भारत ने म्यांमार को लेकर क्या मजबूरी में उठाया यह क़दम- प्रेस रिव्यू

भारत के विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला

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भारत के विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला मंगलवार शाम दो दिवसीय दौरे पर म्यांमार पहुँचे हैं. इस दौरे में वह नायपयिताव और यांगून जाएंगे. श्रृंगला स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव काउंसिल के अध्यक्ष जनरल आंग लाइंग से मुलाक़ात करेंगे. जनरल आंग लाइंग ने पिछले फ़रवरी महीने में चुनी हुई सरकार का तख़्तापलट कर दिया था.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने इस ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है. श्रृंगला ने म्यांमार का पिछला दौरा 2020 में किया था. द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, श्रृंगला म्यांमार के सैन्य नेतृत्व से कहेंगे कि भारत से म्यांमार की लगी 1,600 किलोमीटर लंबी सीमा पर सुरक्षा चिंता बढ़ रही है क्योंकि यहाँ विद्रोही ग्रुप सक्रिय हैं. हाल के दिनों में हमले बढ़े हैं. इसके साथ ही श्रृंगला म्यांमार में सैन्य नेतृत्व के रुख़ को समझने की कोशिश करेंगे.

श्रृंगला का म्यांमार दौरा तब हो रहा है, जब दो हफ़्ते पहले ही नायपयिताव की अदालत ने पूर्व स्टेट काउंसलर और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित आंग सान सू ची को चार साल की क़ैद की सज़ा सुनाई थी. अदालत के इस फ़ैसले पर भारत ने गहरी चिंता जताई थी.

आंग सान सू ची

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अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''भारत का यह दौरा म्यांमार में सैन्य तख़्तापलट को मौन मान्यता देने की तरह है. इससे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में म्यांमार के सैन्य शासन को स्टेट ऐडमिनिस्ट्रेटिव काउंसिल कहा था. इस 11 सदस्यीय काउंसिल को जनरल मिन आंग लाइंग ने बनाया है. इसमें ज़्यादातर सैन्य अधिकारी हैं. जनरल लाइंग ख़ुद को प्रधानमंत्री कहते हैं.''

इसी साल जून महीने में भारत संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव पर वोटिंग से दूर रहा था जिसमें म्यांमार में हथियारों की आपूर्ति को रोकना था. इसी साल नवंबर में भारत ने म्यांमार में विनय कुमार को नया राजदूत नियुक्त किया था. भारत की तरफ़ से म्यांमार में सैन्य तख़्तापलट को लेकर ऐसा कोई संदेश नहीं दिया गया है जिससे लगे कि उसे सैन्य शासन को स्वीकार करने में समस्या है.

अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि आधिकारिक रूप से इस बात से इनकार किया गया है कि श्रृंगला का म्यांमार दौरा सैन्य शासन को मान्यता देना है. अधिकारियों का कहना है कि श्रृंगला का दौरा राजनीतिक नहीं बल्कि आधिकारिक है. उनका कहना है कि भारत म्यांमार में लोकतंत्र की बहाली को लेकर बात करने की इच्छा रखता है लेकिन साथ ही सुरक्षा चिंताएं भी अहम हैं. कहा जा रहा है कि श्रृंगला अपने दौरे में विपक्षी नेताओं से भी मिल सकते हैं.

म्यांमार

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भारत कोशिश कर रहा है कि म्यांमार के मामले में नीति संतुलित हो जिसमें लोकतंत्र को लेकर प्रतिबद्धता भी दिखे, लेकिन वहाँ बढ़ते चीन के प्रभाव को भी कम किया जा सके. ये भी कहा जा रहा है कि भारत ने अगर म्यांमार में आंग सान सू ची को लेकर ज़्यादा ज़िद दिखाई तो चीन वहाँ पैर और मज़बूती से जमा लेगा और ख़ुद अलग-थलग पड़ जाएगा. भारत की चिंता यह भी है कि एसोसिएशन ऑफ़ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस (आसियान) में अपनी मज़बूत दस्तक रख सके.

द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि म्यांमार में सैन्य तख़्तापलट और वहां की सरकार से भारत की दूरी के कारण सीमा से सटे विद्रोही समूहों को फिर से एकजुट होने में मदद मिल सकती है. भारत को डर है कि पूर्वोत्तर भारत में कहीं फिर से विद्रोही ग्रुप सक्रिय ना हो जाएं.

मनोहर लाल खट्टर

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खुले में नमाज़ पढ़ने की इजाज़त नहीं- मनोहर लाल खट्टर

हिन्दी अख़बार दैनिक जागरण ने पहले पन्ने की बॉटम ख़बर लगाई है- खुले में नमाज़ पढ़ने की इजाज़त नहीं देगी हरियाणा सरकार. इस ख़बर के मुताबिक़ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने विधानसभा में कहा है कि मुसलमानों को खुले में नमाज़ पढ़ने की अनुमति किसी भी सूरत में नहीं दी जा सकती.

गुड़गाँव में नमाज़ पढ़ने को लेकर पिछले कई महीनों से गतिरोध बना हुआ है. दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन शून्य काल के दौरान नूंह के कांग्रेस विधायक आफ़ताब अहमद ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर धर्म के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि संविधान में सभी को पूजा-पाठ, अरदास और नमाज़ पढ़ने का अधिकार है और इस अधिकार की रक्षा करना मुख्यमंत्री का काम है.

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इस पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि उनकी सरकार ने किसी को नमाज़ पढ़ने से नहीं रोका है लेकिन खुले में शक्ति प्रदर्शन करना सही नहीं है. खट्टर ने कहा कि पूजा-पाठ, नमाज़ और अरदास के लिए मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि खुले में नमाज़ को लेकर टकराव नहीं बढ़ने दिया जा सकता. खट्टर ने कहा कि ज़िला प्रशासन मुद्दे को सुलझाने में लगा है और कोई ना कोई रास्ता निकल आएगा.

महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति इरानी

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बाल विवाह संशोधन विधेयक को संसदीय समिति के पास भेजा गया

टाइम्स ऑफ इंडिया ने लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने वाले बिल को संसदीय समिति के पास भेजने की ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है. इस ख़बर के अनुसार, लड़कियों की शादी की उम्र 18 से 21 साल करने के प्रावधान वाला विधेयक मंगलवार को भारी हंगामे के बीच लोकसभा में पेश हुआ.

महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति इरानी ने बाल विवाह निषेध संशोधन विधेयक 2021 पेश किया. विधेयक को महिलाओं को बराबरी देने वाला बताते हुए इरानी ने कहा कि हम पहले ही इसमें 75 साल की देरी कर चुके हैं. हालांकि विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए उन्होंने ख़ुद सभापति से इसे संसद की स्थायी समिति को भेजने का अनुरोध किया़. विपक्ष ने विधेयक को जल्दबाज़ी में लाया बताकर भारी विरोध किया और इस पर गंभीर चर्चा की मांग की.

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