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दलित किशोर ने गढ़ी थी मूंछ को लेकर हमले की कहानीः गुजरात पुलिस
- Author, रॉक्सी गागेदकर छारा
- पदनाम, बीबीसी गुजराती के लिए
गुजरात के गांधीनगर में पुलिस का कहना है कि मूंछ रखने को लेकर हमले का आरोप लगाने वाले दलित किशोर ने हमले की झूठी कहानी गढ़ी थी.
लिंबोदरा गांव के 17 वर्षीय दलित किशोर ने आरोप लगाया था कि उस पर मूंछ रखने को लेकर उच्च जाति के युवकों ने हमला किया है.
पुलिस ने बीबीसी गुजराती से कहा, "जांच में पता चला है कि किशोर ने अपने ऊपर हमले की कहानी गढ़ी थी."
गांधीनगर के पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र यादव ने बीबीसी से कहा, "किशोर ने शेविंग ब्लेड ख़रीदा था और अपने दो दोस्तों की मदद से अपनी पीठ पर घाव लगवाया था."
पुलिस के मुताबिक घटना के दो चश्मदीदों ने पुलिस को बताया है कि इस किशोर ने अपने भाई पर हुए हमले की जांच पर पुलिस का ध्यान फ़ोकस कराने के लिए ये कहानी रची.
हालांकि युवक चंद्रिका महेरिया की मां ने बीबीसी से फ़ोन पर कहा, ''हो सकता है कि उनके बेटे को किसी ने गुमराह कर दिया हो और वो ऐसा कर बैठा. उन्होंने कहा कि वो अभी विस्तृत जानकारी मिलने का इंतज़ार कर रही हैं और अभी वो इस मुद्दे पर अपने बेटे से बात नहीं करना चाहती हैं.''
परिवार ने खुद को उन दलित कार्यकर्ताओं से भी अलग कर लिया है जो इस मामले में उनकी मदद की कोशिश कर रहे हैं. इलाके के दलित कार्यकर्ता कौशिक परमार ने कहा कि कार्यकर्ताओं ने घटना के बाद उनसे बात करने की कोशिश की थी, लेकिन उस परिवार ने दूरी बना रखी है.
इसी युवक के रिश्ते के भाई पीयूष परमार पर भी मूंछ रखने को लेकर हमला हुआ था. पीयूष ने 27 सितंबर को पुलिस में मामला दर्ज कराया था, पुलिस अभी उस घटना की जांच कर रही है.
हालांकि दूसरी ओर पुलिस ने कहा है कि पीयूष के भाई वाले मामले को बंद कर दिया जाएगा. पुलिस के मुताबिक फॉरेंसिक जांच दल ने अपनी जांच में पाया है कि ये घाव बहुत सावधानी से लगाया हुआ लगता है और ये हमले में लगे घाव जैसा नहीं है.
अपने बयान में किशोर ने पुलिस से कहा था कि वो हमलावरों को देख नहीं सका था क्योंकि वो नीचे गिर गया था लेकिन फॉरेंसिक दल को किशोर की शर्ट पर मिट्टी या धूल होने के सबूत भी नहीं मिले हैं.
पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र यादव का कहना है कि पुलिस किशोर और उसके दोस्तों पर कोई कार्रवाई नहीं करेगी.
छात्र के आरोपों की मीडिया में व्यापक कवरेज हुई थी. इस घटना के बाद गुजरात में दलितों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठे थे.
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी दलितों ने मूंछ के साथ अपनी तस्वीरें शेयर की थीं.
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