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पटना से पंजाब लौट रहे सिख श्रद्धालुओं पर पत्थरबाज़ी, 20 लोगों पर एफ़आईआर
- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए
17 जनवरी की सुबह शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने एक ट्वीट किया.
ट्वीट के मुताबिक बिहार में सिख श्रद्धालुओं के एक समूह पर एक भीड़ ने पत्थरबाज़ी की.
सुखबीर सिंह बादल ने इस ट्वीट में बिहार के मुख्यमंत्री से इस मामले की जांच करने और दोषियों पर कार्रवाई का आग्रह किया है.
इस मामले में पीरो के डीएसपी राहुल कुमार सिंह ने बीबीसी को बताया, "इस घटना में छह श्रद्धालु ज़ख्मी हुए थे. सभी को चरपोखरी सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र) में प्राथमिक उपचार देकर उनकी मर्जी से छुट्टी दे दी गई है. 16 जनवरी की शाम 7 बजे ये सभी श्रध्दालु अपने गृह जिले पंजाब चले गए हैं."
उन्होंने बताया, "इस मामले में 11 लोगों पर नामजद और 10 से 15 अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज हुई है. चार लोगों की अब तक गिरफ्तारी हो चुकी है."
क्या है पूरा मामला?
ये घटना बिहार के भोजपुर जिले के चरपोखरी थाना क्षेत्र में घटी है. ये पूरा मामला चंदे से जुड़ा है.
आरा सासाराम स्टेट हाईवे के पास ध्यानी टोला नाम की जगह पर लक्ष्मी नारायण हनुमान प्राण प्रतिष्ठा यज्ञ का आयोजन किया जाना था.
18 से 25 जनवरी के बीच आयोजित हो रहे इस यज्ञ के लिए बीते 20 दिन से चंदा लिया जा रहा था.
स्थानीय पत्रकार कृष्णा कुमार बताते हैं, "16 जनवरी की दोपहर तकरीबन एक बजे ये घटना घटी है. जब चरपोखरी थाना क्षेत्र के पास सिख श्रद्धालुओं ने चंदा देने से मना कर दिया. उनके मना करने से जबरन चंदा वसूली करने वाले स्थानीय युवकों ने उन्हे मारा पीटा. भाषाई दिक्कत के चलते भी मामला ज्यादा गड़बड़ाया."
मिल रही जानकारी के मुताबिक़ आरा सासाराम स्टेट हाईवे नंबर 12 पर ध्यानी टोला के पास 20 से 25 की संख्या में स्थानीय युवक स्थानीय ऑटो वालों से चंदा ले रहे थे.
इस बीच पटना से पंजाब वापस लौट रहे सिख श्रद्धालुओं का ट्रक भी वहां पहुंचा. इसमें 60 सिख श्रद्धालु सवार थे, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे.
इनमें से एक श्रद्धालु हरप्रीत सिंह ने बताया, "जब इन्होंने हमारे ट्रक चालक तजिंदर सिंह से भी चंदा मांगा तो उसने मना कर दिया. बस इसी बात पर ये उसको लाठी डंडे से पीटने लगे. हमने जब बीच बचाव किया तो वहां और स्थानीय लोग इकट्ठे हो गए और हम पर पत्थरबाज़ी करने लगे जिससे हमारे 6 से 7 बंदे घायल हो गए. इनमें से कुछ को गहरी चोट आई है और उनको 6 से 7 टांके भी लगे हैं."
'हमने कोई आदेश नहीं दिया था'
वहीं, इस आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह ने बताया, "प्राण प्रतिष्ठा के लिए कुछ लोग अपनी मर्जी से ये सब किए होंगे. हमारी तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया था. बीते 20 दिनों से चंदा लिया जा रहा था."
बता दें बीती 4 जनवरी को श्रद्धालुओं का ये दल पंजाब के मोहाली और चंडीगढ़ से पटना साहिब आया था.
16 जनवरी को ये सभी वापस लौट रहे थे, जब ये घटना घटी. इस दल में शामिल महिलाएं और बच्चों में से किसी को चोट नहीं आई है.
पीरो के डीएसपी राहुल कुमार सिंह ने बीबीसी को बताया, "इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद शिनाख्त परेड भी कराई गई थी और श्रद्धालुओं की ट्रक के साथ एहतियातन एक एस्कॉर्ट दल भी भेजा गया था."
बता दें कि बिहार की राजधानी पटना सिखों की धार्मिक आस्था से जुड़ा स्थल है. यहां पटना साहिब गुरुद्वारा सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह की जन्मस्थली है.
बीते कई सालों से बिहार सरकार सिख धर्म से जुड़े आयोजन यहां करती रही है. ऐसे आयोजनों के वक़्त राजधानी पटना का पटना सिटी इलाका 'मिनी पंजाब' जैसा लगता है.
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