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बिटक्वॉइन के गिरने का एलन मस्क से क्या कनेक्शन
चीन के क्रिप्टोकरेंसी पर लगाए नए प्रतिबंध के बाद बुधवार को तीन महीने में पहली बार बिटक्वॉइन की क़ीमतें गिर कर 34,000 डॉलर से कम हो गई हैं.
चीन ने हाल में बैंकों और पेमेन्ट फ़र्म्स पर क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए लेनदेन करने पर पाबंदी लगा दी थी. मंगलवार को चीन ने निवेशकों को क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए लेनदेन को लेकर चेतावनी भी दी.
इससे पहले कार बनाने वाली कंपनी टेस्ला ने भी कहा था कि वो ख़रीदफ़रोख़्त के लिए बिटक्वॉइन का इस्तेमाल नहीं करेगा. इसके बाद बीते सप्ताह बिटक्वॉइन की क़ीमतों में दस फ़ीसद से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है.
बुधवार को इसकी क़ीमतें थोड़ी संभली ज़रूर लेकिन ये अभी भी 10.4 फ़ीसद की गिरावट के बाद 38,131 डॉलर पर है.
इसके साथ ही इथेरियम ब्लॉकचेन नेटवर्क के इथर और डोज़क्वॉइन जैसी दूसरी क्रिप्टोकरेंसी की क़ीमतों में क़रीब 22 फ़ीसद और 24 फ़ीसद की गिरावट आई है.
ये गिरावट केवल बिटक्वॉइन में ही आई ऐसा नहीं है. एलन मस्क के ऐलान के बाद उनकी कंपनी टेस्ला के शेयरों में भी क़रीब तीन फ़ीसद की गिरावट आई.
ग़ौरतलब है कि एलन मस्क के पास तक़रीबन डेढ़ अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी है.
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पहले घोषणा, फिर यू-टर्न
इसी साल मार्च में टेस्ला ने ऐलान किया था कि वह बिटक्वॉइन के ज़रिए भी ख़रीद को स्वीकार करेगा. कई पर्यावरणविदों और निवेशकों ने उनके इस क़दम का विरोध किया था.
एलन मस्क ने हाल में अपने इस फ़ैसले को बदला और यू-टर्न लेते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन की चिंताओं को देखते टेस्ला क्रिप्टोकरेंसी से गाड़ियों की ख़रीद की अपनी योजना को रद्द कर रही है.
उन्होंने कहा कि बिटक्वाइन की माइनिंग में काफ़ी उर्जा लगती है और इसमें कई हाई-पावर्ड कम्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है. अक्सर इसके लिए जिस पावर का इस्तेमाल किया जाता है वहां ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत कोयला है.
हालांकि मस्क ने भी स्पष्ट किया है कि कंपनी अपने ख़रीदे हुए बिटक्वाइन नहीं बेचेगी बल्कि जब माइनिंग के लिए स्थायी ऊर्जा का इस्तेमाल होगा तब टेस्ला अपनी करेंसी का इस्तेमाल करेगी.
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चीन ने क्या कहा?
साल 2019 में मनी-लॉन्ड्रिंग पर लगाम कसने के लिए चीन ने क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए होने वाले लेनदेन पर रोक लगा दी थी. लेकिन इसके बाद भी लोग ऑनलाइन काम के लिए बिटक्वॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए लेनदेन का काम कर रहे हैं, जो चीनी सरकार के लिए परेशानी का सबब बन गया था.
मंगलवार को नेशनल इंटरनेट फ़ाइनेंस एसोसिएशन और पेमेन्ट एंड क्लीयरिंग एसोसिएशन समेत चीनी सरकार समर्थित संस्थाओं ने सोशल मीडिया पर चेतावनी जारी की.
उन्होंने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी में निवेश या फिर इसके लेनदेन के कारण अगर किसी को नुक़सान उठाना पड़ता है तो उन्हें इस मामले में किसी तरह की कोई सुरक्षा नहीं मिलेगी.
इन संस्थाओं का कहना था कि हाल में क्रिटप्टोकरेंसी की क़ीमतों में जो उतार चढ़ाव आए हैं उससे "व्यक्ति की संपत्ति की सुरक्षा को ख़तरा पैदा हुआ है" और इससे "सामान्य आर्थिक लेनदेन पर असर पड़ा है."
Markets.com में काम करने वाले नील विल्सन का कहना है कि "चीन पहले से क्रिप्टोकरेंसी के क्षेत्र में दबाव बनाने की कोशिश कर रहा था. लेकिन अब उसने कड़ा क़दम उठाया है. देशों के केंद्रीय बैंक भी डिजिटल करेंसी पर ज़ोर देने लगे हैं, ऐसे में हो सकता है कि इसके बाद दूसरे देश भी चीन की राह पर चलें"
"बिटक्वॉइन के मामले में अब तक पश्चिमी नियामक निश्चिंत रहे हैं लेकिन स्थिति अब जल्द बदल सकती है."
चीन के फ़ैसले के बाद बिटक्वॉइन के ज़रिए चीन में काम नहीं हो सकता लेकिन ये बात भी सच है कि दुनिया का 75 फ़ीसद से अधिक बिटक्वाइन की माइनिंग चीन में ही होती है.
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