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मथुरा: गो-तस्करी के आरोप में भीड़ ने की मुसलमान शख़्स की पिटाई
- Author, अनंत झणाणे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर प्रदेश के मथुरा से एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमे एक मुसलमान शख़्स को गुस्साई भीड़ बेरहमी से पीट रही है.
मथुरा पुलिस के मुताबिक़ घटना 20 मार्च की है जब आमिर नाम के एक शख़्स जानवरों के कंकालों से लदी गाड़ी गोवर्धन से हाथरस के सिकंदरा राऊ लेकर जा रहे थे. उन्हें मथुरा के राल कस्बे में कथित दो गो-रक्षकों ने रोका.
वायरल वीडियो में गुस्साए लोग आमिर को बेल्ट से पीट रहे हैं और गालियां दे रहे हैं. पीटने वाले लोग आमिर के कपड़े फ़ाड़ देते हैं और उन पर गो तस्करी और गो हत्या का आरोप लगाते नज़र आ रहे हैं.
इस दौरान सफ़ेद कमीज़ पहना एक आदमी आमिर को बचाने की कोशिश करता है लेकिन भीड़ उसे धक्का मार कर किनारे कर देती हैं.
इस घटना का एक और वीडियो सामने आया है जिसमे ज़मीन पर आमिर हाथ जोड़े गिड़गिड़ाते दिख रहे हैं और एक अन्य वीडियो में कंकाल से लदी हुई गाड़ी पलटी नज़र आ रही है.
क्या है पूरा मामला
आमिर ने पुलिस को दी अपनी तहरीर में लिखा है कि वे अपने दो साथियों कासिम और बर्रू के साथ जानवरों के कंकाल, अयूब नाम के एक शख़्स की हड्डी फैक्ट्री में लेकर जा रहे थे.
तहरीर पर दर्ज हुई एफ़आइआर में लिखा है कि रात के आठ बजे विकास शर्मा और बलराम ठाकुर जो ख़ुद के गो रक्षक होने का दावा करते हैं, उन्होंने अपनी गाड़ी आमिर की गाड़ी के सामने रोक कर उनका रास्ता रोका और पूछा कि गाड़ी में क्या है. एफ़आइआर के मुताबिक़ आमिर ने उन्हें बताया की गाड़ी में मृत जानवरों के अवशेष हैं जिसे वे गोवर्धन से सिकंदरा राऊ ले जा रहे हैं.
एफ़आइआर के मुताबिक़ विकास शर्मा और बलराम ठाकुर ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी. देखते ही देखते राल गाँव के लोगों ने उन्हें घेर लिया और मारपीट की और उसके दोनों साथी डर के मारे भाग गए.
अस्पताल में मीडिया से बात करते हुए आमिर ने अपने ऊपर हुए हमले के बारे कहा, "गाड़ी में भैंस की हड्डी ले जा रहे थे. गांव में गाड़ी हमारे पीछे लग गयी. उन्होंने रोका और पूछा क्या है इसमें? मैंने कहा भैंस की हड्डी है. उतनी देर में पब्लिक आ गई, कहने लगी इसे जाने मत देना. फिर रोकने वाले फरार हो गए. भीड़ मुझे मारने लगी. जान से मारने की कोशिश की. बहुत लोग थे. कम से कम 400 से 500 लोग इकठ्ठा हो गए थे."
आमिर के खिलाफ़ भी दर्ज हुई एफ़आइआर
विकास शर्मा पंडित की तरफ से दी गई तहरीर में वे ख़ुद को विश्व हिन्दू परिषद के गो रक्षा विभाग के संयोजक बताते हैं.
इस घटना के समय उनके साथ अखिल भारतीय गोरक्षा सेवा समिति के सचिव सचिन उर्फ़ बलराम ठाकुर भी थे. उन्होंने ग्रामीणों पर हमले का आरोप लगाया है. मामले में दोनों एफ़आइआर में कुल 30 लोग नामजद हैं और 120 से 150 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया.
विकास पंडित ने अस्पताल में मीडिया को बताया कि, "हम एक भागवत कथा से लौट रहे थे. रास्ते में हमें एक पिकअप गाड़ी दिखाई दी जिससे बहुत ज़्यादा बदबू आ रही थी. हमने उसे रोका. रुकवाने के बाद उसमें हमने देखा कि उसमें गो माता के बहुत सारे कटे हुए सर और अंग थे.
"तब वहां गांववालों ने उसे मारना शुरू कर दिया. मैंने उनको बचाने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं माने और वहां से थोड़ा आगे बढ़ने पर उन्होंने हम पर हमला कर दिया. और हमें भी मारना शुरू कर दिया. मैं और मेरा छोटा भाई बलराम ठाकुर घायल हैं. मारने वाले पहचान लिए गए हैं. मौके पर पुलिस आ चुकी थी. वहां पर 150 से 200 लोग थे. मैं चिल्लाता रहा कि हम लोग गो रक्षक हैं, लेकिन वो कहने लगे की तुम गो तस्कर हो. कई लोगों ने शराब पी रखी थी. वो सुनने को तैयार ही नहीं थे."
मामले में चार गिरफ़्तार
घटना की जानकारी मिलने पर मथुरा पुलिस राल कस्बे में पहुँची और उन्होंने आमिर को भीड़ से छुड़ाया. बाद में विकास शर्मा और बलराम ठाकुर और आमिर को अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया.
इस घटना के बारे में मथुरा के एसपी सिटी एमपी सिंह का कहना है, "जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया की रामेश्वर वाल्मीकि जो कि गोवर्धन के रहने वाले हैं, जिनके पास ग्रामीण स्वच्छता के तहत ज़िला पंचायत से मृत पशुओं के शव निस्तारण (निपटाने) के लिए अधिकार पत्र जारी किया गया है. ये अवशेष उन्हें भेजे जा रहे थे. राल क़स्बा में इस गाड़ी को रोक कर गोवंश व गोमांस होने की सूचना पर यह घटना हुई. प्राथमिक छानबीन के क्रम में यह भी प्रकाश में आया गाड़ी में किसी भी तरह का गोमांस नहीं पाया गया है."
इस मामले में पुलिस ने एक प्रेस रिलीज़ जारी कर चार लोगों की गिरफ़्तारी की जानकारी दी है. बीबीसी से मथुरा एसपी सिटी एमपी सिंह ने कहा की गिरफ़्तार किए गए चारों अभियुक्त मारपीट से जुड़े वायरल वीडियो में दिख रहे हैं.
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