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उत्तर प्रदेश में क्या सपा कार्यकर्ताओं पर हो रही है ताबड़तोड़ एफ़आईआर?
- Author, अनंत झणाणे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ से
क्या उत्तर प्रदेश में चुनाव के नतीज़ों के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर कानूनी कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया है?
अखिलेश यादव के आह्वान पर प्रदेश भर में काउंटिंग सेंटर और स्ट्रॉंग रूम पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गाड़ियां रोककर चेकिंग की थी. इसके बाद चुनावी नतीजे आए जिसमें बीजेपी को भारी बहुमत से जीत हासिल हुई.
लेकिन बीजेपी को बहुमत मिलने के बाद से प्रदेश के कई ज़िलों से लोगों पर मुकदमे दर्ज होने की खबरें आ रही हैं.
वाराणसी में 640 लोगों पर मुक़दमा
बीती 8 मार्च को वाराणसी के थाना जैतपुरा में पहड़िया मंडी स्थित मतगणना सेंटर में रखी गयी ईवीएम को जब एक गाड़ी लेकर जा रही थी तब उसे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने घेर लिया और ईवीएम को बदलने का आरोप लगाया.
इस घटना पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस भी की और पार्टी के कार्यकर्ताओं को मतगणना केंद्रों पर पहरा देने का आदेश दिया.
लेकिन वाराणसी प्रशासन के मुताबिक़ भीड़ ने काउंटिंग के प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल होने वाली ईवीएम ले जा रही गाड़ी को रोका था.
इस घटना के बाद मंडी के बाहर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं का हुजूम इकठ्ठा हो गया और प्रशासन को फिर से सभी प्रत्याशियों की मौजूदगी में ईवीएम की गिनती करानी पड़ी.
11 मार्च को थाना जैतपुरा के एसएचओ की तहरीर पर एक मुक़दमा दर्ज किया गया है जिसमें 40 लोगों को नामजद किया गया है और 500-600 अज्ञात लोग शामिल किए गए हैं.
पुलिस का आरोप है कि अभियुक्तों ने पुलिस के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और ईंट पत्थर चलाये और लाठी डंडे से मारने लगे और सरकारी गाड़ियों को नुकसान पहुँचाया.
अभियुक्तों के ख़िलाफ़ भीड़ में शामिल होकर हिंसा और उपद्रव करने, सरकारी आदेश का उल्लंघन करने, सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने, सरकारी अधिकारी पर काम करते समय हमला करने, उकसाने के इरादे से अपमान करने और क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट के सेक्शन 7 के उल्लंघन के तहत मामला दर्ज किया है.
इस एफआईआर में यह नहीं लिखा गया है कि नामजद लोग समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता हैं या नहीं.
समाजवादी पार्टी के वाराणसी ज़िला अध्यक्ष लक्कड़ यादव ने माना है कि नामजद लोगों में सपा के कार्यकर्ता भी शामिल हैं और कहा कि, "इन चालीस में से एक, दो, चार, दस हमारे कार्यकर्ता भी हैं. इसका वीडियो बनाकर पुलिस 500 लोगों से धन उगाई कर रही है. अब पुलिस कमाई कर रही है. हम तो यही कह रहे हैं कि जिन लोगों ने पुलिस से हाथापाई की और ईंट पत्थर चलाये उन पर कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन पुलिस भी पीछे नहीं हटी है और इनके लोग भी खुले आम लाठी, ईंट पत्थर चलाये हैं."
इन मुकदमों के बारे में हमने वाराणसी के पुलिस कमिश्नर सतीश गणेश से बात करने की कोशिश की लेकिन उनसे फ़ोन पर संपर्क नहीं हो पाया.
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सहारनपुर में सपा कार्यकर्ताओं पर मुक़दमा
मुकदमों की ख़बर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से भी आ रही हैं. सहारनपुर के एसपी सिटी से मिली जानकारी के मुताबिक़ समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है जिसमें तीन कार्यकर्ताओं को नामजद किया गया है और अन्य 10-12 अज्ञात भी शामिल हैं.
सहारनपुर में 9 मार्च को ऑब्ज़र्वर वेयरहाउस परिसर में चेकिंग करने पहुंचे थे जहाँ पर सपा के कार्यकर्ताओं पर उनकी गाड़ी रोककर चेकिंग करने का आरोप लगाया गया है.
सहारनपुर के एसपी सिटी राजेश कुमार के मुताबिक़, "थाना जनकपुरी के सेंट्रल वेयरहाउस में कुछ राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं द्वारा, ऑब्ज़र्वर के लायज़निंग अधिकारीकी गाड़ी रोक कर उनसे बदतमीज़ी की गई, सरकारी काम में बाधा पहुंचाई गई. इस संबंध में वीडियो आया हुआ था जिसे संज्ञान में लेते हुए तीन लोग चिह्नित हुए हैं और साक्ष्य के आधार पर इस मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है."
इस मुक़दमे में सरकारी कार्य में बाधा डालना, हंगामा करना, अफ़रा-तफ़री का माहौल पैदा करना जैसे आरोप लगे हैं. मामला सहारनपुर के जनकपुरी थाने में दर्ज हुआ है. हालांकि, अभी किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है.
दरअसल देवबंद से सपा प्रत्याशी कार्तिकेय राणा ने बयान दिया था कि, "अखिलेश जी के आह्वान पर पार्टी का एक-एक प्रत्याशी, एक-एक पदाधिकारी और एक-एक कार्यकर्ता सब लोग अपने स्ट्रॉंग रूम की रखवाली के सामने आ रहे हैं."
उन्होंने अपने बयान में प्रेक्षक के अलावा एसडीएम और प्राइवेट गाड़ियों के अंदर जाने का आरोप लगाया था और आपत्ति जताई थी.
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गोरखपुर में 100 'हुड़दंगियों' के ख़िलाफ़ एफआईआर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू की है. पुलिस के मुताबिक़ जिन लोगों ने ईवीएम को लेकर भ्रामक अफवाहें फैलायीं, और लोगों की भावनाओं को जगाया और भड़काया, और सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न कीं, लोगों के लिए समस्या उत्पन्न की, उन 'हुड़दंगियों' के ख़िलाफ़ पुलिस ने मुक़दमा दर्ज किया है.
इसमें 7 सीएलए एक्ट भी लगाया गया है. गोरखपुर प्रशासन का कहना है कि पुलिस के पास सभी लोगों का फुटेज उपलब्ध है, यूनिवर्सिटी के गेट पर प्रशासन ने कैमरे लगा रखे थे. पुलिस का कहना है की लोगों के पहचान कर गिरफ्तार किया जायेगा और उन्हें जेल भेजा जायेगा.
क्या यह कोई पार्टी विशेष का लोग हैं? इस सवाल के जवाब में गोरखपुर एसएसपी विपिन टाडा ने कहा कि, "इसमें जो भी लोग कैमरे की नज़र में आये हैं, गड़बड़ी फैलाते पाए गए हैं, हंगामा करते पाए गए हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया के ज़रिये या किसी और माध्यम से भ्रामक सूचनाएं फैलाई हैं उन सभी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी. इसमें चाहे जो भी व्यक्ति हो उसके ख़िलाफ़ नियमानुसार कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी."
मुक़दमा थाना कैंट द्वारा दर्ज कराया गया है, जहाँ पर यूनिवर्सिटी परिसर स्थित है और यूनिवर्सिटी में ही काउंटिंग सेंटर के बाहर काउंटिंग सेंटर के अंदर आने वाली गाड़ियों की चेकिंग करने की ख़बर आई थी.
बलिया, बस्ती, हापुड़ और आगरा में भी हुए मुक़दमे
मतगणना केंद्रों पर सरकारी काम में बाधा डालने के आरोपों के तहत उत्तर प्रदेश के अन्य ज़िलों में भी मुकदमे दर्ज हुए हैं.
बस्ती के एसपी आशीष श्रीवास्तव के मुताबिक़, "नौ तारीख़ को मतगणना स्थल पर जो भी सरकारी गाड़ियां जा रही थीं, जिसमें संबंधित रिटर्निंग अफसर थे, और अन्य उच्च अधिकारी थे. उनकी गाड़ियां समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा अनैतिक रूप से चेक की जा रही थीं, जिसके संबंध में थाना पुरानी बस्ती में सात मुकदमे दर्ज हुए हैं. जो संबंधित अधिकारियों के साथ कर्मचारियों द्वारा लिखाये गए हैं. इन अलग अलग मुकदमों में लगभग एक ही बात लिखी है और 7 सीएलए एक्ट और 307 आईपीसी की धारा लगी हुई हैं. सरकारी काम में बाधा डालने की धारा लगी हुई है. इनमें 6-7 व्यक्ति ज्ञात और क़रीब 100 कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ मुक़दमा पंजीकृत किया गया है."
बस्ती सदर से सपा के नवनिर्वाचित विधायक महेंद्र नाथ यादव ने आरोप लगाया है कि, "समाजवादी पार्टी के चार विधायक बस्ती से चुनकर आये हैं और तब से लगातार पूरे ज़िले में सपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न हो रहा है. फ़र्ज़ी मुकदमे लगा कर उनका उत्पीड़न कर रहे हैं. अगर उत्पीड़न बंद नहीं होगा तो फिर हम लोग सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ने का कार्यक्रम करेंगे."
काउंटिंग सेंटर पर गाड़ियां रोक कर चेकिंग करने के पुलिस के आरोप के बारे में विधायक ने कहा कि, "वहां गाड़ी किसी की नहीं रोकी गयी. सबसे विनम्रता पूर्वक अनुरोध किया जा रहा था कि चुनाव आयोग की गाइडलाइन हैं कि 100 मीटर की दूरी पर, जहाँ पर स्ट्रॉंग रूम है, उसके 100 मीटर के दायरे में कोई गाड़ी लेकर नहीं जायेगा. और जिस तरह से बनारस की घटना हुई, बरेली की घटना हुई, तो इन लोगों से विनम्रता पूर्वक अनुरोध किया जा रहा था कि आप गाड़ी 100 मीटर दूर रखिये, और अगर गाड़ी अंदर ले जाना है तो फिर पुलिस के अधिकारी द्वारा गाड़ी खोल करके दिखा दीजिये जिससे लोगों को संतुष्टि हो जाये."
आगरा में भी इन सभी मामलों से मिलते जुलते आरोप सपा के कार्यकर्ताओं पर लगाए गए हैं और थाना एत्माददौला में एफआईआर में सपा और आरएलडी के 24 कार्यकर्ताओं को नामजद किया और 50-60 अज्ञात लोग शामिल किया गया है.
इन सभी पर सरकारी और प्राइवेट गाड़ियों को रोककर जबरन तलाशी लेने, निर्वाचन में लगी गाड़ी की जबरन तलाशी लेने और गाड़ियों में रखे चुनाव संबंधी कागज़ों को फेंकने का आरोप है.
हापुड़ में भी मतगणना से एक दिन पहले एसडीएम की गाड़ी रोककर चेकिंग करने के आरोप में हापुड़ देहात में 6 लोगों को नामजद किया गया है और एफआईआर में 25 से 30 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है.
इस कार्रवाई के बारे में सपा के ज़िलाध्यक्ष देवेंद्र जाखड़ का कहना है कि, "यह मुक़दमे झूठे हैं. चुनाव ख़त्म होने के आठ दिन बाद इन्होंने हमारे कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया है, जबकि वो वहां थे भी नहीं. उन लोगों का फर्जी नाम लिखा गया है. हमने ज़िला प्रशासन को ज्ञापन भी दिया है. अगर यह ख़त्म नहीं होते हैं तो फिर हम आंदोलन की तरफ भी बढ़ सकते हैं."
पूर्वांचल के बलिया की कोतवाली थाने में भी मुक़दमा दर्ज हुआ है जिसमे 11 लोगों को नामजद किया गया है और 50 - 60 लोग अज्ञात है.
इन तमाम एफआईआर के बावजूद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस बारे में कोई बयान नहीं दिया है.
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