असम में जहां हुई हिंसा, वहां के एसपी सुशांत बिस्वा सरमा पर क्यों उठ रहे हैं सवाल

    • Author, अनंत प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर दरंग हिंसा को लेकर अपने छोटे भाई के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ता जा रहा है.

सितंबर महीने की 23 तारीख़ को असम के दरंग ज़िले की पुलिस धौलपुर नामक गांव में 'अवैध अतिक्रमण' हटाने गई थी. लेकिन यहां पुलिस और अतिक्रमणकारियों के बीच हिंसा होने की वजह से दो लोगों की जान चली गई.

बता दें कि दरंग ज़िले में एसपी सुशांत बिस्वा सरमा हैं जो असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के छोटे भाई हैं.

इस घटना के बाद कांग्रेस समेत कई अन्य पक्ष सरकार पर स्थानीय पुलिस अधीक्षक यानी सुशांत बिस्वा सरमा के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं.

कांग्रेस नेता रिपुन बोरा ने बीबीसी से बात करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री को ये संकेत नहीं देने चाहिए कि वह भाई होने की वजह से स्थानीय पुलिस अधीक्षक का बचाव कर रहे हैं.

सरकारी जांच से संतुष्ट नहीं विपक्ष

असम सरकार ने 23 सितंबर की घटना की जांच गुवाहाटी हाई कोर्ट के एक पूर्व जज से कराने के आदेश जारी किए हैं.

बता दें कि 23 सितंबर को दरंग ज़िले के धौलपुर गांव में पुलिस और अतिक्रमणकारियों के बीच हिंसक झड़प होने से दो लोगों की मौत हो गई थी जिनकी पहचान मोइनुल हक़ और शेख़ फरीद के रूप में हुई.

सरकार के मुताबिक़, इस घटना में आठ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं.

लेकिन इस घटना से जुड़ा एक वीडियो वायरल होने के बाद सरकार पर दबाव बढ़ गया है.

इस वीडियो में पुलिस की कार्रवाई को रिकॉर्ड करने के लिए बुलाया गया कैमरामैन एक मृतप्राय व्यक्ति को पीटता हुआ दिख रहा है.

कांग्रेस से लेकर ऑल असम माइनॉरिटीज़ स्टूडेंट्स यूनियन इस घटना की जांच को लेकर सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन से संतुष्ट नज़र नहीं आते हैं.

न्यायिक जांच की मांग

ऑल असम माइनॉरिटीज़ स्टूडेंट्स यूनियन के महासचिव इम्तियाज़ हुसैन ने बीबीसी को बताया है कि उनका संगठन इस मामले में न्यायिक जांच की मांग करता है.

उन्होंने कहा, "हम इस मामले में एक उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हैं. असम सरकार ने एक पूर्व जज से इस मामले की जांच कराने की बात कही है. लेकिन हमें लगता है कि ये पूरी तरह से न्यायिक जांच नहीं होगी.

हम इसे न्यायिक जांच तब मानेंगे जब ये कार्यपालिका के प्रभाव से बाहर होगा. ऐसे में हम गुवाहाटी हाइकोर्ट के चीफ़ जस्टिस की देखरेख में एक सिटिंग जज द्वारा जांच की मांग करते हैं. क्योंकि एक पूर्व जज पर सरकार और कार्यपालिका का प्रभाव रहेगा. न्यायपालिका का एक पूर्व जज पर सीधा नियंत्रण नहीं होगा."

इस मामले में अतिक्रमण हटाने गए पुलिसकर्मियों पर मानवाधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाया जा रहा है.

कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद रिपुन बोरा मानते हैं कि इस मामले में पुलिस द्वारा अतिरिक्त बल का प्रयोग किया गया है.

रिपुन बोरा कहते हैं, "हम लोगों ने वीडियो फुटेज़ में देखा है कि तीस - चालीस पुलिसकर्मी अत्याधुनिक हथियारों से लैस हैं. और फिर एक आदमी आता है. सवाल ये है कि इतने पुलिसकर्मी एक व्यक्ति को ज़िंदा गिरफ़्तार क्यों नहीं कर सके. चालीस आदमी मिलकर एक आदमी की हत्या करना, ये पुलिस का कौन सा क़ानून है. जिस आदमी को उन्होंने मारा, उनके पास कोई हथियार नहीं था."

"इसके बावजूद पुलिस उन्हें ज़िंदा गिरफ़्तार क्यों नहीं कर पाई. ये पुलिस की भारी ग़लती है. हमने वीडियो देखा है जिसमें पुलिस ने डंडे से पीट-पीटकर मारा है. इसके बाद एक कैमरा मैन कैसे आकर एक मृत शरीर के ऊपर डांस करने लगा. पुलिस ने उन्हें क्यों नहीं रोका. ये कौन सा दुनिया का मानवाधिकार है. मृत शरीर के ऊपर एक लड़के द्वारा एक बार नहीं दो तीन बार डांस किया जाना. पुलिस ने उनको भी नहीं रोका. हम इसीलिए एसपी के तबादले और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. क्योंकि ये उनकी ज़िम्मेदारी है."

सीएम सरमा के भाई के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग

इस घटना के बाद से हिमंत बिस्वा सरमा के भाई यानी स्थानीय पुलिस अधीक्षक सुशांत बिस्वा सरमा के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की जा रही है.

बोरा कहते हैं, "हम असम सरकार के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को एक निष्पक्ष और पारदर्शी नेता के रूप में देखना चाहते हैं. उन्हें निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए फिर चाहें वह अधिकारी उनका भाई हो या कोई और हो.

सरकार को ये संदेश नहीं देना चाहिए कि कार्रवाई इसलिए नहीं हुई क्योंकि स्थानीय पुलिस अधीक्षक मुख्यमंत्री के छोटे भाई हैं."

हालांकि, इम्तियाज हुसैन मानते हैं कि इस मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए क्योंकि इस बात का संदेह है कि इस घटना के तार सीधे मुख्यमंत्री से जुड़े हुए हैं.

वह कहते हैं, "असम पुलिस में कुछ सांप्रदायिक तत्व शामिल हो गए हैं. और इस घटना में जो कैमरापर्सन का जिक्र आ रहा है, वैसे तमाम लोग हैं. जो नफ़रत से भरे हुए हैं और असम की गलियों में घूम-घूमकर मुसलमान मृतकों का असम्मान कर रहे हैं.

ऐसे में सरकार और प्रशासन 23 सितंबर की अमानवीय घटना के लिए पूरी तरह ज़िम्मेदार हैं. इस वजह से हम न्यायिक जांच की मांग करते हैं.

हम ये जांच चाहते हैं क्योंकि हमें इस बात का शक है कि इस मामले में मुख्यमंत्री स्वयं शामिल थे. क्योंकि उनके भाई वहीं मौजूद थे. और पुलिसकर्मियों ने मानवाधिकारों की हर सीमा को लांघ दिया. ऐसे में हमें लगता है कि एक सिटिंग जज से उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की ज़रूरत है. और ये जांच गुवाहटी हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस की मॉनिटरिंग में होनी चाहिए."

क्या कहते हैं सुशांत बिस्वा सरमा

दरंग प्रशासन ने इस मामले में बचाव की मुद्रा में दिखाई पड़ रहा है.

सुशांत बिस्वा सरमा ने बीबीसी से बात करते हुए कहा है, "हमारे ऊपर हमला किया गया है. इसके बाद हमने कानूनी कार्रवाई करते हुए कदम उठाए.

पुलिस के ऊपर हमला किया गया था और अपने बचाव में हमने कार्रवाई की."

इसके बाद जब उनसे वीडियो को लेकर सवाल किया गया तो सरमा ने कहा कि वह वीडियो एक लंबी रिकॉर्डिंग का अंश मात्र है.

उन्होंने कहा, "वो एक वीडियो नहीं है. आपको पूरा वीडियो देखना पड़ेगा."

वहीं, मुख्यमंत्री के भाई होने की बात पर सुशांत बिस्वा सरमा ने कहा, "मैं इस पर क्या कह सकता हूं. मैं एक सरकारी मुलाज़िम हूं."

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