाफ़ आंदोलन तेज़ कर दिया है और आज (रविवार को) उन्होंने औरंगाबाद कूच किया है जहां उनकी बड़ी रैली है.
वहीं महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी गठबंधन (कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना) के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सरकार ने अभी तक लाउडस्पीकर के ख़िलाफ़ कोई क़दम नहीं उठाया है. ये माना जा रहा है कि राज ठाकरे इस विवाद को अभी और हवा देंगे.
सांसद गिरफ़्तार
राज ठाकरे के ही नक़्शे क़दम पर चलते हुए महाराष्ट्र के अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा ने उद्धव ठाकरे के घर के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने की चेतावनी दी थी.
शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने उनके घर के बाहर प्रदर्शन भी किया.
बाद में महाराष्ट्र की सरकार ने सांसद नवनीत कौर और उनके विधायक पति रवि राणा को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
सांसद नवनीत राणा और उनके पति पर राजद्रोह के अलावा कई धाराएं लगाई गई हैं. उन्हें चौदह दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
उत्तर प्रदेश में हट रहे हैं लाउडस्पीकर
वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी लाउडस्पीकर और धार्मिक जुलूसों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने घोषणा भी की है कि नए धार्मिक स्थलों पर माइक लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
इस बारे में यूपी के मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट करके बताया है, "सभी को अपनी उपासना पद्धति को मानने की स्वतंत्रता है. माइक का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन यह सुनिश्चित हो कि माइक की आवाज़ उस परिसर से बाहर न आए. अन्य लोगों को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए. नए स्थलों पर माइक लगाने की अनुमति न दें."
उत्तर प्रदेश सरकार ने धार्मिक जुलूसों पर भी सख़्ती का आदेश दिया है.
इस बारे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, "बिना अनुमति के कोई भी धार्मिक जुलूस नहीं निकाला जाना चाहिए. अनुमति देने के बाद शांति और सौहार्द बरक़रार रखने के लिए एक शपथ पत्र आयोजक को देना चाहिए. अनुमति सिर्फ़ उन्हीं धार्मिक जुलूसों को दी जानी चाहिए जो पारंपरिक रहे हैं. नए कार्यक्रमों को बिना वजह की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए."
उत्तर प्रदेश सरकार के इन आदेशों के बाद से ही प्रदेशभर में धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए जा रहे हैं. जहां लाउडस्पीकर नहीं हटाए गए हैं वहां आवाज़ को सीमित किया जा रहा है. कई शहरों में मंदिरों और मस्जिदों से आपसी सहमति के बाद लाउडस्पीकर उतार दिए गए हैं.
अज़ान के समय हनुमान चालीसा
उत्तर प्रदेश के वाराणासी और अलीगढ़ में हिंदूवादी समूहों ने अज़ान के समय हनुमान चालीसा पाठ करना भी शुरू किया.
मस्जिदों से दिन में पांच बार अज़ान दी जाती है. वाराणासी में इन पांचों वक़्त मंदिरों से हनुमान चालीसा पाठ किया गया.
अलीगढ़ में भी ऐसे ही प्रयास हुए. हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार के लाउडस्पीकर को लेकर आदेश के बाद इन्हें रोक दिया गया
नीतीश के बयान में नहीं है गंभीरताः मणिकांत ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार
कोई भी ऐसा मसला जिससे नीतीश कुमार को लगता है कि भारतीय जनता पार्टी दबाव में आएगी तो नीतिश उसे उठाते रहे हैं. इस तरह की बयानबाज़ी ना सिर्फ़ उनकी तरफ़ से बल्कि उनकी पार्टी के प्रवक्ताओं की तरफ़ से भी होती रही है.
चूंकि इस मसले में भारतीय जनता पार्टी का इंट्रेस्ट है और उत्तर प्रदेश में और दूसरी जगहों पर लाउडस्पीकर हटाए जा रहे हैं, ऐसे में नीतीश को ये दिखाना है कि वो इसके ख़िलाफ़ हैं और इसलिए ही उन्होंने ये बयान दिया है. नीतीश ये भी दिखाना चाहते हैं कि वो विपक्ष के भी साथ हैं. देश में जो विपक्ष का मोर्चा बनने की संभावना बन रही है नीतीश वहां भी अपनी जगह रखना चाहते हैं.
हालांकि नीतीश के बयान में बहुत गंभीरता नहीं दिख रही है. अपने बयान में नीतीश ने कहा है कि लाउडस्पीकर विवाद का कोई मतलब नहीं हैं, उन्होंने ये नहीं कहा है कि हम लाउडस्पीकर पर रोक नहीं लगने देंगे, या लाउडस्पीकर नहीं हटने देंगे. वो सीधे तौर पर ऐसा कहने से बचते हुए दिखे हैं.
नीतीश बहुत कठोर भी नहीं होते हैं. ये ऐसे ही है जैसे दो क़दम आगे बढ़कर एक क़दम पीछे हट जाना. इसके बाद ये संदेश देना कि हम हर फ़ैसले में आपके साथ नहीं हैं. वो सत्ता में अपनी सहयोगी पार्टी बीजेपी को यही बताना चाहते हैं.
नीतीश कुमार हाल ही में कई इफ़्तार पार्टियों में भी दिखे हैं और बिहार में विपक्ष के नेताओं के साथ टोपी पहनकर तस्वीर भी खिंचवाई है. ज़ाहिर है ऐसा करने वाले नीतीश अकेले नेता नहीं हैं. ये रवैया लगभग सभी ऐसे राजनेताओं का है जिनकी नज़र वोट बैंक पर होती है.
ऐसा करके वो लोगों को अपने साथ करना चाहते हैं. नेताओं के ऐसे मंसूबे इस तरह के बयानों में और कार्रवाई में झलकते हैं. नीतीश अगर टोपी पहन कर तस्वीर खिंचा रहे हैं तो इसमें कुछ नया नहीं है. इससे पहले भी वो कह चुके हैं कि वो टीका और टोपी दोनों का सम्मान करते हैं और किसी एक के साथ नहीं है बल्कि दोनों के पक्षधर हैं.
इससे साफ़ है कि वो ये चाहते हैं कि उनसे ना मुसलमान नाराज़ हों और ना ही हिंदू समाज के लोग. हालांकि ऐसी रणनीति पर चलने वाले अकेले नेता नहीं हैं. जहां तक मुसलमानों के नीतीश के साथ होने का सवाल है, जब से उन्होंने बीजेपी के साथ सरकार बनाई है, बिहार में मुसलमान बहुत हद तक उनके साथ नहीं हैं. जो मुसलमान उनके साथ दिखते हैं उनके अपने निजी स्वार्थ और हित होते हैं.
जब से नीतीश भारतीय जनता पार्टी के साथ आए हैं, आम मुसलमानों ने नीतीश से दूरी बना ली है. ये कहना ग़लत होगा कि नीतीश मुसलमानों को अपने साथ रखने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं. जब वो बीजेपी से अलग हो जाएंगे तब शायद बिहार का मुसलमान समुदाय ये मानने लगे कि नीतीश हमारे हक़ की बात करते हैं.
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