यूट्यूब के ज़रिए कैसे फैल रहा बॉलीवुड के प्रति नफ़रत का 'धंधा' - बीबीसी पड़ताल

- Author, जुगल पुरोहित, मेधावी अरोड़ा और सेराज अली
- पदनाम, बीबीसी डिसइन्फ़ॉर्मेशन यूनिट
देश के हिंदी फ़िल्म उद्योग 'बॉलीवुड' को हिट और फ़्लॉप, जश्न और त्रासदी, प्रशंसा, उपहास और मतभेदों के लिए जाना जाता है. हालाँकि, कुछ ऐसी भी चीज़ें हैं जो दिख नहीं रही हैं.
ऐसा पता चला है कि इंटरनेट पर इन दिनों बॉलीवुड और उसके कलाकारों के ख़िलाफ़ किसी योजना के तहत एक नकारात्मक अभियान चलाया जा रहा है.
इसके तहत, किसी इन्फ्लुएंसर से उनके लाखों फ़ॉलोअर को बॉलीवुड के कलाकारों के साथ गाली-गलौज करने, झूठ फैलाने और उन्हें नुक़सान पहुंचा सकने वाले दुष्प्रचार करने का निर्देश मिलता है. दिलचस्प बात ये है कि दुष्प्रचार करते हुए ये इन्फ्लुएंसर कमाई भी कर रहे हैं.
लेकिन यह होता कैसे है, इसे समझने के लिए हमें गूगल के वीडियो शेयरिंग प्लेटफ़ॉर्म 'यूट्यूब' के बारे में जानना चाहिए. बॉलीवुड के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे इस दुष्प्रचार अभियान का मुख्य अड्डा यूट्यूब ही है.
बीबीसी की डिसइन्फ़ॉर्मेशन यूनिट ने हफ़्तों तक दुष्प्रचार फैलाने वाले सैकड़ों वीडियो देखने के बाद इस नेटवर्क का पता लगाया है. इस रिपोर्ट में हम इस मामले की तह तक जाएंगे और इस बारे में यूट्यूब का जवाब भी आपको बताएंगे.
बीबीसी ने अपनी पड़ताल में यह भी पाया कि हिंदी फ़िल्म जगत के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार फैलाने वाले इन इन्फ़्लुएंसर में से कई लोग दक्षिणपंथी हैं. हमें ऐसे वीडियो मिले, जिनमें वे बीजेपी के सदस्यों के साथ बातचीत कर रहे थे. एक इन्फ़्लुएंसर को तो उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ वर्चुअल मीटिंग के लिए बुलाया गया था.
बॉलीवुड के लोगों ने ऑनलाइन चल रही इन गतिविधियों के उन पर पड़ रहे असर को स्वीकारते हुए माना कि उन्होंने अपना बचाव करने के लिए पर्याप्त कोशिश नहीं की है.
फ़र्ज़ी वीडियो का सहारा
हम इस मामले को संदीप वर्मा का उदाहरण लेकर समझने की कोशिश करते हैं. संदीप वर्मा हमारे द्वारा ट्रैक किए गए कुछ इन्फ़्लुंएसर में से हैं. उनका दावा है कि पेशे से वे पत्रकार हैं और एक 'मध्यम वर्गीय इंसान' हैं. उनके यूट्यूब चैनल (इसका नाम हम छिपा रहे हैं) पर हमें फ़िल्म उद्योग के बारे में कई वीडियो मिले.

उन वीडियो में से एक में उन्होंने इन महिला (चैट का स्क्रीनशॉट) को दिखाया है. इनके बारे में वर्मा ने दावा किया है कि वे दिल्ली के मशहूर सरकारी अस्पताल एम्स में काम करने वाली एक 'मेडिकल व्हिसलब्लोअर' हैं.
उन्होंने यह दावा किया था कि बॉलीवुड हीरो सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच के लिए बनाई गई समिति में भ्रष्टाचार होते देखा है. उस वीडियो का शीर्षक 'बिगेस्ट प्रूफ़' था, जिसमें बताया गया कि एम्स ने कैसे सुशांत सिंह मामले की जांच में धांधली की.
बीबीसी की टीम ने इन दावों की जांच के लिए जब एम्स पहुंची, तो एम्स प्रवक्ता ने इनकार किया कि उस महिला ने कभी संबंधित विभाग में काम किया. प्रवक्ता ने उस वीडियो को 'फ़र्ज़ी वीडियो' क़रार दिया.
हालांकि बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में संदीप वर्मा ने कहा कि उनके पास उन 'व्हिसलब्लोअर' की पहचान साबित करने के पूरे सबूत हैं. लेकिन उन्होंने कोई ब्यौरा देने से मना कर दिया. उन्हें जब ऐसा करने की चुनौती दी, तो वर्मा पीछे हट गए और हम लोगों पर 'कार्रवाई' करने की धमकी देने लगे.
बिना सबूत के आधारहीन आरोप
हमें कई इन्फ़्लुएंसर के ऐसे वीडियो मिले, जिनमें अभिनेताओं, निर्देशकों और निर्माताओं को 'राष्ट्र विरोधी' और 'हिंदू विरोधी' क़रार दिया गया था. हमने पाया कि उन वीडियो में बिना किसी सबूत के अभिनेताओं पर ड्रग्स, वेश्यावृत्ति, चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी और यहां तक कि मानव अंगों के धंधों में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं.
इन इन्फ़्लुएंसर ने ऐसे कई दावे करते हुए वीडियो देखने वालों से पैसे मांग की है. पैसे जुटाने के लिए ये इन्फ़्लुएंसर यूट्यूब की चैट फ़ीचर के अलावा 'पेड मेंबरशिप' बेचने या वीडियो में बताए गए बैंक खातों का सहारा ले रहे हैं.
एक इन्फ़्लुएंसर अपने वीडियो देखने वालों से कह रहे थे- "कृपया (यूट्यूब) विज्ञापनों को छोड़कर आगे न बढ़ें. यदि आप बिना विज्ञापन छोड़े हमारे वीडियो देखेंगे, तो उनसे आने वाले पैसे का कुछ हिस्सा हमें भी मिलेगा और हमें यह सब करने में मदद मिलेगी.''
यूट्यूब पर मौजूद कई वीडियो में बीबीसी ने पाया कि लोग उसके चैट विकल्पों के ज़रिए तरह तरह की प्रतिक्रिया देने के साथ इन इन्फ़्लुएंसर को पैसे भी भेज रहे थे.

'आख़िर हम जिएंगे कैसे?'
बॉलीवुड के शहर मुंबई में हमने अभिनेत्री स्वरा भास्कर से मुलाक़ात की, जिन्हें ऑनलाइन चलाई जा रही ऐसी मुहिमों का अक्सर सामना करना पड़ता है. हमने उनसे पूछा कि इनका उन पर क्या असर हुआ.
स्वरा भास्कर ने बताया, "अब लोगों के दिमाग़ में मेरे बारे में एक छवि बन गई है और यह मेरे कामों से ज़्यादा मेरे बारे में मचाए गए शोर से बनी है.''
उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर उनकी रोजी-रोटी पर पड़ा है. वे कहती हैं, "मुझे बहुत काम नहीं मिल पाता. इंडस्ट्री में लोग इस बात को लेकर चिंता करते हैं कि यदि स्वरा आई तो विवाद हो सकता है. इसलिए ब्रांड मुझसे बहुत डरते हैं."
स्वरा भास्कर से हमने पूछा कि क्या इस तरह के अभियान कलाकारों को निजी तौर पर प्रभावित करने के साथ फ़िल्म उद्योग पर भी असर डाल रहे हैं. इस पर उन्होंने हामी भरते हुए कहा कि इन सबसे यहां 'डर का माहौल' बन गया है.
स्वरा कहती हैं, "लोग अक्सर पूछते हैं कि 2011, 2012 और 2013 की तरह आज स्टार लोग पेट्रोल के बढ़े दामों की शिक़ायत क्यों नहीं करते? यहां तक कि जब उन्हें निशाना भी बनाया जाता है तो वे कुछ नहीं कहते. लेकिन हम ये नहीं सोचते कि आख़िर बदला क्या है. जो बदला है वो डर है. बॉलीवुड पर लगातार हमले हो रहे हैं. इसके पीछे एक तय योजना के तहत चलाया गया एजेंडा है, जो प्रायोजित है. इसके पीछे की सोच बॉलीवुड को उनके इशारे पर नचाने का है."
हालांकि बॉलीवुड में सिर्फ़ एक्टर नहीं हैं. हिंदी फ़िल्म उद्योग हज़ारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार देने के लिए जाना जाता है. लेकिन बीबीसी ने अभी जिस तरह के अभियान का पर्दाफ़ाश किया है, उससे रोज़गार को भी नुक़सान हो रहा है.
इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईएमपीपीए) के सचिव अनिल नागरथ ने बीबीसी को बताया, "कुछ लोगों ने जिस तरह से इस उद्योग को बदनाम किया है, उससे निर्माताओं के लिए अपने प्रोजेक्ट के लिए पैसा जुटाना कठिन हो गया है. पेमेंट में देरी होने से मज़दूरों को भी परेशानी होती है. आख़िर हम जिएंगे कैसे?"

'जान को भी हो सकता है ख़तरा'
अफ़वाहों पर यदि क़ाबू न किया जाए तो बात हिंसा तक भी पहुँच सकती है.
पत्रकार रह चुकीं श्रीमी वर्मा ने इस बारे में एक उदाहरण देते हुए बताया, "जब पद्मावत रिलीज़ हो रही थी, तब फ़िल्म में रानी बनीं दीपिका पादुकोण और अलाउद्दीन ख़िलजी बने रणवीर सिंह के बीच एक किसिंग सीन की अफ़वाह उड़ने पर ही असामाजिक संगठनों ने उस फ़िल्म के सेट तोड़ दिए, निर्देशक संजय लीला भंसाली को थप्पड़ मार दिया और दीपिका की नाक काटने की धमकी भी दे डाली.''
चुप बैठने की क़ीमत लगातार बढ़ रही है. वे कहती हैं, ''मैं ख़तरे की घंटी नहीं बजाना चाहती, लेकिन स्थिति बहुत भयानक है. आज किसी भी शो की रिलीज़ से पहले प्रोडक्शन हाउस इस बात पर विचार करते हैं कि कहीं उसमें कोई आपत्तिजनक तथ्य तो नहीं हैं और कहां परेशानी खड़ी हो सकती है. लेकिन ये सब नहीं होना चाहिए."
आख़िर इस दौर से बाहर निकलने का क्या रास्ता है?
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि कई लोग ये सोचते हैं कि वे ख़ास क़िस्म की फ़िल्में बना रहे हैं और कुछ लोगों के पीछे दौड़ रहे हैं, इसलिए वे सुरक्षित हैं. लेकिन इतिहास से उन्हें सीखना चाहिए कि कोई भी तब तक सुरक्षित नहीं होता, जब तक कि वे एकजुट न हों.''
श्रीमी कहती हैं, ''बॉलीवुड को आपसी एकता बनाने की ज़रूरत है. इसे कुछ और करने की ज़रूरत है. उन्हें सांसदों से बात करना चाहिए, क़ानून में बदलाव करवाना चाहिए. ये समझना चाहिए कि हम अभिव्यक्ति की आज़ादी पर नहीं फ़र्ज़ी ख़बरों पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रहे हैं."

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इन चैनलों पर बीजेपी नेताओं के वीडियो भी
बीबीसी को अपनी पड़ताल के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपलोड किया हुआ एक वीडियो मिला. 'सोशल मीडिया संवाद' टाइटल वाला यह वीडियो 9 सितंबर, 2021 को अपलोड किया गया.
इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 'अपनी सरकार के नज़रिए को मज़बूती से रखने वाले महत्वपूर्ण इन्फ़्लुएंसरों की टीम को संबोधित कर रहे हैं.' इस वीडियो में इन्फ़्लुएंसरों को श्रेय देते हुए उन्होंने कहा, "ऐसी कई चीज़ें हैं जिसे सरकार सीधे तौर पर नहीं कह सकती, लेकिन उसे आप कहते हैं."
उसमें हमें 'एल्विश यादव' नाम का एक शख़्स मिला, जिसे 'यूट्यूबर' बताया गया था. उन्हें सीएम से सवाल भी पूछने को कहा गया. हमें उन्हीं इन्फ़्लुएंसर का एक वीडियो मिला, जिसमें बॉलीवुड एक्टरों को बार-बार गाली दी गई और उन पर 'सेक्सिस्ट कमेंट' किए गए.
यूट्यूब की नीति है कि वहां डाले गए वीडियो में अपशब्द नहीं होने चाहिए. इसके बाद भी वह अभी भी यूट्यूब पर है. बीबीसी ने इन इन्फ़्लुएंसर से बात करने के लिए उन्हें बार-बार लिखा, लेकिन कोई जवाब नहीं आया.
हमने इसी क़िस्म के कई और वीडियो में बीजेपी के कई पदाधिकारियों को भाग लेते हुए देखा. उनमें बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला और महाराष्ट्र एवं पश्चिम बंगाल के कई नेता भी हैं.
राजनीतिक क़िस्म के ऐसे वीडियो देखने से पता चलता है कि इन इन्फ़्लुएंसरों का बीजेपी नेताओं से संबध रहा है. हालांकि अधिकांश इन्फ़्लुएंसर ने बीबीसी से कहा कि उनका बीजेपी के साथ कोई संबंध नहीं है.
महाराष्ट्र से बीजेपी प्रवक्ता श्वेता शालिनी भी संदीप वर्मा के यूट्यूब चैनल पर दिखीं. बीबीसी ने जब उनसे संपर्क किया तो उन्होंने कहा, "यह इन्फ़्लुएंसर मेरी पार्टी को नहीं जानता और न ही इसका पार्टी से कोई जुड़ाव है. मेरी उससे हुई बातचीत पूरी तरह से निजी है और बतौर युवा नेता युवाओं तक पहुंचने के कार्यक्रम का एक हिस्सा है."
वहीं शहज़ाद पूनावाला ने बार-बार कोशिश करने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया. बीबीसी ने कई दूसरे इन्फ़्लुएंसरों से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही ने हमारी कोशिश का जवाब दिया.

'हमें यूट्यूब के एक्शन की चिंता नहीं है'
कई हफ़्तों तक संपर्क करने के बाद संदीप वर्मा हमसे दिल्ली में मिलने को तैयार हुए. उन्होंने व्हाट्सएप पर कहा, "मैं अपनी लोकेशन को गोपनीय रखता हूं. मुझ जैसे लोगों को सावधान रहने की ज़रूरत है. क्या हम किसी होटल में कोई कमरा किराए पर ले सकते हैं?"
हमने वर्मा से पूछा कि क्या वे पैसे के लिए सनसनीखेज़ और बिना आधार वाले वीडियो बना रहे हैं. इन आरोपों से इनकार करते हुए उन्होंने कहा, "मैं बॉलीवुड से नफ़रत नहीं करता, लेकिन मैं उसकी सफ़ाई चाहता हूं."
वहीं एक अन्य इन्फ़्लुएंसर संदीप फोगाट का यूट्यूब पर एक वेरिफ़ाइड चैनल है. वे ख़ुद को 'आम लोगों की आवाज़' बताते हैं. हमने उनसे पूछा कि क्या उनका कंटेट इस बात पर निर्भर है कि उन्होंने निजी तौर पर बॉलीवुड को कैसे देखा.
उन्होंने एक वीडियो कॉल पर जवाब दिया, "मेरे दफ़्तर में जब लोग दिवाली मनाते हैं, तो ज़ाहिर तौर पर बॉलीवुड के ही गाने बजते हैं. लगातार दो साल से मैंने इसमें भाग नहीं लिया. यहां तक कि जो लोग इसमें शामिल होते थे, जब मैंने उनसे बात की तो अब वे भी इसमें शामिल नहीं होते."
उनके वीडियो में किए गए कई निराधार दावों पर जब सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, "जब आप 2 घंटे लंबे वीडियो बनाते हैं, तो हो सकता है कि उसमें कुछ चूक हुई हो."
उन दोनों से जब यह पूछा गया कि क्या उन्हें यूट्यूब के हो सकने वाली कार्रवाई की चिंता नहीं होती, तो उन दोनों ने कहा कि उन्हें इसकी चिंता नहीं होती.
संदीप फोगाट ने कहा, "यदि यह चैनल बंद भी हो जाए तो मैं 10 और चैनल खोल कर इन चीज़ों पर बार-बार बात कर सकता हूं."
इनमें से कुछ इन्फ़्लुएंसर एक-दूसरे के यूट्यूब चैनलों पर सह-पैनलिस्ट के रूप में भी शामिल होते हैं. उनके पास तथाकथित विशेषज्ञों का एक पूल है. ये विशेषज्ञ एक इन्फ़्लुएंसर के चैनल से दूसरे चैनल पर जाते रहते हैं. इससे इन इन्फ़्लुएंसरों और चैनलों के बीच आपसी तालमेल होने का भी पता चलता है.

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यूट्यूब की भूमिका
भारत में यूट्यूब के क़रीब 45 करोड़ ग्राहक हैं, जबकि पूरी दुनिया में यह संख्या 2 अरब है. इस तरह अकेले इस देश में इसके 22 फ़ीसदी उपयोग करने वाले लोग हैं. भारत इस प्लेटफ़ॉर्म के सबसे बड़े बाज़ारों में से एक है.
भारत में यूट्यूब के क़रीब 45 करोड़ ग्राहक हैं, जबकि पूरी दुनिया में यह संख्या 2 अरब है. इस तरह अकेले इस देश में इसके 22 फ़ीसदी उपयोग करने वाले लोग हैं. भारत इस प्लेटफ़ॉर्म के सबसे बड़े बाज़ारों में से एक है.
हमने पाया कि यूट्यूब ने इन इन्फ़्लुएंसर को अपने कंटेंट के मोनेटाइजेशन (कंटेंट से पैसा कमाना) की इजाज़त दी हुई थी.
यूट्यूब ने कथित तौर पर विज्ञापन से होने वाली कमाई में इन्हें हिस्सा देने के साथ साथ उनके चैनलों को पेड मेंबरशिप की इजाज़त भी दी है. इन इन्फ़्लुंएसरों को यूट्यूब के चैट फ़ीचर के ज़रिए कमाई करने और अपने दर्शकों से सीधे अपील करने की अनुमति भी मिली हुई है.
वास्तव में ऐसे इन्फ़्लुएंसर ख़तरनाक क़िस्म का दुष्प्रचार करते हुए अपने चैनल पर अपना सामान भी बेच रहे हैं.
यूट्यूब ने कई इन्फ़्लुएंसरों को 'सत्यापित बैज' भी दिया हुआ है. इस बैज से उन्हें अपने दर्शकों के बीच भरोसा बनाने में मदद मिलती है.
सनसनी भरी सुर्ख़ी, भरमाने वाले थंबनेल और बॉलीवुड और बड़े एक्टरों के बारे में के बारे में दुष्प्रचार और अफ़वाह फैलाने से इनके वीडियो को हज़ारों व्यूज़ और लाइक्स मिलते हैं. इससे यूट्यूब को भी और अधिक फैलने में मदद मिलती है.
हमने अपने अनुभवों को यूट्यूब को बताया तो कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हमने यूट्यूब कम्युनिटी की सुरक्षा के लिए ज़रूरी नीतियों, संसाधनों और इसके उत्पादों में भारी निवेश किया है. हमने अधिक प्रामाणिक कंटेंट दिखने के लिए अपने सर्च और डिस्कवरी एल्गोरिद्म को बदल दिया है. हमारी टीमें यहां फैलाई जाने वाली किसी भी ग़लत सूचना को लेकर सतर्क हैं."
हमने यूट्यूब से पूछा कि ग़लत सूचनाएं फैलाने वाले इन्फ़्लुएंसर आख़िर अपने एकाउंट को वेरिफाई कराने में कैसे सफल हो जाते हैं और कैसे वहां डाले गए कंटेंट से कमाई भी कर रहे हैं? लेकिन यूट्यूब ने इन सवालों के जवाब नहीं दिए.
मोज़िला फ़ाउंडेशन के प्रोजेक्ट 'रिग्रेट्स रिपोर्टर' से पता चलता है कि यूट्यूब ऐसे वीडियो भी रिकमेंड कर रहा है, जो उनकी कंटेंट नीतियों का उल्लंघन करते हैं और लोगों को भी नुक़सान पहुंचाते हैं.
मोज़िला की इस रिपोर्ट की सह-लेखक ब्रैंडी गोरकिंक ने बीबीसी को बताया कि भारत जैसे ग़ैर-अंग्रेज़ी भाषी बाज़ारों में ये मुद्दे अंग्रेज़ी भाषी देश की तुलना में क़रीब 60 फ़ीसदी ज़्यादा चिंताजनक हैं.

अब आगे क्या?
यह संयोग है कि बीबीसी की जांच के नतीजे तब सामने आए हैं, जब भारत सरकार यूट्यूब और दूसरे ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्मों पर फैलाए जा रहे दुष्प्रचार के ख़िलाफ़ लगातार कार्रवाई कर रही है.
पिछले दो महीनों में देश के 'इन्फॉर्मेशन एनवॉयरमेंट' को सुरक्षित रखने और 'भारत विरोधी प्रचार' पर अंकुश लगाने का हवाला देते हुए देश के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने लगभग 55 यूट्यूब चैनलों के साथ अन्य प्लेटफ़ॉर्मों पर मौजूद एकाउंटों को ब्लॉक कर दिया है.
सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव अपूर्व चंद्रा ने 21 जनवरी को नागरिकों और मीडिया से अपील की कि वे उन्हें ऐसे चैनलों के बारे में बताएं, जो माहौल को ज़हरीला बना रहे हैं. उन्होंने ऐसे चैनलों पर कार्रवाई करने का भरोसा दिया है.
बीबीसी ने भी अपनी पड़ताल को केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दोनों के साथ साझा करते हुए उनसे जवाब मांगा है. लेकिन बार-बार याद दिलाने के बाद भी अधिकारियों ने अभी तक इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया है.
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