राहुल गांधी के ख़िलाफ़ हिमंत बिस्व सरमा अपमानजक बयान क्यों देते हैं?

    • Author, दिलीप कुमार शर्मा
    • पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी के लिए

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने पिछले दिनों उत्तराखंड की एक चुनावी रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर एक विवादित टिप्पणी की जिसकी काफी आलोचना हुई. कांग्रेस के युवा कार्यकर्ताओं ने दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में मुख्यमंत्री सरमा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया.

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से लेकर लोकसभा सांसद गौरव गोगोई समेत पार्टी के कई नेताओं ने हिमंत बिस्व सरमा की इस आपत्तिजनक टिप्पणी को बचकाना और निंदनीय बता चुके हैं.

इस बीच असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कई महिला सदस्य मंगलवार को मुख्यमंत्री सरमा के खिलाफ दिसपुर थाने में एक मामला दर्ज कराने पहुंची, लेकिन मामला दर्ज नहीं हुआ.

जबकि तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सरमा को तत्काल बर्खास्त करने की मांग करते हुए उनके खिलाफ तेलंगाना के अलग-अलग पुलिस स्टेशन में कई आपराधिक मामले दर्ज कराने की बात कही है.

दरअसल अगस्त 2015 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हिमंत बिस्व सरमा के इस विवादित बयान के पीछे राजनीतिक जानकार कई तर्क देते हैं. क्योंकि इससे पहले जब वे कांग्रेस में थे, उस दौरान भी उन्होंने चुनावी रैलियों में बीजेपी नेताओं के खिलाफ ऐसी टिप्पणियां की थी. लेकिन बीजेपी में आने के बाद भी उन्हें राजनीतिक तौर पर कोई नुकसान उठाना नहीं पड़ा है.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हिमंत बिस्व सरमा शुरू से ही बहुत महत्वाकांक्षी रहे हैं और अपनी राजनीति को चमकाने के लिए समय-समय पर वे इस तरह के विवादित बयान देते रहे हैं.

असल में हिमंत बिस्व सरमा पारंपरिक तौर पर बीजेपी या आरएसएस के आदमी नहीं हैं. दो दशक से भी ज्यादा कांग्रेस में बिताने के बाद बीजेपी में शामिल हुए हिमंत बिस्व सरमा अब खुद को बीजेपी का ज्यादा वफ़ादार और राष्ट्रवादी साबित करने में लगे है. लिहाजा गांधी परिवार पर निजी हमले या फिर 'सांप्रदायिक बयानबाजी' के पीछे उनकी आक्रामकता में यह स्पष्ट दिखता है कि वे खुद को बीजेपी में बतौर हिंदू नेता स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं.

असम में लंबे से समय से पत्रकारिता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार नव कुमार ठाकुरिया कहते हैं, "हिमंत राजनीति के काफी चतुर खिलाड़ी है और वे जानबूझकर ऐसे विवादित बयान देते है. उत्तराखंड की चुनावी रैली में उन्होंने राहुल गांधी पर जो टिप्पणी की है वो जुबान की फिसलन नहीं है. बल्कि उन्होंने जानबूझकर ऐसी टिप्पणी की है.''

''उनका मकसद कांग्रेस और राहुल गांधी पर हमला करना था. इसके पीछे उनका दो मकसद है. पहला उन्हें पब्लिसिटी चाहिए जिससे बतौर बीजेपी नेता उनकी राष्ट्रीय पहचान बन सके. दूसरा मकसद राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमले कर वो बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष ज़्यादा प्रिय बनना चाहते हैं."

राहुल गांधी के बारे में क्या कहा था हिमंत ने

हिमंत बिस्व सरमा ने उत्तराखंड में 11 फरवरी को एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था, ''राहुल गांधी ने सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगा था. अरे भाई! आप कौन से पिता के बेटा हैं, कभी हमने प्रुफ (प्रमाण) मांगा है क्या? मेरे सैनिक से सबूत मांगने का आपका क्या अधिकार है? हमारी सेना ने अगर बोल दिया कि हमने पाकिस्तान में बम फोड़ा है, तो फोड़ा है. उसमें क्या विवाद है? क्या आपका बिपिन रावत पर भरोसा नहीं था? मैंने कभी आपसे यह सबूत मांगा है क्या कि आप सचमुच पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे हैं या नहीं?''

लेकिन इस बार मुख्यमंत्री सरमा अपने इस विवादित बयान के लिए केवल कांग्रेस ही नहीं बल्कि विभिन्न दलों के निशाने पर आ गए हैं. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने मुख्यमंत्री सरमा के बयान की निंदा करते हुए बीजेपी के शीर्ष नेताओं से उनके इस्तीफ़े की मांग की हैं.

हालांकि हिमंत बिस्वा सरमा ने विपक्ष द्वारा की जा रही आलोचना के बाद मीडिया के समक्ष कहा है कि कांग्रेस उनके बयान की "गलत व्याख्या" कर रही है और इसे "असली सवालों से भटकाने" के लिए एक मुद्दा बना रही है.

लेकिन मुख्यमंत्री सरमा ने चुनावी रैली की बाद भी राहुल गांधी की आलोचना जारी रखे हुए हैं. उन्होंने हाल ही में मीडिया के समक्ष कहा था, 'राहुल गांधी को केवल गुजरात से बंगाल तक ही भारत दिखाई देता है. राहुल गांधी के अंदर जिन्ना का भूत घुस गया है. 1947 से पहले मोहम्मद अली जिन्ना जिस तरह की भाषा का प्रयोग करते थे अभी राहुल गांधी वही भाषा बोल रहे हैं.'

आखिर राहुल गांधी से उनकी इस निजी अदावत के पीछे क्या कारण हो सकता है?

इस सवाल का जवाब देते हुए राज्य के वरिष्ठ पत्रकार बैकुंठ नाथ गोस्वामी कहते हैं, "असम में साल 2011 के विधानसभा चुनाव में हिमंत को राज्य का इंचार्ज बनाया गया था और उस चुनाव में कांग्रेस ने 126 में से 78 सीटें जीती थीं. तरुण गोगोई लगातार राज्य में दो बार सीएम बन चुके थे तो हिमंत को ऐसी उम्मीद थी कि पार्टी हाईकमान इतनी बड़ी जीत के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाएगी.''

''उन्होंने उस समय की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ कई बैठकें की, लेकिन पार्टी ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया. खासकर उस समय राहुल गांधी से उनको कोई समर्थन नहीं मिला था. यह उनकी नाराज़गी का एक बड़ा कारण माना जाता है. लिहाजा बीजेपी में आने के बाद उन्हें राहुल गांधी के खिलाफ खुलकर बयानबाज़ी करने का मौका मिल गया."

साल 2017 में राहुल गांधी ने अपने घरेलू कुत्ते को बिस्किट खिलाते हुए एक ट्वीट किया था जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए हिमंत ने लिखा था "उन्हें (राहुल गांधी) मुझसे बेहतर कौन जानता है. फिर भी आपको याद दिला दूँ कि आप उसे (कुत्ते) बिस्कुट खिलाने में व्यस्त थे, जबकि हम आपसे असम के ज़रूरी मुद्दों पर चर्चा करना चाहते थे."

उस दौरान हिमंत का वो ट्वीट मीडिया की सुर्खियां बना था और तब से वे राहुल गांधी को लेकर लगातार टिप्पणी करते रहे हैं. उन्होंने कई बार सार्वजनिक तौर पर राहुल गांधी को घमंडी कहा है.

बैकुंठ नाथ गोस्वामी मुख्यमंत्री हिमंत के ताज़ा बयान पर कहते हैं,"उत्तराखंड की रैली में हिमंत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं की उपलब्धियों पर भाषण देने की ज़रूरत थी लेकिन जो लोग उन्हें शुरू से देख रहे हैं वो यह जानते है कि हिमंत खासकर चुनावी रैलियों में ऐसी विवादित टिप्पणी करते है जिससे वे लाइमलाइट में रह सकें.''

''साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भी हिमंत ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ कुछ ऐसी ही विवादित टिप्पणी की थी जिसके बाद बीजेपी के कई शीर्ष नेता नाराज़ हो गए थे. वह भाषण भी उन्होंने उस समय कांग्रेस हाईकमान को खुश करने के लिए दिया था."

साल 2014 में असम के तेजपुर के पंच माइल में आयोजित एक चुनावी रैली में हिमंत बिस्व सरमा ने अपने भाषण में नरेंद्र मोदी के लिए कहा था, "आपने (नरेंद्र मोदी) कहा था कि गुजरात में पानी के पाइप के अंदर मारुति कार चल सकती है. आप यह सच बताइए असम के लोगों को कि असम में पानी के पाइप से पानी बहता है. गुजरात में पानी के पाइपों से मुसलमानों का खून बहता है."

असम प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रमोद स्वामी कहते हैं, "हमारे मुख्यमंत्री के बयान को लेकर कांग्रेस राजनीति कर रही है. इसलिए वो मुख्यमंत्री के बयान को अपने तरीके से व्याख्या कर रही है. इसमें उन्होंने (मुख्यमंत्री) कहा था कि जिस तरह से राहुल जी राजीव गांधी के बेटे है, यह सत्य है. इसमें कोई सबूत की आवश्यकता नहीं है. ठीक उसी तरह सर्जिकल स्ट्राइक भी एक सत्य है. क्योंकि यह बात हमारे आर्मी चीफ ने कही थी.''

''हमने कोरोना से निपटने के लिए जो दो स्वदेशी वैक्सीन बनाई है वो बात भी एक सत्य है. लेकिन जो लोग सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाते है, एयर स्ट्राइक पर सवाल उठाते है, हमारे वैक्सीन पर कहते है कि यह मोदी वैक्सीन है हम नहीं लगाएंगे, यह कंफ्यूज़न करना ठीक नहीं है. राष्ट्रीय हित से जुड़े मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए."

मुख्यमंत्री अपने आलाकमान को खुश करने के लिए पूर्व में भी ऐसे विवादित राजनीतिक बयान देते रहे हैं. इस सवाल का जवाब देते हुए स्वामी ने कहा, "जब वे कांग्रेस में थे उस समय उनकी एक भूमिका थी और आज भारतीय जनता पार्टी में है तो उनकी एक अलग भूमिका होती है. हर व्यक्ति जिस राजनीतिक दल में होता है वो उस दल की विचारधारा को बोलता है. इसमें किसी को खुश और किसी को नाखुश करने की कोई बात नहीं है. यह विचारधारा की बात है. हमारी विचारधारा में राष्ट्र प्रथम है."

पत्रकार ठाकुरिया के अनुसार, 'असल में भारत की राजनीति में इस तरह की निम्न स्तर की बयानबाज़ी की जगह नहीं होनी चाहिए.''

हालांकि बीजेपी के किसी शीर्ष नेताओं की ओर से हिमंता बिस्वा सरमा के राहुल गांधी पर निजी हमले पर खेद नहीं ज़ाहिर किया है.

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