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उत्तराखंड में HIV संक्रमित महिला पर नाबालिग का यौन शोषण करने का आरोप
- Author, वर्षा सिंह
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तराखंड के उधम सिंह नगर में 23 वर्षीय महिला पर 15 साल के भतीजे के यौन शोषण का केस दर्ज हुआ है.
अभियुक्त महिला एचआईवी संक्रमित है. उसके पति की मौत भी पिछले वर्ष दिसंबर में एचआईवी संक्रमण के चलते हुई थी. बच्चे की एचआईवी रिपोर्ट नेगेटिव आई है.
नाबालिग बच्चे के मां-बाप की शिकायत पर रुद्रपुर के ट्रांज़िट कैंप थाने में केस दर्ज किया गया है.
इस मामले की जांच कर रही सब इंस्पेक्टर रीता चौहान ने बताया कि पॉक्सो एक्ट और आईपीसी की धारा-270 के तहत केस दर्ज किया गया है.
धारा-270 के तहत दुर्भावना से जीवन के लिए ख़तरनाक बीमारी का संक्रमण फैलाने का अपराध शामिल होता है.
क्या था पूरा मामला
रीता बताती हैं कि 2 अप्रैल को लड़के के पिता थाने आए थे. उन्होंने तहरीर दी कि उनके 'बेटे के साथ चाची ने जबरन शारीरिक संबंध बनाए. वह ब्लैकमेल भी कर रही थी कि इसके बारे में किसी को बताया तो वह उस पर ज़बरदस्ती करने का आरोप लगाएगी.'
बीते 30 मार्च को अभियुक्त महिला बच्चे को ब्लैकमेल कर रही थी. उसी समय उसकी मां ने ये बातें सुनीं जिसके बाद लड़के ने पूरे मामले के बारे में बताया.
अभियुक्त महिला फ़िलहाल न्यायिक रिमांड में है.
पीड़ित लड़के के पिता बताते हैं कि 'अभियुक्त महिला पीलीभीत में अपने ससुराल में सास और ननद के साथ रहती थी. होली के समय वे भी अपने परिवार के साथ गांव गए हुए थे. जब उसने लड़के के साथ पहली बार शारीरिक संबंध बनाए. उनके लड़के ने बताया कि ऐसा उसकी सहमति के बग़ैर किया गया. इससे इनकार करने पर चाची ने उस पर ज़ोर-जबरदस्ती करने का आरोप लगाने और शर्मिंदा करने की धमकी दी.'
पिता के मुताबिक, 30 मार्च को आरोपी महिला रुद्रपुर आई हुई थी. वहां भी लड़के के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए, जब वह उसे डांट रही थी तो लड़के की मां ने उनकी बातचीत सुन ली.
वह बताते हैं कि उनके छोटे भाई की मौत दो दिसंबर 2021 को हुई थी. उसकी शादी को 5 वर्ष हो चुके थे. शादी के 6 महीने बाद ही उसकी तबियत बिगड़ने लगी. जांच के बाद पता चला कि वह एचआईवी संक्रमित था. इसके बाद उसकी पत्नी की भी जांच करायी गई और वह भी एचआईवी संक्रमित निकली. आरोपी महिला का एचआईवी संक्रमण का इलाज चल रहा है. यह स्पष्ट नहीं हुआ कि एचआईवी संक्रमण पति से पत्नी को हुआ था या पत्नी से पति को.
वो कहते हैं, "वह हमसे बेटे को गोद लेने और उसे गांव में ही भेजने की बात कहती थी. हम इसके लिए तैयार भी हो रहे थे. मेरे लड़के ने 8वीं की परीक्षा दी है. हम उसे गांव भेजते उससे पहले ही ये सारा मामला सामने आ गया. अगर हम उसे गांव भेज देते तो क्या होता?"
हालांकि बेटे की एचआईवी रिपोर्ट नेगेटिव आने पर वो राहत में हैं और एक महीने बाद उसका दोबारा मेडिकल कराया जाएगा.
पुरुषों के साथ यौन अपराध
देहरादून में वकील अनुपमा गौतम कहती हैं, "यौन अपराध जैसे मामले अब जेंडर आधारित नहीं रह गए हैं. महिलाओं पर भी अब इस तरह के आरोप लग रहे हैं. लड़कों के साथ यौन अपराध के ज़्यादातर मामले दर्ज ही नहीं होते. दर्ज होते भी हैं तो उन पर जल्द कार्रवाई नहीं होती. उनके मुताबिक ऐसे ज़्यादातर मामलों में महिलाएं बड़ी उम्र की होती हैं."
वह अपने एक केस का हवाला देती हैं जिसमें 21 वर्ष के लड़के ने 45 वर्ष की महिला से दबाव में शादी की. "इस केस में महिला ने लड़के के साथ सहमति से यौन संबंध बनाए. फिर उस पर शादी का दबाव बनाया और इसके लिए उसे ब्लैकमेल किया. हमारे सामने ऐसे मामले अब आ रहे हैं. समाज में बदलाव आ रहा है."
अनुपमा बताती हैं कि कानून के तहत महिलाओं पर सीधे बलात्कार का केस दर्ज नहीं होता. पुरुषों के साथ यौन शोषण बलात्कार की क़ानूनी परिभाषा में नहीं आता इसलिए ऐसे मामलों में महिलाओं पर यौन उत्पीड़न, चोट पहुंचाने जैसा केस दर्ज किया जाता है. रुद्रपुर के इस मामले में पीड़ित बच्चे के नाबालिग होने पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.
रुद्रपुर के एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने पॉक्सो एक्ट से जुड़ा मामला होने के चलते इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है. लेकिन ये पूछे जाने पर कि क्या ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिनमें महिलाएं यौन उत्पीड़न की दोषी हों, उन्होंने कहा कि ऐसा बेहद कम होता है.
जेंडर से जुड़े मुद्दों पर कार्य कर रही दीपा कौशलम कहती हैं, "अपने कार्य के दौरान मैंने ऐसे भी केस देखे हैं जिसमें औरतों ने पीड़ा दी है. किशोरों के साथ यौन शोषण के मामलों में महिलाएं भी दोषी पायी गई हैं लेकिन ये मामले सामने नहीं आ पाते. समय के साथ महिलाएं भी अपनी यौन इच्छाओं को लेकर जागरुक हुई हैं और इस तरह के मामले बढ़े हैं."
दीपा कहती हैं, "आखिर में अपराध तो अपराध ही होता है. चाहे किसी महिला ने किया हो या पुरुष ने".
वह भी मौजूदा समय में यौन अपराध से जुड़ी कानूनी परिभाषा को जेंडर न्यूट्रल आधार पर नए सिरे से देखने की ज़रूरत पर ज़ोर देती हैं, जिसमें स्त्री के साथ पुरुष और थर्ड जेंडर को भी शामिल किया जाए.
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