यूएन में यूक्रेन संकट पर भारत ने नहीं दिया अमेरिका का साथ-प्रेस रिव्यू

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भारत ने सोमवार को यूक्रेन संकट पर तत्काल तनाव कम करने के लिए कहा है.
भारत ने इस मामले में सभी देशों के उचित सुरक्षा हितों को भी रेखांकित किया. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन पर रूसी हमले के ख़तरे को लेकर चर्चा होनी चाहिए या नहीं, इस पर वोटिंग हुई और भारत इस वोटिंग से बाहर रहा.
अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने इस ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है. अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इस विषय पर चर्चा हुई और अमेरिका के नेतृत्व में 10 देशों ने चर्चा के पक्ष में वोटिंग की.
भारत के साथ कीनिया और गैबॉन वोटिंग से बाहर रहे. रूस और चीन ने चर्चा के ख़िलाफ़ वोट किया. यह वोटिंग प्रक्रियात्मक थी और इसमें वीटो का प्रावधान नहीं था. इसमें 9 वोटों की ज़रूरत थी. अमेरिका इस बात को लेकर आश्वस्त था कि चर्चा के लिए उसे 9 से ज़्यादा देशों का समर्थन मिल जाएगा.
यह दूसरी बार है, जब भारत ने यूक्रेन संकट को राजनयिक और रचनात्मक वार्ता के ज़रिए सुलझाने के लिए कहा है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा, ''भारत इस संकट का समाधान चाहता है और यह तत्काल तनाव में कमी लाकर हासिल किया जा सकता है. इसमें सभी देशों को सुरक्षा हितों का ख़्याल रखना चाहिए. इसका लक्ष्य इस इलाक़े में लंबी अवधि के लिए शांति और स्थिरता होना चाहिए. भारत सभी संबंधित पक्षों के संपर्क में है. 20 हज़ार से ज़्यादा भारतीय छात्र और अन्य लोग यूक्रेन और उसके सीमाई इलाक़ों में रहते हैं.''
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टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''भारत का वोटिंग से बाहर रहना, उसके संतुलनवादी रुख़ को दर्शाता है. अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत ने रूस पर आक्रामक होने जैसा कोई आरोप लगाने से परहेज़ किया. भारत का रूस के साथ सुरक्षा संबंध तो है ही साथ ही अफ़ग़ानिस्तान में भी भारत को अपने हितों के लिए रूस के समर्थन की ज़रूरत है. रूस ने पिछले साल नंवबर में अफ़ग़ानिस्तान पर भारत में एक कॉन्फ़्रेंस के आयोजन में मदद की थी. भारत और चीन के बीच जारी तनाव को भी रूस कम करने में लगा है.''
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक से पहले रूसी उप-विदेश मंत्री सर्गेई वर्शिनिन भारत के दौरे पर आई थीं और उन्होंने भारत के साथ यूएन में रणनीतिक सहयोग को लेकर चर्चा की थी. आज से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता एक महीने के लिए रूस के पास आ रही है.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस ने भी इस ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है. अख़बार ने लिखा है कि अमेरिका, ब्रिटेन और फ़्रांस समेत 10 देशों ने चर्चा के पक्ष में वोट किया तो भारत, कीनिया और गैबॉन के साथ वोटिंग से बाहर रहा. अख़बार ने लिखा है कि भारत ने यहाँ यह दिखाने की कोशिश की है कि वो यूक्रेन संकट में किसी भी खेमे के पक्ष में नहीं है. अख़बार ने लिखा है कि भारत भले वोटिंग में शामिल नहीं हुआ, लेकिन उसका रुख़ रूस के पक्ष में ही नज़र आया.

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पेगासस न्यायालय में विचाराधीन है, संसद में चर्चा की ज़रूरत नहीं: सरकार
संसद के बजट सत्र की शुरुआत सोमवार को हो गई. विपक्षी पार्टियां बजट सत्र में पेगासस जासूसी पर चर्चा की मांग कर रही हैं, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोमवार को कहा कि पेगासस मुद्दा न्यायालय में विचाराधीन है और इस पर संसद में अलग से चर्चे की ज़रूरत नहीं है.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू की ख़बर के अनुसार, सरकार ने वर्चुअली आयोजित सर्वदलीय बैठक में कहा कि पेगासस मुद्दे पर चर्चा नहीं होगी और न ही इस पर प्रधानमंत्री बयान देंगे. कई विपक्षी नेताओं ने मांग की थी कि अगर चर्चा नहीं हो सकती है तो कम से कम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बयान दे देना चाहिए.
हालांकि प्रह्लाद जोशी ने यह कहा कि सांसद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बोलते हुए अपनी बातों में इस मुद्दे को उठा सकते हैं. द हिन्दू ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि सरकार भी पेगासस मुद्दे पर संसद में विपक्ष से भिड़ने के लिए तैयार है. कांग्रेस के दो नेताओं ने सूचना एवं तकनीक मंत्री अश्विनी वैष्णव के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया है. इन्होंने अपने नोटिस में कहा है कि आईटी मंत्री ने पेगासस मुद्दे पर संसद को गुमराह किया था.

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अखिलेश यादव के ख़िलाफ़ बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री को उतारा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के ख़िलाफ़ मैनपुरी की करहल सीट से बीजेपी ने केंद्रीय क़ानून एवं न्याय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल को उतारा है.
हिन्दी अख़बार दैनिक जागरण ने इस ख़बर पहले पन्ने पर जगह दी है. अख़बार ने अपनी ख़बर में लिखा है, ''आगरा से सांसद बघेल कभी समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की सुरक्षा में तैनात थे. राजनीति के दांव-पेच उन्होंने सियासत के पहलवान मुलायम सिंह से सीखे. ऐसे में उन्हें अखिलेश के ख़िलाफ़ उतारकर बीजेपी ने मुक़ाबले को दिलचस्प बना दिया है.
वहीं अखिलेश के चाचा और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के ख़िलाफ़ भाजपा ने विवेक शाक्य को इटावा की जसवंत नगर सीट से प्रत्याशी बनाया है. करहल और जसवंत नगर सीटें सपा का गढ़ रही हैं.
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