अमेरिका में पढ़ी लड़की क्यों पहुंची थी बलात्कार के अभियुक्त बाबा के आश्रम में?

    • Author, अनंत प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

"हम अभी कुछ नहीं कह सकते...सोमवार को कोर्ट का फ़ैसला आएगा, तब कुछ कह पाएंगे."

ये शब्द हैं राम रेड्डी के जिनकी बेटी संतोष रूपा अब से लगभग सात साल पहले उन्हें कुछ बताए बिना अमेरिका से सीधे बलात्कार के अभियुक्त बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के विवादित आश्रम में रहने आ गई थी जो कई सालों से फ़रार हैं.

38 वर्षीय संतोष रूपा उन कई महिलाओं में शामिल हैं जो आज भी दिल्ली के रोहिणी में स्थित पांच मंज़िला ऊंची क़िलेनुमा इमारत में रहती हैं.

इनमें से कई महिलाओं के घर वाले राम रेड्डी की तरह अपनी बेटियों को विवादित आश्रम से निकालने की कोशिश करते रहे हैं.

लेकिन ये पहला मौका नहीं है जब इस विवादित आश्रम से जुड़ा मामला कोर्ट पहुंचा हो.

जब छुड़ाई गई 41 नाबालिग़ लड़कियां

इससे पहले साल 2017 में इसी विवादित इमारत पर सीबीआई और पुलिस ने छापा मारकर यहां से 41 नाबालिग़ लड़कियों को छुड़ाया था.

इस पूरे विवाद के केंद्र में 75 वर्षीय बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित हैं जो ख़ुद को शिव का अवतार बताते हैं. इनके ख़िलाफ़ अलग-अलग थानों में बलात्कार समेत कई मामले दर्ज हैं.

वीरेंद्र दीक्षित के ख़िलाफ़ बलात्कार से लेकर यहां रहने वाली लड़कियों से मालिश करवाने और यौन संबंध बनाने जैसे तमाम गंभीर आरोप भी हैं.

इस मामले में जनहित याचिका दायर करने वाली एक ग़ैर-सरकारी संस्था के वकील के मुताबिक़, ''वीरेंद्र देव दीक्षित अपने आपको शिव का अवतार बताते थे और शिवलिंग की तरह अपने लिंग की पूजा करने को कहते थे.''

सीबीआई ने इस मामले की जांच करने के बाद उनके ख़िलाफ़ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया. लेकिन इसके पांच साल बाद भी भारत की तमाम सुरक्षा एजेंसियां वीरेंद्र देव दीक्षित को पकड़ने में नाकामयाब रही हैं.

इसके बावजूद ये विवादित आश्रम पहले की तरह चल रहा है और आज भी यहां 150 से ज़्यादा लड़कियां मौजूद हैं जो कि कथित रूप से जानवरों की तरह रखी जा रही हैं.

दिल्ली हाई कोर्ट ने जताया आश्चर्य

दिल्ली हाई कोर्ट ने बीते मंगलवार इस मामले पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि देश की राजधानी में ये सब कैसे चल रहा है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार इस आश्रम को अपने नियंत्रण में लेने पर विचार करे.

लाइव लॉ के मुताबिक़, दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और जस्टिस नवीन चावला की डिविज़न बेंच ने कहा है कि "बाथरूम में भी दरवाज़े नहीं हैं. हालत ये है और ये सब देश की राजधानी में हो रहा है. ये काफ़ी चौंकाने वाला है. इसका हल निकाला जाना चाहिए."

इस मामले में अगली सुनवाई आगामी सोमवार को होनी है जिसके बाद ये तय किया जाएगा कि दिल्ली सरकार इस आश्रम को अपने नियंत्रण में लेती है या नहीं.

संतोष रूपा के पिता राम रेड्डी बेसब्री से सोमवार को आने वाले फ़ैसले का इंतज़ार कर रहे हैं.

कौन हैं संतोष रूपा?

राम रेड्डी और मीनावती के घर जन्म लेने वाली 38 वर्षीय संतोष रूपा ने नैनो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अमेरिका की प्रतिष्ठित लुइसविले यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है.

इससे पहले उन्होंने जवाहरलाल नेहरू टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई की थी. लेकिन साल 2015 से कुछ समय पहले संतोष रूपा को कमर में गंभीर दर्द का सामना करना पड़ा.

राम रेड्डी के वकील श्रवण कुमार के मुताबिक़, संतोष रूपा ने बताया है कि नेचुरोपैथी यानी प्राकृतिक चिकित्सा से राहत मिलने की वजह से उन्होंने ध्यान आदि शुरू किया.

संतोष जब इस गंभीर दर्द से गुज़र रही थीं तभी उन्हें यूट्यूब के माध्यम से दिल्ली के रोहिणी स्थित वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रम के बारे में पता चला.

इसके बाद संतोष रूपा साल 2015 में अमेरिका छोड़कर सीधे वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रम पहुंच गईं.

श्रवण कुमार बताते हैं, "यूट्यूब पर वीडियो देखने के बाद संतोष रूपा अपने घरवालों को बताए बिना अमेरिका से सीधे इस आश्रम में पहुंच गईं. इसके बाद उन्होंने पुलिस और अपने घरवालों समेत कई विभागों को एक चिट्ठी लिखी जिसमें उन्होंने लिखा कि 'मैं यहां पर अपनी मर्ज़ी से रह रही हूं'."

इसके बाद से संतोष रूपा के माता-पिता उन्हें इस आश्रम से निकालने की क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं.

इस विवादित आश्रम में रहने वाली महिलाओं की ओर से लिखे गए इस तरह के पत्र पहले भी सार्वजनिक हुए हैं.

श्रवण कुमार बताते हैं, "साल 2017 में भी जब अदालत द्वारा बनाई गई समितियां 2017 और 2018 में गई थीं तो उन्हें भी ऐसे ही सैकड़ों पत्र मिले थे. इन चिट्ठियों में यहां रहने वाली तमाम महिलाओं के हस्ताक्षर थे और ये पत्र एक जैसे थे. ये आश्रम यहां रहने वाली महिलाओं से ऐसे पत्र लिखवाकर सरकारी विभागों को भेजते हैं और मांग करते हैं कि उन्हें उनके घरवालों से बचाने के लिए सुरक्षा दिलाई जाए."

क्या कहते हैं संतोष रूपा के वकील

इस मामले में संतोष रूपा और आश्रम की ओर से कोर्ट में पेश हुए वकील अमोल कोकने ने बीबीसी से बात करते हुए संतोष रूपा का पक्ष रखा.

कोकने कहते हैं, "उन लोगों ने अदालत के सामने याचिका दी है कि संतोष रूपा को रिलीज़ किया जाए. इस मामले में फ़ैसला संतोष रूपा के पक्ष में होगा क्योंकि वह एक वयस्क महिला हैं. उनकी उम्र आज 38 वर्ष है और वह इस आश्रम में अपनी मर्ज़ी से रह रही हैं. उन्होंने कोर्ट के समक्ष पहले भी अपने बयान दिए हैं. उनका सारा रिकॉर्ड कोर्ट के सामने मौजूद है. ऐसे में ये फ़ैसला तो संतोष रूपा के हक़ में होगा और उन्हें उनके माता-पिता को सौंपा नहीं जाएगा."

लेकिन इससे पहले यहां पर नाबालिग़ लड़कियों को रखे जाने से जुड़ी ख़बरें भी आई हैं.

बीबीसी ने सीबीआई से बात करने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली. अगर बात होती है तो केंद्रीय एजेंसी पक्ष जोड़ दिया जाएगा.

हाई कोर्ट को देना पड़ा दखल

आश्रम के पड़ोस में रहने वालों ने नाम न बताने की शर्त पर यहां का हाल बयां किया.

एक महिला ने बताया, 'पहले तो यहां 11-12 साल की बच्चियां आती थीं. फिर उन्हें भट्टी रस्म के लिए माउंट आबू ले जाया जाता था. अभी भी यहां रहने वाली लड़कियों की उम्र 20 से 25 के बीच होगी. कुछ महिलाएं ज़्यादा उम्र की भी हैं. ये रविवार के दिन कहीं जाती हैं, लेकिन पास-पड़ोस में कभी किसी से बातचीत नहीं करतीं. कई बच्चियों के माँ-बाप आते हैं, रोते-बिलखते रहते हैं लेकिन ये लोग मिलवाना तो दूर दरवाज़ा तक नहीं खोलते. घरवालों का पूरा-पूरा दिन यहां सड़क पर बैठे-बैठे बीत जाता है, लेकिन सुनवाई नहीं होती.''

इस बातचीत को सुनते हुए वहीं मौजूद एक शख़्स ने कहा कि ''यहां कई बार पुलिसवालों की बच्चियां तक फंस गई हैं और वो बेचारे भी नहीं निकाल पाए, आम आदमी की क्या बात करें?''

हालांकि बीबीसी इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाया है. संतोष रूपा के घरवालों की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही है.

कोरोना जैसे भयानक दौर और उससे पहले से अपनी बेटी को यहां से निकालने की कोशिश करने वाले संतोष रूपा के पिता की उनसे मुलाक़ात दिल्ली हाई कोर्ट के दखल के बाद संभव हुई.

श्रवण कुमार के दावे के मुताबिक़, "दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में स्थानीय डीसीपी से कहा था कि वे मां-बाप की बेटी से मुलाक़ात करवाएं. इसके बाद ही संतोष रूपा अपने घरवालों से मिल सकीं. संतोष रूपा ने घरवालों के सामने शर्त भी रखी कि आप केस वापस लो तभी मुलाकात करूंगी.

एक बार संतोष रूपा के घरवाले उनसे मिलने इस बिल्डिंग में पहुंचे थे तो आश्रम वालों ने पूरी तरह घेर लिया. वे बाउंसर्स जैसे थे...मज़बूत कदकाठी वाली महिलाओं ने घरवालों को संतोष रूपा से मिलने भी नहीं दिया. यहां तक कि मां-बाप अपनी बेटी को छू भी नहीं सके."

दिल्ली हाई कोर्ट के दखल के बाद जब राम रेड्डी की मुलाक़ात संतोष रूपा से हुई तो वह उनकी हालत देखकर परेशान हो गए.

श्रवण कुमार बताते हैं, "संतोष रूपा के घरवाले उनकी सेहत को लेकर चिंतित हैं. वो कहते हैं कि 'उनकी बेटी की हालत बहुत ख़राब है, जब वह अमेरिका में थी तो वह काफ़ी स्वस्थ थी लेकिन अब उसके दांत काले हो गए हैं, उसे किसी तरह का नशीला पदार्थ दिया जा रहा है. यूं ही किसी के दांत काले नहीं हो जाते.'

घरवाले अपनी बेटी का इलाज़ कराना चाहते हैं. लेकिन लड़की का कुछ इस तरह ब्रेनवॉश किया गया है कि वह कहती है कि दुनिया ख़त्म होने वाली है और वह लोग नई दुनिया बनाएंगे."

साल 2017 में जब सीबीआई ने इस आश्रम पर छापा मारा था तब दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने आश्रम के अंदर का हाल बताया था.

उन्होंने कहा था कि जब वे अंदर पहुंचीं तो उन्हें ऐसे पत्र मिले जिनमें लड़कियों से कथित बाबा के लिए आपत्तिजनक बातें लिखवाई गई थीं और आश्रम से ढेरों दवाइयां, इंजेक्शन और इस्तेमाल की हुई सुइयां बरामद की गई थीं.

साल 2017 में क्या हुआ था?

साल 2017 में सीबीआई और दिल्ली पुलिस की तमाम टीमों ने इस इमारत पर छापा मारकर 41 नाबालिग़ लड़कियों को आज़ाद कराया था.

बीबीसी संवाददाता सर्वप्रिया सांगवान की तब की रिपोर्ट के मुताबिक़, वीरेंद्र देव दीक्षित के ख़िलाफ़ अलग-अलग थानों में 10 एफ़आईआर दर्ज हैं जिनमें से ज़्यादातर बलात्कार के मुक़द्दमे हैं.

इसके साथ ही पुलिस की डायरी एंट्री में एक महिला की आत्महत्या का मामला भी दर्ज है. 7 दिसंबर 2016 को जीटीबी अस्पताल ने ये मामला दर्ज करवाया था. इस महिला ने कथित तौर पर आश्रम की छत से कूद कर जान दे दी थी.

इसके अलावा 4 मार्च 2017 को एक महिला द्वारा आश्रम में कथित तौर पर फांसी लगाने का मामला सामने आया था. केस की जांच के दौरान आश्रम की महिलाओं ने उस पर भूत-प्रेत का साया होने की बात कही थी.

फ़ाउंडेशन फ़ॉर सोशल एंपावरमेंट नामक गैर सरकारी संस्था ने इस मामले में जनहित याचिका दाखिल की थी और संस्था के वकील ने बताया था कि वीरेंद्र देव दीक्षित ख़ुद को शिव का अवतार बताते हैं.

वकील ने कहा था, "जिस तरह शिवलिंग की पूजा होती है, उसी तरह वीरेंद्र देव दीक्षित अपने लिंग की पूजा करने को कहते हैं. जो लड़कियां वहां रहती हैं, उन्हें नशे की दवाई पिलाकर रखा जाता है. शुरुआत में लड़कियों से एक रस्म करवाई जाती है जिसे वे 'भट्टी' कहते हैं. इस रस्म के मुताबिक लड़कियों को 7 दिन तक एकांत में रखा जाता है और तब आश्रम में भी किसी से मिलने की इजाज़त नहीं होती. जो लड़कियां ये रस्म कर लेती हैं, उन्हें फिर दूसरे शहरों के आश्रम में भेज दिया जाता है. नाबालिग़ लड़कियों को फुसलाया जाता है कि वे उनकी गोपियां बनेंगी. जो लड़कियां अपने साथ यौन शोषण होने देती हैं, उन्हें कहते हैं कि तुम मेरी 16 हज़ार रानियों में से एक हो."

अब तक फ़रार हैं बाबा

इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू ने यहां से बच निकलने में कामयाब हुई लड़कियों के साथ हुई बातचीत के आधार पर बताया था कि 'लड़कियों को हॉर्मोन बढ़ाने वाली दवाइयां दी जाती हैं ताकि उनसे यौन संबंध बनाए जा सकें. बाबा उनसे मालिश करवाते थे, नहलाने को कहते थे और अपने साथ यौन संबंध बनाने के लिए फुसलाते थे.'

सुषमा साहू के मुताबिक़, कानपुर की एक 13 साल की लड़की ने उन्हें बताया था कि उसे राजस्थान ले जाकर उसका यौन शोषण किया गया और विरोध करने पर उसे मारा-पीटा जाता था.

सीबीआई ने इस मामले की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी है, लेकिन अब तक इस बारे में पर्याप्त जानकारी निकलकर सामने नहीं आई है.

इसके साथ ही सीबीआई ने वीरेंद्र देव दीक्षित के ख़िलाफ़ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया हुआ है. इसके साथ ही सीबीआई ने वीरेंद्र देव दीक्षित से जुड़ी जानकारी देने पर पांच लाख के इनाम का भी एलान किया है.

लेकिन इन तमाम प्रयासों के बावजूद अब तक वीरेंद्र देव दीक्षित पुलिस की पकड़ से बाहर हैं.

हालांकि, आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के यूट्यूब चैनल पर उनके ऑडियो या वीडियो जारी किए जा रहे हैं. सबसे आख़िरी वीडियो बीती 19 अप्रैल को जारी किया गया था.

संतोष रूपा के मामले में अब क्या होता है ये सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में तय हो सकता है. उनके माता-पिता बेसब्री से अदालत के फ़ैसले का इंतज़ार कर रहे हैं.

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