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मोदी और आंबेडकर पर इलैयाराजा ने ऐसा क्या कहा जिससे मच गया हंगामा
- Author, बीबीसी तमिल सेवा
- पदनाम, .
एक किताब की प्रस्तावना में जाने-माने तमिल संगीतकार इलैयाराजा ने भीमराव आंबेडकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच समानताएं बताई हैं और इसलिए किताब की प्रस्तावना विवाद का विषय बन गई है.
प्रस्तावना में इलैयाराजा ने मोदी की प्रशंसा की और उनकी तुलना आंबेडकर से की है.
इस पर द्रविड़ और दलित संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
वहीं बीजेपी के राज्य और केंद्र के नेताओं ने उनका समर्थन किया है.
इलैयाराजा खुद एक दलित हैं, लेकिन वो अक्सर ख़ुद को इस पहचान से दूर कर करते रहे हैं. उनके पिता कम्युनिस्ट मंचों पर गाना गाया करते थे.
इलैयाराजा ने क्या कहा?
ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन से प्रकाशित अंग्रेजी किताब 'आंबेडकर एंड मोदी - रिफॉर्मर्स आइडियाज परफॉर्मर्स इम्प्लीमेंटेशन' के लिए संगीतकार ने दो पन्ने की प्रस्ताव लिखी.
14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती के जन्मदिन के उपलक्ष्य में पुस्तक का विमोचन किया गया.
प्रस्तावना आंबेडकर और मोदी के बीच समानताएं दर्शाती है और दोनों की जमकर प्रशंसा करती है.
प्रस्तावना की शुरुआत डॉक्टर आंबेडकर की समझदारी और भेदभाव के ख़िलाफ़ उनकी लड़ाई की प्रशंसा से होती है.
इसमें लिखा गया है, "हम सभी ने उनके काम की महानता को देखा है, जो अधिकार उन्होंने हमारे संविधान के माध्यम से हम सभी को सुनिश्चित किए हैं. डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर एक दुर्लभ नेता हैं जिन्होंने अपने जीवन के दौरान इतिहास रचा और अपने मरने के दशकों बाद भी उन्हें व्यापक रूप से पढ़ा और उनका अनुसरण किया जा रहा है."
इलैयाराजा आगे कहते हैं कि उन्होंने पीएम मोदी के शब्दों के ज़रिए आंबेडकर के बारे में कुछ नई बातें सीखीं.
वह लिखते हैं, "कुछ साल पहले, मैंने समाचार में पढ़ा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉक्टर आंबेडकर को भारत की जल और नदी नेविगेशन नीति का वास्तुकार कहा था. मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि बाबासाहेब ने पानी और सिंचाई से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण संस्थानों के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी. इसके बारे में प्रधानमंत्री मोदी जी के 2016 में एक निवेश शिखर सम्मेलन में दिए गए भाषण के ज़रिए पता चला."
इसके बाद इलैयाराजा ने कहा कि "मोदी ने कई कानूनों, संवैधानिक सुरक्षा और लंबे समय से लंबित ओबीसी आयोग की स्थापना के माध्यम से सामाजिक रूप से हाशिए के समुदायों के लिए कानूनी सुरक्षा को मजबूत किया है."
इलैयाराजा ने तीन तलाक़ को ख़त्म करने जैसे विवादास्पद फ़ैसले के लिए भी पीएम मोदी की प्रशंसा की और कहा कि आंबेडकर को इस पर गर्व होता होगा.
इलैयाराजा ने कहा, "तीन तलाक पर प्रतिबंध और ऐतिहासिक 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' आंदोलन के कारण लिंगानुपात में वृद्धि जैसे महिला समर्थक कानूनों ने सामाजिक परिवर्तन लाया है, ये सब ऐसा काम है जिस पर आंबेडकर को गर्व होगा."
नेता और आम लोग इस पर क्या कह रहे हैं?
इलैयाराजा का नाम विवादों से जुड़ा रहता है, उनके इस बयान ने भी तमिलनाडु में एक विवाद पैदा कर दिया है, बीजेपी और उसके सहयोगियों ने उनका समर्थन किया है, और द्रविड़ और दलित खेमे उनकी कड़ी आलोचना कर रहे हैं.
बीबीसी तमिल से बात करते हुए, तमिलनाडु में एससी/एसटी लोगों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एनजीओ 'एविडेंस' से जुड़े कथिर कहते हैं कि यह कोई मुद्दा नहीं होता अगर इलैयाराजा ने कहा होता कि मोदी उनके पसंदीदा नेता हैं.
वह कहते हैं, "आंबेडकर ने जीवन भर जाति उत्पीड़न और वर्ण व्यवस्था के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी. इलैयाराजा उनकी तुलना एक ऐसी पार्टी के नेता से कर रहे हैं, जिसका रुख़ इसके विपरीत है. यह कैसे सही हो सकता है?"
काथिर ने कहा कि लोग आमतौर पर कहते हैं कि 'बस उनका (इलैयाराजा) संगीत सुनो'. मैं यही कहता हूं, वह अपने संगीत के साथ-साथ राजनीति पर भी बोलें लेकिन अगर उनकी राजनीति उचित नहीं है, तो इसकी आलोचना होगी.
इलैयाराजा के समर्थन में बीजेपी
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 18 अप्रैल को इलैयाराजा के समर्थन में कहा, "राज्य में सत्ताधारी दल से जुड़े तत्वों ने देश के बड़े संगीतकार की मौखिक रूप से लिंचिंग, आरोप लगाने और अपमानित करने में कोई क़सर नहीं छोड़ी है. क्योंकि उनके ऐसे विचार हैं जो किसी एक राजनीतिक दल और उनके सहयोगियों के अनुकूल नहीं हैं."
इस बीच, तमिलनाडु बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने संगीतकार को भारत रत्न दिए जाने की मांग की है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर इलैयाराजा को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया जाता है तो यह सम्मान की बात होगी.
बेटे की बग़ावत
इस विवाद के बीच, इलैयाराजा के बेटे युवान शंकर राजा, जो तमिल इंडस्ट्री में एक प्रसिद्ध संगीतकार हैं, उन्होंने इंस्टाग्राम में अपनी एक काले रंग की टी-शर्ट में एक तस्वीर पोस्ट की है. इस पर कैप्शन लिखा है- 'डार्क द्रविड़ियन' गर्वित तमीज़ान.'
काले रंग को आमतौर पर द्रविड़ आंदोलन से जोड़ कर देखा जाता है. ऐसे में माना जा रहा है कि युवान का ये पोस्ट उनके पिता के लिखी प्रस्तावना के विरोध में है.
इलैयाराजा का जवाब
बताया जा रहा है कि इस विवाद पर इलैयाराजा ने अपने भाई गंगई अमरन से कहा है, "मैं अपने बयानों का राजनीतिकरण नहीं करना चाहता, मैं मोदी को वोट नहीं दूंगा. और न ही मैं कहूंगा कि उन्हें वोट न दें."
इलैयाराजा को उनके मनमौजी स्वभाव के लिए उतना ही जाना जाता है, जितना कि उनके आत्मा को झकझोर देने वाले संगीत के लिए. कई बार वो प्रेस कॉन्फ्रेंस और मंच पर अपना आपा खो चुके हैं.
वह रेडियो स्टेशनों को अपने गीतों को प्रसारित करने से रोकने जैसे विवादास्पद फैसले ले चुके हैं. साथ ही वो गायकों को अपने गीतों को लाइव शो में गाने से रोक चुके हैं, क्योंकि गायकों ने रॉयल्टी का भुगतान किए बिना उनका गाना गाया था.
इन सबके बावजूद, तमिल लोग उन्हें एक ऐसे संगीतकार के रूप में सम्मान देते हैं जिन्होंने उनके जीवन और भावनाओं को आवाज़ दी.
इलैयाराजा ने 1976 में 'अन्नाकिली' फिल्म के साथ एक संगीतकार के रूप में अपना करियर शुरू किया, और तब से अब तक वह 1,400 से अधिक फिल्मों में संगीत दे चुके हैं. उन्होंने चीनी कम और पा जैसी हिंदी फिल्मों के लिए भी संगीत दिया है.
उन्हें पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है.
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