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सिपाही की मूँछ को लेकर क्यों उलझी मध्य प्रदेश पुलिस
- Author, शूरेह नियाज़ी
- पदनाम, भोपाल से बीबीसी हिंदी के लिए
अपनी मूंछों की वजह से निलंबित हुए मध्य प्रदेश पुलिस के कॉन्सेटबल राकेश राणा को अब बहाल कर दिया गया है. सरकारी आदेश में निलंबन रद्द करने की वजह 'आदेश सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी नहीं किया' बताया गया है.
राकेश राणा दरअसल भोपाल में को-ऑपरेटिव फ्रॉड एवं लोक सेवा गारंटी विंग में कांस्टेबल के तौर पर तैनात थे. उनका काम स्पेशल डीजी का वाहन चलाने का था. एक साल से अधिकारी के साथ जुड़े राणा को मूंछें हटाने के लिये कहा गया.
लेकिन जब वो इसके लिये तैयार नही हुए तो उन्हें निलंबित कर दिया गया. इस विवाद ने उन्हें चर्चा में ला दिया.
अधिकारियों ने उन्हें मूंछें हटाने के लिये तर्क दिया कि उनका चेहरा अच्छा नहीं दिखता है.
विभाग के सहायक पुलिस महानिरीक्षक प्रशांत शर्मा ने जो आदेश निकाला उसमें लिखा था कि राणा का 'टर्नआउट' चेक करने पर पाया गया कि उनके बाल बढ़े हुए हैं, और मूँछ अजीब डिज़ाइन में गले पर है जिससे टर्नआउट अत्यधिक भद्दा दिखाई दे रहा है.
उन्हें बाल और मूँछ उचित ढंग से कटवाने के लिए निर्देश दिए गए. लेकिन उन्होंने आदेश का पालन नहीं किया.
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि ये यूनिफार्म सेवा में अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है तथा इसका अन्य कर्मचारियों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, इसलिए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है.
'आत्मसम्मान और स्वाभिमान'
इसके बाद राणा भी पीछे हटने के लिये तैयार नही हुए.
राणा ने कहा था कि, "कई पुलिस अधिकारियों और पुलिस जवानों ने मूँछें रखी इसमें उन्हें कोई बुराई नज़र नही आती है. मूँछों में जवान बल्कि बहुत अच्छे नज़र आते है. मैं एक साल से इस काम में लगा हुआ हूँ. लेकिन अचानक मेरी मूँछों पर सवाल किये जाने लगें. मैं निलंबन का सामना कर सकता हूं, लेकिन मूँछें नहीं कटवा सकता, क्योंकि मैं राजपूत हूं और ये मेरे आत्मसम्मान और स्वाभिमान से भी जुड़ी है."
वहीं लोगों ने यह बात भी उठाई कि जो विभाग मूँछों के लिये सवाल उठा रहा है, वही विभाग लोगों को मूँछों रखने के लिये पहले 100 रुपये का भत्ता भी देता रहा है.
यह भत्ता मूँछों की देखभाल के लिये दिया जाता था. लेकिन लगभग 10 साल पहले बंद कर दिया गया है.
अभी तक मूँछों को लेकर पुलिस विभाग में कोई ऐसा प्रावधान नहीं था कि उन्हें नहीं रखा जा सकता है. पुलिस का आदेश और राणा के तर्क लोगों में चर्चा का विषय बन गया.
आख़िरकार पुलिस ने अपने फैसले को बदल दिया और राणा को विभाग में काम पर वापस आने के लिए कह दिया गया.
बीबीसी ने राजेंद्र मिश्रा से इस पूरे प्रकरण पर बात करने की कोशिश की लेकिन उनका कहना है कि वो इस मुद्दे पर कुछ नही बोलना चाहते.
अभी राणा को कोई नया आदेश नहीं दिया गया है लेकिन नौकरी पर बुला लिया गया है. अब वें एमटी(मोटर ट्रांसपोर्ट) पुल में रिज़र्व ड्राइवर के तौर पर काम पर तैनात हैं.
विभाग में आपत्तियाँ
पुलिस महकमे के कुछ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जिस तरह से राणा पर कारवाई की गई उसे लेकर विभाग के अंदर भी कुछ अधिकारियों को आपत्ति थी. उनके ख़िलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती थी लेकिन सीधे कारवाई कर दी गई.
राकेश राणा 2007 से पुलिस विभाग में है. उनका दावा है कि लगभग 11 साल से वो इसी तरह से मूँछें रख रहे है लेकिन आपत्ति अचानक अभी की गई.
राणा की मूँछें एयरफोर्स के ग्रुप कैप्टन अभिनंदन जैसी नज़र आती है. इस वजह से उन्हें विभाग के लोग अभिनंदन भी कहते थे.
अपनी बहाली के बाद राणा ने इस बात की पुष्टि की है कि वो काम पर लौट आए हैं. उन्होंने कहा कि वो इससे ज्यादा कुछ नही कहेंगे.
गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि, "इस मामले में डीजीपी से रिपोर्ट मांगी गई है. वो दोनों पक्षों से बात करके रिपोर्ट देंगे. "
इधर कांग्रेस ने भी इस मामलें में तंज कसा है.
कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने ट्वीट कर कहा था, "हुज़ूर यह सही है कि मूँछ - दाढ़ी वालों से आपके रिश्ते ठीक नहीं है, लेकिन इस राजपूत जवान को सिर्फ़ मूँछ के कारण सस्पेंड करना ठीक नही है. इनकी बहाली हो'.
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