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उत्तर प्रदेश चुनाव: लखनऊ कैंट की वीआईपी सीट पर बोलेगा योगी का काम या विपक्ष पड़ेगा भारी -ग्राउंड रिपोर्ट
- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
लखनऊ कैंट विधानसभा सीट के सदर बाज़ार में किनारे भाजपा प्रचार गाड़ी पर लगे वीडियो स्क्रीन पर सुबह तेज़ आवाज़ में कुछ युवक-युवती पार्टी के लिए वोट देने के लिए कह रहे थे.
इस सीट पर लंबे समय से भाजपा का दबदबा रहा है. पिछले 33 सालों में सिर्फ़ दो बार कांग्रेस प्रत्याशी जीते हैं.
पास की ही एक दुकान में सतीश शर्मा (बदला हुआ नाम) अपने कपड़ों की दुकान में झाड़-पोछ कर रहे थे.
लखनऊ की इस वीआईपी विधानसभा सीट में चुनावी मुद्दे पर मेरे सवाल पर जैसे वो फट पड़े. वो बोले, "सोच रहा हूं सब-कुछ छोड़कर लखनऊ से भाग जाऊं."
लेकिन क्यों? उन्होंने आगे बताया, "महंगाई इतनी बढ़ गई है कि पूछो नहीं. पिछले तीन सालों में बिक्री चौथाई रह गई है. पहले ससुराल थर्ड एसी में जाते थे, अब स्लीपर के लिए भी सोचना पड़ता है. पहले हर दिन 12,000 रुपए तक की बिक्री हो जाती थी, अब चार हज़ार भी मुश्किल है. मेरे दुकान में पहले छह लड़के काम करते थे, अब सिर्फ़ दो बचे हैं. लेकिन ये सब किससे कहें हम?"
उन्होंने दुकान के सामने की सड़क के गड्ढे की ओर इशारा करके कहा कि 'पिछले पांच सालों में गड्ढा-मुक्त नहीं गड्ढा-युक्त सड़कें हो गई हैं.'
पास ही क़रीब चार दशकों से कपड़े की एक और दुकान चलाने वाले परमजीत सिंह दुग्गल का इसके उलट कहना है, "सड़कें बहुत अच्छी हैं और लोगों को कोई समस्या नहीं है."
वो आगे बोले, "पानी यहां अच्छा मिलता है, सीवर लाइन भी यहां पर बन रही है और सबसे बड़ी बात गुंडई पूरे यूपी में कम हो गई है, बिज़नेस थोड़ा ठीक हो रहा है. और जब गेहूं के दाम बढ़ेंगे तो महंगाई अपने आप बढ़ेगी."
जब अगल-बगल रहते लोगों के लिए विकास के मायने इतने अलग हों तो आश्चर्य होता है.
लखनऊ में 23 फ़रवरी को चौथे चरण में वोटिंग होनी है जिस दिन प्रदेश की 59 सीटों पर मतदान होगा. लखनऊ के अलावा उस दिन उन्नाव, पीलीभीत, खेरी, सीतापुर, हरदोई, रायबरेली, बांदा और फ़तेहपुर में भी वोटिंग होगी.
हाई प्रोफ़ाइल सीट
जो लोग लखनऊ कैंट से वाकिफ़ न हों, उन्हें ऐसा लग सकता है कि ये सिर्फ़ छावनी का इलाका है जहां साफ़, चौड़ी सड़कें होंगी और सिर्फ़ पूर्व सैनिक या फिर उनके परिवार रह रहे होंगे, लेकिन इस विधानसभा क्षेत्र में चारबाग, आलमबाग, सदर जैसे इलाके भी आते हैं, जहां पतली गलियां हैं, टूटी सड़के हैं और विकास का इंतज़ार करते इलाके भी हैं.
वरिष्ठ पत्रकार अतुल चंद्रा याद दिलाते हैं कि इस विधानसभा क्षेत्र के विधायक को कई काम करवाने के लिए छावनी परिषद के साथ की भी ज़रूरत पड़ती है.
इस वीआईपी सीट पर भाजपा के सुरेश चंद्र तिवारी विधायक हैं जो चार बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन रिपोर्टों की मानें तो उम्मीदवार की घोषणा से पहले कई बड़े नेताओं की निगाहें इस सीट पर टिकी थीं.
चाहे वो उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा हों, यादव खानदान की बहू अपर्णा यादव या फिर इलाहाबाद से भाजपा सांसद रीता बहुगुणा जोशी जो इस सीट को अपने बेटे मयंक के लिए चाहती थीं.
राज्य से पूर्व कांग्रेस पार्टी नेता रीता बहुगुणा जोशी ने साल 2019 में इस सीट को खाली किया था जिसके बाद वो इलाहाबाद से सांसद बनीं. लखनऊ कैंट के लिए उप-चुनाव में भाजपा ने सुरेश चंद्र तिवारी को उतारा था जो विजयी हुए.
बेटे मयंक को लखनऊ कैंट से टिकट मिल जाए इसलिए रीता बहुगुणा जोशी चुनावी राजनीति से संन्यास तक लेने को तैयार थीं.
अपर्णा यादव साल 2017 में सपा के टिकट पर लखनऊ कैंट से लड़ीं लेकिन वो रीता बहुगुणा जोशी से हार गई थीं.
वोट का समीकरण
लखनऊ कैंट की इस सीट पर क़रीब सवा लाख ब्राह्मण वोटरों के अलावा सिंधी और पंजाबी, वैश्य, मुस्लिम और दलित वोटर भी हैं.
पार्टी उम्मीदवारों के नाम देखें तो समझना मुश्किल नहीं कि पार्टियों ने उन्हें टिकट क्यों दिया है. भाजपा ने योगी सरकार में क़ानून मंत्री ब्रजेश पाठक को, सपा गठबंधन ने राजू गांधी, बसपा ने अनिल पांडे और कांग्रेस ने दिलप्रीत सिंह को टिकट दिया है.
लखनऊ मध्य विधानसभा सीट से विधायक और राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री ब्रजेश पाठक का अप्रैल 2021 में कोरोना के हालात पर चिंता जताए जाने से जुड़ा एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ था.
आलमबाग में चंदर नगर गुरुद्वारे से बाहर निकलते हुए उन्होंने बीबीसी से बातचीत में भरोसा दिलाया कि कोरोना काल में आई दिक़्क़तों की "हम भरपाई करेंगे, व्यवसाय को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं, उस दिशा में हमारी सरकार लगातार काम कर रही है."
उन्होंने कहा, "अब हम कोरोना से जीत गए हैं. अब हम प्रोडक्शन भी बढ़ाएंगे, सेल भी बढ़ाएंगे और खुदरा व्यापार भी बढाएंगे."
ब्रजेश पाठक भाजपा उम्मीदवार क्यों?
लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी के मुताबिक मध्य क्षेत्र से विधायक ब्रजेश पाठक को वहां से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रविदास मेहरोत्रा से काफ़ी कड़ी चुनौती मिल रही थी और भाजपा चाहती थी कि ब्रजेश पाठक ज़रूर जीतकर आएं क्योंकि वो उन्हें ब्राह्मण चेहरे के तौर पर आगे बढ़ा रही थी.
रामदत्त त्रिपाठी के मुताबिक विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान विधायक सुरेश चंद्र तिवारी के ख़िलाफ़ लोगों में नाराज़गी थी. रामदत्त त्रिपाठी ब्रजेश पाठक के व्यक्तित्व को भी उन्हें आगे बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार बताते हैं.
वो कहते हैं, "ब्रजेश पाठक सर्वसुलभ हैं. वो लोगों से मिलते हैं, खासकर कोरोना के दरम्यान उन्होंने अस्पताल की समस्याओं, लोगों को दवाएं नहीं मिलने को लेकर खुलकर आवाज़ उठाई थी और लोगों की मदद की थी."
वरिष्ठ पत्रकार अतुल चंद्रा भी ब्रजेश पाठक की सर्वसुलभता की बात करते हैं और कहते हैं ब्रजेश पाठक को आगे बढ़ाने का मक़सद भाजपा से "नाराज़ माने जा रहे ब्राह्मणों" को ख़ुश करना भी था.
ब्रजेश पाठक ने बीबीसी से बातचीत में दावा किया कि उन्हें "कोई चुनौती नहीं है."
बढ़ती महंगाई की शिकायत पर उन्होंने सरकारी योजनाओं को गिनाया, "हमने नि:शुल्क मकान दिए हैं, बिजली कनेक्शन दिए हैं, नि:शुल्क शौचालय दिए हैं, महीने में दो बार राशन दे रहे हैं."
वो कहते हैं, "उत्तर प्रदेश के लोगों की परचेज़िंग पावर बढ़ी है और हमारे साथ जितने भी व्यवसायी वर्ग हैं, उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश की जीडीपी बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रही है "
बसपा, कांग्रेस का दावा
ब्रजेश यादव के दावे बसपा समर्थक राम सजीवन के गले नहीं उतरते. वो दलित हैं और नटखेरा रोट पर उनकी टेलरिंग की दुकान है. पहले वो दिन का 400-500 कमा लेते थे, अब 100-150 रुपए कमाना मुश्किल हो रहा है.
इस इलाके में सोनकर, जाटव, कोरी समाज, दलित समाज के लोग रहते हैं.
वो कहते हैं, ''विकास तो कोई नहीं हुआ है, राशन के अलावा सरकार ने और कुछ नहीं बांटा है, बेरोज़गारी इतनी ज़्यादा बढ़ गई है कि हर आदमी परेशान है. और बहनजी की सरकार ने सबसे पहले आकर 72,000 टीचरों की भर्ती की, दो लाख पांच हज़ार पुलिसकर्मियों की भर्ती की, एक लाख 89 हज़ार सफ़ाई कर्मचारियों की भर्ती की. इन दोनों सरकारों में कोई काम नहीं हुआ है."
उन्हें विश्वास है कि बसपा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी.
आज़ाद नगर में रहने वाले और टाइल्स का काम करने वाले आरिफ़ हुसैन गलियों की बदहाल सड़कों की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, "अगर पानी गिरता है तो हमलोगों के निकलने के लिए जगह नहीं है, इतना पानी भर जाता है कि बच्चे स्कूल ठीक से नहीं जा पाते हैं और न ही कोई वाहन कायदे से निकल सकता है."
वहीं के शब्बीर अहमद ने कहा, "काम तो कुछ नहीं हुआ है, जहां थे वहां से और नीचे हो गए हैं."
लखनऊ कैंट को आदर्श विधानसभा क्षेत्र बनाने का वायदा करने वाले समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार राजू गांधी कहते हैं, "पहली बार ऐसा चुनाव हो रहा है जिसमें जनता चुनाव लड़ रही है, प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ रहा है."
एक जनसंपर्क कार्यक्रम के दौरान बातचीत में उन्होंने बताया कि वो जलभराव और सीवर की समस्याओं पर काम करने का वायदा कर रहे हैं.
कई विश्लेषक इस विधानसभा चुनाव को सपा गठबंधन और भाजपा के बीच सीधी टक्कर बता रहे हैं, ऐसे में कांग्रेस कहां है?
कांग्रेस उम्मीदवार दिलप्रीत सिंह अपने पांच साल के काम और प्रियंका गांधी का हवाला देते हैं.
आलमबाग में अपने दफ़्तर के बाहर उन्होंने बताया, "प्रियंका जी जिस तरह से सड़कों पर उतर कर काम कर रही हैं, हर मुसीबत में अगर कोई नेता खड़ा हुआ वो प्रियंका जी थीं. मुझे लगता है कि मेरे साथ यहां के वोटर्स भी ये देख रहे हैं."
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