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नौ साल तक यौन उत्पीड़न का शिकार रही महिला की कहानी
तेलंगाना में 25 साल की एक महिला ने पिछले सप्ताह पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि गुजरे नौ सालों में 139 लोगों ने उसके साथ कई दफा बलात्कार किया है.
शुक्रवार को हैदराबाद के पुंजागुट्टा पुलिस स्टेशन में इस बाबत केस दर्ज कर लिया गया है. नालगोंडा की रहने वाली यह युवती एक एनजीओ गॉडपावर फाउंडेशन की मदद से न्याय की गुहार लेकर पुलिस थाने पहुंची थी.
बीबीसी तेलुगू सेवा की दीप्ति बाथिनी ने इस लड़की और गॉडपावर फाउंडेशन के राजश्रीकर रेड्डी से बात की है. दीप्ति ने उनसे फोन पर बात की है.
लड़की के मुताबिक, उसे 15 साल की उम्र में शादी के लिए मजबूर किया गया था. उस वक्त उसने दसवीं के इम्तिहान दिए थे.
लड़की ने बताया, "मेरे मां-बाप दिहाड़ी मजदूर हैं. मेरा एक छोटा भाई है. लड़के वालों ने मेरे परिवार पर दबाव डाला और मेरी शादी कर दी. इसमें मेरी राय नहीं ली गई थी."
उन्होंने बताया कि पढ़ाई पूरी करने के लिए उनका नामांकन कराया गया था. वे कहती हैं, "मुझे लग रहा था कि मैं अपनी पढ़ाई पूरी करूंगी. लेकिन, यह एक फर्जीवाड़ा था. मेरे साथ घरेलू कामकाज करने वाली मेड की तरह बर्ताव किया जा रहा था. शादी के तुरंत बाद उन्होंने और दहेज की मांग शुरू कर दी थी. मेरे पेरेंट्स ने वो सब दिया जो उनसे बन सका."
उनकी समस्याएं केवल ज्यादा दहेज मांग के चलते होने वाली घरेलू हिंसा तक सीमित नहीं थीं. वे कहती हैं कि उनके ससुराल वालों ने उन्हें देह व्यापार में धकेल दिया.
वे बताती हैं, "उन्होंने कहा कि वे मुझे दूसरे लोगों के साथ सोने के लिए मजबूर करने से उन्हें अपने पैसे मिलेंगे. उन्होंने धमकी दी कि वे मेरे पेरेंट्स को मार देंगे अगर मैंने इस बारे में उन्हें कुछ भी बताया. मैं डरी हुई थी. मैं चुप रही और एक साल से ज्यादा वक्त तक प्रताड़ना, शोषण और सेक्शुअल हैरेसमेंट सहती रही."
आखिरकार उन्होंने हिम्मत बटोरी और 2010 में अपने पति से तलाक ले लिया.
वे अपने माता-पिता के पास वापस लौट गईं और अपनी ग्रेजुएशन पूरी करने के लिए एक कॉलेज में आवेदन किया. उन्हें उम्मीद थी कि अब उनकी समस्याओं का अंत हो गया है.
वे कहती हैं, "मेरी दोस्ती एक अन्य महिला से हुई. वो जानती थी कि मैं किन मुश्किलों से गुजरी थी. उसने मुझे अपने भाई एम सुमन से मिलवाया. उसने कहा कि वह एक स्टूडेंट यूनियन लीडर है. उन्होंने मुझे मदद करने का वादा किया. लेकिन, उन्होंने मेरी नग्न तस्वीरें और वीडियो बना लीं. उन्होंने मुझे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया."
वे अपनी शिकायत में एम सुमन को मुख्य आरोपी बताती हैं. उन्होंने बताया सुमन और उनकी बहन ने शिक्षा के बेहतर अवसरों के लिए उनके मां-बाप को उनके साथ हैदराबाद जाने के लिए राज़ी कर लिया.
वे कहती हैं, "उन्होंने मेरे माता-पिता से कहा कि वे मेरी पढ़ाई का ध्यान रखेंगे. मुझे न्यूड पिक्चरों और वीडियोज के लिए ब्लैकमेल किया जा रहा था और मुझे हैदराबाद ले जाया गया. तब से मुझे एक ग्रुप से दूसरे ग्रुप में भेजा जाता रहा. वे मुझे लंबे वक्त तक कभी एक घर में नहीं रखते थे."
अपनी पुलिस शिकायत में उन्होंने कहा है कि सुमन और कुछ अन्य लोग एक सेक्स रैकेट चला रहे थे. वे कहती हैं कि उन्हें अलग-अलग लोगों के साथ सोने के लिए मजबूर किया गया.
उन्होंने उनके साथ ज़बरदस्ती सेक्स करने के लिए तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री के कुछ एक्टरों, मीडिया के लोगों, राजनेताओं, राजनेताओं के पर्सनल असिस्टेंट्स का नाम लिया है.
वे कहती हैं, "मुझसे नग्न होकर डांस करने के लिए कहा जाता था. मुझे शराब पीने और ड्रग्स लेने के लिए मजबूर किया जाता था. मैं कुछ दफा प्रेग्नेंट हुई. वे मुझे अबॉर्शन कराने के लिए ले जाते थे. हालांकि, मैं अकेली नहीं थी. वहां और भी लड़कियां लाई जाती थीं."
वे बताती हैं कि कैसे वे गॉडपावर फाउंडेशन के संपर्क में आई. वे बताती हैं कि डेढ़ साल पहले सुमन और अन्य लोगों ने उनसे कहा कि अगर वे उन्हें नौ लाख रुपये दें तो वे उन्हें उनकी न्यूड फोटो और वीडियो वापस लौटा देंगे. वे कहती हैं कि उन्होंने तो पैसे जुटाने का एक प्लान भी बना लिया था.
वे कहती हैं, "मुझे एक सरकारी जॉब ऑफर लेटर के फर्जी दस्तावेज दिए गए. मुझे किसी अमीर शख्स से संपर्क करने के लिए कहा गया था. मैं राजश्रीकर रेड्डी के पास गई. मुझे पता था कि वे एक एनजीओ चलाते हैं. कई हफ्तों तक गुहार लगाने के बाद वे मुझे पैसा देने के लिए राजी हो गए. उन्होंने मुझसे एक वचन पत्र पर दस्तखत कराए थे."
हालांकि, उनकी फोटो और वीडियो उन्हें नहीं दिए गए. उन्होंने कहा कि उनका शोषण जारी रहा.
वे बताती हैं, "उन्होंने मेरे नाम का खाता खोल रखा था. वे मेरे फोटो और ब्योरा डेटिंग साइट्स और सेक्स चैट साइट पर डालते. इसके बाद वे मुझे न्यूड वीडियो कॉल्स करने पर मजबूर करते. इसके बाद वे मेरे खाते में आए हुए पैसे को ले लेते थे."
संयोग से राजश्रीकर रेड्डी ने अपने दफ्तर में एक जॉब ऑफर के लिए लॉकडाउन में उन्हें कॉल कर लिया. उन्होंने बताया कि दो महीने में वे उनके दफ्तर में जॉइन कर सकती हैं.
रेड्डी बताते हैं, "एक दिन वे मेरे दफ्तर में आईं उस वक्त उनको बहुत ब्लीडिंग हो रही थी. वे बेहोश हो गईं. हमने उन्हें प्राथमिक उपचार दिया. तब उन्होंने अपनी पूरी दास्तान सुनाई. हमने उन्हें एनजीओ में रहने के लिए ही कहा. हमने उन्हें उन जगहों के नाम याद करने के लिए कहा जहां उन्हें ले जाया गया था. हमने सबूत जुटाने शुरू कर दिए."
वे बताती हैं कि अपनी शिकायत दर्ज कराने में उन्हें काफी दिक्कतें हुईं. वे कहती हैं, "मुझे जातिवादी गालियां दी गईं. हालांकि, उन्होंने आखिर में केस दर्ज कर लिया."
बीबीसी से बात करते हुए इनवेस्टिगेटिंग ऑफिसर इंस्पेक्टर निरंजन रेड्डी ने कहा कि उन्होंने पीड़िता के बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा, "हम उन्हें मेडिकल एग्जामिनेशन के लिए ले गए. हमने उन्हें काउंसलिंग भी दी. अब हम पीड़िता के बयान दर्ज कर रहे हैं और उनसे सूचनाएं हासिल कर रहे हैं. हम इस बारे में कुछ दिन बाद और ज्यादा जानकारी दे पाने में सक्षम होंगे."
बीबीसी ने सुमन तक पहुंचने की कोशिश की. उनका फोन अनुपलब्ध था. जिस छात्र संगठन का उन्हें सदस्य बताया जा रहा था उसने कहा कि वे कभी भी उस संगठन का हिस्सा नहीं थे.
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