पंजाब में ‘आप’ की जीत के पांच अहम कारण क्या रहे

    • Author, सर्वप्रिया सांगवान
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है. प्रदेश की कुल 117 सीटों में से आम आदमी पार्टी ने 92 सीटों के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. वहीं कांग्रेस 18 और बीजेपी दो सीटों पर जीती है.

लेकिन इस ऐतिहासिक जीत के पीछे पांच बड़ी वजहें क्या हैं?

भगवंत मान को सीएम पद का उम्मीदवार बनाना

आम आदमी पार्टी ने इस बार स्पष्ट तरीके से अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार भगवंत मान को घोषित किया.

साल की शुरुआत से ही पंजाब में आम आदमाी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरे को लेकर संशय बना हुआ था. इससे पहले 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में भी सीएम पद के उम्मीदवार को लेकर इसी तरह की स्थिति थी. पंजाब में आम आदमी पार्टी के लगभग आधे उम्मीदवार दूसरी पार्टियों से निकल कर 'आप' में शामल हुए थे, इसलिए दिल्ली और पंजाब के बीच ठनने की स्थिति आ सकती थी.

लेकिन इस बार पार्टी आलाकमान ने वक़्त रहते फ़ैसला लिया और भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के चेहरे के रूप में पेश किया. इसके लिए पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं के बीच रेफ़रेंडम (जनमत संग्रह) भी करवाया.

पर्दे के पीछे के खिलाड़ी

पंजाब चुनाव को ज़मीनी स्तर पर देख रहे राजनीतिक जानकार सागर बिश्नोई ने बताया कि पंजाब में पार्टी के रणनीतिकार संदीप पाठक की अहम भूमिका रही है. संदीप आईआईटी से पढ़े हैं, लंदन रिटर्न हैं. वो पहले जानेमाने राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ भी काम कर चुके हैं.

पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी आलाकमान के फ़ैसलों को लागू करवाने के पीछे संदीप पाठक का ही हाथ रहा है. बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बताया था कि 2017 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का अभियान साल भर पहले ही अपने शीर्ष पर पहुंच गया था. पार्टी को पहले ही ढेर सारी सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था और अभियान ख़त्म होने का वक्त आते-आते अभियान ही बिखर गया था.

लेकिन इस बार के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ. संदीप पाठक के नेतृत्व में उनके पांच जूनियरों की एक टीम बनी जो ख़ुद भी सोशल मीडिया और चुनाव की लाइमलाइट से दूर रही.

पंजाब को पांच ज़ोन में बांटा गया और एक व्यक्ति को एक ज़ोन की ज़िम्मेदारी दी गई. हर ज़ोन का पूरा अध्ययन करने के बाद उन्होंने चुनाव के लिए उम्मीदवारों को चुनने में मदद की. साथ ही यह भी पता लगाया गया कि किस उम्मीदवार को टिकट देने से किस प्रकार की नाराज़गी फैल सकती है. समय रहते पार्टी ने इसका हल भी निकाला.

पंजाब में इस तरह की मैनेजमेंट से पार्टी को बड़ी मदद मिली. संदीप पाठक ने इससे पहले 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी आम आदमी पार्टी के अभियान को मैनेज किया था जिसमें पार्टी को बड़ी जीत मिली थी.

बदलाव के लिए वोट

आम आदमी पार्टी ने अपने अभियान में शुरू से ही ये नैरेटिव सेट किया कि पिछले बीस साल से जनता ने अकाली दल, बीजेपी या कांग्रेस का शासन देखा है, इसलिए इस बार नई पार्टी को वोट देकर देखा जाए.

साथ ही पार्टी ने अपने दिल्ली मॉडल पर ख़ासा ज़ोर दिया जिसे वो शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार का मॉडल कहती है. उन्होंने तीन सौ यूनिट फ़्री बिजली और 18 साल से ऊपर की औरतों को हज़ार रुपये महीना देने जैसे वादे भी किए हैं. वहीं, किसान आंदोलन की वजह से कृषि से जुड़ी समस्याएं भी चर्चा में आईं और इसे लेकर पुरानी सरकारों की नाकामियों पर भी चुनाव में काफ़ी चर्चा थी.

मालवा का कैंपेन

मालवा पंजाब का सबसे बड़ा क्षेत्र है, प्रदेश की 117 विधानसभा सीटों में से 69 इसी क्षेत्र में पड़ती हैं.

2017 के चुनाव में पार्टी ने कुल 20 सीटें जीती थीं जिसमें से 18 मालवा क्षेत्र की थीं. किसान आंदोलन का मुख्य केंद्र भी यही क्षेत्र था.

पार्टी ने इस बार भी मालवा पर ज़्यादा ध्यान दिया. मालवा को तीन ज़ोन में बांटा गया था और यहां पार्टी ने ज़ोरदार अभियान चलाया. चुनाव के नतीजे बताते हैं कि पार्टी को यहां साठ से ज़्यादा सीटें मिली हैं.

कांग्रेस की अंदरूनी कलह

जहां एक तरफ़ पंजाब में आम आदमी पार्टी हर क़दम फूंक-फूंक कर रख रही थी, वहीं कई महीनों से कांग्रेस में अस्थिरता की ख़बरें आ रही थीं.

कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम की कुर्सी से हटाया गया और नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब का इंचार्ज बनाया गया जिसे लेकर कांग्रेस के नेताओं की असहमति सामने आई, ये पूरा मामला सार्वजनिक हो रहा था.

इससे जनता के बीच कांग्रेस को लेकर संदेश गया कि पार्टी के अंदर कलह है. अगर पार्टी जीत भी गई तो शायद ये कलह पंजाब की गवर्नेंस को अस्थिर कर देगी. इस बात का फ़ायदा आम आदमी पार्टी को हुआ.

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