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कोरोना महामारी में परिवार गंवाया, उत्तर प्रदेश चुनाव में क्या चाहते हैं ये लोग?
- Author, गुरप्रीत सैनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
जिन चेहरों की हंसी से कभी घर की दीवारें गूंजा करती थी, आज वही चेहरे इन दीवारों पर लगी तस्वीरों में कैद हैं.
कोरोना की भयावह दूसरी लहर इस परिवार पर कहर बनकर टूटी और परिवार के आठ सदस्यों को अपने साथ बहा ले गई.
22 अप्रैल से 15 मई के बीच क़रीब एक महीने में इस परिवार ने चार सगे भाइयों, दो बहनों, मां और बड़ी मां की अर्थियां उठने का दर्द सहा.
लखनऊ से सटे इमलिया गांव के इस एक परिवार की कहानी उत्तर प्रदेश में उस वक़्त की भयावह तस्वीर को दिखाती है.
सीमा यादव आज भी उस वक़्त को याद करके सिहर जाती हैं, जब एक के बाद एक होती मौतों से उनका पूरा परिवार उजड़ गया.
दावों की हक़ीक़त
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश ने कोरोना महामारी को भारत में सबसे बेहतर तरीक़े से संभाला.
उनके स्वास्थ्य मंत्री ने विधान परिषद में बीते 16 दिसंबर को जानकारी दी कि राज्य में ऑक्सीजन की कमी से कोई भी मौत सूचित नहीं हुई है.
लेकिन सीमा यादव जो अपनी आपबीती बयां करती हैं, वो इस दावे से बिल्कुल उलट है. बेबस आवाज़ में वो बताती हैं, "हमने उनको बहुत तड़पते हुए देखा है. उनको सांस लेने में इतनी दिक़्क़त हो रही थी. क्या बताएं वो कैसे हमारे सामने तड़प-तड़प के मरे हैं. हम कुछ नहीं कर पाए उनके लिए."
सीमा यादव दावा करती हैं कि उनके परिवार के अधिकतर सदस्यों की मौत ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुई.
वो बताती हैं कि जब उनके परिवार के लोग अस्पताल में थे तब उन्होंने सिर्फ एक सिलेंडर से पतली नली के ज़रिए आठ से दस लोगों को ऑक्सीजन चढ़ती हुई देखी है.
वो बताती हैं कि उनके रिश्तेदार पैसे लेकर हर जगह भटक रहे थे, लेकिन अपने मरीज़ों के लिए बाहर से ऑक्सीजन ख़रीदने का जुगाड़ नहीं कर पा रहे थे.
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'निराश हूं, इस बार वोट ही नहीं दूंगी'
कुछ ऐसी ही आपबीती लखनऊ के सरसमां इलाक़े की प्रतिमा दास भी बयां करती हैं.
उनके परिवार के सभी चार सदस्यों को कोरोना हुआ था, लेकिन उनकी सास कोरोना से जंग हार गईं.
उस वक़्त को याद करते हुए वो बताती हैं, "लखनऊ का ऐसा कोई अस्पताल नहीं था जहां हम नहीं गए, फिर भी हमें एक भी बेड नहीं मिल सका. अगर हमें बेड मिल जाता तो शायद मम्मी बच जाती."
वो भी ऑक्सीजन की कमी की बात कहती हैं, "ऑक्सीजन की कमी की वजह से उनकी मौत हो गई. हमने सभी हेल्पलाइन नंबरों पर फ़ोन किया लेकिन हमें मदद नहीं मिली. हमने ऑनलाइन ऑक्सीजन मंगवाई लेकिन वो भी मम्मी की मौत के बाद आई."
नीति आयोग की ओर से सोमवार को जारी स्वास्थ्य सूचकांक के मुताबिक़, समग्र स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में उत्तर प्रदेश में स्थिती सबसे दयनीय है. ये रिपोर्ट साल 2019-20 के आंकडों के आधार पर बनी है.
राज्य के स्वास्थ्य सिस्टम से निराश प्रतिमा दास और उनके पति ने आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव में मतदान ना करने का फ़ैसला किया है. लेकिन उनके ससुर वोट ज़रूर करेंगे, क्योंकि उनका मानना है कि उनके वोट की ताक़त शायद इस सिस्टम सुधार ले आए.
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विनोद ने दूसरी लहर में अपने दोस्त को खोया. वो बताते हैं कि सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में उन्हें भर्ती कराने की कोशिश की लेकिन वो कामयाब नहीं हो सके.
आख़िरकार उन्हें सिविल अस्पताल में बेड मिला. जहां जांच में वो कोविड पॉज़िटिव मिले और उन्हें ऑक्सीजन दी गई. लेकिन जब वेंटिलेटर की ज़रूरत पड़ी तो अस्पताल ने उन्हें रेफर कर दिया. जिसके बाद उन्हें मेदांता अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां बेड नहीं मिल सका. पीजीआई में भी बेड नहीं मिल पाया. दोबारा उन्हें सिविल अस्पताल ले आया गया.
विनोद के मुताबिक़, लेकिन फिर उनके दोस्त को वहां ऑक्सीजन नहीं मिल सकी और क़रीब दो घंटे में उनकी मौत हो गई.
हेमंत शर्मा का कहना है कि उनकी 70 वर्षीय मां को वक़्त पर एम्बुलेंस नहीं मिल सकी और अस्पताल ना पहुंच पाने की वजह से 23 अप्रैल को उनकी मां की मौत हो गई.
वो कहते हैं, "बहुत मुश्किल वक़्त था. कोई फ़ोन नहीं उठाता था. हम फ़ोन ही लगाते रहे, लेकिन हमें कोई मदद नहीं मिली."
संगीता बताती हैं कि सांस लेने में दिक़्क़त होने के बाद जब उनकी सास को अस्पताल ले जाया गया लेकिन बेड के इंतज़ार में वहीं उनकी मौत हो गई.
हालांकि रमेश कहते हैं कि जो कुछ भी हुआ उसमें योगी सरकार को पूरी तरह कसूरवार ठहराना सही नहीं है, क्योंकि उस वक़्त पूरा विश्व इस संकट से जूझ रहा था.
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ओमिक्रॉन के ख़तरे से चिंतित लोग
लोग उस भयावह मंज़र को अब तक भूले भी नहीं हैं कि अब एक बार फिर ओमिक्रॉन के बढ़ते ख़तरे ने उनकी चिंताएं बढ़ा दी हैं.
राज्य में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में राज्य के लोगों में चिंता बढ़ गई है. हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कह चुके हैं कि अगर तीसरी लहर आती है तो राज्य उसके लिए पूरी तरह से तैयार है.
प्रतिमा दास उम्मीद करती हैं कि सरकार जो दावे कर रही है वो वक़्त आने पर ज़मीन पर सच साबित हो.
वो कहती हैं, "फिर वो हालात ना देखने को मिलें इसके लिए ऑक्सीजन का अच्छे से प्रबंध किया जाए, ताकि जिसे जब ज़रूरत हो उसे तब ऑक्सीजन मिले, ना कि मरीज़ के गुज़र जाने के बाद. समय पर उन्हें एम्बुलेंस मिल जाए, ऑक्सीजन, बेड मिल जाए, बस यही उम्मीद करते हैं."
वो कहती हैं कि नेता अभी वोट मांगने के लिए घर-घर आ रहे हैं, लेकिन 'जब लोग कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहे थे तब वो उनतक कभी नहीं आए.'
सरकार ने दूसरी लहर में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 50 हज़ार मुआवज़ा देने का एलान किया है, जिनमें से कई को मिला है और कई फ़िलहाल इंतज़ार कर रहे हैं.
इस बीच सीमा यादव सरकार से अपील करती हैं कि पूरे परिवार के उजड़ने का दर्द जो उन्होंने सहा वो कोई और ना सहे, इसलिए वो आने वाले ख़तरे के लिए पूरा इंतज़ाम करे.
उनका मानना है कि विधान सभा चुनाव फ़िलहाल टल जाए तो राज्य के लोगों के लिए बेहतर होगा.
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