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बजट 2022-23: क्रिप्टोकरेंसी, डिजिटल वॉलेट और ब्लॉकचेन से जुड़े हर सवाल का जवाब
- Author, अभिनव गोयल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बजट पेश किया. बजट घोषणा में निर्मला सीतारमण ने वर्चुअल एसेट पर टैक्स और भारतीय डिजिटल करेंसी लॉन्च करने की बात कही.
उन्होंने कहा, ''किसी भी तरह के वर्चुअल डिजिटल एसेट के लेनदेन से होने वाली आय पर 30 प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा. वर्चुअल डिजिटल एसेट को ट्रांसफ़र करने पर भी एक प्रतिशत टीडीएस का भुगतान करना होगा. गिफ़्ट में वर्चुअल करेंसी लेने वाले व्यक्ति को टैक्स भरना होगा''.
वर्चुअल एसेट के अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की तरफ से डिजिटल रुपी लॉन्च करने की बात भी कही.
वर्चुअल एसेट, क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल रुपी को आसान भाषा में समझने के लिए बीबीसी ने अर्थशास्त्री शरद कोहली, क्रिप्टोकरेंसी एक्सपर्ट संजीव कंसल और क्रॉस टावर क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज के सीईओ विकास आहूजा से बातचीत की.
सवाल- क्रिप्टोकरेंसी क्या है ?
बड़े-बड़े कंप्यूटर एक ख़ास फ़ॉर्मूले या कहें कि एल्गोरिथम को हल करते हैं, इसे माइनिंग कहा जाता है तब जाकर क्रिप्टोकरेंसी बनती है. बिटकॉइन जैसी क़रीब चार हजार वर्चुअल करेंसी बाज़ार में उपलब्ध हैं. इन सब वर्चुअल करेंसी को क्रिप्टोकरेंसी कहते हैं. नॉर्मल करेंसी को कोई ना कोई संस्था कंट्रोल करती है. जैसे भारत में करेंसी को भारतीय रिज़र्व बैंक कंट्रोल करता है. रिज़र्व बैंक करेंसी को प्रिंट करता है और उसका हिसाब-किताब रखता है. क्रिप्टोकरेंसी को कोई संस्था कंट्रोल नहीं करती.
सवाल- कैसे काम करती है क्रिप्टोकरेंसी ?
क्रिप्टोकरेंसी की हर एक ट्रांज़ैक्शन का डेटा दुनियाभर के अलग अलग कंप्यूटर में दर्ज होता है. आसान शब्दों में समझें तो मान लीजिए कि एक बहुत बड़ा कमरा है, जिसमें सारी दुनिया के लोग बैठे हुए हैं. ऐसे में जब कोई व्यक्ति क्रिप्टोकरेंसी की लेन-देन करता है तो उसकी जानकारी कमरे में बैठे सभी लोगों को हो जाती है यानी उसका रिकॉर्ड सिर्फ़ एक जगह दर्ज नहीं होता. दुनियाभर के अलग-अलग कंप्यूटर में रखा जाता है इसलिए यहां किसी, बैंक जैसे तीसरे पक्ष की जरू़रत नहीं पड़ती है. 2008 में बिटकॉइन नाम की क्रिप्टोकरेंसी बनी थी. 2008 से लेकर अब तक बिटकॉइन को कब किस वॉलेट से ख़रीदा या बेचा गया उसकी सारी जानकारी रहती है. इसमें परेशानी बस इतनी है कि इसमें ये पता नहीं चलता कि वॉलेट किस व्यक्ति से जुड़ा हुआ है.
सवाल - बजट घोषणा में वर्चुअल एसेट पर 30 प्रतिशत टैक्स का क्या मतलब है ?
क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली कमाई पर अब व्यक्ति को 30 प्रतिशत टैक्स देना होगा. अगर किसी व्यक्ति ने एक लाख रुपये की क्रिप्टोकरेंसी ख़रीदी और उसे दो महीने बाद दो लाख रुपये में बेच दिया. इसका मतलब है कि उसे एक लाख रुपये का मुनाफ़ा हुआ. अब उस व्यक्ति को इस एक लाख रुपये के मुनाफ़े पर 30 प्रतिशत यानी 30 हज़ार रुपये टैक्स के रूप में सरकार को देने होंगे.
सवाल- वर्चुअल एसेट पर एक प्रतिशत टीडीएस का क्या मतलब है ?
अगर पहला व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से एक लाख रुपये की क्रिप्टोकरेंसी ख़रीदता है. ऐसे में पहला व्यक्ति एक प्रतिशत टीडीएस यानी 1 हज़ार रुपये घटाकर उसे 99 हजार की पेमेंट करेगा. इस एक हज़ार रुपये को सरकार के टीडीएस के रूप में जमा करना पड़ेगा जिसे बाद में टैक्स के तौर पर क्रेडिट किया जा सकता है. इससे सरकार को लेन-देन की जानकारी रहेगी.
सवाल- क्या क्रिप्टोकरेंसी गिफ़्ट करने पर भी टैक्स देना होगा?
जी हां. कुछ मामलों में क़रीब के रिश्तेदारों को सामान गिफ़्ट करने पर टैक्स नहीं लगता है, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी को गिफ़्ट की कैटेगरी से बाहर रखा गया है. अगर आप, अपने भाई-बहन को भी क्रिप्टोकरेंसी गिफ़्ट देते हैं तो इस पर टैक्स लगेगा.
सवाल- अगर क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन में नुक़सान हुआ तो क्या होगा?
सालाना आय में क्रिप्टोकरेंसी से होने वाले फ़ायदे या नुक़सान को नहीं जोड़ा जा सकता. अगर आपको अपने बिज़नेस से पांच लाख रुपये की कमाई हुई है और क्रिप्टोकरेंसी से एक लाख रुपये का नुक़सान हुआ है. ऐसे में आपको पूरे पांच लाख रुपये पर सरकार को टैक्स देना होगा. इसमें क्रिप्टोकरेंसी से हुए नुक़सान को एडजस्ट नहीं किया जा सकता. मतलब की आप अपनी कमाई चार लाख रुपये नहीं दिखा सकते.
सवाल- वर्चुअल एसेट क्या होता है?
वर्चुअल का मतलब है जिसे फ़िज़िकली टच ना किया जा सके और एसेट का मतलब है संपत्ति. मार्केट में बिटकॉइन, इथीरियम, डॉजकॉइन जैसी जितनी भी क्रिप्टोकरेंसी हैं वे सारी वर्चुअल एसेट कहलाती हैं. इसमें नॉन फ़ंजिबल टोकन यानी एनएफ़टी भी शामिल है. उदाहरण के लिए दुनिया का जो सबसे पहला एसएमएस गया था उसे एक व्यक्ति ने संभालकर उसका नॉन फ़ंजिबल टोकन बना लिया है. बहुत सारी पेंटिंग को भी लोगों ने एनएफ़टी की शक्ल में तैयार कर लिया है. इन्हें वर्चुअल दुनिया में बेचा या ख़रीदा जा सकता है.
सवाल- डिजिटल वॉलेट क्या होता है ?
जैसे एक व्यक्ति अपने पैसे को पर्स में रखता है. ऐसे ही क्रिप्टोकरेंसी रखने के लिए डिजिटल वॉलेट की ज़रूरत पड़ती है. डिजिटल वॉलेट खोलने के लिए पासवर्ड होता है. जिसके पास भी डिजिटल वॉलेट का पासवर्ड होता है वो उसे खोलकर क्रिप्टोकरेंसी को ख़रीद या बेच सकता है. डिजिटल वॉलेट का एक पता होता है जो 40 से 50 अंकों का होता है. इनमें अल्फ़ाबेट और न्यूमेरिक दोनों शामिल होते हैं. हर वॉलेट का यूनिक पता होता है. ऐसे अरबों-खरबों वॉलेट डिजिटल दुनिया में हैं.
सवाल- ब्लॉकचेन क्या होती है ?
क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा जब कोई ट्रांज़ैक्शन होता है तो वो ब्लॉक में दर्ज होता है. ब्लॉक में सीमित ट्रांज़ैक्शन ही दर्ज हो सकते हैं. एक ब्लॉक भरने के बाद ट्रांज़ैक्शन दूसरे ब्लॉक में दर्ज होता है. ऐसा एक ब्लॉक अगले ब्लॉक से जुड़ता चला जाता है. इसी चेन को ब्लॉकचेन कहते हैं.
सवाल- क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज क्या होती है ?
ये ऐसे प्लेटफ़ॉर्म होते हैं जहां पर व्यक्ति क्रिप्टोकरेंसी को ख़रीद या बेच सकता है. रुपयों को इन एक्सचेंज प्लेटफ़ॉर्म पर जाकर क्रिप्टोकरेंसी में बदलवा सकते हैं. अगर आपको एक क्रिप्टोकरेंसी बेचकर दूसरी क्रिप्टोकरेंसी ख़रीदनी हो तब भी इस तरह के एक्सचेंज काम में आते हैं. जिस तरह से ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर सामान ख़रीदने के लिए जाते हैं वैसे ही क्रिप्टोकरेंसी ख़रीदने के लिए क्रिप्टो एक्सचेंज की मदद लेते हैं. यहां क्रिप्टोकरेंसी ख़रीदने वाले भी होते हैं और बेचने वाले भी.
सवाल- डिजिटल रुपी, पेटीएम जैसे ई-वॉलेट में रखे पैसों से कैसे अलग है?
डिजिटल रुपी में की बात करें तो आपकी जेब में जो नोट और सिक्के पड़े हुए हैं वो डिजिटल रूप में आपके फ़ोन या वॉलेट में रहेंगे. इसमें आपको बैंक की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. अभी के समय में कोई पेमेंट करने के लिए किसी बैंक या किसी पेमेंट वॉलेट का सहारा लेना पड़ता है. पेटीएम जैसी ई-वॉलेट कंपनियां मध्यस्थ का काम करती हैं. डिजिटल रुपी में ऐसा नहीं होगा. जैसे अभी आप कैश पैसे से लेन-देन करते हैं, वैसे ही डिजिटल रुपी से भी कर पाएंगे. ये डिजिटल करेंसी ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित होगी. इससे पता चलेगा कि डिजिटल करेंसी कहां-कहां से चलकर आप तक आई है. साधारण करेंसी की तरह की डिजिटल रुपी को भी भारतीय रिज़र्व बैंक जारी करेगा.
सवाल- डिजिटल रूपी, क्रिप्टोकरेंसी से कैसे अलग है?
बिटकॉइन 2 करोड़ 10 लाख से ज़्यादा नहीं हो सकते. बिटकॉइन की सप्लाई लिमिटेड है, जब मांग बढ़ती है तब बिटकॉइन के दाम बढ़ने लगते हैं. पांच साल पहले बिटकॉइन 22 हज़ार रुपये का था लेकिन आज इसकी क़ीमत क़रीब 30 लाख रुपये है. इसके दाम बढ़ते-घटते रहते हैं. ज्यादातर क्रिप्टोकरेंसी की एक तय संख्या होती है, उससे अधिक उन्हें नहीं बनाया जा सकता. दूसरी तरफ़ डिजिटल रुपी की क़ीमत में कोई बदलाव नहीं आता. दस रुपये डिजिटल रुपी के तौर पर कई सालों के बाद भी दस रुपये ही रहेंगे. डिजिटल रुपी सिर्फ़ हमारे लेन-देन के तरीके को बदल देगा.
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