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पद्म पुरस्कार: ग़ुलाम नबी आज़ाद के स्वीकार और बुद्धदेब भट्टाचार्य के इनकार पर सरगर्मी- प्रेस रिव्यू
गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले पद्म सम्मानों की घोषणा की गई. कई सरकारों में इन पुरस्कारों की घोषणा को लेकर सवाल उठते रहे हैं. मोदी सरकार में 2022 के गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले यह घोषणा हुई तो कुछ नामों को लेकर काफ़ी चर्चा हुई.
आज के सभी अख़बारों ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा और उसे लेकर विवाद को प्रमुखता से जगह दी है. कोलकाता से प्रकाशित होने वाला अंग्रेज़ी दैनिक द टेलीग्राफ़ की ख़बर के अनुसार, पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य ने मंगलवार को पद्म भूषण सम्मान लेने से इनकार कर दिया.
बुद्धदेब भट्टाचार्य का नाम केंद्र सरकार की ओर से जारी पद्म पुरस्कारों की लिस्ट में था. इसके अलावा हिन्दुत्व की राजनीति के झंडाबरदार रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को मरणोपरांत पद्म विभूषण देने की घोषणा की गई है.
टेलीग्राफ़ की ख़बर से अनुसार, ''सीपीएम के दिग्गज नेता बुद्धदेब भट्टाचार्य ने कहा- मैं इस सम्मान के बारे में कुछ नहीं जानता हूँ. किसी ने इस बारे में मुझे कुछ नहीं बताया है. अगर उन्होंने मुझे पद्म भूषण देने का फ़ैसला किया है तो मैं इसे लेने से इनकार करता हूँ.''
टेलीग्राफ़ ने लिखा है, ''सीपीएम के प्रमुख रहे और केरल के मुख्यमंत्री रहे ईएमएस नंबूदरीपाद ने भी 1992 में पद्म विभूषण लेने से इनकार कर दिया था. उन्होंने कहा था कि सरकार से सम्मान लेना उनके सिद्धांत के ख़िलाफ़ होगा.''
गायिका संध्या मुखर्जी ने भी पद्मश्री सम्मान लेने से इनकार कर दिया. उनकी बेटी सोमी सेनगुप्ता ने कहा है कि उनकी माँ से इस अवॉर्ड को लेकर सहमति मांगी गई थी, तभी उन्होंने मना कर दिया था. सेनगुप्ता ने कहा कि पद्मश्री एक गायिका के क़द के हिसाब से अपमानजनक है.
जिन्होंने लेने से इनकार किया उनकी तो चर्चा है ही लेकिन जिन्होंने स्वीकार किया, उनकी भी कम चर्चा नहीं है. इस मामले में सबसे ज़्यादा सुर्खियां बटोर रहे हैं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद. ग़ुलाम नबी आज़ाद को लेकर तो कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. 25 जनवरी को जारी की गई पद्म पुरस्कारों की लिस्ट में ग़ुलाम नबी आज़ाद का नाम पद्म भूषण के लिए था.
ग़ुलाम नबी आज़ाद को पद्म भूषण देने की घोषणा हुई तो ट्विटर पर एक स्क्रीनशॉट शेयर होने लगा कि उन्होंने अपने ट्विटर के प्रोफ़ाइल से कांग्रेस का नाम हटा दिया है. बाद में ग़ुलाम नबी आज़ाद ने ख़ुद ही ट्विटर पर स्पष्टीकरण जारी किया. इस ख़बर को अंग्रेज़ी अख़बार हिन्दुस्तान टाइम्स ने प्रमुखता से जगह दी है. आज़ाद ने कहा कि फ़र्ज़ी दावे किए जा रहे हैं कि उन्होंने ट्विटर बायो में कुछ बदलाव किया है.
मंगलवार को आरपीएन सिंह कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए थे. ग़ुलाम नबी आज़ाद को लेकर भी बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लगाई जाने लगीं. सीनियर कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश की एक टिप्पणी को लेकर भी काफ़ी चर्चा है. जयराम रमेश ने बुद्धदेब भट्टाचार्य के पद्म भूषण लेने की तारीफ़ करते हुए कहा, ''उन्होंने सही फ़ैसला लिया. वह आज़ाद रहना चाहते हैं न कि ग़ुलाम.'' कहा जा रहा है कि जयराम रमेश ने इस टिप्पणी के ज़रिए ग़ुलाम नबी आज़ाद पर तंज़ किया है.
जयराम रमेश अपनी किताब 'इंटरट्वाइंड लाइव्स: पीएन हक्सर एंड इंदिरा गांधी' के एक पन्ने का स्क्रीनशॉट ट्वीट करते हुए लिखा, ''हमारे देश के सबसे शक्तिशाली सिविल सर्वेंट रहे पीएन हक्सर को 1973 में पीएमओ छोड़ने के दौरान पद्म विभूषण ऑफ़र किया गया था. यह है, पीएन हक्सर की प्रतिक्रिया. यह एक क्लासिक है और अनुकरण करने योग्य है.''
ग़ुलाम नबी आज़ाद कांग्रेस के ग्रुप-23 का नेतृत्व कर रहे हैं. यह ग्रुप कांग्रेस की कार्यशैली पर कई तरह के सवाल उठा चुका है. इसे लेकर ग़ुलाम नबी आज़ाद पार्टी के भीतर निशाने पर भी रहते हैं. कहा जाता है कि ग़ुलाम नबी आज़ाद को कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर यूनिट की कमान देने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया था और कहा था कि यहाँ कांग्रेस अब नहीं बची है.
चुनाव में मुफ़्त उपहार बाँटने का वादा गंभीर मामला: सुप्रीम कोर्ट
हिन्दी अख़बार दैनिक जागरण ने पहले पन्ने की लीड ख़बर लगाई है- चुनाव में मुफ़्त उपहार बाँटने का वादा गंभीर मामला: सुप्रीम कोर्ट. जागरण की इस ख़बर के अनुसार, मतदाताओं को लुभाने के लिए चुनाव से पहले एक के बाद एक नक़द और मुफ़्त उपहारों की घोषणा कर रहे राजनीतिक पार्टियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सरकारी ख़ज़ाने से नक़द और मुफ़्त उपहारों का वादा करने वाले दलों का चुनाव चिह्न ज़ब्त करने और ऐसे दलों की मान्यता रद्द करने की मांग पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर चार हफ़्तों में जवाब मांगा है.
इस दौरान कोर्ट ने कहा कि यह गंभीर मुद्दा है क्योंकि कई बार मुफ़्त उपहारों की घोषणा का बजट नियमित बजट से ज़्यादा हो जाता है. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस एसएस बोपन्ना और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने भाजपा नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर ये नोटिस जारी किया है.
कोरोना से उबरते हुए आर्थिक तरक़्क़ी के रास्ते पर देश: राष्ट्रपति
अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने 73वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के राष्ट्र के नाम संबोधन को पहले पन्ने पर जगह दी है. राष्ट्रपति कोविंद ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना महामारी की गंभीर चुनौतियों का सामना करते हुए भी देश आर्थिक तरक़्क़ी के रास्ते पर तेज़ी से अग्रसर है.
राष्ट्रपति ने कहा कि अपनी संकल्प शक्ति के सहारे एक नया भारत उभर रहा है. रामनाथ कोविंद ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में निहित लोकतंत्र, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर भारत एक गणतंत्र के रूप में मज़बूती से खड़ा है.
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